लेखक परिचय

जोली अंकल

जोली अंकल

स्वतंत्र वेब लेखक व ब्लॉगर

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एक लड़की मरने के बाद भगवान के द्वार पर पहुंची तो प्रभु उसे देख कर हैरान हो गये कि तुम इतनी जल्दी स्वर्गलोक में कैसे आ गई हो? तुम्हारी आयु के मुताबिक तो तुम्हें अभी बहुत उम्र तक धरती पर जीना था। उस लड़की ने प्रभु परमेश्वर को बताया कि वो किसी दूसरी जाति के एक लड़के से बहुत प्यार करती थी। जब बारबार समझाने पर भी हमारे घरवाले इस शादी के लिये राजी नही हुए तो हमारे गांव के चंद ठेकेदारों ने हमें मौत का हुक्म सुना दिया। इससे पहले कि वो हमें जान से मारते हम दोनों ने अपनी जिंदगी को खत्म करने का मन बना लिया। भगवान ने हैरान होते हुए कहा लेकिन तुम्हारा प्रेमी तो कहीं दिखाई नही दे रहा, वो कहां है? जब दूसरे देवताओ ने मामले की थोड़ी जांचपड़ताल की गई तो मालूम हुआ कि यह दोनों मौत को गले लगाने के लिये इक्ट्ठे ही एक पहाड़ी पर आये थे। जब लड़की कूदने लगी तो इसके प्रेमी ने यह कह कर आखें बंद कर ली कि प्यार अंधा होता है। अगले पल जब उसने देखा कि लड़की तो कूद कर मर गई है वो वहां से यह कह कर वापिस भाग गया कि मेरा प्यार तो अमर है, मैं काहे को अपनी जान दू।

यह सारा प्रंसग सुनने के बाद वहां बैठे सभी देवताओं के चेहरे पर क्रोध और चिंता की रेखाऐं साफ झलकने लगी थी। काफी देर विचार विमशर के बाद यह तय हो पाया कि समयसमय पर जब कभी भी स्वर्गलोक में कोई इस तरह की अजीब समस्यां देखने में आती है तो नारद मुनि जी से ही परामर्श लिया जाता है। सभी देवीदेवताओं की सहमति से परमपिता परमेश्वर ने उसी समय नारद मुनि को यह आदेश दिया कि हमने तो पृथ्वीलोक पर एक बहुत ही पवित्र आत्मा वाला ाुद्व माटी का खिलोना बना कर भेजा था। लेकिन यह वहां पर कैसेकैसे छल कपट कर रहा है। इसके बारे में खुद धरती पर जाकर जल्द से जल्द वहां का सारा विवरण हमें बताओ।

नारद जी प्रभु के हुक्म को सुनते ही नारायणनारायण करते हुए वहां से धरती की और निकल पड़े। धरती पर पांव रखते ही उनका सामना उस बेवफा प्रेमी से हो गया जिसने उस लड़की को धोखा देकर मौत के मुंह में धकेल दिया था। वो शराब के नश् में टुन झूमता हुआ अपनी मस्ती में हिंदी फिल्म के एक गाने को गुनगुना रहा था कि मुन्नी बदनाम हुई डार्लिंग तेरे लिये। नारद मुनि जी को देखते ही वो शराबी उनसे बोला कि भाई तुम कौन? नारद जी ने कहा कि लगता है तुमने मुझे पहचाना नही। उस शराबी ने कहा कि यह दारू बड़ी कमाल की चीज है यह अपने सारे दुखो से लेकर दुनियां के सारे गम तक भुला देती है। नारद जी ने अपना परिचय देते हुए मैं स्वर्गलोक से आया हॅू। यह सुनते ही शराबी ने नारद जी की खिल्ली उड़ाते हुए से कहा कि फिर तो यहां मेरे साथ बैठो, मैं अभी आपके लिये दारू मंगवाता हॅू। नारद जी कुछ ठीक से समझ नही पाये कि यह किस चीज के बारे में बात कर रहा है। फिर भी उन्होने इसे कोई ठंडा पेयजल समझ कर बोतल मुंह से लगा कर कर एक ही घूंट में उसे खत्म कर डाला। शराबी बड़ा हैरान हुआ कि हमें तो एक बोतल को खत्म करने में 46 घंटे लग जाते है और यह कलाकार तो एक ही झटके में सारी बोतल गटक गया। उसने एक और बोतल नारद जी के आगे रख दी। अगले ही क्षण वो भी खाली होकर जमीन पर इधरउधर लु़क रही थी। इसी तरह जब 46 बोतले और खाली हो गई तो उस शराबी ने नारद जी से पूछा कि तुम्हें यह दारू च़ती नही क्या? नारद जी ने कहा कि मैं भगवान हॅू, मुझे इस तरह के नशों से कुछ असर नही होता। अब उसशराबीने लड़खड़ाती हुई जुबान में कहा कि अब घर जाकर आराम से सो जाओ तुम्हें बुरी तरह से दारू चढ़ गई है। वरना पुलिस वाले तुम्हें दोचार दिन के लिए कृण जी की जन्मभूमि पर रहने के लिये भेज देगे। नारद जी को बड़ा अजीब लगा कि यह दो टक्के का आदमी सभी लोगो के बीच मेरी टोपी उछाल रहा है। सब कुछ जानते हुए भी नारद जी ने इस शराबी को गुस्सा करने की बजाए इसी से धरती के हालात के बारे में विस्तार से जानना बेहतर समझा।

जब शराबी के साथ थोड़ी दोस्ती का महौल बन गया तो उसने बताना शुरू किया कि आज धरती पर चारों और भ्रटाचार का बोलबाला है। जहां देखो हर इंसान हत्या, बलात्कार और हैवानियत के डर से दहशत के महौल में जी रहा है। देश के नेता बापू, भगत सिंह जैसे महान नेताओ की शिक्षा को भूल कर सरकारी खज़ाने को अंदर ही अंदर खोखला कर रहे है। नेताओ के साथ उनके परिवार वालों का चरित्र भी ीला होता जा रहा है। इतना सुनने के बाद नारद जी ने उस शराबी से कहा कि क्या आपके अध्यापकगण, गुरू या साधूसंत आप लोगो को धर्म की राह के बारे में कुछ नही समझाते।शराबी ने कहा कि आजकल के मटुक लाल जैसे अध्यापक खुद ही लव गुरू बने बैठे हैं बाकी रही साधूसंतो की बात तो स्वामी नित्यानंद जी जैसे संत खुद ही गेरूए वस्त्र धारण करके वासना की भक्ति में लीन पड़े हुए है। इंसान भगवान को भूलकर शौतान बनता जा रहा है, क्योंकि हर कोई यही सोचने लगा है कि यदि भगवान होते तो क्या इस धरती पर यह सारे कुर्कम हो पाते?

नारद जी ने प्रभु का ध्यान करते हुए उस शराबी से कहा कि कौन कहता है कि भगवान इस धरती पर नही है? कौन कहता है कि भगवान बारबार बुलाने पर भी नही आते? क्या कभी किसी ने मीरा की तरह उन्हें बुलाया है? आप एक बार उन्हें प्यार से पुकार कर तो देखो तो सही, भगवान न सिर्फ आपके पास आयेगे बल्कि आपके साथ बैठ कर खाना भी खायेगे। शर्त सिर्फ इतनी है कि आपके खाने में शबरी के बेरों की तरह मिठास और दिल में मिलन की सच्ची तड़प होनी चाहिये। भगवान तो हर जीव आत्मा के रूप में आपके सामने है लेकिन आप लोगो में कमी यह है कि आप हर चीज को उस तरह से देखना चाहते हो जो आपकी आखों को अच्छा लगता है। अब तक उस शराबी को नारद जी की जुबान से निकले एकएक शब्द की पी़ा का अभास होने लगा था। जौली अंकल तो यही सोच कर परेशान हो रहे है कि इससे पहले कि नारद जी जैसे सम्मानित गुरू प्रभु परमेश्वर को जा कर धरती के बारे में यह बताऐं कि वहां मानव दानव बनता जा रहा है उससे पहले हर मानव को मानव की तरह जीना सीख लेना चाहिये ताकि भगवान द्वारा बनाया गया पवित्र, ाुद्व और खालिस माटी का खिलोना फिर से मानवता को निखार सके।

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4 Comments on "’’ खिलोना माटी का ’’"

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Parminder Singh
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बहुत अच्छा लेख है, धन्यावाद |

Jolly Uncle
Guest

सुनील पटेल जी बहुत बहुत धन्यवाद..

Jolly Uncle
Guest

बहुत बहुत धन्यवाद्

sunil patel
Guest

अच्छा उदहारण दिया है लेख में. यहाँ दो पहलु है. * पहला युवा उम्र के प्यार का.
* दूसरा माँ बाप के लालन-पालन और अधिकार का.
दोनों ही विस्तृत छेत्र है और वाद विवाद पर कागज कम पड जायेंगे.

किन्तु नुक्सान में हमेशा लड़की ही होती है. युवा उम्र में प्यार का नशा उतरता है तो लड़का अपनी रह पकड़ लेता है, नादानी को भुगतना लड़की को पड़ता है.
माँ बाप कर कर्त्तव्य है की अपने बच्चो को (खासकर लडकियों के अभिभावक को) नैतिकता की ऐसी सिक्षा दे की वे अपना बुरा और भला समझ सके और धोखा नहीं खाए.

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