लेखक परिचय

लिमटी खरे

लिमटी खरे

हमने मध्य प्रदेश के सिवनी जैसे छोटे जिले से निकलकर न जाने कितने शहरो की खाक छानने के बाद दिल्ली जैसे समंदर में गोते लगाने आरंभ किए हैं। हमने पत्रकारिता 1983 से आरंभ की, न जाने कितने पड़ाव देखने के उपरांत आज दिल्ली को अपना बसेरा बनाए हुए हैं। देश भर के न जाने कितने अखबारों, पत्रिकाओं, राजनेताओं की नौकरी करने के बाद अब फ्री लांसर पत्रकार के तौर पर जीवन यापन कर रहे हैं। हमारा अब तक का जीवन यायावर की भांति ही बीता है। पत्रकारिता को हमने पेशा बनाया है, किन्तु वर्तमान समय में पत्रकारिता के हालात पर रोना ही आता है। आज पत्रकारिता सेठ साहूकारों की लौंडी बनकर रह गई है। हमें इसे मुक्त कराना ही होगा, वरना आजाद हिन्दुस्तान में प्रजातंत्र का यह चौथा स्तंभ धराशायी होने में वक्त नहीं लगेगा. . . .

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कांग्रेस में राहुल गांधी एक एसा नाम है जिस पर समूचे देश के कांग्रेसी अपनी सियासत की रोटियां सेंक रहे हैं, मगर राहुल गांधी की अपने संसदीय क्षेत्र में क्या इज्जत है यह बात कुछ दिनों पहले ही सामने आई है। उत्तर प्रदेश के विधानपरिषद के चुनावों में उनके संसदीय क्षेत्र अमेठी के सुल्तानपुर क्षेत्र से पार्टी उम्मीदवार का नाम तय करने में कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी को पसीना आ गया। अनुशासन का पाठ सिखाने और युवाओं को अपने साथ लेने के लिए मिशन 2012 पर निकले राहुल गांधी के सामने उनके संसदीय क्षेत्र में ही अनुशासन तार तार हो गया। पार्टी ने जैसे ही जगदीश सिंह का नाम सामने किया वैसे ही असंतोष का लावा बह गया। नाराज कांग्रेसियों ने जगन्नाथ यादव को अपना प्रत्याशी घोषित कर गाजे बाजे के साथ उनका पर्चा दाखिल करवा दिया। राहुल गांधी अमेठी दौरे पर गए और सभी गुटों के साथ सर जोडकर बैठे। नतीजा सिफर रहा। इस विधानपरिषद के कुल वोटर 2860 हैं और अमेठी संसदीय क्षेत्र में 1034 मतदाता हैं। कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी पशोपेश में हैं कि वे इस विवाद को कैसे शांत करें, नहीं तो अगर यह चिंगारी अमेठी से निकलकर देश में फैली तो उनकी सब जगह आसानी से स्वीकार्यता पर प्रश्नचिन्ह लग जाएगा।

हाईटेक हो रहा है संघ

समय की मांग को देखते हुए अब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने भी आधुनिक जमाने से कदम से कदम मिलाने आरंभ कर दिए हैं। कम्पयूटर इंटरनेट के तेज जमाने में बाबा आदम के तौर तरीकों को अपनाने वाले संघ के आला नेताओं को मशविरा दिया गया है कि वे समय के साथ नहीं चले तो पिछड जाएंगे। फिर क्या था संघ ने भी अपना चोला बदलने की तैयारी कर ली है। संध की शाखाओं में कम हाजिरी से आजिज संघ के आला नेताओं ने साप्ताहिक मिलन समारोह चलाया पर कामयाब नहीं रहा। संघ ने अब इसका इलाज खोज लिया है। संघ अब इंटरनेट पर शाखाएं लगाने की कार्ययोजना पर काम कर रहा है। प्रयोग के तोर पर इसको आरंभ कर दिया गया है। सूत्रों का कहना है जल्द ही समय निर्धारित कर संघ के प्रचारक नेट पर उपलब्ध होंगे। स्वयंसेवकों को शारीरिक तौर पर भले ही न हिला सकें पर संघ के प्रचारक उन्हें बौध्दिक तौर पर तो हिला ही देंगे। संघ ने इंफरमेशन टेक्नालाजी से जुडे लोगों पर केंद्रित कार्ययोजना को अंजाम देने का मानस बना लिया है।

मंत्री के बंगले में पेडों की अवैध कटाई

यूं तो जंगल विभाग की शह पर लकडी माफिया ने देश के जंगलों का सफाया कर दिया है, किन्तु जब बात देश की राजनैतिक राजधानी दिल्ली में पेडों की कटाई की हो तो वन विभाग के कान खडे होना स्वाभाविक ही है, और खासकर जब मामला केंदीय मंत्री से जुडा हो तब तो विभागीय अधिकारियों की चुप्पी देखते ही बनती है। दरअसल केंद्रीय श्रम और रोजगार राज्यमंत्री हरीश रावत को तीन मूर्ति रोड स्थित 9 नंबर की कोठी आवंटित की गई है। इस कोठी में मंत्री महोदय अभी शिफ्ट नहीं हुए हैं। इसकी साफ सफाई और रंग रोगन का काम अभी जारी है। दरअसल मंत्री की कोठी के बाजू में रहने वाले एक जज की नजर मंत्री की कोठी पर गलत तरीके से कांटे छांटे गए पेडों पर पडी। उन्होने वनाधिकारियों को तलब कर मामला बताया। चूंकि जज साहेब ने वनाधिकारियों को बुलाया था, सो जांच आना पाई से की गई। पाया गया कि पेडों की छटाई गलत तरीके से की गई है। फिर क्या था, आनन फानन सीपीडब्लूडी के हॉर्टिकल्चर विभाग के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया।

गडकरी भी वसुंधरा के आगे बौने

भाजपा के नए निजाम के सामने भी राजस्थान में तलवार पजा रहीं वसुंधरा राजे ने अपने तेवर नहीं बदले हैं। नेतृत्व पशोपेश में है कि आखिर वसुंधरा प्रकरण से निजात कैसे पाई जाए। केंद्रीय नेतृत्व को सीधी टक्कर दे रहीं वसुंधरा के आगे झुककर केंद्रीय नेतृत्व ने राजस्थान भाजपा के चुनाव फिलहाल टाल दिए हैं। यद्यपि आधिकारिक तौर पर चुनावों को टालने का कारण पंचायत के प्रदेश में होने वाले चुनाव बताए जा रहे हैं किन्तु अंदरखाने से जो खबरें छन छन कर बाहर आ रहीं हैं, उनके अनुसार भाजपा के अंदर अंदरूनी मतभेद के चलते चुनाव टाले गए हैं। 24 दिसंबर को हाने वाले चुनावों को आम सहमति की मुहर के साथ टाल दिया गया है। वसुंधरा दिल्ली यात्रा पर आईं और आला नेताओं के साथ मिलकर उन्होंने प्रदेश में संगठनात्मक चुनाव में हो रही धांधलियों का कच्चा चिट्ठा रखा। पूछे जाने पर हौले से मुस्कुराकर वे इशारे ही इशारे में यह बोल गईं कि वे तो महज नए अध्यक्ष को हैलो बोलने आईं हैं। भाजपाई हल्कों में खबर है कि वे भाजपा के नए निजाम को हैलो बोलने नहीं अपनी ताकत दिखाकर हिलाने आईं थीं।

अब अहमद पटेल की बारी

कांग्रेस के सत्ता और शक्ति के शीर्ष केंद्र 10 जनपथ (सोनिया गांधी का सरकारी आवास) के विश्वस्त अहमद पटेल को कई बार शिकस्त दे चुके कांग्रेस के ताकतवर महासचिव और राहुल गांधी के अघोषित राजनैतिक गुरू राजा दिग्विजय सिंह और कांग्रेसाध्यक्ष श्रीमति सोनिया गांधी के बीच इन दिनों उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष को लेकर कुछ तनातनी चल रही है। दरअसल दिग्गी राजा चाहते हैं कि यूपी में रीता बहुगुणा को हटाकर विधायक दल के नेता प्रमोद तिवारी को काबिज करवा दिया जाए। यूपी में कांग्रेस की साख सुधरने से तिवारी के मन में मुख्यमंत्री बनने की चाहत जागना स्वाभाविक ही है। उधर राजमाता को तिवारी की छवि और उनके मुलायम तथा मायावती से रिश्तों के बारे में भी आवगत करवा दिया गया है। कुछ दिन पहले राहुल गांधी के हेलीकाप्टर प्रकरण में रीता बहुगुणा का बडबोलापन राजा को नागवार गुजरा था, तब से राजा इसी जुगत में हैं कि रीता को कैसे भी करके हटाया जाए। रीता भी शायद राजा की मंशा जान चुकी हैं, सो उन्होंने भी अब अपना मुंह सिल लिया है। अब बाजी अहमद पटेल के हाथ में हैं। कहते हैं कि अहमद अब दिग्गी और यूपी के बारे में जैसी भी चाभी भरेंगे सोनिया वैसा ही कदम उठाएंगी।

कमल नाथ ने मारी बाजी

कमल नाथ के पास चाहे वस्त्र मंत्रालय रहा हो या वन एवं पर्यावरण अथवा वाणिज्य एवं उद्योग हर बार उन्होंने अपनी कार्यप्रणाली के चलते विभाग को चर्चित बनाया है। वन एवं पर्यावरण रहते हुए पृथ्वी सम्मेलन में भारत की जोरदार उपस्थिति के चलते वे चर्चाओं में रहे तो वाणिज्य और उद्योग मंत्री रहते हुए विदेशों के लगातार दौरे ने उन्हें चर्चा में रखा। अब भूतल परिवहन मंत्री बनने के बाद स्वर्णिम चतुर्भुज के उत्तर दक्षिण गलियारे को अपने संसदीय क्षेत्र जिला छिंदवाडा से होकर गुजारने के मामले में वे सुर्खियों में हैं। अपनी कार्यप्रणाली के कारण चर्चाओं में रहने वाले भूतल परिवहन मंत्री कमल नाथ ने अंतत: एक मामले में बाजी मार ही ली। उन्होंने हाल ही में योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया को परास्त करते हुए निविदा नियमों को बहुत सरल बनवाने में सफलता हासिल कर ली है। योजना आयोग के एक सदस्य और पूर्व कैबनेट सचिव बी.के.चतुर्वेदी ने नियमों के सरलीकरण के मामले में कमल नाथ के पक्ष में रिपोर्ट दे दी है।

चोर पर पडे मोर

पुरानी कहावत चोर पर पडे मोर रूपहले पर्दे के थ्री खान्स में से एक आमिर खान के साथ चरितार्थ हो ही गई। अपनी नई फिल्म थ्री ईडियट्स के प्रमोशन के लिए वे तरह तरह के स्वांग कर देश भर में घूम रहे थे। लंबे समय से फिल्मी दुनिया में पहचाना चेहरा रहे खान को गुमान भी न होगा कि भारत देश में एसा कोई है जो उन्हें ही पहचानने से इंकार कर देगा। देश भर में घूमने के बाद जब आमिर महाबलीपुरम पहुचे तो वहां एक टूरिस्ट गाईड से उनकी मुलाकात हुई। काफी गुफ्तगू के बाद आमिर ने उस गाईड को बताया कि वे आमिर खान हैं, फिल्मी जगत के माने हुए अभिनेता। छूटते ही गाईड ने आमिर से ही पूछ लिया कि यह आमिर खान कौन है। आमिर भी कहां हार मानने वाले थे, उन्होने अपनी किरकरी होती देख उससे पूछा कि क्या वे शाहरूख खान को जानते हैं, उसने नकारात्मक ही सर हिलाया। हारकर आमिर ने आखिरी प्रश्न दागा कि वह हिन्दी फिल्म देखता है कि नहीं। उसने बडी ही शालीनता से जवाब दिया कि उसने शालीमार देखी थी और फिल्मिस्तान में वह सदी के महानायक अमिताभ बच्चन और धर्मेंद्र को ही जानता है। फिर क्या था आमिर अपना सा मुंह लिए लौट गए।

फिर हाई अलर्ट में राजधानी

देश की राजनैतिक राजधानी दिल्ली साल में दस महीने हाई अलर्ट पर ही रहा करती है। जब चाहे तब केंद्रीय गृह विभाग दिल्ली में हाई अलर्ट जारी कर देता है। 15 अगस्त, 26 जनवरी, नया साल, ईद, बकरीद, दीपावली, दशहरा, क्रिसमस आदि न जाने कितने पर्व हैं जबकि दिल्ली में आतंकी वारदात होने की आशंका बनी ही रहती है। दरअसल इन त्योहारों के दौरान बाजारों में भीडभाड चरम पर ही रहा करती है, इसलिए वारदात की आशंका ज्यादा ही हुआ करती है। हर बार हाई अलर्ट पर पुलिस द्वारा सडकों पर महज रस्मअदायगी के लिए चेकिंग की जाती है, पर इस बार नजारा कुछ और ही नजर आ रहा है। इस बार शराब पीकर गाडी चलाने वालों के खिलाफ पुलिस ने कुछ ज्यादा ही सख्ती अपना रखी है। साल के आखिरी पखवाडे में जगह जगह मयखाने बनाने वालों की शामत आ गई है। इस बार पुलिस किसी की कोई दलील सुनती नहीं दिखाई दे रही है। क्रिसमस और न्यू ईयर पार्टीज पर भी पुलिस की चौकस निगाहें हैं।

गडकरी का राहुल प्रेम

लगता है भाजपा के नए निजाम नितिन गडकरी आरंभ से ही कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी के फैन हो गए हैं। भाजपाध्यक्ष का कार्यभार संभालने के बाद अपनी पहली ही प्रेस कांफ्रेंस में उन्होंने कहा कि वे राहुल गांधी के काम से संतुष्ट हैं। राहुल गांधी के दलित प्रेम पर गडकरी ने राहुल की उन्मुक्त कंठ से प्रशंसा करते हुए कहा कि राहुल गांधी अच्छा काम कर रहे हैं। भाजपा का एक धडा गडकरी के इस कथन से खफा नजर आ रहा है, क्योंकि गडकरी ने प्रत्यक्ष तौर पर अपने विरोधी के उन क्रियाकलापों की तारीफ कर दी जिसे भाजपा अब तक ढोंग बता रही थी। भाजपा के नेताओं का कहना है कि जहां तक राहुल गांधी को शुभकामना देने की बात है तो वह तो औपचारिकतावश समझ में आता है किन्तु किसी दूसरे के काम की सराहना करने का क्या मतलब निकाला जाए। गौरतलब होगा कि मध्य प्रदेश के टीकमगढ जिले में एक महिला की बच्ची के विवाह के लिए राहुल गांधी ने 20 हजार रूपए देने का आश्वासन दिया था, राहुल तो भूल गए किन्तु सूबे के भाजपाई निजाम शिवराज सिंह चौहान ने उसे बीस हजार की मदद पहुचाकर राहुल के पांखंड के मुंह पर करारा तमाचा मारा था।

पूर्व गृहमंत्री के दामाद को बचा रही है पुलिस!

मध्य प्रदेश के पूर्व गृहमंत्री के दामाद को ढूंढने में मध्य प्रदेश पुलिस पूरी तरह सुस्त ही नजर आ रही है। गृहमंत्री के दामाद अतुल सिंह के खिलाफ राजधानी भोपाल के कमला नगर में प्रकरण पंजीबध्द है। बताते हैं कि कोतवाली थाने में पदस्थ आरक्षक मुकेश पाठक जब अपने घर लौट रहा था तभी उसकी मोटर साईकिल अतुल सिंह की कार से टकरा गई। इससे नाराज होकर अतुल सिंह ने अपने साथियों सोनू सिंह और विजय कुमार श्रीवास्तव के साथ मिलकर मुकेश का अपहरण कर लिया। इसके बाद टीटी नगर थाना प्रभारी उमेश तिवारी ने आरक्षक को माता मंदिर के पास मुक्त करवाया, जहां विजय तो पुलिस की पकड में आ गया, बाकी फरार हो गए। इसका प्रकरण कमला नेहरू नगर थाने में पंजीबध्द है। पुलिस ने अब तक पुलिस के ही आरक्षक के अपहरणकर्ताओं को नहीं पकडा है, जिससे सियासी हल्कों में यह बात तैर गई है कि कांग्रेस के शासन काल में पूर्व गृह मंत्री के दामाद होने के बावजूद भी भाजपा के शासनकाल में उसे पकडा नहीं जा सका है।

शहीदों के परिजनों को बेघर करने की तैयारी

मुंबई में अब तक के सबसे बडे आतंकी हमले के उपरांत शहीदों के परिजनों के साथ सरकार कैसा रवैया अपना रही है, इस बात को नेशनल मीडिया ने बखूबी उठा दिया है, किन्तु सूबों में छोटी छोटी घटनाओं में शहीद हुए कर्मचारियों के परिजनों को क्या भोगना पडता है इस बात से सरकार और मीडिया दोनों ही इत्तेफाक नहीं रखते हैं। महाराश्ट्र सूबे के ही गढचिरोली में नक्सलवादियों के साथ लोहा लेते हुए शहीद हुए पुलिस कर्मियों के परिजनों को सरकारी आवास से बेघर करने का मामला प्रकाश में आया है। चंद्रपुर में हुए विदर्भ साहित्य सत्कार सम्मेलन में जब शहीद उपनिरीक्षक चंद्रशेखर की बेवा हेमलता को बोलने बुलाया गया तो उसका गुस्सा फट पडा। हेमलता का आरोप था कि मुंबई में तो शहीद पुलिस कर्मियों के परिजनों को सरकार सर आंखों पर बिठाती है पर गढचिरोली में अब तक शहीद हुए 152 पुलिस कर्मियों के परिवारों की ओर सरकार ने नजर उठाकर भी नहीं देखा है। सच ही है गढचिरोली में अगर सरकार इन शहीदों के परिजनों के लिए कुछ कर भी दे तो भला प्रदेश या राष्ट्रीय स्तर की खबर थोडे बनेगी और पब्लिसिटी के भूखे नेता फिर भूखे ही रह जाएंगे।

अबूझ पहेली बना करकरे का जैकेट

मुंबई में हुए अब तक के सबसे बडे आतंकी हमले में शहीद एटीएस चीफ हेमंत करकरे की बुलेट प्रूफ जैकेट की गुत्थी सुलझती नहीं दिखती। जेजे अस्पताल के वार्ड ब्वाय के बयान ने मामले को और अधिक उलझा दिया है कि उसने जैकेट कूडे में फेंक दी थी। यहां पुलिसिया कार्यवाही पर प्रश्नचिन्ह लगना स्वाभाविक है। एक ओर जहां पुलिस किसी भी घायल या शव के आसपास के हर साक्ष्य को सहेजकर रखती है, वहीं दूसरी ओर उसे कूडे में फेंकने से अनेक प्रश्न आज भी अनुत्तरित ही हैं। मजे की बात तो यह है कि करकरे के बुलेट प्रूफ जैकेट से संबंधित फाईल तो मिल गई है पर उससे जरूरी कागज गायब हैं। क्या जैकेट बुलेट प्रूफ नहीं थी, क्या करकरे के खिलाफ यह किसी के इशारे पर यह कोई सुनियोजित षणयंत्र था, जैसे प्रश्नों के उत्तर उनके परिजनों और देशवासियों को कब मिलेंगे, मिलेंगे भी या नहीं यह नहीं कहा जा सकता है।

अब राजमाता के नाम पर फरेब

कांग्रेस की राजमाता श्रीमती सोनिया गांधी के नाम से रकम एंठने का एक मामला प्रकाश में आने से कांग्रेसी हल्कों में सनसनी मचना स्वाभाविक ही है। दिल्ली में एक व्यक्ति ने राज्यसभा में मनोनयन के नाम पर दस करोड रूपए की राशि बतौर रिश्वत लेने का मामला पुलिस में पंजीबध्द करवाया है। अब तक सियासी दलों पर लोकसभा और विधानसभाओं में पैसे देकर टिकिट मिलने के मामले प्रकाश में आते रहे हैं। यह पहला मौका है जबकि किसी ने राज्यसभा में मनोनयन के नाम पर रिश्वत मांगने और देने की बात कही हो। इस मामले में किसी मध्यस्थ ने कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमति सोनिया गांधी और उनके राजनैतिक सचिव अहमद पटेल के नाम पर उक्त राशि वसूली है। वैसे कहा जाता है कि राज्यसभा यानी पिछले दरवाजे से संसद में प्रवेश करने के लिए लोगों की अंटी में माल होना बहुत जरूरी है। हालत देखकर यह कहना गलत नहीं होगा कि अब योग्यता के बजाए पैसा ही पैमाना बन चुका है।

पुच्छल तारा

इस बार पुच्छल तारा कुछ अलग ही है। हमारे ब्लाग पर जब हमने महामहिम के सुखोई में यात्रा करने और महिलाओं को एयर फोर्स में फाईटर पायलट न बनने के निर्देशों के सबंध में टिप्पणी की तो मुंबई की मनीषा नारायण ने उस पर टिप्पणी की। जब हमने मनीषा का ब्लाग देखा तो आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहा। मनीषा किन्नर है। इस देश में हमें पहली बार किसी किन्नर का ब्लाग पढने को मिला। मनीषा का ब्लाग पढकर सुखद आश्चर्य हुआ कि मनीषा को लेखन का शौक है। वह अपने बारे में लिखतीं हैं ”मैं ईश्वर की सर्वश्रेष्ठ रचना मनुष्य हूं, और स्त्री पुरूष दायरे से मुक्त, मेरे भीतर गुण दोनों के हैं, लेकिन अवगुण एक के भी नहीं, मुझे बस प्यार चाहिए और आपको देना भी है प्यार . . . . ।” मनीषा ने अपने ब्लाग का नाम हिज(डा) हाईनेस मनीषा रखा हुआ है। मनीषा के ब्लाग में राहुल गांधी की कारसेवा करने वाली तस्वीर को भी बेहद करीने से चित्रित किया है, जिसमें महिला चप्पल पहने लोहे के तसले में मिट्टी फेंक रही है तो युवराज राहुल गांधी श्वेत धवल मंहगे जूते पहनकर साफ सुथरी प्लास्टिक के तसले में।

-लिमटी खरे

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2 Comments on "ये है दिल्ली मेरी जान/घर में ही विद्रोह का समाना करना पडा युवराज को!"

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मनीषा नारायण
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आदरणीय भाईसाहब,मैं किन्नर नहीं हूं,वानर नहीं हूं,यक्ष, गन्धर्व और देव भी नहीं हूं सीधे-सीधे आपकी ही तरह मनुष्य हूं किन्तु दुर्दैव से लैंगिक विकलांग। बस इतनी सी बात अपने ब्लाग के द्वारा बताने का प्रयास कर रही हूं। आपको मेरे लेखन पर आश्चर्य है तो मुझे भी सुखद आश्चर्य है कि मुख्यधारा के लोग मुझे आश्चर्य से देखते हैं जैसे कि ब्लाग पर आकर मैंने कोई पहाड़ तोड़ लिया हो, मेरे ब्लाग का नाम “अर्धसत्य” है और हिज(ड़ा)हाइनेस मनीषा के ब्लागर नाम से लिखा करती हूं। मेरे गुरुदेव और बड़े भाई आदरणीय डा.रूपेश श्रीवास्तव जी के अनुसार मैं दुनिया की… Read more »
SUNITA ANIL REJA
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सर, राहुल गाँधी इस रियल सोसिअल वोर्केर . इफ बीजेपी प्रेसिडेंट प्रैसेद थे वर्क एंड विसिओं ऑफ़ राहुल गाँधी थें नोथिंग वरोंग इन आईटी अस वे हवे सीन ठाट रेस्पेक्टेद फोर्मेर प्रीमे मिनिस्टर ऑफ़ इंडिया श्री अटल बहरी बाजपाई जी इस वैरी फवौरिते लीडर ऑफ़ अल पर्तिएस. एवेरी लीडर फ्रॉम एनी पार्टी अल्वाय्स अप्प्रेसिअते अटल जी BECAUSE ऑफ़ HIS एथिक्स एंड चलेँ पोलिटिकल लीडर. सो व्हेन अटल जी कैन बे अप्प्रेसिअतेद बी कोन्रेस एंड ओथेर पर्तिएस थें वहत इस वरोंग इफ नेवली एलेक्टेद प्रेसिडेंट गडकरी जी अप्प्रेसिअते राहुल गाँधी. गुड थिंग्स अल्वाय्स बे अप्प्रेसिअतेद . थिस इस काल्लेद रियल एंड… Read more »
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