लेखक परिचय

लिमटी खरे

लिमटी खरे

हमने मध्य प्रदेश के सिवनी जैसे छोटे जिले से निकलकर न जाने कितने शहरो की खाक छानने के बाद दिल्ली जैसे समंदर में गोते लगाने आरंभ किए हैं। हमने पत्रकारिता 1983 से आरंभ की, न जाने कितने पड़ाव देखने के उपरांत आज दिल्ली को अपना बसेरा बनाए हुए हैं। देश भर के न जाने कितने अखबारों, पत्रिकाओं, राजनेताओं की नौकरी करने के बाद अब फ्री लांसर पत्रकार के तौर पर जीवन यापन कर रहे हैं। हमारा अब तक का जीवन यायावर की भांति ही बीता है। पत्रकारिता को हमने पेशा बनाया है, किन्तु वर्तमान समय में पत्रकारिता के हालात पर रोना ही आता है। आज पत्रकारिता सेठ साहूकारों की लौंडी बनकर रह गई है। हमें इसे मुक्त कराना ही होगा, वरना आजाद हिन्दुस्तान में प्रजातंत्र का यह चौथा स्तंभ धराशायी होने में वक्त नहीं लगेगा. . . .

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-लिमटी खरे

अभी और दिखेगा राहुल का बैचलर पावर!

कांग्रेस की नजर में देश के युवराज और भविष्य के प्रधानमंत्री राहुल गांधी बहुत जल्द परिणय सूत्र में आबद्ध नहीं हो पाएंगे, यह कहना है देश के प्रख्यात ज्योतिषियों का। देश के हृदय प्रदेश की राजधानी भोपाल में बीते दिनों हुए शैक्षणिक ज्योतिष सम्मेलन में देश भर से आए ज्योतिष के प्रकांड विद्वानों ने एक राय से इस 49 वर्ष की अवस्था में ही बन रहा है। राहुल गांधी की कुंडली में चल रहीं ग्रह दशाओं के अनुसार अनेक ग्रह राहुल गांधी को शादी के मण्डप से दूर रखे हुए हैं। कुछ ज्योतिष इस बात पर अडिग रहे कि राहुल गांधी का विवाह लगभग डेढ वर्ष तक तो कतई संभव नहीं है। इसके उपरांत के साढे सात साल फिर राहुल गांधी शादी के मण्डप से दूर ही रहेंगे। ज्योतिषियों की मानें तो राहुल बाबा की कुंडली में बनने वाले ”पात करकरी योग” के चलते कांग्रेस की नजर में देश के प्रधानमंत्री की शादी में विलंब प्रतीत हो रहा है। अगर ज्योतिषाचार्य सही फरमा रहे हैं, और वे प्रधानमंत्री बनते हैं तो कांग्रेस के युवराज पहले कांग्रेसी प्रधानमंत्री होंगे जो अविवाहित अवस्था में वजीरे आजम बने हों। वैसे अटल बिहारी बाजपेयी भी अविवाहित ही प्रधानमंत्री बनने का गौरव पा चुके हैं।

7 रेसकोर्स की ओर बढते दिग्विजयी कदम

अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सबसे ताकतवर महासचिव दिग्विजय सिंह ने एक बार फिर परोक्ष तौर पर इशारा करने का प्रयास किया है कि उनकी दिलचस्पी अब देश के हृदय प्रदेश अर्थात मध्य प्रदेश में राजनीति में लौटने की नहीं है, वे अब 7 रेसकोर्स रोड (प्रधानमंत्री का सरकारी आवास) को अपना आशियाना बनाने में ज्यादा दिलचस्पी रखते हैं। मध्य प्रदेश में दस साल लगातार राज करने वाले राजा दिग्विजय सिंह का कहना है कि वे अब प्रदेश के बजाए केंद्र की राजनीति में ज्यादा इच्छुक हैं। बकौल 2014 में होने वाले आम चुनावों में किस्मत आजमाने में ज्यादा 2003 में सत्ता के गलियारे से बाहर फेंक दिए जाने के पूर्व उन्होंने कौल लिया था कि अगर कांग्रेस मध्य प्रदेश में सत्ता में नही आई तो वे दस साल तक के लिए सक्रिय राजनीति से सन्यास ले लेंगे। 2013 में पूरा होने वाला है। अब तक नपे तुले सधे कदमों से चलने वाले राजा दिग्विजय सिंह ने कांग्र्रेस के सत्ता और शक्ति के 10 जनपथ और राहुल गांधी के दरबार में दमदार भूमिका बना ली है।

आखिर ममता के बचाव में क्यों आगे आए प्रणव?

डॉ.मनमोहन सिंह की दूसरी पारी का एक साल पूरा हो चुका है। इस बार रेल विभाग का दारोमदार स्वयंभू प्रबंधन गुरू लालू प्रसाद यादव के बजाए त्रणमूल की सुप्रीमो ममता बनर्जी के कांधों पर है। ममता बनर्जी का पूरा ध्यान रेल के बजाए पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनावों पर है। सारा देश चीख चीख कर इस ओर इशारा कर रहा है, पर देश पर आधी सदी से ज्यादा राज करने वाली कांग्रेस है कि आंखों पर पट्टी बांधे बैठी है। ममता के कार्यकाल में रेल गाडियां आपस में इस कदर टकरा रहीं हैं, मानो किसी सिनेमा में दुर्घटनाओं को फिल्माया जा रहा हो। हाल ही में पश्चिम बंगाल के सैंथिया में हुई रेल दुर्घटना के बाद कांग्रेस के तारणहार समझे जाने वाले पश्चिम बंगाल मूल के केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने ममता के पक्ष में बयान देकर सभी को चौंका दिया। लोग हतप्रभ इसलिए हैं, क्योंकि पश्चिम बंगाल पर कांग्रेस भी निशाना साधे बैठी है। प्रणव दा ने इस बात को सिरे से नकार दिया कि देश को एक पूर्णकालिक रेल मंत्री की दरकार है। माना जा रहा है कि कांग्रेस पश्चिम बंगाल के चुनावों तक त्रणमूल सुप्रीमो ममता को छेडने के मूड में नहीं दिख रही है।

काम न आई पीएम की लंच डिप्लोमेसी

भारत गणराज्य की राजनीति में लंच या डिनर डिप्लोमेसी का अपना महत्व है। अपने प्रतिद्वंदी दलों के सदस्यों को लंच या डिनर पर बुलाकर उनके कान फूंककर काम निकालने के अनेक उदहारण मौजूद हैं, पर लगता है कि भारतीय जनता पार्टी द्वारा कांग्रेसनीत संप्रग सरकार के प्रधानमंत्री डॉ.मनमोहन सिंह के दोपहर के भोज को ठुकराकर नई इबारत लिखी है। भारत गणराज्य के इतिहास में एसे उदहारण कम ही होंगे जब देश के वजीरेआजम को अपना दोपहर का भोज मेहमानों के न आने के चलते निरस्त करना पडा हो। गुजरात के गृह राज्य मंत्री अतिम शाह के मामले में केंद्र सरकार पर सीबीआई के दुरूपयोग के आरोप लगाती आ रही है भाजपा। कांग्रेस इस बात को भली भांति समझ भी रही है। मानसून सत्र के पहले प्रधानमंत्री ने भाजपा के तीन नेताओं एल.के.आडवाणी, सुषमा स्वराज और अरूण जेतली को दोपहर के भोज पर बुलवाया। शीर्ष स्तर के तीनों भाजपाई नेताओं ने पीएम के बुलावे का बहिष्कार कर दिया और फिर क्या था, मेजबान मनमोहन सिंह को भोज निरस्त कर अकेले ही भोजन करना पडा।

क्या गुल खिलाएगा अर्जुन का जहर बुझा तीर

बीसवीं सदी के अंतिम दशकों में कांग्रेस के चाणक्य की अघोषित उपाधि से नवाजे गए कुंवर अर्जुन सिंह के दुर्दिन अब शायद छटने वाले ही हैं। प्रधानमंत्री डॉ.मनमोहन सिंह ने उन्हें अपनी दूसरी पारी में मंत्रीमण्डल से बाहर का रास्ता दिखाया है। सदा चर्चा में रहने वाले अर्जुन सिंह एक साल से अधिक समय से राजनैतिक वनवास भोग रहे हैं। उनके प्रबल भाग्य ने एक बार फिर जोर मारा और उनके हाथ भोपाल गैस कांड में तुरूप का इक्का लग गया। जब यह कांड हुआ तब वे मुख्यमंत्री थे और राजीव गांधी की सरकार के कथित इशारे या आदेश के चलते यूनियन कार्बाईड प्रमुख एण्डरसन को पूरी शानो शौकत से देश से विदा कर दिया गया था। राज्य सभा में अर्जुन के बयान का इंतजार सभी को है। राजीव गांधी के समय मंत्रीमण्डल सदस्य रहे प्रणव मुखर्जी और राजीव गांधी के बीच बाद में संबंधों में जबर्दस्त खटास आ गई थी। यह अलहदा बात है कि वर्तमान में प्रणव दा कांग्रेस के तारणहार की भूमिका में हैं। प्रणव दा और अर्जुन सिंह के बीच चर्चा के दौर हो चुके हैं, पर कहा जा रहा है कि राजीव गांधी से खार खाए प्रणव मुखर्जी ने अर्जुन सिंह को राजीव गांधी सरकार को बचाने के लिए कुछ भी गुजारिश नहीं की है।

तीन साल में ले लो न्याय!

भारत गणराज्य में न्याय के नाम पर मुवक्किल के हिस्से में कोर्ट कचहरी की चौखट को ही घिसना आता है। साल दर साल चलने वाले मुकदमों से देश की जनता आजिज आ चुकी है। वालीवुड के अनेक चलचित्रों में तारीख पर तारीख के डायलाग भी चीख चीख कर सुनाए गए पर शासकों के कान में जूं तक नहीं रेंगी। अब 2021 तक देश में एक हजार अतिरिक्त अदालतों का गठन किया जाना प्रस्तावित है, इसके लिए पंद्रह हजार करोड रूपयों का अतिरिक्त भार आने का अनुमान लगाया गया है। यह अतिरिक्त भार आज के हिसाब से जोडा गया है। ग्यारह साल की अवधि के साथ ही यह कितने गुना बढ जाएगा इसका अनुमान वर्तमान में लगाना बहुत ही दुष्कर है। विडम्बना तो इस बात की है कि न्यायालयों के समय को बढाने के बाद भी तारीख पर तारीख का आलम आज भी बदस्तूर जारी है। पहले सरकार ने ठेके पर न्यायधीशों को रखने की बात कही थी। आज आवश्यक्ता इस बात की है कि न्याय व्यवस्था में अमूल चूल परिवर्तन लाया जाए ताकि लोगों को त्वरित न्याय मिल सके।

गौर निकले काबिले गौर!

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान नगरीय प्रशासन और विकास मंत्री बाबू लाल गौर एक अनूठे मंत्री हैं, यह बात पिछले दिनों ही सामने आई है। गौर को डायरी लिखने का बहुत शौक है। वे अपने दैनिक कार्यों में मुलाकात करने वालों के नाम और उनसे हुई चर्चा को भी अपनी डायरी में स्थान देते हैं। पोखरण विस्फोट की बात उजागर करते हुए गौर ने मीडिया में खुलासा किया था कि पूर्व प्रधानमंत्री नरसिंहराव ने तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी को एक पुर्जा थमाया था जिसमें लिखा था कि वे अर्थात नरसिंहराव तो विस्फोट नहीं कर सके, तुम अर्थात अटल पोखरण में विस्फोट अवश्य करना। भाजपा में उमा भारती की पुर्नवापसी के घुर विरोधी क्यों बने गौर? इस बात का खुलासा भी इसी तरह 2003 के चुनावों में उमा भारती के विरोध के चलते गौर की टिकिट संकट में पड गई थी। बाद में अटल बिहारी बाजपेयी के हस्ताक्षेप से उनकी टिकिट वापस उन्हें मिल सकी।

विकास के पैसों का खेल

भारत में सुबह उठकर रात के सोने तक देश का प्रत्येक नागरिक हर एक बात के लिए प्रत्यक्ष या परोक्ष तौर पर कर देता है। यह कर की राशि से ही देश में राज काज चलता है। इसी टेक्स से देश में विकास की योजनाएं संचालित होती हैं। करों से प्राप्त होने वाले राजस्व को विभिन्न मदों में बांटकर केंद्र सरकार खुद के लिए और राज्यों को आवंटित करती है। दिल्ली की कांग्रेस की सरकार ने विकास के लिए आए पैसे को कामन वेल्थ गेम्स की मद में खर्च कर नया चमत्कार किया है। अनुसूचित जाति की मद में आई लगभग आठ सौ करोड रूपए की राशि को राष्ट्रमण्डल खेलों के लिए निकाल कर खर्च कर दिया है, शीला दीक्षित के नेतृत्व वाली सरकार ने। केंद्र सरकार द्वारा कामन वेल्थ गेम्स के लिए पर्याप्त मात्रा में धनराशि देने के बावजूद भी शीला दीक्षित को पता नहीं कौन सी जरूरत आन पडी कि उन्होंने इस मद के लिए अतिरिक्त राशि वह भी अनुसूचित जाति के मद से आहरित कर ली।

फर्जी शस्त्र लाईसेंस का गढ बना हिमाचल

देश भर में हथियारों के प्रयोग का चलन तेजी से बढा है। हथियार अवैध हैं या वैध यह कहा नहीं जा सकता है। अवैध हथियारों के जखीरों को जब तब बरामद किया जाता रहा है। अवैध हथियार का लाईसेंस भी बन जाता है, यह है भारत गणराज्य की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था। भारत गणराज्य के हिमाचल प्रदेश को देवभूमि के नाम से जाना जाता है। हिमाचल प्रदेश में फर्जी शस्त्र लाईसेंस बनाने का भाण्डाफोड किया है हरियाणा पुलिस ने। फरीदाबाद पुलिस ने हिमाचल प्रदेश से फर्जी शस्त्र लाईसेंस लाकर बनाकर बेचने का मामला पकडा है। इस मामले में तफ्तीश जारी है। एक संदिग्ध आरोपी के पास से हिमाचल के धर्मशाला की सील लगा लाईसेंस पकडा है। इस तरह के अनेक मामले हरियाणा पुलिस अगर पकड ले तो किसी को आश्चर्य नहीं होना चाहिए। देश की राजनैतिक राजधानी दिल्ली से सटे फरीदाबाद और हरियाणा के अन्य कस्बों में इन दिनों शस्त्रों का चलन काफी हद तक अधिक बताया जा रहा है।

पांच करोड रूपए में लगा एक उद्योग

देश के हृदय प्रदेश में मुख्यमंत्री बार बार मध्य प्रदेश के नागरिकों के गाढे खून पसीने की कमाई को हवा में उडाते जा रहे हैं, और उसका लाभ न तो प्रदेश की जनता को ही मिल पा रहा है, और न ही उस राशि का सही उपयोग हो पा रहा है। यह बात कोई और नहीं मध्य प्रदेश के उद्योग मंत्री तथा मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के घुर विरोधी कैलाश विजयवर्गीय कह रहे हैं। विजयवर्गीय ने कांग्रेस के विधायक डॉ.गोविंद सिंह के एक प्रश्न के जवाब में साफ किया है कि मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री बाबू लाल गौर और 2010 तक अमेरिका, संयुक्त अरब अमीरात, सिंगापुर, मलेशिया, बेल्जियम, हालेंड, इटली, जर्मनी आदि देशों का दौरा किया है। इस पर लगभग पांच करोड रूपए स्वाहा हो चुके हैं। विदेशों के ये दौरे वहां के निवेशकों को आकर्षित करने की गरज से किए गए थे, किन्तु 20 एमओयू हस्ताक्षरित होने के बाद अमल में आए महज पांच ही। मजे की बात तो यह है कि इनमें से इकलौता उद्योग पीथमपुर में कापरो इंजीनियरिंग इंडिया के नाम से ही स्थापित हो सका है।

फिर निकला फोरलेन का जिन्न

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी के कार्यकाल की महात्वाकांक्षी योजना स्वर्णिम चतुर्भुज के अंग उत्तर दक्षिण गलियारे में मध्य प्रदेश के सिवनी जिले के साथ अन्याय होने की बात यहां की जनता चीख चीख कर कह रही है। केंद्रीय भूतल परिवहन मंत्री कमल नाथ और वन एवं पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश के बीच छिडी रार के चलते इसका काम रूका हुआ बताया 21 अगस्त को सिवनी जिले की जनता ने एतिहासिक जनता कर्फ्यू लगाया था। इस दौरान कमल नाथ की न केवल सांकेतिक शवयात्रा निकाली गई थी, वरन उनके पुतले भी बडी तादाद में जलाए गए थे। सिवनी के साथ अन्याय का सिलसिला जारी है। पहले बिना किसी प्रस्ताव के सिवनी लोकसभा को विलोपित कर दिया गया। इसके उपरांत अब स्वीकृत और निर्माणाधीन उत्तर दक्षिण गलियारे के नक्शे से सिवनी का नाम विलोपित करने का कुत्सित प्रयास किया जा रहा है। सिवनी जिले से सटा है कमल नाथ का संसदीय क्षेत्र छिंदवाडा। माना जा रहा है कि अपने आशियाने अर्थात संसदीय क्षेत्र को हर तरह से संपन्न बनाने की गरज से कमल नाथ द्वारा सिवनी के मुंह से निवाला छीना जा रहा है।

पुच्छल तारा

मानसून की फुहार के साथ ही साथ दिल्ली में अघोषित बिजली कटौती पर एसएमएस की बौछार सी होने लगी है। दिल्ली के लक्ष्मी नगर इलाके से विनोद कुमार एसएमएस भेजते हैं कि दिल्ली में पावर कट ने लोगों का जीना मुहाल कर रखा है। एक 48 घंटे तक फसा रहा, क्योंकि वह एस्केलेटर (बिजली द्वारा स्वचलित सीढियां) पर से उपर चढ रहा था। पावर कट से एस्केलेटर बंद हो गया और बेचारे वे दो दिन तक लाईट आने का इंतजार करते रह गए।

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1 Comment on "ये है दिल्ली मेरी जान"

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श्रीराम तिवारी
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दिल्ली राहुल बाबा .दिग्गी राजा पुनर्वास .ममता पे प्रणव की ममता .देश के राष्ट्र्यीय राजमार्ग .और ह्रदय प्रदेश .मद्ध्यप्रदेश में उमा पर गौर की राजनेतिक जिज्ञाशाओं पर गौर करते हमारे खरे जी लेखनी पर भी खरे उतरे .बधाई .सूचनापरक आलेख .को प्रस्तुत करने की .

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