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toll_bridge1परिवहन मंत्रालय टोल टैक्स (चुंगी वसुली) के माध्यम से निजी क्षेत्र की निर्माण कंपनियों को बेहिसाब फायदा पहुंचाने में जुटी है। दिल्ली-गुड़गांव एक्सप्रेस हाईवे पर रोजाना टोल टैक्स के रूप में होने वाली लाखों रुपए की उगाही की जानकारी मिलने पर यह खुलासा हुआ।भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने निजी क्षेत्र की भागीदारी से बीओटी यानी निर्माण, संचालन और स्थानांतरण के तहत दिल्ली-गुड़गांव एक्सप्रेस हाईवे का निर्माण किया है। इस परियोजना को पूरा होने में 702 करोड़ रुपए की लागत आई थी। इन रुपए की उगाही के लिए उक्त परियोजना से जुड़ी निजी कंपनी को सन् 2022 तक चुंगी उगाही का अधिकार दिया गया है।

प्रतिवर्ष गाड़ियों की बढ़ती संख्या और वहां से गुरजने वाली प्रत्येक गाड़ी पर टोल टैक्स में वृद्धि होने से सन् 2022 तक 24,000 करोड़ रुपये की उगाही का अनुमान है। इससे साफ मालूम पड़ता है कि यहां जनता की जरूरतों को नजरअंदाज कर परियोजना से जुड़ी निर्माण कंपनी को 702 करोड़ रुपए के बदले अरबों रुपए का फायदा पहुंचाने की जुगत लगाई गई है। इस बाबत अधिवक्ता विवेक गर्ग ने एनएचएआई के भ्रष्ट अधिकारियों और परिवहन मंत्रालय व इससे जुड़े अन्य संबंधित विभाग के खिलाफ केंद्रीय जांच ब्यूरो(सीबीआई) के निदेशक अश्वनि कुमार के समक्ष शिकायत दर्ज की है।

शिकायत में कहा गया है कि दिल्ली-गुड़गांव एक्सप्रेस हाईवे पर इंदिरा गांधी एयर पोर्ट (14 किमी), गुड़गांव दिल्ली बोर्डर (24 किमी) और खिड़कीदौला (42 किमी) के निकट राहगीरों से चुंगी वसूली जाती है। एनएचएआई की ओर से मुहैया कराए गए आंकड़ों के अनुसार इंदिरा गांधी एयर पोर्ट और खिड़कीदौला के निकट चुंगी के रूप में प्रत्येक महिने 10 करोड़ यानी वर्ष में करीब 130 करोड़ रुपए तक की उगाही होती है। जबकि, गुड़गांव दिल्ली बोर्डर पर होने वाली उगाही की कोई जानकारी नहीं दी गई है। अनुमान है कि यहां से होने वाली उगाही उक्त दोनों स्थानों से दोगुनी है।

ऐसी स्थिति में इस एक्सप्रेस हाईवे पर प्रतिवर्ष 260 करोड़ रुपए की उगाही का अनुमान है। गर्ग ने बताया कि सूचना का अधिकार कानून का इस्तेमान करने पर एनएचएआई ने इस बात की जानकारी दी कि प्रत्येक वर्ष पहली अप्रैल को चुंगी की दर में संशोधन करने का प्रावधान है। अप्रैल 2008 में इस राशि में कुल 13 प्रतिशत की वृद्धि की गई थी। इससे गत वर्ष 293.8 करोड़ रुपये की वसूली का अनुमान है।

शिकायक पत्र में इस बात की ओर भी इशारा किया गया है कि प्रतिवर्ष गाड़ियों की बढ़ती संख्या की वजह से चुंगी की उगाही में और भी इजाफा होगा। ऐसे में इस परियोजना में लगी राशि की उगाही वर्ष 2010 तक ब्याज सहित कर ली जाएगी। साथ ही मूलधन के रूप में कम से कम 116.55 करोड़ रुपये का फायदा होगा। इसके बावजूद वर्ष 2022 तक चुंगी वसूलने का अधिकार दिए जाने का औचित्य समझ से परे है।

गर्ग ने बताया कि आरटीआई कानून के तहत देश भर में बीओटी के माध्यम से तैयार हुई परियोजनाओं से टोल टैक्स संबंधित जानकारी मागने पर संबंधित विभाग टालमटोल कर रहा है। इससे पता चलता है कि इसमें बड़े पैमाने पर हेराफेरी हो रही है।

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