लेखक परिचय

प्रवक्‍ता ब्यूरो

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बीसवीं सदी में देश प्रदेश की राजनीति में धूमकेतु की तरह उभरे कांग्रेस के चाणक्य कुंवर अर्जुन सिंह की स्थिति उनके ही चेलों ने बहुत जर्जर करके रख दी है। कल तक जिस राजनैतिक बियावन में अर्जुन सिंह ने गुरू द्रोणाचार्य की भूमिका में आकर अपने अर्जुन रूपी शिष्यों को तलवार चलाना सिखाया उन्ही अर्जुनों ने कुंवर साहेब के आसक्त होते ही तलवारें उनके सीने पर तान दी। कुंवर अर्जुन सिंह के लिए सबसे बडा झटका तब लगा जब इस बार उन्हें केंद्रीय मंत्रीमण्डल में शामिल नहीं किया गया। अब कुंवर साहेब के सरकारी आवास के छिनने की भी बारी आने वाली है। इस साल मई में उनका राज्यसभा का कार्यकाल पूरा होने वाला है। कुंवर साहेब को दुबारा राज्य सभा में नहीं भेजा जाएगा इस तरह के साफ संकेत कांग्रेस के सत्ता और शक्ति के शीर्ष केंद्र सोनिया गांधी के आवास दस जनपथ ने दिए हैं। सूत्रों का कहना है कि अर्जुन सिंह के शिष्य दिग्विजय सिंह को अर्जुन सिंह के स्थानापन्न कराने की योजना बनाई जा रही है। यद्यपि दिग्गी राजा ने दस साल तक कोई चुनाव न लेने का कौल लिया है, पर अगर आलाकमान का दबाव होगा तो वे राजी हो सकते हैं। इसके अलावा मध्य प्रदेश में कांग्रेसाध्यक्ष सुरेश पचौरी को पांचवीं मर्तबा पिछले दरवाजे अर्थात राज्य सभा से भेजा जा सकता है, इतना ही नहीं सूबे की नेता प्रतिपक्ष जमुना देवी का नाम भी राज्यसभा के लिए लिया जा रहा है। वैसे केंद्र में बैठे प्रतिरक्षा मंत्री ए.के.अंटोनी,, उद्योग मंत्री आनंद शर्मा, खेल मंत्री एम.एस.गिल, वन एवं पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश और सबसे खराब परफार्मेंस वालीं अंबिका सोनी भी इस साल राज्यसभा से रिटायर हो रहीं हैं, अत: उनके पुनर्वास के लिए अर्जुन सिंह के स्थान पर इनमें से किसी एक को पुन: राज्यसभा में भेजा जा सकता है।

अंधेरे की जद में है चालीस फीसदी शाईनिंग इंडिया

भारत में सियासी दल कभी शाईनिंग इंडिया तो कभी भारत निर्माण का नाम लेते हैं, पर जमीनी हालातों के बारे में जानकारी के लिए किसी भी जनसेवक ने कभी पहल नहीं की है। असली भारत गांव में बसता है, यह बात उतनी ही सच है जितनी कि दिन और रात। बावजूद इसके गांव की ओर रूख करने में न जाने जनसेवकों को पसीना क्यों आ जाता है। ग्रीन पीस की स्टिल वेटिंग रिपोर्ट जाहिर करती है कि ग्रिड आधारित वर्तमान विद्युत प्रणाली में सरकारी असमानता के चलते आजादी के 62 सालों के बाद भी आज देश के चालीस फीसदी गांवों में बिजली किसे कहते हैं, इस बात से ग्रामीण अनिभिज्ञ ही हैं। बिजली उत्पदान में लगातार बढोत्तरी और कार्बन उत्सर्जन के बावजूद भी ग्रामीण इलाकों के चालीस फीसदी घरों में लोग अब भी अंधेरे में रहने को मजबूर हैं। यह आलम तब है जबकि पिछले दो दशकों में बिजली का उत्पादन 162 फीसदी बढा है। जनसेवकों के घर अगर गांव में भी हैं तो उन्होंने अपनी सुविधा के हिसाब से ट्रसफार्मर, इन्वर्टर या जनरेटर की व्यवस्था की हुई है, सच ही है उन्हें जनादेश देने वाली जनता की सुध उन्हें पांच साल बाद ही आएगी न।

कहां है एनआईए का कार्यालय

देश की आर्थिक राजधानी मुंबई पर अब तक के सबसे बडे आतंकी हमले के बाद केंद्र सरकार द्वारा गठित राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) का गठन कर केद्र और राज्य सरकारों के बीच बेहतर तालमेल बनाने का प्रयास किया जा रहा हो, पर कोई नहीं जानता है कि इसका प्रधान कार्यालय (हेड आफिस) कहां है। बताते हैं कि केंद्र सरकार द्वारा अब तक एनआईए को कार्यालय खोलने के लिए जगह तक मुहैया नहीं कराई गई है। नार्थ ब्लाक स्थित गृह मंत्रालय से अपना कामकाज आरंभ करने वाला एनआईए पिछले दिनों तक एनआईए दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास सेंतूर होटल के 13 कमरों को किराए पर लेकर काम कर रहा था, जिसे आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा रिक्त किया गया था। बताते हैं कि इसके लिए सीबीआई के वर्तमान कार्यालय को आवंटित करने का प्रस्ताव है। गौरतलब है कि नकली नोट और पूर्वोत्तर के आतंकवाद के आरंभिक हमलो की जांच में एनआईए ने जबर्दस्त सफलता हासिल भी की थी।

शायद ही लौटें साईबेरियन बगुले

साईबेरियन क्रेन अर्थात साईबेरियन बगुलों को अब हिन्दुस्तान की आबोहवा रास नहीं आ रही है। पिछले लगभग एक दशक से इन बगुलों ने हिन्दुस्तान की ओर रूख नहीं किया है, जो पर्यटकों के लिए बुरी खबर हो सकती है। गौरतलब है कि साईबेरियन बगुले राजस्थान के भरतपुर स्थित केवलादेव पक्षी अभ्यरण में आया करते थे। इसके अलावा समूचे भारत में इन बगुलों को 2001 के उपरांत नहीं देखा गया है। भारत में इन बगुलों को संरक्षित पक्षी का दर्जा भी प्राप्त है। एक युवा साईबेरियन बगुले की उंचाई 91 इंच और वजन लगभग 10 किलो तक हो सकता है। भारत का रास्ता भूलने के दो कारण ही समझ में आ रहे हैं, अव्वल तो शिकारी की गिध्द नजर इन पर सदा ही रहा करतीं हैं, दूसरे 2001 में अफगानिस्तान में अमेरिकी फौजों द्वारा की गई अंधाधुंध गोलीबारी और बमबारी ने इन बगुलों को रास्ता बदलने पर मजबूर कर दिया था, यही कारण है कि 2001 के बाद इन बगुलों ने भारत की ओर रूख नहीं किया है।

यह है महामहिम आवास का हाल सखे

देश के पहले नागरिक का आवास कहलाता है रायसीना हिल्प पर सीना ताने खडा महामहिम राष्ट्रपति का सरकारी आवास। इस आवास की सुरक्षा चोबीसों घंटे संगीनों के साए में होती है, बावजूद इसके अगर यहां चोरी हो जाए तो क्या कहा जाएगा, देश के आखिरी आदमी की सुरक्षा के बारे में कैसे चिंता की जा सकेगी। महामहिम के आवास में पिछले साल तीन सितंबर को चोरी की वारदात हुई थी। हेल्थ सेंटर से तीन डंबल, कंप्यूटर सहित कुछ सामान चोरी हुआ था। इसकी एफआईआर बाकायदा चाणक्यपुरी के थाने में दर्ज है। देश के पहले नागरिक के सराकरी आवास जहां परिंदा भी पर नहीं मार सकता वहां से कोई सामान चोरी हो जाए तो इसे आंख से काजल चुराना ही कहेंगे, और आप ही फैसला करें कि छ: महीने बीतने के बाद भी कोई सुराग न लगे तो फिर ”आपकी सुरक्षा में सदा आपके साथ”’ का दावा करने वाली दिल्ली पुलिस को क्या कहा जाए। सच ही है जब पूरे कुंए में ही भांग घुली हुई है तो फिर अंजाम . . . .।

पेपर की बचत का नायाब आईडिया

सदी के महानायक अमिताभ बच्चन के बेटे अभिषेक बच्चन देश की एक जानी मानी सेलुलर कंपनी ”आईडिया” के विज्ञापनों में जब तब नजर आ ही जाते हैं। कभी आदमी को नाम के बजाए नंबर से पहचानने में तो कभी कुछ और। हाल ही में अभिषेक आईडिया के पेपर बचाओ अभियान में नजर आ रहे हैं। एक बरगद के झाड बने अभिषेक कागज बचाने का संदेश देते नजर आते हैं विज्ञापनों में। पहले आरपीजी फिर टाटा, बिरला, एटीएण्डटी जिसे लोग बटाटा भी कहते थे हुआ करती थी आईडिया कंपनी। मजे की बात तो यह है कि कागज बचाने के लिए पेड न काटने का संदेश देने वाली बटाटा यानी आईडिया कंपनी के जितने भी रिचार्ज बाउचर आते हैं वे सब पेपर पर ही आते हैं। है न मजे की बात कि एक तरफ पेपर बचाने की दुहाई और दूसरी तरफ पेपर की जबर्दस्त बरबादी। रिचार्ज कराने के उपरांत वह कागज किस काम का रहता है। इसके अलावा आईडिया सहित सभी सेलुलर कंपनियों के विज्ञापनों में कागज और फ्लेक्स का जिस कदर इस्तेमाल किया जाता है, वह भी किसी से छिपा नहीं है। इन सबे उपयोग के बाद क्या रह जाती है इनकी अहमियत। जाहिर है उसे कचरे में ही फेंक दिया जाता है। फिर काहे की पेड या कागज बचाने की मुहिम।

मोदी फिर हुए ताकतवर

भाजपा के नए निजाम नितिन गडकरी के दरबार में हाजिरी न लगाने के लिए चर्चित रहे गुजरात के निजाम नरेंद्र मोदी का कद कम नहीं हुआ है। आज भी वे उतने ही ताकतवर हैं, जितने कि पहले हुआ करते थे, या यह कहा जाए कि मोदी का कद बढा है, अतिश्योक्ति नहीं होगा। गडकरी द्वारा आश्चर्यजनक रूप से अडवाणी की जगह अब मोदी को प्रधानमंत्री पद का असली दावेदार बताकर सभी को चौंका दिया है। एक निजी चेनल को दिए साक्षात्कार में गडकरी ने यह कहकर थमे पानी में कंकर मार दिया है कि भले ही प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार का फैसला संसदीय बोर्ड करेगा पर उनकी नजर में मोदी ही सबसे उपयुक्त उम्मीदवार हैं। जानकारों का कहना है कि मोदी की प्रशंसा कर गडकरी ने एक तीर से अनेक शिकार कर डाले हैं। सबसे पहले तो वे उमर दराज आडवाणी को किनारे करना चाह रहे हैं, फिर राहुल गांधी की काट युवा को आगे लाने का प्रयास कर रहे हैं, ताकि उनके कार्यकाल में कम से कम एक बार तो केंद्र में भाजपा सत्तारूढ हो जाए। कुछ लोगों का कहना है कि मोदी ने गडकरी को अंदर ही अंदर इतना पस्त कर दिया है कि अब गडकरी बिना मोदी एक कदम भी चलने की स्थिति में नहीं रह गए हैं। भले ही सुषमा स्वराज मोदी को पीछे कर शिवराज सिंह चौहान को आगे बढाना चाह रहीं हों पर मोदी इस सब पर भारी पडते ही दिख रहे हैं।

गोमाता की जय हो, पर क्या हुआ शीला जी . . .!

गाय हमारी माता है, इसकी सेवा करना चाहिए, यह बात सवा सौ साल पुरानी कांग्रेस ने अनेक बार कही है। यही नहीं कांग्रेस का चुनाव चिन्ह भी एक समय में गाय और बछडा हुआ करता था। इस बात को अभी तीस साल से ज्यादा समय नहीं बीता है, किन्तु कांग्रेस की ही दिल्ली सरकार की निजाम शीला दीक्षित इस सबको शायद भूल चुकी हैं। कामन वेल्थ गेम्स के दौरान विदेशी महमानों को खुश करने और उनकी क्षुदा शांत करने के लिए दिल्ली सरकार ने निर्णय लिया है कि विदेशी मेहमानों के खाने के मेन्यू में पांच सितारा होटलों में गौ मांस को परोसा जाएगा। यह बात तब सामने आई जब राष्ट्रवादी सेना ने इसके विरोध में आंदोलन छेडने का निर्णय लिया। सेना के पार्टी प्रमुख जयभगवान गोयल का कहना है कि कामन वेल्थ गेम्स के दौरान विदेशी मेहमानों की आवभगत में गोमांस परोसने के दिल्ली सरकार के निर्णय ने हिन्दु धर्मावलंबियों की भावनाओं को आहत किया है, अत: इसके खिलाफ आंदोलन छेडा जाएगा। वाह री कांग्रेस, आखिर क्यों न करे वो एसा सवा सौ साल पुरानी कांग्रेस की बागडोर इतालवी मूल की सोनिया गांधी के हाथ जो है, जिनकी गोमाता के प्रति संवेदना समझी जा सकती है।

और मंत्री ने खुद ही मांग ली चौथ!

नेता, मंत्री, विधायक, सांसद या कोई भी जनसेवक हो, आम जनता भली भांति जानती है कि वो कितना पाक साफ होता है, और जबरिया वूसली में कितना उस्ताद होता है। दिल्ली के तुगलक रोड थोन में एक मामला दर्ज कराया गया है, जिसमें केंद्रीय मंत्री के नाम से जबरिया वसूली की शिकायत दर्ज की गई है। केंद्रीय खाद्य एवं प्रसंस्करण मंत्री सुबोध कांत सहाय के नाम से किसी ने जमकर चौथ वसूली है। कहा तो यहां तक जा रहा है कि सहाय की आवाज में उक्त ठग ने लोगों को जमकर चूना लगाया है। ठगी का शिकार हुए एक व्यक्ति ने नाम गुप्त रखने की शर्त पर कहा कि वह आवाज जिसके माध्यम से पैसा मांगा गया था, वह सुबोध कांत सहाय की ही थी, इसमें कोई शक नहीं है। कहते हैं कि उक्त ठग द्वार दस से साठ हजार रूपए तक की राशि अपने आईसीआईसीआई के बैंक एकाउंट मे जमा करवाई जाती थी। अब ठगी के शिकार अनेक लोग पोल खुलने के डर से किसी से कुछ भी कहने की स्थिति में नहीं हैं।

स्वागत योग्य है शिवराज का सुझाव

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मांग की है कि एक हजार और पांच सौ के नोट का प्रचलन बंद होना चहिए। चौहान का कहना है कि इससे देश में नकली नोटों का प्रचलन कम हो सकेगा। वैसे चौहान के सुझाव में दम है, क्योंकि सौ, पचास, या दस बीस के नोट को छापने में किसी को कोई ज्यादा लाभ नहीं होगा, इसलिए नकली नोटों का चलन वैसे भी कम ही हो जाएगा। इसके साथ ही साथ भ्रष्टाचार पर भी अंकुश लगने की उम्मीद है। अगर देखा जाए तो देश के आम आदमी को पांच सौ और हजार रूपए से क्या वास्ता। एक आम भारतीय सौ दो सौ रूपए दिन में ही खर्च कर पाता है, फिर हजार और पांच सौ के नोट का चलन अखिर है किस के लिए। जाहिर है कि बडे हवाला या एकाउंट को स्थानांतरित करने के लिए भ्रष्टाचारियों और सेठ साहूकारों को सुविधा देने के लिए इन नोटों को प्रचलन में लाया गया है।

बेपरवाह टोल टेक्स के ठेकेदार!

देश भर में प्रधानमंत्री ग्रामीण सडक योजना और एनएचएआई की मद में सडकों का जाल बिछाया जा रहा है। इन सडकों को बनाओ, कमाओ और सरकार के हवाले करो अर्थात बीओटी आधार पर बनाया जा रहा है। इन सडकों पर कर वसूली के लिए टोल नाके बनाए गए हैं। इन नाकों पर सरकारी वाहनों, सांसद, विधायक आदि को कर से छूट प्रदान की गई है। इतना ही नहीं अधिमान्यता प्राप्त पत्रकारों को भी इससे मुक्त रखा गया है। मध्य प्रदेश में भूतल परिवहन मंत्री कमल नाथ के संसदीय क्षेत्र से लगे होशंगाबाद में टोल टेक्स वसूली के ठेकेदार द्वारा सारे नियम कायदों को ताक पर रखा जा रहा है। एक अधिमान्यता प्राप्त पत्रकार द्वारा बताया गया कि वे अपने वाहन से पंचमढी जा रहे थे, तभी रास्ते में होशंगाबाद के करीब टोल नाके पर अपना सरकारी अधिमान्यता परिचय पत्र दिखाने के बाद भी ठेकेदार के गुर्गों द्वारा रसीद नंबर 203441 के माध्यम से 72 किलोमीटर के लिए 29 रूपए की राशि वसूल ली गई। इतना ही नहीं आगे पहुंचने पर पिपरिया से पंमढी के लिए फिर ठेकेदार के गुर्गों द्वारा सरीस नंबर 189269 के माध्यम से 22 रूपए का टोपा पहना दिया गया। कहा तो यहां तक जा रहा है कि विधायक सांसदों को जेब में रखने वाले इस तरह के ठेकेदारों द्वारा जमकर मलाई काटी जा रही है।

पुच्छल तारा

हैदराबाद से रोहित सक्सेना मेल भेजते हैं कि जब दिल्ली में आंखों की जांच कराने गए तीन आतंकवादी फरार हो गए, तब जबर्दस्त हंगामा मचा। उनका कहीं पता नहीं चला। जब पुलिस आयुक्त ने जवाबदार कर्मचारियों को बुलाकर वास्तविकता जाननी चाही तो उनमें से एक ने धीरे से मंह छिपाते हुए कहा -”जनाब, आप कतई चिंता न करें, उनकी आंखों की जांच की रपट अपने पास है, आप परवाह न करें, वे अपनी जांच रिपोर्ट लेने आखिर आएंगे तो हमारे पास ही. . . !

-लिमटी खरे

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