लेखक परिचय

लिमटी खरे

लिमटी खरे

हमने मध्य प्रदेश के सिवनी जैसे छोटे जिले से निकलकर न जाने कितने शहरो की खाक छानने के बाद दिल्ली जैसे समंदर में गोते लगाने आरंभ किए हैं। हमने पत्रकारिता 1983 से आरंभ की, न जाने कितने पड़ाव देखने के उपरांत आज दिल्ली को अपना बसेरा बनाए हुए हैं। देश भर के न जाने कितने अखबारों, पत्रिकाओं, राजनेताओं की नौकरी करने के बाद अब फ्री लांसर पत्रकार के तौर पर जीवन यापन कर रहे हैं। हमारा अब तक का जीवन यायावर की भांति ही बीता है। पत्रकारिता को हमने पेशा बनाया है, किन्तु वर्तमान समय में पत्रकारिता के हालात पर रोना ही आता है। आज पत्रकारिता सेठ साहूकारों की लौंडी बनकर रह गई है। हमें इसे मुक्त कराना ही होगा, वरना आजाद हिन्दुस्तान में प्रजातंत्र का यह चौथा स्तंभ धराशायी होने में वक्त नहीं लगेगा. . . .

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भाजपा के नए निजाम गडकरी के लिए इंदौर की ओमेक्स सिटी में हुए तीन दिनी सम्मेलन में भाजपा अपने आदर्श और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी तथा निर्वतमान अध्यक्ष राजनाथ सिंह से किनारा करते ही नजर आई। इस सम्मेलन के मुख्य द्वार पर नए अध्यक्ष गडकरी के साथ राजग के पीएम इन वेटिंग लाल कृष्ण आडवानी के ही चित्र नजर आए। इसमें निर्वतमान अध्यक्ष राजनाथ सिंह को भी गेट पर दिखाया नहीं गया। सम्मेलन में जिस तरह से आडवाणी का महिमा मण्डन और बाकी पूर्व अध्यक्षों की उपेक्षा की गई उसके बाद से राजनैतिक फिजां में तरह तरह की चर्चाओं के बाजार गर्मा गए हैं। लोग तो यह तक कहने से नहीं चूक रहे हैं कि आडवाणी के बाहुपाश में बंधे नितिन गडकरी आने वाले समय में नितिन आडवाणी प्राईवेट लिमिटेड बनाकर ही छोडेंगे। भले ही लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष का पद आडवाणी ने तज दिया हो पर प्रधानमंत्री बनने की उनकी ललक में कहीं कमी नहीं आई है। चर्चा है कि पिछली बार लोकसभा चुनावों में बुरी तरह पिटने के बाद अब आडवाणी की चाहत देश भर में एक अलग छवि बनाने की है, और इसी मिशन के तहत अब पार्टी ने अटल बिहारी बाजपेयी से किनारा कर लिया है, साथ ही अपने पूर्व अध्यक्षों को भी हाशिए पर लाकर सिर्फ और सिर्फ आडवाणी को ही प्रोजेक्ट किए जाने की कार्ययोजना बनाई जा रही है।

महामहिम के आदेश से हिमाचल सरकार सकते में

देश में सबसे बडे संवैधानिक पद महामहिम राष्ट्रपति का फरमान हो या उनके कार्यालय का, बात एक ही मानी जाती है। महामहिम कार्यालय के फरमान ने हिमाचल प्रदेश की सरकार को संशय में डाल दिया है। हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले के सारी गांव का 12वीं पास युवा निरंजन कुमार चाहता है कि उसे एक दिन का राष्ट्रपति या मुख्यमंत्री बनना चाहता है। इस हेतु उसने महामहिम राष्ट्रपति को आवेदन कर एक दिन के लिए देश का राष्ट्रपति बनाने की गुहार लगाई है। निरंजन ने आगे कहा है कि अगर उसे एक दिन का राष्ट्रपति राष्ट्रपति नहीं बनाया जा सकता है, तो कम से कम उसे एक दिन का मुख्यमंत्री ही बना दिया जाए ताकि वह कुछ करके दिखाए। निरंजन ने अपने आवेदन में एक दिन में देश के विकास और गरीबी दूर करने के सुझाव भी दिए हैं। उसने अपने आवेदन में कहा है कि देश में बहुत सारी एसी प्रतिभाएं हैं जो एक दिन में देश का विकास कर सकतीं हैं। इस आवेदन को राष्ट्रपति सचिवालय की बेलगाम नौकरशाही ने अग्रिम कार्यवाही के लिए हिमाचल सरकार को अग्रेषित कर दिया है। अब हिमाचल सरकार को समझ में नहीं आ रहा है कि अग्रिम कार्यवाही के मायने आखिर क्या हैं।

बंगाल के खाते में रहेगा इस बार का बजट

आम बजट आने को है, इस बार का समूचा बजट पश्चिम बंगाल के चुनावों के मद्देनजर वहां समर्पित किया जा सकता है। इसका सबसे बडा कारण वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी और रेल मंत्री ममता बनर्जी का पश्चिम बंगाल से होना है। वैसे भी रेलमंत्री बनने के बाद ममता बनर्जी ने अपना सारा ध्यान बंगाल पर ही केंद्रित कर लिया है। ममता तो बाकायदा अपना कार्यालय बंगाल से ही चला रहीं हैं। उन्होंने अपने पार्टी के मंत्रियों को भी बंगाल पर ध्यान देने की बात कही है। बंगाल में रेल मंत्रालय द्वारा जारी किए जाने वाले सरकारी विज्ञापनों में कांग्रेस की अध्यक्ष सोनिया गांधी और प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह की तस्वीरें हटा दी गईं हैं। वहीं दूसरी और कांग्रेस के सत्ता और शक्ति के शीर्ष केंद्र 10 जनपथ के सूत्रों की मानें तो बंगाल के चुनावों को मद्देनजर रख प्रणव दा ने सोनिया को इसके लिए राजी कर लिया है कि वे अपना खजाना बंगाल के लिए खोल दें, अगर एसा हुआ तो देश के अन्य सूबों का दुर्भाग्य ही होगा, क्योंकि जो मंत्री जिस सूबे से है, वह अपने सूबे को ठेंगा ही दिखा रहा है।

खून की होली की तैयारी में नक्सलवादी

देश में नक्सलवाद आग की तरह फैलता जा रहा है। लाल दायरा धीरे धीरे समूचे भारत को अपने आगोश में लेते जा रहा है। छत्तीसगढ में नक्सलवाद तेजी से उभरता जा रहा है। गुप्तचर एजेंसी के सूत्रों की मानें तो छत्तीसगढ से साढे छ: सौ नक्सलवादियों का जत्थ होली पर तबाही मचाने के उद्देश्य से बिहार और बंगाल के अनेक इलाकों में घुस गए हैं। बताया जाता है कि ये सभी भाकपा माओवादी के हमलावर दस्ता पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी के सदस्य हैं। कहते हैं कि ये सभी हर मामले में दक्ष हैं। छत्तीसगढ में केंद्रीय सुरक्षा बल के दबाव बढने के उपरांत ये नक्सलवादी यहां से कूच कर गए हैं। बिहार के सिल्दा में माओवादी हमले में 24 जवानों और जमुई में 12 लोगों की मौत हुई है। सूत्रों का कहना है कि इस बार होली में ये बुरी तरह आतंक बरपा सकते हैं।

रीढविहीन हैं फिकरमंद

देश का दुर्भाग्य है कि सरकार के अधिकांश मंत्री पिछले रास्ते अर्थात राज्यसभा से संसदीय सौंध तक पहुंचे हैं, अर्थात जिन्हें जनता द्वारा नकारा गया है, या जो जनता का सामना करने की हिम्मत नहीं जुटा पाते हैं, वे देश के नीति निर्धारक बने बैठे हैं। अब देश के पांच मंत्रियों को यह चिंता सताए जा रही है कि वे अगली बार कैसे अपनी लाल बत्ती को बरकरार रख पाएंगे। कांग्रेस की राजमाता श्रीमति सोनिया गांधी के चहेते प्रतिरक्षा मंत्री ए.के.अंटोनी,, उद्योग मंत्री आनंद शर्मा, खेल मंत्री एम.एस.गिल, वन एवं पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश और सबसे खराब परफार्मेंस वालीं अंबिका सोनी इस साल रिटायर हो रहीं हैं। इसके अलावा इस साल 65 राज्य सभा सदस्यों की सदस्यता समाप्त हो रही है। सभी का दुबारा पुनर्वास संभव प्रतीत नहीं हो रहा है। खासकर खेल मंत्री एम.एस.गिल, सूचना प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी और पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश की कारगुजारियों से पार्टी के आला नेता खुश नहीं दिख रहे हैं।

दिग्गी में दिखती अर्जुन की छवि

पूर्व केंद्रीय मंत्री अर्जुन सिंह को बीसवीं सदी के अंतिम दशकों में कांग्रेस का कूटनीतिक चाणक्य माना जाता था। ढलती उमर के चलते उन्हें राजनीतिक बियावान से शून्य की ओर धकेल दिया गया है। अर्जुन खामोश हैं, लोगों को बहुत आश्चर्य है। इक्कीसवीं सदी में कांग्रेस के दूसरे नंबर के ताकतवर महासचिव दिग्विजय सिंह में लोग अर्जुन सिंह का अक्स ढूंढते मिल रहे हैं। माना जा रहा है कि अब अर्जुन सिंह की तर्ज पर ही दिग्विजय सिंह चाणक्य बनने की जुगत में हैं। उत्तर प्रदेश में मुसलमानों को साधने की महती जवाबदारी दिग्गी के कांधो पर डाली गई। अर्जुन सिंह की राह पर ही चलते हुए उन्होंने बटाला एनकाउंटर और आजमगढ मामले में जमकर सियासत की। इतना ही नहीं भारी विरोध के बावजूद न केवल दिग्गी राजा वहां गए वरन अब तो वे कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी को भी आजमगढ ले जाने की तैयारियों में जुट गए हैं। कांग्रेस के वर्तमान गांधी (राहुल और सोनिया) को साधकर राजा दिग्विजय सिंह ने ”एक साधे सब सधें” की कहावत को चरितार्थ कर दिया है।

बिग बी के निशाने पर मीडिया

मीडिया और सदी के महानायक अमिताभ बच्चन की दोस्ती और बैर कोई नया नहीं है। बिग बी की तारीफों और आलोचनाओं से सदा ही मीडिया पटा पडा रहता है। अब अपनी इकलौती बहू को लेकर मीडिया और बिग बी आमने सामने हैं। मुंबई मिरर में यह खबर आई कि एश्वर्या राय बच्चन को पेट का कैंसर है, इसलिए वे फिलहाल मां नहीं बन सकतीं। जैसे ही यह खबर फिजां में तैरी वैसे ही मीडिया की सुर्खियां बनते देर नहीं लगी। इससे अमिताभ बच्चन का परिवार बहुत आहत हुआ है। एश्‍वर्या ने एक खत जारी कर यह पूछा है कि बिना पुष्टि के इस तरह की खबर जारी कर किसी का माखौल उडाने का आखिर क्या मतलब है। लोग तो यहां तक कह रहे हैं कि अमर सिंह और अमिताभ की मित्रता के चलते हो सकता है कि समाजवादी पार्टी के नए मैनेजरों ने इस तरह की प्लांट खबर फिजां में तैरा दी हो। अभिषेक बच्चन ने टि्वटर पर टिप्पणी की है कि मीडिया ने पहले भी उनके और उनके पिता अमिताभ बच्चन के बारे में अनर्गल बातें कहीं हैं, जो बर्दाश्त की जा चुकी हैं पर घर की महिलाओं को तो कम से कम इस तरह के दुष्प्रचार से दूर रखा जाना चहिए।

मान गए कोडा को

करोडों रूपयों के घोटाले के आरोप में जेल की सलाखों के पीछे बैठे मधु कोडा भले ही अपने भाग्य और करनी को कोस रहे हों पर केंद्र में कांग्रेसनीत सरकार उन पर जबर्दस्त तरीके से मेहरबान नजर आ रही है। सी.पी.जोशी के नेतृत्व वाला ग्रामीण विकास मंत्रालय आज भी अपने संसदीय सलाकार बोर्ड में उनके ओहदे को बरकरार रखे हुए है। कोडा इस समिति में स्थाई आमंत्रित की हैसियत से हैं। मजे की बात तो यह है कि इस समिति के सदस्य कांग्रेस की नजर में भविष्य के प्रधानमंत्री राहुल गांधी भी हैं। जेल में रहने के कारण वे इस समिति की बैठक में भाग नहीं ले पाए हैं पर वे चाहें तो विशेषाधिकार के तहत इसमें भाग लेने की मंशा जता सकते हैं, और अगर उन्होंने इस तरह की मंशा जताई तो केंद्र सरकार मुश्किल में पड सकती है। उधर बिना धार का विपक्ष सब कुछ जानते बूझते इतने अहम मुद्दे पर चुप्पी साधे बैठा है।

फिल्मों में दिलचस्पी लेते सिब्बल

केंद्रीय मानव संसाधन और विकास मंत्री कपिल सिब्बल अपने विभाग से इतर अब सुनहले पर्दे में दिलचस्पी लेने लगे हैं। आजकल सिब्बल वालीवुड की मशहूर हस्तियों के साथ गलबहियां डाले दिखाई दे रहे हैं। कापीराईट एक्ट की तलवार के चलते फिल्मी हस्तियों उनकी चौखट चूमती नजर आ रहीं हैं।

रक्षक बने भक्षक

पुलिस का काम आम जनता की जान माल की रक्षा का होता है। पुलिस के द्वारा आम जनता के जान माल को लूटना कोई नई बात नहीं है। पिछले दिनों मध्य प्रदेश के कटनी जिले में जो हुआ है, वह खाकी वर्दी पर काले दाग से कम नहीं है। फिर भी सूबे के मुख्मंत्री शिवराज सिंह चौहान नीरो की तरह चैन की बंसी बजा रहे हैं। कटनी जिले के बरतारा बरतरी गांव में पुलिस का कहर टूटा एक दलित महिला पर। पुलिस ने एक महिला को जिंदा ही जलाने का प्रयास किया। यह मामला संगीन अपराध की श्रेणी में आता है। यह सच है कि इस काम को अंजाम दिया है पांच पुलिस कर्मियों ने पर भरोसा तो सूबे के समूचे पुलिस महकमे के उपर से उठा है। इन पांचों को सजा मिलेगी या नहीं यह समय ही बताएगा पर इनके खिलाफ क्या कार्यवाही की जा रही है, यह आम जनता के सामने आना जरूरी है। इनके खिलाफ कठोरतम कार्यवाही होना चाहिए, ताकि भविष्य में इस तरह की हरकत करने के पहले खाकी धारण करने वाला लाख मर्तबा सोचे।

आखिर क्या बला है बीटी बैगन

इन दिनों बीटी बैगन का मामला मीडिया में छाया हुआ है। हर कोई बीटी बैगन का जिकर कर रहा है। चौक चौराहों पर बीटी बैगन का चर्चा आम है। बीटी बैगन, जयराम रमेश के बारे में तो लोग बढ चढकर बात कर रहे हैं, पर बीटी बैगन है क्या बला यह कोई बताने को राजी नहीं है। दरअसल जमीन में पाए जाने वाले एक बैक्टीरिया बेसिलस थुरिंजिएन्सिस अर्थात बीटी के एक जीन को निकालकर बैगन में प्रत्यारोपित कर दिया गया है। यह जीन एक खास तरह के प्रोटीन का निर्माण करता है, जिसकी वजह से बैगन के मूल गुणों में परिवर्तन हो जाता है। यह जीन फसल को कीडों से भी बचाता है, इसीलिए इस जीन की मदद से तैयार बैगन को बीटी बैगन कहा गया है। इसी जीन का प्रयोग कर देश में बीटी काटन का निर्माण भी हो रहा है। बीटी बैगन मानव स्वास्थ्य के लिए उपयुक्त है या नहीं यह अभी साफ नहीं हो सका है। पूरी दुनिया में अभी किसी भी देश में इसके उत्पादन को मंजूरी नहीं मिली है, पर भारत है कि इस मामले में श्रेय लेने की गरज से इसका उत्पादन सबसे पहले करना चाह रहा है।

यह है अजमेर का हाल सखे

के सीरियल के लिए विख्यात एकता कपूर के साथ ख्वाजा की दरगाह अजमेर में जो कुछ हुआ वे शायद ही भूल पाएं। उनके प्रशंसकों ने उनके साथ जबर्दस्त तरीके से बदसलूकी की। इतना ही नहीं भीडभाड में दरगाह परिसर में एकता का मोबाईल भी जेब तराशों ने पार कर दिया। ख्वाजा के दर पर देश विदेश से लोग अपनी मुराद मांगने या पूरी होने पर मत्था टेकने आते हैं। यहां मची लूट किसी से छिपी नहीं है। ख्वाजा के सेवक होने का दावा करने वाले काली टोपी वाले साहेबान सदा ही अपने आने वालों पर टूट पडते हैं, एवज में वे श्रृध्दालुओं को बेवकूफ बनाकर मोटी रकम भीं एंठ लेते हैं। ख्वाजा के दर पर पुलिस का सख्त पहरा है, बावजूद इसके यह सब बदस्तूर जारी रहता है। मतलब साफ है कि जो भी होता है वह पुलिस की मिली भगत से ही होता है। अरे पैसे के भूखे सरकारी नुमाईंदो कम से कम धर्मस्थलों को तो इस सबसे महफूज रखा होता।

झूल भैया झूल तेरी टोपी में फूल

बडा पुराना गाना है यह, यह गाना तब सुनाया जाता है जब कभी भी बच्चे को बहलाना होता है। मध्य प्रदेश का आलम भी कमोबेश इसी तरह का है। सूबे के निजाम चाहे दिग्विजय सिंह रहे हों, उमाश्री, बाबू लाल गौर या फिर शिवराज सिंह चौहान, सभी ने सूबे के बच्चों को यही गाना सुनाकर बहलाने का जतन ही किया है। सूबे में बिजली की किल्लत हद दर्जे पर है। परीक्षा सिर पर है, और गांव गांव में बिजली का टोटा है। उधर शिवराज सिंह द्वारा दिल्ली आकर दूसरे सूबों को बिजली बेचने की बात कही जाती है। समूचे मध्य प्रदेश में शहरी क्षेत्रों में बिजली की कटौती जारी है। इस कटौती से बिजली विभाग के मुख्यालय जबलपुर और भोपाल को मुक्त रखा गया है। एक समय था जब दिग्गी राजा के गढ राजगढ, कमल नाथ के छिंदवाडा, जबलपुर और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में बिजली कटौती नहीं की जाती थी। आज नक्सल समस्या सर चढकर बोल रही है, फिर भी बालाघाट, मण्डला, डिंडोरी आदि जिलों में बिजली कटौती जारी है। बच्चे लालटेन युग की ओर लोट रहे हैं, चिमनी और भभके में पढने को मजबूर बच्चों को इक्कीसवीं सदी में भी शिवराज सिंह चौहान वही पुराना गाना झूल भैया झूल सुना रहे हैं।

पुच्छल तारा

रायपुर से स्वाति खरे ने ई मेल भेजा है। जिसके अनुसार भाजपा की राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक में अध्यक्ष नितिन गडकरी द्वारा मंदिर दो मस्जिद लो कहा गया है। दरअसल पेशे से राजनेता और उद्योगपति नितिन गडकरी के बारे में अब यह कहा जा रहा है कि वे अपने राजनेता के बजाए उद्योगपति के अनुभवों को साझा कर रहे हैं क्योंकि बाजार में किसी के साथ कुछ फ्री की स्कीम बडी ही कारगर साबित होती है।

-लिमटी खरे

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