लेखक परिचय

लिमटी खरे

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हमने मध्य प्रदेश के सिवनी जैसे छोटे जिले से निकलकर न जाने कितने शहरो की खाक छानने के बाद दिल्ली जैसे समंदर में गोते लगाने आरंभ किए हैं। हमने पत्रकारिता 1983 से आरंभ की, न जाने कितने पड़ाव देखने के उपरांत आज दिल्ली को अपना बसेरा बनाए हुए हैं। देश भर के न जाने कितने अखबारों, पत्रिकाओं, राजनेताओं की नौकरी करने के बाद अब फ्री लांसर पत्रकार के तौर पर जीवन यापन कर रहे हैं। हमारा अब तक का जीवन यायावर की भांति ही बीता है। पत्रकारिता को हमने पेशा बनाया है, किन्तु वर्तमान समय में पत्रकारिता के हालात पर रोना ही आता है। आज पत्रकारिता सेठ साहूकारों की लौंडी बनकर रह गई है। हमें इसे मुक्त कराना ही होगा, वरना आजाद हिन्दुस्तान में प्रजातंत्र का यह चौथा स्तंभ धराशायी होने में वक्त नहीं लगेगा. . . .

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नई दिल्ली 10 अप्रेल। कभी भाजपा की फायरब्राण्ड नेत्री रही साध्वी उमाश्री भारती की भाजपा में घर वापसी के लिए राजग के पीएम इन वेटिंग लाल कृष्ण आडवाणी की कीर्तन मण्डली ने सारी ताकत झोंक दी है। अब आडवाणी मण्डली हर तरह से उमाश्री को हर कीमत पर भाजपा में वापसी के मार्ग प्रशस्त करने पर तुल गई है। कहा तो यह जा रहा है कि उमाश्री को उत्तर प्रदेश में भाजपा की मजबूती के लिए वापस लाया जा रहा है, पर कहीं पे निगाहें कहीं पर निशाने साफ तौर पर समझ में आने लगे हैं।

पिछले दिनों भाजपा के शीर्ष नेता एल.के.आडवाणी ने जिस तरह से मध्य प्रदेश के निजाम शिवराज सिंह चौहान को बुलावा भेजा और उनसे चर्चा की उससे साफ होने लगा है कि शिवराज सिंह चौहान पर उमाश्री की घर वापसी के लिए दवाब बनाना आरम्भ कर दिया गया है। आडवाणी के करीबी सूत्रों का कहना है कि शिवराज सिंह से बन्द कमरे में गुफ्तगूं करने के बाद दोनो ही नेताओं ने भाजपा सुप्रीमो नितिन गडकरी से भी इस मसले में रायशुमरी की।

सूत्रों ने बताया कि इसके पहले आडवाणी ने उमाश्री भारती को बुलाकर उनसे एकान्त में लंबी चर्चा की थी। आडवाणी से मिलने के उपरान्त उमाश्री भारती ने भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी की देहरी पर भी मत्था टेका था। उधर उमा विरोधी झण्डा उठाने वाले अरूण जेतली ने भी नितिन गडकरी के आवास पर इसी सम्बंध में चर्चा की। यह चर्चा लगभग तीन धंटे चली। गडकरी के करीबी सूत्रों ने संकेत दिए हैं कि गडकरी इस बात के पक्षधर हैं कि उमाश्री भाजपा में वापस आ जाएं, किन्तु कुछ वरिष्ठ नेताओं के तगडे विरोध के चलते वे खुलकर इस मसले पर सामने आने से कतरा रहे हैं।

उधर मध्य प्रदेश के मुख्यमन्त्री शिवराज सिंह चौहान के दरबार से जो खबरें छन छन कर बाहर आ रही हैं, उनके मुताबिक चौहान ने उमाश्री की वापसी से मध्य प्रदेश पर पडने वाले असर पर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सह सर कार्यवाहक सुरेश सोनी से चर्चा की है।

उमाश्री की भाजपा में वापसी से भयाक्रान्त मध्य प्रदेश के वरिष्ठ भाजपाई नेताओं ने अब दिल्ली दरबार में मत्थ टेकना आरम्भ कर दिया है। एमपी की पूर्व मुख्यमन्त्री उमा भारती के सक्सेसर रहे पूर्व मुख्यमन्त्री एवं वर्तमान में सूबे में नगरीय कल्याण मन्त्रालय का जिम्मा सम्भालने वाले बाबू लाल गौर ने अपनी पुत्रवधू और भोपाल की महापौर कृष्णा गौर के साथ नितिन गडकरी से लंबी चर्चा की है। बताया जाता है कि इस चर्चा में बाबू लाल गौर ने भी शिवराज सिंह चौहान और मध्य प्रदेश भाजपाध्यक्ष नरेन्द्र तोमर की तान में ही आलाप गाया है, जिसके तहत उमा के वापस लोटने से भले ही देश में भाजपा मजबूत हो पर मध्य प्रदेश में भाजपा कई धडों में बंट सकती है।

गौरतलब है कि उमाश्री भारती की घर वापसी की अटकलें लोकसभा चुनाव के पहले लगाई जा रहीं थीं, तब मामला परवान न चढ सका। इसके बाद निरन्तर उनकी घर वापसी की चर्चा सियासी फिजा में तैरती रहीं। उमाश्री की घरवापसी की घोर विरोधी हैं मध्य प्रदेश इकाई। दरअसल उमाश्री भारती की कर्मभूति रहा है मध्य प्रदेश, सो नेताओं को भय सताए जा रहा है कि अगर उनकी घर वापसी होती है, तो वे अपना असली रंग दिखाएंगी। उस सूरत में उन नेताओं को मुश्किल का सामना करना पड सकता है, जिन्होंने उमा के मुख्यमन्त्री पद से हटने के बाद पाला बदला था।

राजनैतिक फिजां में बह रही बयार के अनुसार उमा के भाजपा में वापस आने को लेकर आडवाणी की आतुरता आश्चर्यजनक ही मानी जा रही है। अगर आडवाणी भाजपा के प्रति इतने ही फिकरमन्द थे, तो उमा को लोकसभा के पूर्व ही भाजपा में ले लिया जाता और आडवाणी का आरक्षण कंफर्म हो जाता, वे पीएम इन वेटिंग से पीएम ही बन जाते। जानकारों का मानना है चूंकि आडवाणी से नेता प्रतिपक्ष हथियाने के बाद सुषमा स्वराज काफी तेजी से अपना ग्राफ आगे बढा रहीं हैं, तो आडवाणी की कीर्तन मण्डली को लगने लगा है कि कहीं 2014 में होने वाले आम चुनावों में आडवाणी की तस्वीर भी अटल बिहारी बाजपेयी के बराबर लगाकर उनके स्थान पर सुषमा स्वराज को पीएम इन वेटिंग न बना दिया जाए। अगर एसा होता है तो लाल कृष्ण आडवाणी का 7 रेसकोर्स रोड (भारत गणराज्य के प्रधानमन्त्री का सरकारी आवास) को आशियाना बनाने का सपना अधूरा ही रह जाएगा।

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