लेखक परिचय

अनुप्रिया अंशुमान

अनुप्रिया अंशुमान

अनुप्रिया अंशुमान, आज़मगढ़ जिले में जन्म, आज़मगढ़ के शिबली नेशनल डीग्री कॉलेज से अँग्रेजी में स्नातकोत्तर, हिन्दी में नियमित लेखन, मुख्यरूप से स्त्री विमर्श, प्रेम व गुरु विषयों पर लेखन...

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बहुत ही दूर तक दिखता है मुझको
ये अकेलापन
तुम्हारे साथ होने पर भी नहीं हटता है
ये अकेलापन
कभी किया करती हूँ खुद से बातें मैं बेपर्दा
कि _छुप के देखता है मुझको
ये अकेलापन
हृदय के एक कोने में जब याद उठती है तुम्हारी
कि_छुप के साँस लेता है मुझमें
ये अकेलापनlonliness
कितनी ख्वाइशें सिमटी है मुझ में
मगर मैं बेखबर
कि इस पर आह भरता है
ये अकेलापन
कभी समझी नहीं मैं खुद की काबिलियत
सुनलो
कि_अब दूर से ही मुस्कुराता है
ये अकेलापन
धड़कनो को लिखने की जबसे आदत पड़ गयी
कि_हँस के साथ चलता है ये अकेलापन
अकेले में कभी जब गीत हूँ तेरा गाती
कि साथ मेरे नाचता है
ये मेरा अकेलापन।।.

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