लेखक परिचय

संजय कुमार फरवाहा

संजय कुमार फरवाहा

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आज का अध्यापक शीक्षा का व्यवसायी कर्ण करता जा रहा है ।
आज का अध्यापक पेट भरने के लीए अध्यापक बनता जा रहा है

अध्यापक का पद नहीं मिला तो क्या हुआ ।
सीपाही के पद के लीए ही फारम भरता जा रहा है
आज का अध्यापक शीक्षा का व्यवसायी कर्ण करता जा रहा है ।
आज का अध्यापक पेट भरने के लीए अध्यापक बनता जा रहा है

आज का अध्यापक छुट्टी की आखरी घंटी का इंतज़ार करता जा रहा है
घडी देख , पाठशाला को नमस्कार कर ,
ट्यूशन देने जल्दी से घर भागता जा रहा है
आज का अध्यापक शीक्षा का व्यवसायी कर्ण करता जा रहा है ।
आज का अध्यापक पेट भरने के लीए अध्यापक बनता जा रहा है

आज के अध्यापक को परीणामों की कोई चिन्ता नहीं है
आज का अध्यापक ट्यूशन पर ही पढ़ा कर बच्चों को
परीणामों का पर्तिशत बढ्वाता जा रहा है
सब बच्चों को कराकर पास
अपने स्कूल का नाम चमकाता जा रहा है
आज का अध्यापक शीक्षा का व्यवसायी कर्ण करता जा रहा है ।
आज का अध्यापक पेट भरने के लीए अध्यापक बनता जा रहा है

कहाँ गए वोह अध्यापक जो मनं से पढ़ाते थे
तभी तो गरीबों के बच्चे भी डॉक्टर ,इंजिनियर का रुत्बा पाते थे
आज कहाँ गरीब का बच्चा ऐसे अध्यापकों से खाकर मार, पा कर दुलार
सफलता की सीढियां चढ़ पा रहा है
आज का अध्यापक शीक्षा का व्यवसायी कर्ण करता जा रहा है ।
आज का अध्यापक पेट भरने के लीए अध्यापक बनता जा रहा है

{ संजय कुमार फरवाहा }

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6 Comments on "आज का अध्यापक"

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rah
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YASMEEN
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आज भी अच्छे अध्यापक मोजूद हैं .

YASMEEN
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ऐसा ज़रूरी नहीं है? हर अध्यापक एक जेसा नहीं होता .

YASMEEN
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MAIN TO KAHUNGI KI HAR TEACHER EK JAISA NAHI HOTA. JIS TARHA PAANCHON UNGLIYAAN BARABER NAHI HOTI.

श्रीराम तिवारी
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क्या वास्तव में तस्वीर वैसी ही है जैसा की इस आलेख में उल्लेखित है? मैं कहूँगा नहीं …नहीं …नहीं …क्योंकि ..आजकाल जो K G का बच्चा जानता है वो आप भी नहीं जानते …यदि किसी middile पास बच्चे से बात करोगे तो वो आपको बहुत कुछ सिखा सकता है …बात अकेले अध्यापक की नहीं है सारा परिवेश ही नित्य परिवर्तनशील है .

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