लेखक परिचय

लिमटी खरे

लिमटी खरे

हमने मध्य प्रदेश के सिवनी जैसे छोटे जिले से निकलकर न जाने कितने शहरो की खाक छानने के बाद दिल्ली जैसे समंदर में गोते लगाने आरंभ किए हैं। हमने पत्रकारिता 1983 से आरंभ की, न जाने कितने पड़ाव देखने के उपरांत आज दिल्ली को अपना बसेरा बनाए हुए हैं। देश भर के न जाने कितने अखबारों, पत्रिकाओं, राजनेताओं की नौकरी करने के बाद अब फ्री लांसर पत्रकार के तौर पर जीवन यापन कर रहे हैं। हमारा अब तक का जीवन यायावर की भांति ही बीता है। पत्रकारिता को हमने पेशा बनाया है, किन्तु वर्तमान समय में पत्रकारिता के हालात पर रोना ही आता है। आज पत्रकारिता सेठ साहूकारों की लौंडी बनकर रह गई है। हमें इसे मुक्त कराना ही होगा, वरना आजाद हिन्दुस्तान में प्रजातंत्र का यह चौथा स्तंभ धराशायी होने में वक्त नहीं लगेगा. . . .

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-लिमटी खरे

कांग्रेस में सबसे बड़ा कद है राहुल का

सियासी दल चाहे कांग्रेस हो या भाजपा, कांग्रेस की नजर में भविष्य के प्रधानमंत्री राहुल गांधी का कद सबसे बड़ा हो गया है। इस तरह की चर्चाएं कांग्रेस के दूसरी पंक्ति के सियासतदारों के बीच चल पड़ी हैं। संसदीय सौंध में इन दिनों ओबामा की भारत यात्रा के दौरान हुए मजेदार वाक्ये को चटखारे लेकर परोसा जा रहा है। हुआ दरअसल यह कि दुनिया के चौधरी अमेरिका के महामहिम राष्ट्रपति बराक ओबामा के भारत दौरे के दरम्यान उन्हें संसद के सेंट्रल हाल में उन्हें भाषण देना था। इस समय डॉ.मुरली मनोहर जोशी, जयंती नटराजन और टी.सुब्बीरामी रेड्डी एक कतार में ही विराजमान थे। इसी बीच रेड्डी को संभवत: लगा कि वे वहां बैठकर ओबामा से हाथ नहीं मिला पाएंगे, सो अपनी इस सीट को ताकने की गुजारिश उन्होंने जोशी और नटराजन से की और अन्यत्र सीट की तलाश में निकल पड़े। इसी बीच कुछ नेताओं ने खाली सीट को कब्जाना चाहा, किन्तु मुरली मनोहर जोशी और जयंती नटराजन ने उन्हें बता दिया कि वह रेड्डी के लिए रखी हुई है। अचानक ही राहुल गांधी वहां आए और सीट खाली देखकर उस पर बैठ गए। राहुल को मना करने की हिम्मत नटराजन तो नहीं जुटा सकीं पर जोशी की खामोशी भी काफी कुछ कह गई। बात यहीं समाप्त नहीं हो रही है, लोग यह कहने से भी नहीं चूक रहे हैं कि अगर पीएम की कुर्सी पर राहुल धोखे से बैठ गए तो सरदार जी की अनिवार्य सेवानिवृत्ति तय है।

तुरूप कार्ड छूने पर नाराज हुई कांग्रेस

कांग्रेस की राजमाता श्रीमति सोनिया गांधी के उपर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व प्रमुख के.एस.सुदर्शन के अमेरिकन गुप्तचर एजेंसी सीआईए के एजेंट होने के हमले के उपरांत कांग्रेस की बासी कढी में उबाल सा आ गया है। कांग्रेस इस बात का मातम मना रही है कि संघ के पूर्व सुप्रीमो ने आखिर ऐसा संगीन आरोप क्यों लगाया? उधर सोनिया गांधी के करीबी कांग्रेसियों से खार खाए कांग्रेस के कुछ सरमायादारों ने इस तरह के आरोपों को हवा देना आरंभ कर दिया है। हालात देखकर यह लगने लगा है कि संघ अब बैकफुट पर आ गया है। संघ ने सोनिया गांधी पर आरोप देश के हृदय प्रदेश की राजधानी भोपाल में जड़े हैं। आरोपों के उपरांत कांग्रेस महासचिव राजा दिग्विजय सिंह ने अपना विरोध दर्ज कराया। कहते हैं कि दिग्गी राजा के समर्थकों ने भोपाल के मीडिया पर्सन को बाकायदा फोन कर उन्होंने खबरों को प्रमुखता से छापने का अनुरोध किया। बाद में जब यह बात कांग्रेस के मध्य प्रदेश अध्यक्ष सुरेश पचौरी को पता चली उन्होंने भी अपना विरोध दर्ज कराया। चर्चा है कि इस सबसे बाद भी पीसीसी में खामोशी ही पसरी रही।

शिव को चुभने लगा है अब कमल!

वैसे तो भगवान शिव को बेलपत्री, धतूरा आदि भाता है, पर अगर कोई कमल उन पर चढ़ा दे तो वे नाराज नहीं होते। मध्य प्रदेश के दो क्षत्रप कमल नाथ और शिवराज सिंह चौहान के बीच लगने लगा है कि अब हनीमून पूरी तरह से समाप्त हो गया है। बार बार लुभावने वादों से केंद्रीय भूतल परिवहन मंत्री कमल नाथ ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को तबियत से ”मामा” बनाया। बाद में जब मामला शिवराज की समझ में आया तब तक काफी देर हो चुकी थी। सूत्रों के अनुसार कमल नाथ ने मध्य प्रदेश को सबसे ज्यादा रकम देने का लाईलप्पा टिकाया, बाद में असलियत सामने आई तो प्रदेश भाजपा ने कमल नाथ को घेरने का प्रयास किया। इसी बीच खजुराहो की इंवेस्टर्स मीट का न्योता देने दिल्ली गए शिवराज को एक बार फिर लोक लुभावने सपने दिखाकर कमल नाथ ने शिवराज को चारों खाने चित्त कर दिया। इस मीट में अरूण यादव को छोड़कर और कोई नहीं पहुंचा। फिर क्या था शिव का तीसरा नेत्र तो खुलना ही था। कहा जा रहा है कि इस तीसरे नेत्र पर दिल्ली में बैठे भाजपा के आला नेता ही पट्टी बांधने की तैयारी में हैं।

अरूण डाउन, सुषमा अप

दुनिया के चौधरी अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा की भारत यात्रा ने भारतीय जनता पार्टी में भी अंदरूनी सियासत जबर्दस्त गर्मा गई है। ओबामा के जाने के बाद अब भाजपा के आला नेताओं की रेंकिंग भी अघोषित तौर पर की जाने लगी है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज और राज्य सभा के अरूण जेतली के बीच भी नंबर वन की होड़ में दोनों ही के समर्थकों का मन उपर नीचे हुए बिना नहीं है। ओबामा की यात्रा में सुषमा स्वराज की टीआरपी में जबर्दस्त उछाल दर्ज किया गया है, किन्तु अरूण जेतली का ग्राफ नीचे आ गया है। ओबामा के दौरे में समयाभाव में यह तय कर पाना मुश्किल था कि सुषमा स्वराज को ओबामा से मिलवाया जाए या फिर अरूण जेतली को। अंतत: मामला स्वराज के पक्ष में फैसला हुआ। सुषमा के मिलने के बाद जेतली खेमा अपने आप को बहुत बेईज्जत महसूस करता रहा। जेतली खेमे ने सारा जोर लगा दिया। बाद में प्रधानमंत्री के भोज में जेतली को ओबामा से मिलने का अवसर मिल ही गया। अब जेतली खेमा आहत है कि उनके सरमायादार अरूण जेतली की रैंकिग सुषमा स्वराज के बाद नंबर दो पर आ गई है।

”गरीब कोटे” के कारण नए चव्हाण भी हैं संकट में

महाराष्ट्र के नए निजाम पृथ्वीराज चव्हाण पर भी अंधेरगर्दी, घोटाले की आंच आने लगी है। चव्हाण पर आरोप है कि उन्होनें बतौर सांसद अपने पद का दुरूपयोग कर आधा करोड़ मूल्य का एक फ्लेट महज चार लाख रूपए में खरीदा था। सूचना के अधिकार कार्यकर्ता ने इस बात का खुलासा करके ठहरे हुए पानी में कंकर मार दिया है। मुंबई के एक आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गाल्गली का दावा है कि देश की आर्थिक राजधानी मुंबई के वडाला क्षेत्र के भक्ति पार्क की बिल्डिंग नंबर 12 में पृथ्वीराज चव्हाण के नाम पर एक मकान है। सांसद चव्हाण को यह आवास ”गरीब कोटे” में आवंटित किया गया है। 20 मई 2003 को चव्हाण को यह फ्लेट आवंटित हुआ तब वे सांसद थे। चव्हाण द्वारा इस आवास के लिए जो दस्तावेज संलग्न किए गए थे, उसमें उनकी खुद की मासिक आय 76 हजार रूपए अर्थात नौ लाख बारह हजार रूपए सालाना और एक राशन कार्ड जो उनकी स्वर्गीय माता परमिलबाई दाजीसाहेब चव्हाण के नाम पर था, में पारिवारिक आय आठ हजार रूपए माहवार यानी लगभग एक लाख रूपए सालाना दर्शाई गई थी। कथित तौर पर बेदाग छवि के धनी समझे जाने वाले पृथ्वीराज चव्हाण ने अपने नामांकन के दौरान दायर हलफनामे में भी इस फ्लेट का जिकर करना मुनासिब नहीं समझा था। कहा जा रहा है कि खुद दागदार मुख्यमंत्री क्या निर्वतमान दागदार नेता के काले कारनामों की जांच ईमानदारी से कर पाएगा।

”राजा” को लेकर उबलने लगी है सियासत

टूजी स्पेक्ट्रम घोटाले में केंद्रीय संचार मंत्री ए.राजा के लिप्त होने के आरोपों के बाद विपक्ष ने अपनी बोथरी धार को पजाना आरंभ कर दिया है। विपक्ष चाहता है कि इस मामले में अव्वल तो राजा को हटाया जाए, फिर संयुक्त संसदीय समिति के जरिए इस पूरे घोटाले की जांच की जाए। पौने दो लाख करोड़ रूपयों के टूजी स्पेक्ट्रम घोटाले के सुर्खियों में बने रहने के बावजूद भी कांग्रेसनीत संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार के चेहरे पर शिकन भी नहीं दिख रही है। कांग्रेस अपने अधिवेशन में भ्रष्टाचार पर चर्चा न कर यही साबित कर रही है कि उसे भ्रष्टाचार और घोटालों से बहुत अधिक लेना देना नहीं है। उधर द्रमुक राजा के बचाव में आगे आ रहा है। द्रमुख ने साफ कहा है कि सीबीआई जांच के नतीजे आने तक विपक्ष को धैर्य रखना चाहिए, साथ ही यह धमकी भी दी है कि अगर राजा को हटाया तो सात मंत्री त्यागपत्र दे देंगे। अन्नाद्रमुक की जयललिता ने कांग्रेस के सामने जलेबी लटकाई है कि अगर राजा को हटाया जाता है तो वे 18 सांसदों का समर्थन जुटाकर सरकार को गिरने से बचा लेंगी। कांग्रेस के रणनीतिकार पशोपेश में हैं क्योंकि राजा को हटाकर अगर जयललिता को साधा तो जयललिता की बारगेनिंग कांग्रेस को बहुत अधिक मंहगी पड़ने वाली है।

भाजपा की ओर बढ़ रहा है एनडी का रूझान

एक समय कांग्रेस की नाक का बाल रहे नारायण दत्त तिवारी अब कांग्रेस में ही बेगाना महसूस कर रहे हैं। उमर दराज हो चुके कांग्रेस के वरिष्ठ नेता तिवारी कांग्रेस के रवैए से अपने आप को आहत महसूस कर रहे हैं। वैसे भी कांग्रेस के खेमे में यह बात गूंजने लगी है कि सालों साल कांग्रेस का झंडा मजबूत करने में जीवन गंवाने वाले कांग्रेसियों को उमर के आखिरी पड़ाव में राजनैतिक तौर पर असहाय होना पड़ रहा है। इस मामले में लोग पूर्व प्रधानमंत्री पी.व्ही.नरसिंहराव, पूर्व केंद्रीय मंत्री कुंवर अर्जुन सिंह, सुश्री विमला वर्मा, विद्याचरण शुक्ल आदि का उदहारण दे रहे हैं। इनके मौका परस्त अनुयायी और चाहने वालों ने भी दूसरे गुटों को साधने में देरी नहीं की है। बहरहाल हाल ही में उत्तराखण्ड के स्थापना दिवस पर आंध्र के पूर्व राज्यपाल एन.डी.तिवारी की मोजूदगी से इन कयासों पर बल मिला कि वे भाजपा की बांह थाम सकते हैं, किन्तु नारायण दत्त तिवारी को यह कतई नहीं भूलना चाहिए कि दूसरे दलों से भाजपा में जाने वालों की सीनियारिटी भाजपा में जीरो से ही आंकी जाती है।

राजा और पटेल में समानता!

कांग्रेस के आला नेता इन दिनों कांग्रेस के दो ताकतवर महासचिवों, राजा दिग्विजय सिंह और अहमद पटेल के बीच समानताएं खोज रहे हैं। समानता नंबर एक दोनों ही नेता कांग्रेस के सत्ता और शक्ति के शीर्ष केंद्र 10, जनपथ के सबसे करीब हैं। दो – दोनों ही नेताओं से कांग्रेस की नजर में भविष्य के प्रधानमंत्री राहुल गांधी मशविरा लिया करते हैं। तीन – कांग्रेस के आला क्षत्रप भी दोनों ही नेताओं की देहरी पर सर रगडकर अपने आप को धन्य समझते हैं। चार – दोनों ही नेताओं ने अपने अपने गुर्गों को ताकतवर बनाकर अपना साम्राज्य स्थापित कर लिया है। पांच – दोनों ही नेताओं की नजरें तिरछी होने पर कांग्रेस के आला कमान की नजरें तिरछी होने में समय नहीं लगता। छ: – दोनों ही नेताओं का सेंस ऑफ ह्यूमर गजब का है। सात – दोनों ही नेताओं ने प्रदेश से निकलकर केंद्रीय राजनीति में कम समय में ही अपने आप को स्थापित कर प्रभावशाली जगह बनाई है। कांग्रेस मुख्यालय में एक वरिष्ठ नेता ने नाम गुप्त रखने की शर्त पर कहा कि एक समानता आप भूले जा रहे हैं, जिस तरह अहमद पटेल ने गुजरात में कांग्रेस का बट्टा बिठाकर नरेंद्र मोदी को मजबूत किया है, उसी राह पर चलते हुए राजा दिग्विजय सिंह ने मध्य प्रदेश में कांग्रेस का बट्टा बिठाकर भाजपा की उन्नति के मार्ग प्रशस्त किए हैं।

चर्चा में है भूतल परिवहन मंत्रालय!

यह बात तो सच है कि मूलत: उद्योगपति राजनेता कमल नाथ जिस किसी भी विभाग में मंत्री रहे हैं, वह विभाग चर्चाओं में आ ही जाता है। वन एवं पर्यावरण मंत्री रहते हुए पृथ्वी सम्मेलन में भारत की जोरदार उपस्थिति से उन्होंने तालियां बटोरी थीं। इसके बाद पदावनत होते हुए वस्त्र मंत्रालय संभाला, तब भी उनका मंत्रालय चर्चाओं में रहा। पिछली मर्तबा वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय का प्रभार संभालते हुए उन्होंने विदेश यात्राओं का खासा रिकार्ड कायम कर दिया, किन्तु अपने संसदीय क्षेत्र छिंदवाड़ा और मध्य प्रदेश की झोली सूनी ही रखी। अब भूतल परिवहन मंत्रालय जमकर चर्चा में है। सड़क परिवहन, पर्यटन और संस्कृति मंत्रालय संबंधी संसदीय स्थाई समिति ने भूतल परिवहन मंत्रालय के अधिकारियों की सुस्त कार्यप्रणाली पर जमकर फटकार लगाई है। दरअसल मोटर वाहन अधिनियम के संशोधन को लेकर समिति ने विभाग को विरोध, शिकायतें और सुझाव भेजे थे। अधिकारियों ने इसका माकूल जवाब देना उचित नहीं समझा। समिति ने इसे अपनी तौहीन बताया है। समिति ने परिवहन सचिव को कहा है कि अब तक की गई तमाम कार्यवाही को लिखित तौर पर समिति के समक्ष पेश किया जाए।

यह है शिव के हाल में प्रजा का हाल सखे!

देश का हृदय प्रदेश कहलाता है मध्य प्रदेश। 2003 से इस प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी का कथित सुशासन और राम राज्य चल रहा है। सबसे पहले उमा भारती फिर बाबूलाल गौर और अब पिछले लगभग पांच सालों से शिवराज सिंह चौहान इस सूबे के निजाम हैं। मध्य प्रदेश में कानून और व्यवस्था की स्थिति अत्यंत जर्जर है। लूट, हत्या, मारपीट, बलवा न जाने कितने तरह के अपराध का ग्राफ तेजी से बढ़ता जा रहा है। छतरपुर में एक कैदी को पेशी पर ले जाने के दौरान सिपाही शराब पीते हैं, नशे में धुत्त सिपाहियों को चकमा देकर कैदी फरार हो जाता है। भोपाल की जिला अदालत की दीवार तोड़कर ग्यारह कैदी दिन दहाड़े भाग जाते हैं। महिलाओं के साथ बलात्कार होते हैं, प्रताडित होती रहतीं हैं, पर सुशासन होने का दावा बदस्तूर जारी है। आश्चर्य तो तब होता है, जब कांग्रेस इस मामले में मौन साधे हुए मिलती है। चर्चा है कि एम पी में कांग्रेस और भाजपा के बीच अंडर टेबिल समझौते हुए हैं। हद तो तब हो गई जब संघ के धरने के दरम्यान चाक चौबंद पुलिस व्यवस्था के बीच राजधानी भोपाल में आठ स्थानों पर महिलाओं की चेन लूट ली गई। पुलिस के अफसर भी क्या करें, उनके मातहत सिपाही सारा दिन कबाडियों के पास जाकर चोरी के माल की चौथ वसूली जो करते रहते हैं।

धक्का किसने दिया तलाश रहे हैं राजूखेड़ी

पुरानी कहानी है कि एक अखाड़े में पहलवान ताल ठोंककर लोगों को लड़ने के लिए बुला रहा था, ईनाम था एक हजार रूपए। इतने में एक जवां मर्द अखाड़े में कूद गया और उस नामी पहलवान को हराकर एक हजार रूपए ले आया। सबसे पहले उसने यह मालूमात करने की कोशिश की कि आखिर अखाड़े में उसे धक्का किसने दिया था, यह तो गनीमत थी कि वह बच गया वरना उसका राम नाम सत्य तय था। इसी तर्ज पर मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष के पद के लिए मीडिया में नाम उछलने के बाद गजेेंद्र सिंह राजूखेड़ी यह ढूंढ रहे हैं कि आखिर मीडिया में उनका नाम किसने उछाल दिया। अमूमन होता यही है कि जिसे भी कतार से हटाना होता है उसके नाम को हवा में उछाल दिया जाता है। दिल्ली में मध्य प्रदेश बीट कव्हर करने वाले मीडिया पर्सन्स के फोन बार बार राजूखेड़ी को बधाई दे रहे हैं। वे असमंजस में हैं कि अभी तक उन्हें कोई सूचना नहीं पर नाम चल पड़ा है, आखिर गोदे (अखाड़े) में उन्हें धक्का किसने दिया। उधर कांग्रेस महासचिव राजा दिग्विजय सिंह और बी.के. हरिप्रसाद ने अलग से उनका स्पष्टीकरण मांग कर उन्हें हलाकान कर रखा है।

पुच्छल तारा

देश के हृदय प्रदेश में चेन स्नेचिंग अर्थात सरे राह महिलाओं की चेन लूटने की घटनाओं से आहत हैं मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल की महिलाएं। भोपाल से मुस्कान मलिक ने इस बारे में एक ई मेल भेजा है। मुस्कान लिखती हैं कि आधुनिक बहू के कम कपड़े और अश्लीलता के दिखावे को देखकर पुराने ख्यालों वाली उसकी सास ने कहा -”बहू, क्या जमाना आ गया है, हम जब आए थे तब . . . .। वैसे लज्जा नारी का ‘आभूषण’ होता है।” बहू तपाक से बोली -”लेकिन मां जी, आजकल चेन स्नेचिंग इतनी ज्यादा हो रही है, गुण्डागर्दी चरम पर है, महिलाएं कितनी असुरक्षित हैं पता है आपको? अब आप ही बताईए कि इन हालातो में भला कोई महिला ‘आभूषण’ पहनने का साहस कर पाएगी?”

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1 Comment on "ये है दिल्ली मेरी जान"

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शैलेन्‍द्र कुमार
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शैलेन्द्र कुमार

वाह वाह धन्यवाद्

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