लेखक परिचय

विजय कुमार

विजय कुमार

शिक्षा : एम.ए. राजनीति शास्त्र, मेरठ विश्वविद्यालय जीवन यात्रा : जन्म 1956, संघ प्रवेश 1965, आपातकाल में चार माह मेरठ कारावास में, 1980 से संघ का प्रचारक। 2000-09 तक सहायक सम्पादक, राष्ट्रधर्म (मासिक)। सम्प्रति : विश्व हिन्दू परिषद में प्रकाशन विभाग से सम्बद्ध एवं स्वतन्त्र लेखन पता : संकटमोचन आश्रम, रामकृष्णपुरम्, सेक्टर - 6, नई दिल्ली - 110022

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विजय कुमार

चिरदुखी शर्मा जी हर दिन की तरह आज भी चौराहे पर मिले, तो उनका गुस्सा छिपाए नहीं छिप रहा था। मिलते ही उन्होंने बगल में दबा अखबार मेरे हाथ में थमा दिया।

– लो पढ़ो। मैं तो पहले से यही कह रहा था।

– क्या बात हो गयी शर्मा जी, इन दिनों दिल्ली का पारा वैसे ही 45 के आसपास पहुंच रहा है। आप इतने गरम होंगे, तो बाकी लोगों का जीना कठिन हो जाएगा।

– तुम मजाक मत करो वर्मा। लोकपाल विधेयक के नाम पर सरकार जो हुज्जत दिखा रही है, उससे मेरा मूड बहुत खराब है।

– क्यों, सरकार तो इस बारे में बहुत गंभीर है।

– खाक गंभीर है। 42 साल से इस पर चर्चा हो रही है। अब बात कुछ बनती दिखाई दी, तो उन्होंने लटकाने के लिए इसे मुख्यमंत्रियों और राजनीतिक दलों के पास सलाह के लिए भेज दिया है।

– शर्मा जी, सरकार का काम यही है। उसके पास तरह-तरह की खूंटियां हैं। अफजल, भुल्लर और कसाब की फांसी की ही तरह एक खूंटी पर इस विधेयक को भी लटका देंगे।

– पर इससे अन्ना हजारे और उनके साथी बहुत नाराज हैं।

– उनकी नाराजगी स्वाभाविक है। यदि उनकी इच्छानुसार लोकपाल विधेयक नहीं बना, तो उनका सारा परिश्रम व्यर्थ हो जाएगा।

– पर सरकार कह रही है कि हम इसके दायरे में प्रधानमंत्री को नहीं रखेंगे। वे संसद के अंदर सांसदों की कार्यवाही को भी इससे मुक्त रखना चाहते हैं।

– शर्मा जी, यह सरकार भ्रष्टाचार रोकना ही नहीं चाहती। भ्रष्टाचार की अम्मा तो यह कांग्रेस ही है। नेहरू से लेकर मैडम इटली तक का यही इतिहास है। अपने बच्चे को कौन मां मारना चाहेगी ?

– अन्ना की तरह बाबा रामदेव का अभियान भी किसी परिणाम तक नहीं पहुंचा। समझ नहीं आता कि अब लोकपाल का क्या होगा ?

– शर्मा जी, अब जमाना लोकपाल का नहीं, ठोकपाल का है। शासन ने बाबा और उनके समर्थकों को आधी रात में ठोक बजाकर, दिल्ली से भागने पर मजबूर कर इसका परिचय दे ही दिया है। इस मामले में कांग्रेस का रिकार्ड सदा से काला ही रहा है।

– अच्छा ?

– जी हां। इसी कांग्रेस ने 1966 में दिल्ली में गोभक्तों पर गोली चलाई थी। 1974-75 को याद करो। किस तरह जयप्रकाश नारायण पर पटना में लाठियां बरसाईं थीं ? आपातकाल में लाखों लोगों को जेल में ठूंसकर हजारों लोगों के हाथ-पैर इंदिरा गांधी ने ही तुड़वाये थे। 1984 में दिल्ली में सिखों का हुआ नरसंहार भूल गये क्या ?

– तो इसका निदान क्या है ?

– निदान यह है कि अन्ना को फुसलाकर और बाबा रामदेव को ठोककर शासन ने तो अपनी कर ली; पर जब जनता की बारी आये, तो वह इस धूर्त और भ्रष्ट सरकार को इतनी बुरी तरह से ठोके कि भ्रष्ट नेता अगले जन्म में भी गंजे पैदा हों।

– मैं समझा नहीं।

– शर्मा जी, यदि उस दिन रात में तुम्हारी भी कुछ ठुकाई हो जाती, तो समझने में इतनी देर न लगती। लोकतंत्र में जनता के पास सबसे बड़ा हथियार वोट है। उसे चाहिए कि अब जब और जहां भी चुनाव हो, इनके विरुद्ध इतने अधिक वोट ठोके कि ये मुंह दिखाने लायक भी न बचें।

– बाबा रामदेव तो अनशन से उठ गये; पर अन्ना हजारे अगस्त में फिर अनशन पर बैठने का कह रहे हैं।

– ये दोनों महानुभाव समझ लें कि अनशन से आज तक कोई समस्या नहीं सुलझी। यदि वे अनशन करते हुए भगवानगंज चले गये, तो कांग्रेस लड्डू बांटेगी। इसलिए अच्छा यह है कि वे देश के कोने-कोने में जाकर जनता को इस ठोकपाल विधेयक का महत्व समझाएं। यदि जनता ने इन भ्रष्ट नेताओं को तबीयत से ठोक दिया, तो लोकपाल विधेयक अगली सरकार एक सप्ताह में बना देगी।

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2 Comments on "ठोकपाल विधेयक"

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आर. सिंह
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अब यह दूसरा व्यंग्य मेरे सामने है.इसमें तो एक तरह से भविष्य वाणी की गयी है.जनता ने सचमुच ठोक दिया,पर नतीजा? गाना याद आ रहा है,नतीजा क्या मेरे लाल? नतीजा वही ठन ठन गोपाल. तो नतीजा तो सचमुच ठन ठन गोपाल है. न सी.वी.सी है ,न सी.आई.सी. है और न लोकपाल है.अब तो आर.टी.आई पर भी रोक लगाने की तैयारी है,क्योंकि यह तो राष्ट्रिय सरकार है. तुर्रा यह कि अब तो आपको मुंह खोलने पर भी पाबंदी लग रही है,जैसा कि महाराष्ट्र के मुख्य मंत्री बोल रहे हैं.

MOHAN LAL YADAV
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ये जो वाकया एवं दर्द है wah हर भारतीय का है. इस देश में यदि नेता लोग & sarkaar अपनी मनमर्जी कर रहे है तो वो केवल इसलिए की उन्हें रोकने वाला कोई है नहीं बाबा रामदेव & अन्ना तो सुरुआत है. दिल्ली में जो हुआ उससे आहत हो इस देश की सम्वधानिक संस्था सुप्रीम कोर्ट ने तो दर्द प्रकट किया, इससे लगता है देश में आज bhai न्याय, ईमानदारी है जिनके बलबूते देश खड़ा है. आज हर आदमी को रामदेव & अन्ना बनना होगा, अकेले रामदेव & अन्ना क्या कर पाएंगे ये हमने देख लिया है. यदि हम ऐसा… Read more »
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