लेखक परिचय

लिमटी खरे

लिमटी खरे

हमने मध्य प्रदेश के सिवनी जैसे छोटे जिले से निकलकर न जाने कितने शहरो की खाक छानने के बाद दिल्ली जैसे समंदर में गोते लगाने आरंभ किए हैं। हमने पत्रकारिता 1983 से आरंभ की, न जाने कितने पड़ाव देखने के उपरांत आज दिल्ली को अपना बसेरा बनाए हुए हैं। देश भर के न जाने कितने अखबारों, पत्रिकाओं, राजनेताओं की नौकरी करने के बाद अब फ्री लांसर पत्रकार के तौर पर जीवन यापन कर रहे हैं। हमारा अब तक का जीवन यायावर की भांति ही बीता है। पत्रकारिता को हमने पेशा बनाया है, किन्तु वर्तमान समय में पत्रकारिता के हालात पर रोना ही आता है। आज पत्रकारिता सेठ साहूकारों की लौंडी बनकर रह गई है। हमें इसे मुक्त कराना ही होगा, वरना आजाद हिन्दुस्तान में प्रजातंत्र का यह चौथा स्तंभ धराशायी होने में वक्त नहीं लगेगा. . . .

Posted On by &filed under राजनीति.


लिमटी खरे

 

कौन सुनेगा मनमोहनी वाणी को अब!

देश के वजीरे आजम डॉ. मनमोहन सिंह पर सादगी के साथ ही साथ भ्रष्टाचार छुपाने के आरोप भी लगने लगे हैं। प्रधानमंत्री पर सबसे बड़ा आरोप तो यह है कि उन्हें लोकसभा में ही मत देने का अधिकार नहीं है, इसका कारण यह है कि वे पिछले दरवाजे यानी राज्यसभा के रास्ते संसदीय सौंध तक पहुंचे हैं। पीएम डॉ. सिंह असम से राज्य सभा सांसद हैं। हाल ही में असम में विधानसभा चुनाव संपन्न हुए। हद तो तब हो गई जब प्रधानमंत्री ने असम में जाकर अपने मताधिकार का ही प्रयोग नहीं किया। भाजपा के युवा आईकान नरेंद्र मोदी ने पीएम पर निशाना साधते हुए इस बात पर दुख व्यक्त किया है कि वजीरे आजम ने असम में विधानसभा चुनवों में अपने मताधिकार का प्रयोग न कर निराश किया है। मुद्दे की बात तो यह है कि देश के उच्च पदों पर बैठे लोगों द्वारा मताधिकार का प्रयोग करने की अपील आम जनता से की जाती है, पर जब प्रधानमंत्री खुद ही मताधिकार का प्रयोग न कर पाए हों तो क्या उन्हें मताधिकार करने की अपील करने का नैतिक अधिकार रह जाएगा?

 

क्यों हैं कांग्रेस के अन्ना विरोधी सुर!

कांग्रेस के महासचिव राजा दिग्विजय सिंह, सलमान खुर्शीद, मनीष तिवारी जैसे नेता आखिर एसी बयानबाजी क्यों कर रहे हैं कि अन्ना हजारे के आंदोलन की हवा निकल सके। कारण साफ है कि पिछले एक साल में कांग्रेसनीत संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार ने एक के बाद एक विवादस्पद फैसले लिए और अपनी भद्द पिटवाई। कांग्रेस के मंत्री लोकपाल बिल के खिलाफ हैं। उधर कांग्रेस की राजमाता श्रीमति सोनिया गांधी और युवराज राहुल गांधी भी मन ही मन इसका विरोध कर रहे हैं, पर वे जानते हैं कि अगर उन्होने इसका साथ नहीं दिया तो आने वाले समय में युवाओं का राहुल गांधी से मोहभंग हो जाएगा। सोनिया और राहुल दोनों ही भली भांति जानते हैं कि युवा ही कल राहुल को देश का वजीरेआजम बनवाएंगे। यही कारण है कि दिग्गी, मनीष सलमान जैसे नेता मिलकर अन्ना के आंदोलन की हवा निकालने पर तुले हुए हैं।

 

शीला का हो रहा शनि भारी

लगभग डेढ़ दशक से अधिक तक दिल्ली की सत्ता पर काबिज रहने वाली श्रीमति शीला दीक्षित के परेशानी के दिन आरंभ होने के संकेत मिले हैं। कल तक शीला के जेब में रहने वाला दिल्ली का कांग्रेस संगठन अब सर उठाने लगा है। नगर निगम के बटवारे को आधार बनाकर संगठन ने शीला की मुखालफत आरंभ कर दी है। शनिवार को आधा दर्जन से अधिक विधायकों ने शीला के खिलाफ कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमति सोनिया गांधी से भेंट कर अपनी बात रखी। शीला ने दिल्ली नगर निगम को पांच हिस्सों में बांटने के मामले में मनमानी के आरोप उन पर लगे हैं। शीला पर आरोप है कि उन्होंने इस मसले में न तो विधायकों को ही विश्वास में लिया और न ही पार्षदों से ही रायशुमारी की। संगठन की शह पर अगर पार्षद और विधायक एक जुट हो गए तो शीला की मुसीबतें बढ़ ही सकती हैं।

 

लो अब खिलाडि़यों को मिला मिलावटी खाना

कामन वेल्थ गेम्स के बाद अब 34वें राष्ट्रीय खेल विवादों में आ गए हैं। एक जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया है कि नेशनल गेम्स में खिलाडि़यों को परोसा गया खाना दूषित और मिलावटी था। धनबाद स्थित प्रयोगशाला में नमूनों की जांच में यह तथ्य उभरकर सामने आया है कि खिलाडि़यों को खिलाया गया खाना मानकों के अनुरूप नही था। खेल के दौरान खेल परिसर में बनाई गई अस्थाई ओपीडी में खेलों के दौरान 11 हजार लोगों का इलाज किया गया था। महालेखाकार ने इस खेल में खाने के लिए टेंडर के माध्यम से पाबंद किए गए ठेकेदार गजल केटरर्स को निर्धारित से अधिक दर पर निविदा देने पर घोर आपत्ति जताई है। कामन वेल्थ गेम्स में एक के बाद एक अनियमितताओं के बाद भी आरोपियों पर कार्यवाही लंबिति होने से अब लोगों के हौसले गलत कामों के लिए बुलंद होना स्वाभाविक ही है।

 

पुत्रमोह भारी पड़ रहा है गहलोत को

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को केंद्र में वापस लाने की मुहिम उनके विरोधियों ने तेज कर दी है। अशोक गहलोत के स्थान पर मुख्यमंत्री की कुर्सी पर महिला आयोग की निर्वतमान अध्यक्ष गिरिजा व्यास और केंद्रीय भूतल परिवहन मंत्री सी.पी.जोशी की नजरें गड़ी हुई हैं। सूबे में शासन की स्थिति को देखकर अब कांग्रेस के कार्यकर्ता ही कहने लगे हैं कि अगर अगला चुनाव गहलोत के नेतृत्व में लड़ा गया तो राज्य में भाजपा की वापसी सुनिश्चित ही है। हाल ही में गहलोत विरोधियों के हाथ एक एसा अस्त्र लगा है जो गहलोत की परेशानी का सबब बन सकता है। विपक्ष इसका उपयोग ब्रम्हास्त्र के बतौर कर सकता है। गहलोत के पुत्र जिस कंपनी के लीगल एडवाईजर हैं उस कंपनी को राज्य में दो बड़े ठेके देने का मामला तूल पकड़ने लगा है। अब देखना है कि गहलोत अपनी कुर्सी सलामत रखने के लिए क्या जतन करते हैं।

 

यह क्या कह गए राजा साहेब!

इक्कीसवीं सदी के कांग्रेस के चाणक्य की अघोषित उपाधि पाने वाले कांग्रेस के महासचिव दिग्जिवय सिंह ने देवभूमि वाराणसी में जाकर जो कहा है उससे देश की राजनैतिक राजधानी में सियासत गर्माने लगी है। दिग्गी राजा ने कांग्रेसियों को हिदायत दी है कि वे ‘होटल और बोतल‘ की संस्कृति से बाहर निकलें। कांग्रेस के आला नेता अब इस बात पर मंथन कर रहे हैं कि कार्यकर्ता या नेता किस होटल में जाकर बोतल का इस्तेमाल करते हैं। वैसे भी कांग्रेसी संगठन के अंदर तीन स्तर के पंचायती राज को परिभाषित कुछ इस तरह करते हैं अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी यानी एआईसीसी (ये आई शीशी), प्रदेश कांग्रेस कमेटी यानी पीसीसी (पी शीशी) और जिला कांग्रेस कमेटी यानी डीसीसी (दी घुमा कर शीशी)।

 

तुम डाल डाल हम पात पात

नक्सलवादी, आतंकवादी, अलगाववादी, क्षेत्रवादी, उग्रवादी, माओवादी जैसे आताताई और सुरक्षा बलों के बीच चूहे बिल्ली का खेल पुराना हो चुका है। एक के बाद एक मोर्चे पर देश विरोधी इन ताकतों के आगे सुरक्षाबलों के परास्त होने की खबरें मिला करती हैं किन्तु देश के शूरवीर जवानों ने कभी हौसला नहीं खोया है। पिछले साल जून में बिहार में एसा कुछ हुआ जो केंद्र सरकार को हिला देने के लिए काफी है। दरअसल धनबाद जिले में रहमान गांव में सीआरपीएफ की एक कंपनी तैनात है। इस कंपनी को जिस तालाब से पीने का पानी सप्लाई होता है, उस तालाब में नक्सलियों द्वारा विस्फोटक मिलाकर पानी को जहरीला कर दिया गया था। सुबह व्यायाम के लिए उठे जवानों ने जब तालाब की मछलियों को सतह पर मरा पाया तो आला अधिकारियों ने इस सूचना पर उसका पानी प्रयोगशाला भेजा जहां इसके जहरीले होने की पुष्टि हुई। सवाल यह उठता है कि जब सीआरपीएफ कंपनी की नाक के नीचे ही नक्सली वारदात करने में सफल रहे तो फिर उनकी मुस्तैदी पर प्रश्नचिन्ह लगना स्वाभाविक ही है।

 

सौंवे साल में एक करोड़ रू.की रोजाना आय!

देश विदेश में अरबों खरबों लोगों की आस्था का केंद्र बन चुके शिरडी के साईं बाबा की महिमा अपरंपार ही है। रामनवमी का पर्व महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले के शिरडी कस्बे के लिए महत्व का होता है। इस साल इसका महत्व और अधिक इसलिए भी बढ़ गया है क्योंकि इस साल यह पर्व सौवें साल में प्रवेश कर गया है। रामनवमी पर साई बाबा को जो चढ़ावा आया वह हैरत अंगेज ही रहा। तीन दिनों में साई बाबा संस्थान को तीन करोड़ रूपए की आय हुई इसमें एक करोड़ 77 लाख रूपए दान पात्र में मिले शेष लोगों द्वारा कार्यालय में जमा कराए गए थे। गौरतलब होगा कि देश भर में साई बाबा के भक्तों के लिए जगह जगह मंदिर अवश्य बना दिए गए हैं किन्तु इन मंदिरों का ट्रस्ट बनाकर उसे रजिस्टर्ड न कराने से इसमें होने वाली आय और व्यय को लोग संदेह की नजरों से ही देखते हैं। अनेक मंदिरों में परिवारों या लोगों का एकाधिकार भी बना हुआ है।

 

कहां जा रही हैं शीला के राज में युवतियां!

दिल्ली की गद्दी पर तीसरी बार काबिज होने वाली कांग्रेस की मुख्यमंत्री श्रीमति शीला दीक्षित के राज में देश की राजनैतिक राजधानी दिल्ली से युवतियों के गायब होने का सिलसिला थम नहीं पा रहा है। पिछले मार्च माह में 18 से 30 साल की 153 युवतियां गायब हैं। दिल्ली पुलिस का अपना अलग राग है जिसमें प्रेम प्रसंग, घरेलू अनबन, कैरियर तलाशने बाहर जाने को प्राथमिकता दी जा रही है। वहीं दूसरी ओर दिल्ली महिला आयोग इस मामले में आपराधिक कारणों को प्रमुखता से रेखांकित कर रही है। दिल्ली की निजाम खुद एक महिला हैं, तो वे महिलाओं के गायब होने की बात को समझ सकती होंगी, किन्तु सत्ता के मद में चूर कांग्रेस की मुख्यमंत्री श्रीमति शीला दीक्षित को इससे कोई सरोकार नहीं दिखाई दे रहा है। अभी हाल ही में एक युवती को मारकर पार्सल किए जाने की खबर से सनसनी फैल गई थी। कांग्रेस की अध्यक्ष श्रीमति सोनिया गांधी की नाक के नीचे अगर बालाओं पर इस तरह का कहर ढाया जा रहा हो तो सुदूर ग्रामीण अंचलों के हाल सोचकर ही रूह कांप उठती है।

 

नशा शराब में होता तो नाचती बोतल

अमिताभ बच्चन के बारे में कहा जाता है कि उन्होंने सालों हो गए शराब को तजे हुए। फिर भी उन्होंने ‘शराबी‘ फिल्म में नशे का जीवंत अभिनय कर साबित कर दिया कि वे सदी के महानायक बनने लायक हैं। देश की राजधानी दिल्ली में पीकर टल्ली होने वालों की तादाद देखें तो आपके होश उड़ जाएंगे। कांग्रेस के शासन में दिल्ली में इस साल की पहली तिमाही में 2004 करोड़ रूपयों की शराब बिकी है, जो पिछले साल 1927 करोड़ रूपए थी। इस बार होली पर भी दिल्ली जमकर टल्ली हुई थी। आने वाले समय में हर घर में शराबी पैदा हो जाएं तो किसी को आश्चर्य नहीं होना चाहिए। अब आप ही बताईए कि आजादी के छः दशकों के बाद देश की युवा पीढ़ी को कांग्रेस आखिर किस अंधी राह पर ढकेलती जा रही है।

 

करोड़पति लोकसेवक!

सरकारी सेवा करने वालों को लोकसेवक कहा जाता था। लोकसेवक का अर्थ होता था जनता की सेवा करने वाला सरकारी नौकर। आज इसके मायने बदलते ही जा रहे हैं। राजस्थान में भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों ने जब अपनी संपत्ति उजागर की तो देश दांतों तले उंगली दबा बैठा। राजस्थान में अब तक 19 आईएएस द्वारा संपत्ति घोषित की है इन 19 में से एक साहेब वाडमेर में पदस्थ गौरव गोयल करोड़पति तो 13 लखपति हैं। जिनमें से अधिकांश की संपत्ति पचास लाख रूपए से ज्यादा है। अब आप ही बताईए कि जो खुद को आर्थिक तौर पर संपन्न बनाने में लगे हों वहां गरीब गुरबों पर नजला गिरना स्वाभाविक ही है। देश में अखिल भारतीय सेवा वाले अधिकारी अगर अपनी संपत्ति जाहिर कर दें तो पता चलेगा कि सरकार द्वारा गरीब गुरबों के हितों को ध्यान में रखकर बनाई जाने वाली योजनाओं का धन आखिर गया कहां है।

 

सूखी धरती किन्तु बाढ़ में डूब गए लाखों झाड़!

2008 से अब तक दिल्ली में 1,60,842 वृक्ष तबाह हो चुके हैं, जी हां, दिल्ली सरकार का कहना है यह। दिल्ली में पर्यावरण की फिजां शायद इतनी अधिक तादाद में झाड़ों के कालकलवित होने से ही बिगड़ी है। सवाल यह है कि पर्यावरण की फिजां को बिगड़ने के मार्ग किसने प्रशस्त किए। इसकी तह में जाया जाए तो आपका मुंह भी विस्मय से खुला ही रह जाएगा। मौसम विभाग ने आशंका व्यक्त की थी कि 2009 में बारिश कम होगी। वस्तुतः इस साल दिल्ली में सूखा भी पड़ा था। इस बात से दिल्ली सरकार को अधिक लेना देना नहीं है। दिल्ली सरकार का कहना है कि इस सूखे में ही एक लाख से अधिक झाड़ बाढ़ में बह गए हैं। सवाल यह उठता है कि जब सूखा पड़ा तब बाढ़ कहां से आ गई। आग और पानी दोनों को एक साथ तो नही रखा जा सकता है। यह चमत्कार दिल्ली सरकार ही कर सकती है, सो उन्होने कर दिया।

 

होगी तुम महारानी हमें तो आईडी दिखाओ

रूपहले पर्दे के अदाकार अपने आप को भगवान से कम नहीं समझते हैं। पिछले दिनों किंग खान यानी शाहरूख को दुनिया के चैधरी अमेरिका में एयर पोर्ट पर रोक लिया गया। उनका गुस्सा सातवें आसमान पर था, हम हिन्दुस्तान की सबसे बड़ी इंडस्ट्री के अघोषित बादशाह और तुम हमें रोको। कमोबेश यही हादसा चंड़ीगढ़ एयरपोर्ट पर हो गया। किंग्स इलेवन की मालकन और अभिनेत्री प्रीति जिंटा से सुरक्षा कर्मी ने पहचान पत्र मांगने की हिमाकत कर डाली। प्रीति भड़क गईं और मामला तूल पकड़ गया। एयरपोर्ट अर्थारिटी के अधिकारी भी मौके पर पहुंच गए। बताते हैं कि प्रीति के जलवे को देखकर उनका पहचान पत्र देखे बिना ही उन्हें प्रवेश दिया गया। होना यह था कि अपने कर्तव्य पर मुस्तैदी से डटे रहने वाले जवान की पीठ थपथपनी चाहिए थी, किन्तु एसा कुछ हुआ नहीं इन परिस्थितियों में जवानों का हौसला पस्त होना स्वाभाविक ही है।

 

पुच्छल तारा

भारत गणराज्य में घपले घोटाले भ्रष्टाचार की गूंज जमकर हो रही है। टूजी ममाले में शरद पवार का नाम आने से और गड़बड़ हो गई। कानपुर से मोनू कुमार अर्गल ने ईमेल भेजा है। मोनू लिखते हैं कि दो उमरदराज नेता आपस में बात कर रहे थे। पहला बोला यार हद ही हो गई। दूसरे ने पूछा क्या हद हुई भाई मेरे। पहला बोला लो शरद पवार का नाम संचार मंत्रालय के टूजी घोटाले में आ गया। दूसरे ने कहा तो इसमें क्या अलग है। सभी घोटाले में लिप्त हैं। पहला बोला यार हद यह हुई कि हमारे जमाने में मंत्री खुद के मंत्रालयों में घोटाला करने तक ही सीमित हुआ करते थे। यह तो सरासर अतिक्रमण है।

Leave a Reply

3 Comments on "ये है दिल्ली मेरी जान"

Notify of
avatar
Sort by:   newest | oldest | most voted
NK Thakur
Guest

बहुत सुन्दर लेख …. बधाई स्वीकार करे ….

ajay atri
Guest

Ruling politicians say that our country is going forward.All the ruling party,planning commission,corporate houses e.t.c. are concerned about GDP.While 95%Indian does not know what it is.Most of them start believing it when even the International Media says so.

अतुल तारे
Guest

respected sir,
your article is really good. congratulation.

wpDiscuz