लेखक परिचय

लिमटी खरे

लिमटी खरे

हमने मध्य प्रदेश के सिवनी जैसे छोटे जिले से निकलकर न जाने कितने शहरो की खाक छानने के बाद दिल्ली जैसे समंदर में गोते लगाने आरंभ किए हैं। हमने पत्रकारिता 1983 से आरंभ की, न जाने कितने पड़ाव देखने के उपरांत आज दिल्ली को अपना बसेरा बनाए हुए हैं। देश भर के न जाने कितने अखबारों, पत्रिकाओं, राजनेताओं की नौकरी करने के बाद अब फ्री लांसर पत्रकार के तौर पर जीवन यापन कर रहे हैं। हमारा अब तक का जीवन यायावर की भांति ही बीता है। पत्रकारिता को हमने पेशा बनाया है, किन्तु वर्तमान समय में पत्रकारिता के हालात पर रोना ही आता है। आज पत्रकारिता सेठ साहूकारों की लौंडी बनकर रह गई है। हमें इसे मुक्त कराना ही होगा, वरना आजाद हिन्दुस्तान में प्रजातंत्र का यह चौथा स्तंभ धराशायी होने में वक्त नहीं लगेगा. . . .

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देश के हृदय प्रदेश में दस साल लगातार राज करने वाले कांग्रेस के महासचिव दिग्विजय सिंह को इक्कीसवीं सदी में कांग्रेस के आधुनिक चाणक्य की उपाधि से अघोषित तौर पर नवाजा जाता है। मध्य प्रदेश में अपने शासनकाल में उन्होंने संयुक्त मध्य प्रदेश में विद्याचरण, श्यामाचरण शुक्ल, अर्जुन सिंह, स्व.माधव राव सिंधिया, अजीत जोगी, कमल नाथ जैसे दिग्गजों को धूल चटा दी थी। इसके बाद 2003 में कांग्रेस के औंधे मुंह गिरने के बाद उन्होंने केंद्र की राजनीति की ओर रूख किया है। आज की तारीख में राजा दिग्विजय सिंह कांग्रेस के सबसे ताकतवर महासचिव राहुल गांधी के बाद दूसरी पायदान पर विराजे हैं। पिछले दिनों एक अखबार में उन्होंने नक्सलवाद के खिलाफ गृहमंत्री पी.चिदम्बरम के खिलाफ टीका टिप्पणी कर ठहरे हुए पानी में हलचल मचा दी है। सियासी हल्कों में चल रही बयार के अनुसार दिग्विजय के इस कदम के पीछे राहुल गांधी का समर्थन था। उधर कांग्रेस की राजमाता को भी भरोसे में लिया गया था। यह अलहदा बात है कि तय रणनीति के अनुसार बाद में कांग्रेस ने इस बात से पल्ला झाड लिया, पर दिग्गी राजा के जहर बुझे तीर का ही कमाल था कि पलनिअप्पम चिदम्बरम को आनन फानन अपना त्यागपत्र पेश करना पडा था।

सोनिया से सियासी गणित बिठाने में लगीं ममता

पश्चिम बंगाल में रेल्वे के विज्ञापनों से कांग्रेस की राजमाता श्रीमति सोनिया गांधी और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के फोटो यह कहकर निकालने वालीं कि रेलवे के विज्ञापनों में मनमोहन सोनिया का क्या काम, ममता बनर्जी अब सोनिया गांधी से राजनैतिक गणित ठीक ठाक करने में जुट गईं हैं। इसी तारतम्य में ममता बनर्जी ने उत्तर रेल्वे द्वारा सदी के महानायक अमिताभ बच्चन को अपना ब्रांड एम्बेसेडर बनाने की कवायद को ठंडे बस्ते में डाल दिया है। रेल्वे के सूत्रों का कहना है कि मानव रहित रेल्वे क्रासिंग पर होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए उत्तर रेल्वे ने यह प्रस्ताव दिया था कि अमिताभ बच्चन को ब्रांड एम्बेसेडर बनाकर बिना मानव वाली रेल्वे क्रासिंग के खतरों के बारे में आगाह करें तो लोग उनका अनुसरण आसानी से कर लेंगे। बताते हैं कि अमिताभ इसके लिए तैयार भी हो गए थे, तभी ममता दीदी को किसी ने बताया कि बिग बी की एंट्री से सोनिया खफा हो सकतीं हैं, सो ममता ने तत्काल इस मामले को लंबित करने के निर्देश दे दिए। अब ममता चाहतीं हैं कि 22 अप्रेल को बंटने वाले रेल मंत्री पुरूस्कार को सोनिया के हाथों बटवाया जाए, पर 10 जनपथ की महारानी इसके लिए तैयार होती नहीं दिख रहीं हैं।

गोविंदाचार्य ने दिखाए तेवर

भाजपा छोडकर गए दो नेताओं गोविंदाचार्य और उमा भारती ने अपने द्वारा बनाई गई पार्टियों से त्यागपत्र देकर एक मिसाल कायम की है। इन दोनों ही नेताओं की भाजपा में वापसी को लेकर अटकलों और अफवाहों के न थमने वाले दौर चल पडे हैं। दोनों ही नेताओं की घर वापसी में उनको पसंद न करने वाले नेताओं ने रोढे अटकाने आरंभ कर दिए हैं। इसी बीच भाजपा के नए निजाम ने गोविंदाचार्य की घर वापसी के लिए प्रायशचित की शर्त से गोविंदाचार्य बुरी तरह भडक गए हैं। उन्होंने भाजपाध्यक्ष नितिन गडकरी को जुबान पर लगाम लगाने की नसीहत तक दे डाली है। कभी भाजपा के थिंक टैंक रहे गोविंदाचार्य के बारे में नए नवेले और सूबाई राजनीति से निकलकर राष्ट्रीय राजनीति में पहुंचने वाले नितिन गडकरी को वैसे सोच समझकर ही बयान जारी करना चाहिए था। उन्होंने गडकरी को उनकी औकात दिखाते हुए कहा कि गडकरी को वाणी में संयम रखने की जरूरत है, जिससे उनकी छवि अनर्गल बोलने वाले और सतही एवं अक्षम नेता की न बन सके। गोविंदाचार्य का कहना है कि उन्हें पार्टी से निकाला नहीं गया था, वे 9 सितम्बर 2000 को अध्ययनावकाश पर गए थे और 2003 के बाद उन्होंने प्राथमिक सदस्यता का नवीनीकरण नहीं कराया है।

घर के लडका गोंही चूसें, मामा खाएं अमावट

बहुत पुरानी बुंदेलखण्डी कहावत -”घर के लडका गोंही (आम की गुठली) चूसें, मामा खाएं अमावट (आम के रस से बनने वाला एक स्वादिष्ट पदार्थ) को चरितार्थ करते हुए, वैश्विक मंदी के इस दौर में एक और जहां देश की आधी से अधिक आबादी को एक जून की रोटी भी मयस्सर नहीं है, वहीं दूसरी ओर राष्ट्रमण्डल खेलों से जुडी परियोजनाओं की समीक्षाओं को लेकर सुरेश कलमाडी की अध्यक्षता आयोजित 57 बैठकों में ही महज 29 लाख 26 हजार रूपए का नाश्ता गटक गए अधिकारी। है न अचरज की बात। कार्यकारी बोर्ड की एक दिन में हुई बैठक में नाश्ते का कुल खर्च सिर्फ एक लाख 75 हजार रूपए आया है। यह बात सूचना के अधिकार में निकाली गई जानकारी में सामने आई हैं पहले तो सूचना के अधिकार के तहत आवेदन देखकर अधिकारियों के हाथ पांव ही फूल गए थे। काफी समय ना नुकुर करने के बाद जब आला अधिकारियों ने निर्देश दिया तब पांच महीनों बाद यह जानकारी मुहैया करवाई गई। नियमानुसार एक माह में जानकारी देने का प्रावधान है।

सज्जन की राह पर कमल नाथ!

चोरासी के दंगों की फाईलें बंद होने का नाम ही नहीं ले रहीं हैं। छब्बीस साल बाद भी अगर दंगों के बारे में प्रकरण चल रहे हों तो भारत सरकार और कानून व्यवस्था को सलाम ही करना बेहतर होगा। साल दर साल प्रकरण चल रहे हैं, मीडिया में उछल रहे हैं। विपक्ष में बैठी भाजपा ने छ: साल लगातार शासन भी किया, फिर भी नतीजा ढाक के तीन पात। जाहिर है केंद्र की सत्ता में चाहे कांग्रेस सत्तारूढ हो या भाजपा, दोनों मिलकर नूरा कुश्ती ही खेलते हैं, जनता तमाशबीन खडी चुपचाप सब कुछ देखती सुनती रहती है। सज्जन कुमार को इसमें बुरी तरह लपेट दिया गया है। इससे पहले कमल नाथ सहित अनेक नेताओं को क्लीन चिट दे दी गई थी। कमल नाथ का दुर्भाग्य तो देखिए कि जब वे अमेरिका में थे, तभी वहां की एक संघीय अदालत में न्यूयार्क के एक सिख संगठन सिख्ख फॉर जस्टिस की ओर से जसबीर सिंह और महिंदर सिंह ने मामला दर्ज कराते हुए एलियन टॉटर्स क्लेम्स अधिनियम के तहत कमल नाथ को दण्ड देने और मुआवजा दिलाने की मांग की है। जसबीर ने अपने परिवार के 24 सदस्य खोए हैं तो उस वक्त दो साल के रहे महिंदर ने अपने पिता को गंवाया था।

सूख गई मैया दाई की बाण गंगा

प्रकृति से लगातार हो रही छेडछाड से पर्यावरण का असंतुल साफ दिखाई देने लगा है। कभी भीषण गर्मी तो कभी हाड कपाने वाली ठंड, और तो और सबसे अधिक बारिश वाले चेरापूंजी के सर से खिताब भी छिनने लगा है कि वहां सबसे ज्यादा पानी गिरता है। चहुं ओर हाहाकार मचा हुआ है। त्रिकुटा पर्वत पर विराजीं माता वैष्णो देवी के चरणों को धोने वाली बाणगंगा अब पूरी तरह सूख चुकी है। माता रानी के दर्शन को जाने वाले श्रद्धालु इस पवित्र नदी में डुबकी अवश्य लगाते हैं। यह नदी समाखल क्षेत्र के 200 फुट उंचे पहाड के मध्य से प्रकट हुई है। इस नदी में माता रानी की गुफा से आने वाला झरना आगे जाकर मिल जाता है। बारिश की कमी से समाखल का तालाब पूरी तरह सूख चुका है। बाण गंगा के बारे में कहा जाता है कि अब तक यह नदी कभी भी नहीं सूखी यह पहला मौका है जब नदी सूख गई है। श्रद्धालु इसे प्रलय का आगज ही मान रहे हैं।

पत्रकारों को रिझाया ममता ने

मीडिया को प्रजातंत्र का चौथा स्तंभ माना गया है। मीडिया की ताकत से राजनेता अनजान नहीं है। मीडिया चाहे तो सरकार बना दे चाहे तो गिरा दे। आज मीडिया पथभ्रष्ट हो गया है, इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है। मीडिया को रिझाने के लिए ममता बनर्जी ने पत्रकारों के साथ साथ साल में एक बार उसकी अर्धांग्नी को भी ले जाने की छूट प्रदान की थी। इससे वे तलाकशुदा, कंवारे और वे पत्रकार नाराज थे, जिनकी अर्धांग्नी अल्लाह को प्यारी हो गईं, सो ममता ने पत्रकारों के किसी भी सहचर को साल में एक बार आधे किराए पर यात्रा की अनुमति दे दी। अब ममता ने एक नया पांसा फेंका है, जिसके मुताबिक पत्रकारों के 18 साल तक के आश्रित बच्चे भी साल में एक बार पचास फीसदी किराए में यात्रा कर सकेंगे। वर्तमान में राजधानी शताब्दी एक्सप्रेस सहित सभी रेल गाडियों में पत्रकारों को पचास फीसदी किराए में असीमित यात्रा की सुविधा प्राप्त है। पत्रकार हैरान न हों, पश्चिम बंगाल चुनाव तक ममता बनर्जी पत्रकारों पर यूं ही मेहरबान रहने वालीं हैं।

राशि गरीबों या कलेक्टर के विकास के लिए

महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना की राशि गरीबों को रोजगार मुहैया कराने खर्च हो रही है या फिर कलेक्टर बंगलों को भव्य बनाने के लिए इस बात पर अब बहस चल पडी है। पहली बार मंत्री बने ग्रामीण विकास राज्यमंत्री प्रदीप जैन ने मध्य प्रदेश सरकार पर गंभीर आरोप लगाया है कि केंद्र सरकार द्वारा इस मद में दी जाने वाली राशि का दुरूपयोग हो रहा है। जिलों में जिलाधिकारियों के बंग्लों का रख रखाव इस मद की राशि से किया जा रहा है। प्रदीप जैन का आरोप है कि वर्ष 2009 – 10 में महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना के तहत केंद्र सरकार द्वारा 72061.418 लाख रूपए की राशि दी गई थी, जिसमें से राज्य द्वारा महज 53379.327 लाख रूपए ही खर्च किए हैं। इस मद में 15 सौ करोड रूपए की राशि तो मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार ने खर्च ही नहीं की। मजे की बात तो यह है कि मध्य प्रदेश कोटे से मंत्री बने कमलनाथ, ज्योतिरादित्य सिंधिया, कांतिलाल भूरिया, अरूण यादव सहित कांग्रेस के सांसदों ने कभी इस पहलू पर गौर ही नहीं फरमाया कि केंद्र पोषित योजनाओं से उनके संसदीय क्षेत्र में चल रही योजनाओ में क्या घालमेल हो रहे है, वे ध्यान दें तो क्यों! आखिर 2013 में ही तो उन्हें दोबरा जनता के सामने जाना है, तब तक जनता सब कुछ भूल ही चुकी होगी।

आडवाणी आउट : मोदी इन

भारतीय जनता पार्टी का स्टेयरिंग संभालने वाले राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने अब आने वाले आम चुनावोे के लिए भूमिका बांधना आरंभ कर दिया है। हाल ही में संघ ने कहा है कि आगामी लोकसभा चुनावों में गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ही भाजपा की ओर से प्रधानमंत्री के दावेदार होंगे। इसके पहले एसआईटी द्वारा मोदी को तलब करने के मसले पर भाजपा के नए निजाम नितिन गडकरी ने कहा था कि मोदी प्रधानमंत्री बनने के योग्य हैं और वे इन सब झंझटों से पार पा लेंगे। मोदी की तारीफों में गडकरी और संघ की एक सी सुरताल से अडवाणी की भजन मण्डली सकते में है। आडवाणी की मण्डली को अभी भी उम्मीद है कि आने वाले चुनावों में राजग एक बार फिर से आडवाणी पर दांव लगाएगा, पर संघ गडकरी की जुगलबंदी से उनकी आशाओं पर तुषारापात होता लग रहा है। दूसरी ओर पीएम इन वेटिंग की राह में दूसरी सबसे सशक्त दावेदार सुषमा स्वराज द्वारा भी इस तरह की चाल चलकर आडवाणी को पार्श्व में ढकेला जा सकता है।

बेटी के चक्कर में बेटों को दुश्मन न बना लें शिवराज

मध्य प्रदेश सूबे में बेटियों को बहुत ही सम्मान से देखा जाने लगा है। महिलाओं का हितैषी बन चुका है देश का हृदय प्रदेश, यह बात सोलह आने सच है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी बिटियों के लिए दीवाने बावले दिख रहे हैं। भाजपा के राष्ट्रीय मुख्यालय में एक नेता ने नाम उजागर न करने की शर्त पर एक वाक्या सुनाया। मध्य प्रदेश के सिवनी जिले में एक कार्यक्रम के दौरान शिवराज सिंह चौहान भावावेश में कुछ ज्यादा ही कह गए। उनके अनुसार कल तक यह मान्यता थी कि बेटा बुढापे की लाठी है, पर आज यह मिथक टूट गया है, बेटों की हरकतों को देखकर उन पर अविश्वास होने लगा है। अरे भले मानस अगर आज से 50, 55 साल पहले अगर इसी बात को सोचा गया होता तो आज मध्य प्रदेश को शिवराज सिंह चौहान जैसा योग्य मुख्यमंत्री कैसे मिलता। शिवराज जी बेटियों की चाहत में जाने अनजाने में कहीं आप बेटों के मन में विरोध तो नहीं जगाने लगे हैं।

”आल इज नाट वेल” विदिन बिग बी एण्ड अमर

समाजवादी पार्टी से बर्खास्त किए गए शातिर राजनेता अमर सिंह और सदी के महानायक बिग बी के बीच सब कुछ ठीक ठाक नहीं है। इस बार मुंबई यात्रा पर आए अमर सिंह ने पहली दफा अमिताभ बच्चन के घर न रूककर संदेश दे दिया है कि उनके बीच कुछ न कुछ गडबड अवश्य ही है। अमर सिंह ने अपने ब्लाग में लिखा है कि 9 अप्रेल को अपनी मुंबई यात्रा के दौरान वे पहली बार अमिताभ बच्चन के घर नहीं रूके। अमूमन हर बार वे होटल में कमरा बुक अवश्य ही करवाते थे, पर अमिताभ के घर रात जरूर गुजारते थे। वैसे जया बच्चन के जन्म दिन पर वे बाकायदा उनके घर गए और शुभकामनाएं दीं। सदा ही खामोश रहकर वार करने वाले सदी के महानायक अमिताभ बच्चन इस मामले में पूरी तरह खामोश हैं। अमर सिंह अपनी ओर से अवश्य बार बार यह संकेत दे रहे हैं कि उनके और बिग बी के बीच अब सब कुछ सामान्य नहीं है।

सिलिकॉन इंप्लांट, जरा संभल कर

अपनी खूबसूरती को बढाने और शरीर को सुडोल आकार देने के लिए महानगरों में सिलिकॉन इम्पलांट का जोर है। पर अब यही बालओं के लिए खतरे की घंटी बजा रही है। दरअसल हवाई अड्डों पर सुरक्षा एजेंसियों द्वारा लगऐ स्केनर अब महिलाओं के द्वारा शरीर में सिलिकॉन इम्पलांट करने पर जोर से बीप बजाने लगता है। यह सिलिकॉन को एक मेटल की तरह डिटेक्ट करता है। वैसे इस तरह की घटनाएं कम ही प्रकाश में आईं हैं पर लोगों की प्राईवेसी के मद्देनजर महिलाओं की चेकिंग के लिए अलग से कक्ष और मशीन के चीखने पर महिला सुरक्षा कर्मी शरीर की किसी अन्य बंद कमरे में जांच कर पुष्टि करेंगी कि महिला ने सिलिकॉन इम्पलांट करवाया है या फिर कोई अस्त्र शस्त्र छुपाकर रखा है।

पुच्छल तारा

पिछले दिनों बस्तर में हुए अब तक के सबसे बडे नक्सली हमले के बाद पूरे देश में इनके समर्थन ओर विरोध पर चर्चाएं चल पडीं हैं। इसी बीच एक खबर आई कि दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में भी नक्सल विचारधारा के पोषक लोग हैं। गुजरात के वापी शहर से अनंत अग्रवाल ई मेल भेजते हैं कि देश भर में कुकुरमुत्ते की तरह गली गली में स्कूल कालेज खुल गए हैं, तब नक्सलवादी अपना स्कूल या कालेज क्यों नहीं चलते, उनके पास जेनएयू है तो. . . .।

-लिमटी खरे

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1 Comment on "ये है दिल्ली मेरी जान – राजा का काटा नहीं मांगता है पानी"

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डॉ. महेश सिन्‍हा
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चाणक्य नीच नहीं था

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