लेखक परिचय

डॉ. वेदप्रताप वैदिक

डॉ. वेदप्रताप वैदिक

‘नेटजाल.कॉम‘ के संपादकीय निदेशक, लगभग दर्जनभर प्रमुख अखबारों के लिए नियमित स्तंभ-लेखन तथा भारतीय विदेश नीति परिषद के अध्यक्ष।

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अपने यहां संस्कृत में कहा जाता है- ‘प्रथमाग्रासे मक्षिकापातः’ याने पहले ग्रास में ही मक्खी गिर गई। यही हुआ डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने पर। अभी अमेरिका का राष्ट्रपति बने, ट्रंप को एक महिना भी नहीं हुआ कि उनके राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार को इस्तीफा देना पड़ गया है। इसके पहले भी उनके कुछ छोटे-मोटे अफसरों ने अपने पद छोड़ दिए थे लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार तो महाराजा की पटरानी की तरह होता है। उसे गृहमंत्री, वित्तमंत्री, विदेश मंत्री से भी ज्यादा महत्व मिला रहता है, क्योंकि वह ही अपने राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री के सबसे निकट होता है।

मिखाइल फ्लिन के इस्तीफे का जो कारण बताया गया है, उसमें काफी मासूमियत दिखाई गई है। यह बताया गया है कि फ्लिन और वाशिंगटन में रुसी राजदूत सर्गेई किसल्याक के बीच दिसंबर में जो फोन-वार्ता हुई थी, उसमें फ्लिन ने किसल्याक को यह आश्वासन दे दिया था कि जैसे ही ट्रंप राष्ट्रपति पद संभालेंगे, वे ओबामा द्वारा निष्कासित 35 रुसी कूटनीतिज्ञों को बहाल कर देंगे। यह आश्वासन फ्लिन ने उस स्थिति में दिया था, जबकि ट्रंप ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के पद पर उन्हें नामजद किया था।

अब जो इस्तीफे का कारण बताया गया है, वह यह है कि इस फोन-वार्ता को फ्लिन ने उप-राष्ट्रपति माइक पेंस से छिपाया और पूछने पर यही बताया कि बातचीत सिर्फ ऊपरी शिष्टाचार तक ही सीमित रही! क्या यह इस्तीफे का कारण हो सकता है? नहीं। सारी बात फ्लिन राष्ट्रपति या विदेश मंत्री को बता सकते हैं लेकिन यदि वे नहीं चाहें तो उप-राष्ट्रपति को क्यों बताएं?

वास्तव में इस्तीफा इसलिए हुआ कि एक तो उनकी फोन-वार्ता को गुप्तचर विभाग ने रेकार्ड कर लिया था। दूसरा, रुस से उनके गहरे संबंध पाए गए। तीसरा, रुस से उन्हें पैसे मिलने के प्रमाण भी पाए गए। चौथा, वे ओबामा-प्रशासन में प्रतिरक्षा खुफिया विभाग से 2014 में निकाले गए थे, क्योंकि उन पर मनमानी और अनुशासनहीनता करने के आरोप थे।

इसके बावजूद ट्रंप ने उन्हें इतना ऊंचा पद इसलिए दे दिया था कि वे उनके सबसे कट्टर और पहले समर्थकों में से थे। फ्लिन की बर्खास्तगी पर रुस में कड़ी प्रतिक्रिया हुई है। कुछ रुसी नेताओं ने कहा है कि ट्रंप दूसरों के इशारों पर फैसले करते हैं। रुस की वजह से अपने सुरक्षा सलाहकार को निकाल बाहर करना पागलपन से भी ज्यादा गंभीर बीमारी है। ट्रंप की इस मनोवृत्ति के कारण अब भारत को भी बड़ा धैर्यवान और सावधान रहना होगा।

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