लेखक परिचय

लिमटी खरे

लिमटी खरे

हमने मध्य प्रदेश के सिवनी जैसे छोटे जिले से निकलकर न जाने कितने शहरो की खाक छानने के बाद दिल्ली जैसे समंदर में गोते लगाने आरंभ किए हैं। हमने पत्रकारिता 1983 से आरंभ की, न जाने कितने पड़ाव देखने के उपरांत आज दिल्ली को अपना बसेरा बनाए हुए हैं। देश भर के न जाने कितने अखबारों, पत्रिकाओं, राजनेताओं की नौकरी करने के बाद अब फ्री लांसर पत्रकार के तौर पर जीवन यापन कर रहे हैं। हमारा अब तक का जीवन यायावर की भांति ही बीता है। पत्रकारिता को हमने पेशा बनाया है, किन्तु वर्तमान समय में पत्रकारिता के हालात पर रोना ही आता है। आज पत्रकारिता सेठ साहूकारों की लौंडी बनकर रह गई है। हमें इसे मुक्त कराना ही होगा, वरना आजाद हिन्दुस्तान में प्रजातंत्र का यह चौथा स्तंभ धराशायी होने में वक्त नहीं लगेगा. . . .

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लिमटी खरे

2012 की चिंता में प्रतिभा ताई

देश की पहिला महिला महामहिम राष्ट्रपति प्रतिभा देवी सिंह पाटिल का कार्यकल जुलाई 2012 में प्रतिभा देवी पाटिल में समाप्त होने जा रहा है। वे एक बार फिर रायसीना हिल्स पर स्थित महामहिम भवन में पांच साल और राज करने की इच्छा मन में दबाए बैठी हैं। राजग के पीएम इन वेटिंग एल.के.आड़वाणी को शायद इस बात की भनक लग गई है। पिछले दिनों उन्होंने एक बयान में कहा था कि हमारी प्रेजीडैंट ज्यादातर मामलों में उदासीन ही रहा करती हैं। राष्ट्रपति भवन के सूत्रों का कहना है कि महामहिम को इसकी जानकारी मिलते ही वे सचेत हो गईं हैं। रामलीला मैदान पर पुलिसिया अत्याचार का ज्ञापन सौंपने गए भाजपा के प्रतिनिधिमण्डल से प्रतिभा ताई ने आम परंपराओं को ताक पर रख दिया। आड़वाणी की ओर मुखातिब प्रतिभा ताई बोलीं -‘‘आप लोग जो ज्ञापन मुझे सौंप जाते हैं, उन्हें मैं बहुत ही ध्यानपूर्वक पढ़ती हूं और फिर संबंधित मंत्रालय को भेजती हूं। इतना ही नहीं जरूरत पड़ने पर अनेक बार मैं खुद ही उसका फालोअप लेती हूं।‘‘ प्रतिभा पाटिल के इस अप्रत्याशित कथन से सियासी हल्कों में यह बात तैर गई है कि भाजपा की बैसाखी बिना अगली बार कोई भी राष्ट्रपति नहीं बन सकता है।

सलमान के साथ उछला हरवंश का नाम!

काले हिरण मामले में विवादित हुए वालीवुड अभिनेता सलमान खान के सितारे इन दिनों ठीक नहीं चल रहे हैं। हाल ही में मुंबई के पनवेल में एक जीमन से लोगों को बेदखल कर उसे खरीदने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। आरोपित है कि इसे सिने अभिनेता सलमान खान से खरीदा है। मुंबई से प्रकाशित एक प्रमुख अंग्रेजी समाचार पत्र के ईपेपर की कापी इन दिनों अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के दिल्ली स्थित मुख्यालय की सुर्खी बना हुआ है। मध्य प्रदेश के सिवनी जिले से डाक से भेजी गई इस फोटो कापी में सलामन के साथ ही साथ कांग्रेस के एक नेता ‘हरवंश सिंह‘ द्वारा भी इस जमीन को खरीदने की बात कही गई है। इस कापी से स्पष्ट नहीं हो पा रहा है कि हरवंश सिंह कौन हैं, किन्तु मध्य प्रदेश विधानसभा के उपाध्यक्ष ठाकुर हरवंश सिंह मूलतः छिंदवाड़ा जिले के हैं पर उनकी कर्मभूमि सिवनी बन गई है, सो उनके चाहने वाले इसमें उल्लेखित नाम को उनसे जोड़कर ही देख रहे हैं।

ममता से सुरक्षित दूरी बनाकर चल रही कांग्रेस

पश्चिम बंगाल में तीन दशक पुरानी वाम सरकार को भले ही ममता बनर्जी ने उखाड़ फेंका हो, पर कांग्रेस ने इशारों ही इशारों में उसे संकेत दे दिए हैं कि वह कांग्रेस को हल्के में न ले। ममता बनर्जी की ताजपोशी में सोनिया गांधी ने अपनी उपस्थिति दर्ज न करवाकर 2012 में वाम दलों के साथ तालमेल के विकल्प को खुले रखा है जिससे ममता की पेशानी पर पसीने की बूंदे छलकना स्वाभाविक ही है। इसके पहले सोनिया ने मुफ्ती मोहम्मद सईद और उमर उबदुल्ला की ताजपोशी में शिरकत की थी। सियासी जानकारो का कहना है कि अगर सोनिया कोलकता जाकर ममता के शपथ ग्रहण में शामिल होती तों यह कांग्रेस का त्रणमूल के सामने आत्मसमर्पण माना जाता। ममता ने भले ही प्रणव मुखर्जी का पैर छूकर आर्शीवाद लिया हो पर कांग्रेस उन्हें स्थापित होने का मौका नहीं देना चाह रही है।

बाबा को बॉय बॉय कह सोनिया उड़ीं पीहर की ओर

इधर बाबा रामदेव काले धन और भ्रष्टाचार के मामले में अनशन पर बैठे थे, वहां सरकार की हालत बिगड़ती जा रही थी। वजीरे आजम के निवास 7 रेसकोर्स रोड़ और कांग्रेस के सत्ता और शक्ति के शीर्ष केंद्र सोनिया के निवास 10, जनपथ की अघोषित जंग को हवा उस वक्त मिली जब बाबा के अनशन का दंश झेल रही कांग्रेसनीत संप्रग सरकार को बेसहारा छोड़कर कांग्रेस की राजमाता श्रीमती सोनिया गांधी चुपचाप दुबई के रास्ते अपने पीहर इटली रवाना हो गईं। खबर है कि प्रियंका अपने बच्चों और राहुल के साथ अपनी नानी से मिलने जा रहे हैं। वैसे भी गर्मी में सोनिया का इटली जाना और सर्दियों में उनकी मां क्रिसमस मनाने सोनिया के घर जरूर आती हैं। कहा जा रहा है कि सोनिया को उनकी किचिन कैबनेट ने मशविरा दिया कि बाबा रामदेव के मामले में अगर आप सामने आईं तो भाजपा इसमें मिशनरी वर्सेस हिन्दू का कार्ड खेल सकती है। यही कारण है कि आजादी के उपरांत ताकतवर हुआ कांग्रेस और भाजपा का ‘गांधी परिवार‘ इस मामले में मौन साधे हुए है।

कट सकता है वृंदा का टिकिट

माकपा के अंदर करात दंपत्ति के खिलाफ गुस्सा फटने लगा है। पोलित ब्यूरो के दो महत्वपूर्ण सदस्य सीताराम येचुरी और वृंदा करात की राज्य सभा की सदस्यता इस साल अगस्त में ही समाप्त होने वाली है। पश्चिम बंगाल में वाम मोर्चे को महज एक सीट से ही संतोष करना पड़ सकता है। वाम मोर्चे के अंदर चल रही चर्चाओं के अनुसार 34 साल के वाम दलों के शासन के उपरांत उसका सफाया अगर हुआ है तो इसके पीछे करात दंपत्ति की गलत नीतियां ही हैं। प्रकाश करात और वृंदा करात के खिलाफ उपजे इस रोष का शमन होता नहीं दिख रहा है। सूत्रों की मानें तो सीताराम येचुरी को तो पार्टी ने राज्य सभा से वापसी के लिए हरी झंडी दे दी है पर वृंदा को रेड सिग्नल दिखा दिया है। बंगाल के साथ ही साथ केरल में सफाए का सारा दोष करात दंपत्ति के सर मढ़ दिया गया है।

बंद हो सकता हैं डाक टिकिट चलन!

चवन्नी से कम की भारतीय मुद्रा का प्रचलन समाप्त कर दिया गया है। अब डाक टिकिटों पर संकट के बादल छाते दिखाई दे रहे हैं। डाक टिकिटों के स्थान पर कंप्यूटर से निकलने वाली रसीद का तेजी से बढ़ा चलन इस ओर इशारा कर रहा है कि जल्द ही डाक टिकिट भी इतिहास की वस्तु में शामिल होने की तैयारी में है। डाक विभाग के माध्यम से स्पीड पोस्ट, रजिस्ट्री आदि करने पर अब डाक टिकिट के बदले रसीद दिए जाने का चलन बढ़ गया है। इसी तरह बड़े उपभोक्ताओं ने फ्रेंकिग मशीन के माध्यम से डाक टिकिट लगाने आरंभ कर दिए हैं। देश के लगभग सभी पोस्ट ऑफिस को कंप्यूटरीकृत करने के बाद अब सभी को ऑन लाईन एक दूसरे से जोड़ने की योजना भी जारी है। वैसे भी सरकार की मिली भगत से कोरियर कंपनियों ने भारतीय डाक विभाग की कमर तोड़ रखी है।

सहाराश्री और बाबा की बढ़ती निकटता

अपने बलबूते पर करोड़ों अरबों का कारोबार खड़ा करने वाली दो हस्तियों के बीच इन दिनों काफी नजदीकी देखने को मिल रही है। साहारा समूह के सुब्रत राय सहारा और योग के नाम पर दौतल एकत्र करने वाले बाबा रामदेव के बीच काफी लगाव है। बाबा रामदेव गाहे बेगाहे सहाराश्री का चार्टर्ड विमान इस्तेमाल कर लेते हैं। पहले की बात अलहदा मानी जा सकती है, अब तो हरियाण के रामकिशन यादव उर्फ बाबा रामदेव देश के घोषित अरबपति हो चुके हैं, इसलिए वे खुलेआम किराए के विमान या हेलीकाप्टर का उपयोग कर सकते हैं। बाबा रामदेव का रूख अगर आक्रमक रहा तो आने वाले समय में केंद्र सरकार का शिकंजा सहारा श्री पर कस जाए तो किसी को आश्चर्य नहीं होना चाहिए। साथ ही साथ बाबा के अनन्य भक्त और बिल्डर्स की दुनिया के माफिया सुधाकर शेट्टी द्वारा अनशन में अपने खर्च पर बीस हजार लोगों को भेजना कांग्रेस को नागवार गुजरा है सो उनका नपना तो तय ही है।

बिना नेता प्रतिपक्ष के असम विधानसभा!

असम में कांग्रेस की धमाकेदार वापसी हुई तो विपक्ष औंधे मुंह गिरा हुआ है। असम में पहली बार एसा हो रहा है कि विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष ही नहीं होगा। 126 सदस्यीय विधानसभा में एक भी नेता प्रतिपक्ष नहीं होना अपने आप में अनोखी मिसाल ही होगी। आला अफसरान का मानना है कि मुख्य विपक्षी पार्टी की हैसियत पाने के लिए सूबे में किसी भी सियासी दल के पास न्यूनतम विधायक संख्या भी नहीं है। विधानसभा में मुख्य विपक्षी पार्टी के पास न्यूनतम 21 विधायकों का होना आवश्यक है, पर बोडोलेण्ड पीपुल्स फ्रंट ने 12 असम गण परिषद ने 10 तो असम यूनाईटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट ने 18 सीटें जीती हैं। इन परिस्थितियों में प्रमुख विपक्षी पार्टी की आसनी खाली ही रह गई है। विपक्ष के नेता के मामले में विधानसभा और संसद के अपने अपने तय नियम हैं, किन्तु इनमें संशोधन के लिए वे स्वतंत्र हैं।

सड़कों के बाद अब नामकरण में वृक्षों की बारी

इस नश्वर देह को त्याग चुके अनेक अतिमहत्वपूर्ण और महत्वपूर्ण लोगों की याद में सड़कों के नामकरण का रिवाज बड़ा पुराना है। देश के कमोबेश हर शहर में सड़कों का नाम किसी महान हस्ती से जुड़ा हुआ है। दिल्ली की हर सड़क किसी न किसी के नाम पर ही है। व्हीआईपी और व्हीव्हीआईपीज की फेहरिस्त इतनी लंबी हो चली है कि दिल्ली में अब सड़कें ही नहीं बची हैं, जिनका नामकरण किया जा सके। दिल्ली सरकार द्वारा दिल्ली विकास प्राधिकरण से इस बारे में इजाजत मांगी है कि मिलेनियम पार्क मंे महत्वपूर्ण लोगों के नाम से पेड़ आवंटित कर दिए जाएं। दिल्ली सरकार के पास वैसे भी हर साल दो सैकड़ा से अधिक आवेदन इस बात को लेकर आते हैं कि किसी के नाम पर सड़क का नामकरण कर दिया जाए। दिल्ली सरकार परेशानी बढ़ती ही जा रही है, क्योंकि मुख्य मार्ग तो छोड़ें बाई लेन तक का नामकरण किया जा चुका है।

मल्टीनेशनल्स के निशाने पर चिकित्सा विभाग

देश में जीवन रक्षक औषधियों पर मूल्य नियंत्रण लागू न हो पाने का कारण मल्टीनेशनल कंपनियों की मुगलई है। दो अलग अलग कंपनियों में एक ही दवा की कीमत में दस गुना का अंतर होना आम बात है। केंद्र सरकार से लेकर दवाओं और योग के माध्यम से अरबपति बने स्वयंभू योग गुरू तक इस बारे में खामोशी अख्तियार किए हुए हैं। असंयमित दिनचर्या और खान पान के चलते मधुमेह का गढ़ बन चुके हिन्दुस्तान में अब महज दो रूपए में शुगर की जांच हो सकेगी। वर्तमान में इसका खर्च औसतन पचास से सौ रूपयों के बीच बैठता है। हाल ही में इंडियन कॉउंसिल ऑफ मेडीकल रिसर्च ने इस बारे में कहा है कि इतने कम खर्च में शुगर की जांच से गरीबों को बेहद फायदा हो सकेगा। चिकित्सकों को जेब में रखने वाली मल्टीनेशनल दवा कंपनियां अब इस फिराक में हैं कि दो रूपए में मधुमेह की जांच की योजना को अमली जामा न पहनाया जा सके। अब देखना यह है कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नबी आजाद का इस मामले में क्या रूख रहता है।

21 जवानों को लील गया मच्छर

कहने को तो मच्छर बहुत ही छोटा सा उड़ने वाला जीव है, जिसे नंगी आंखों से देखा जा सकता है। मच्छर के कारण न जाने कितने लोगों को असमय ही काल के गाल मंे समाना पड़ा था। आजादी के साल अर्थात 1947 में ही आठ लाख लोग मलेरिया के चलते जान गवा चुके हैं। केंद्र सरकार ने इसके बाद राष्ट्रीय मलेरिया उन्नमूलन कार्यक्रम का आगाज किया था। कालांतर में इसका नाम परिवर्तित हो गया। छः दशकों में मच्छरों का सफाया तो नहीं हुआ अलबत्ता मलेरिया विभाग का नामोनिशान मिट गया है। वर्ष 2010 में केंद्रीय रिजर्व पुलिस फोर्स के 21 जवानों की मलेरिया से मौत होने पर सीआरपीएफ की व्यवस्था पर सवालिया निशान लग गए हैं। सबसे ज्यादा छः जवान छत्तीसगढ़ में मारे गए हैं। दरअसल जंगली इलाकों में गश्त के दौरान जवानों को मच्छरों का शिकार बनना पड़ता है, फिर वहां समुचित चिकित्सा सुविधा न मिल पाने से उनकी हालत बिगड़ जाती है।

टीवी पर अशलीलता परोसी तौ खैर नहीं!

छोटे पर्दे पर किसी का जोर नहीं चल पर रहा है। यही कारण है कि टीवी पर चेनल्स द्वारा हंसी मजाक के नाम पर फूहड़ता परोसी जा रही है। फिल्म सेंसर बोर्ड की तर्ज पर अब केंद्र सरकार द्वारा टेलीवीजन चेनल्स के लिए भी नियामक संस्था का गठन कर दिया गया है। केंद्र सरकार को टीवी पर अश्लीलता और आक्रमता को लेकर लगातार ही शिकायतें मिल रही थीं। इसी के मद्देनजर केंद्र सरकार ने 13 सदस्यीय ब्राडकास्ट कंटेंट कम्प्लैंट्स काउंसिल का गठन कर दिया है। दिल्ली उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायधीश ए.पी.शाह को इसका अध्यक्ष मनोनीत किया गया है, जिन्होंने अपना पदभार ग्रहण कर लिया है। यह संस्था देश भर के साढ़े पांच सौ से अधिक टीवी चेनल्स पर नजर रखने का काम करेगी, अश्लीलता और आक्रमकता पर कठोर कार्यवाही कर जन शिकायतों पर चेनल्स को दिशा निर्देश जारी करने का काम करेगी।

शंकराचार्य की शरण में सोनिया

उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव पर सभी की नजरें गड़ी हैं। सारे सियासी दल मान रहे हैं कि जिसने भी यूपी में परचम लहरा दिया वह अगले आम चुनावों में इसका सबसे ज्यादा लाभ प्राप्त कर सकता है। कांग्रेस महासचिव राजा दिग्विजय सिंह के अल्पसंख्यक प्रेम से कांग्रेस की राजमाता को लगने लगा कि यूपी में मुसलमान कांग्रेस से नाराज हो सकते हैं। सोनिया मण्डली ने उन्हें भरमाया और संगठन के एक जरूरी कार्यक्रम में भाग लेने बनारस आईं सोनिया प्रोग्राम के पहले ही गाजीपुर के सैदपुर के लिए उड़ गईं। उनका चौपर जहां लेण्ड किया वहीं पास में शंकराचार्य का आश्रम था। सोनिया ने आधे घंटे से ज्यादा समय शंकराचार्य के साथ बिताया और सोने का मुकुट उन्हें पहनाया। सियासी हल्कों में सोनिया के एक कृत्य की दबी जुबान से चर्चा होने लगी है कि आखिर किसके पैसों से मंहगे सोने का मुकुट सोनिया ने अर्पित किया। क्या आयकर विभाग इस बारे में सोनिया से कुछ दरयाफ्त करने की जहमत उठाएगा?

पुच्छल तारा

इक्कीसवीं सदी के स्वयंभू योग गुरू बाबा रामदेव के कस बल कांग्रेस ने ढीले कर दिए हैं। बाबा की हुंकार में अब पहले जैसी तल्खी दिखाई नहीं पड़ रही है। उधर अन्ना हजारे के स्वर बुलंद होते दिख रहे हैं। सरकार का दमन का डंडा तेजी से घूम रहा है। अन्ना हजारे के घर पर भी आयकर अधिकारी धमक गए। जो सरकार के खिलाफ आवाज उठाने की जहमत कर रहा है सरकार या तो पुलिस या फिर आयकर के माध्यम से उसे धमका रही है। हालाता ब्रितानी सत्ता जैसे हो गए हैं। उत्तरांचल के रूड़की से दिशा नागर ने ईमेल भेजा है। दिशा लिखती हैं कि जगजाहिर है ‘‘देश की बागडोर सोनिया गांधी के हाथों में है। सोनिया राजनैतिक रूप से अपरिपक्व हैं। वे एक एसी गुडिया हैं जो चाबी से चलती है। उन्हें जितना बोलने की ताकीद दी जाती है वे उतना ही बोलती हैं। उन्होंने कभी प्रेस कांफ्रेंस का सामना नहीं किया। कांग्रेस के मैनेज्ड पत्रकार उनका साक्षात्कार लेते हैं। वे भारतीय समाज के रीति रिवाज, रहन सहन आदि से भली भांति परिचित नहीं हैं। इन परिस्थितियों में देश में सामंतवादी मानसिकता का आगाज होना कोई अस्वाभाविक प्रक्रिया नहीं है।‘‘

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