लेखक परिचय

प्रवीण दुबे

प्रवीण दुबे

विगत 22 वर्षाे से पत्रकारिता में सर्किय हैं। आपके राष्ट्रीय-अंतराष्ट्रीय विषयों पर 500 से अधिक आलेखों का प्रकाशन हो चुका है। राष्ट्रवादी सोच और विचार से प्रेरित श्री प्रवीण दुबे की पत्रकारिता का शुभांरम दैनिक स्वदेश ग्वालियर से 1994 में हुआ। वर्तमान में आप स्वदेश ग्वालियर के कार्यकारी संपादक है, आपके द्वारा अमृत-अटल, श्रीकांत जोशी पर आधारित संग्रह - एक ध्येय निष्ठ जीवन, ग्वालियर की बलिदान गाथा, उत्तिष्ठ जाग्रत सहित एक दर्जन के लगभग पत्र- पत्रिकाओं का संपादन किया है।

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ओछी, स्तरहीन और झूठी बातों का सहारा लेकर कोई भी व्यक्ति, राजनीतिक दल अथवा पत्रकार कुछ समय तक तो वाहवाही लूट सकता है लेकिन इसके सहारे लंबे समय तक अपना अस्तित्व कायम नहीं रख सकता। विश्व के सबसे बड़े सामाजिक और सेवाभावी संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघ चालक डॉ. मोहन भागवत पर असीमानंद के एक कथित साक्षात्कार का हवाला देकर झूठे आरोप लगाने वाली कैरावन पत्रिका पर यह बात पूरी तरह लागू होती है। इस पत्रिका ने असीमानंद के साक्षात्कार के माध्यम से दावा किया है कि समझौता एक्सप्रेस धमाकों की मंजूरी डॉ. मोहन भागवत ने दी थी। लोकसभा चुनाव नजदीक आते देख अब उन सारी ताकतों को बदनाम करने का षड्यंत्र बड़े स्तर पर चल रहा है जो इस राष्ट्र के लिए समर्पित हैं। चूंकि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भारत की मजबूती के लिए समर्पित ढंग से कार्य कर रहा है। अत: ऐसी ताकतें जो भारत को कमजोर करना चाहती हैं घबराई हुई हैं, उन्हें भय सता रहा है कि यदि केन्द्र में एक मजबूत राष्ट्रवादी विचारों वाली सरकार सत्ता में आती है तो उनके मंसूबे कामयाब नहीं हो पाएंगे। यही वजह है कि इस देश की एकता अखंडता के लिए कार्यरत संगठनों पर कीचड़ उछाला जा रहा है, उन्हें बदनाम करने की साजिश रची जा रही है। यूं तो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ गैर राजनीतिक संगठन है लेकिन वह सदैव इस बात का प्रबल समर्थक रहा है कि इस देश की सत्ता ऐसे दल के हाथ में जिसे इस देश से प्यार हो, देश की एकता अखंडता और समरसता के लिए वह समर्पित हो। यही वह कारण है कि संघ सदैव निशाने पर रहा है। इस बार भी कुछ ऐसा ही षड्यंत्र रचा गया है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने कैरावन पत्रिका के इस साक्षात्कार को बकवास करार दिया है। सबसे महत्वपूर्ण बात तो यह है कि जिन असीमानंद के साक्षात्कार को प्रचारित कर संघ प्रमुख को बदनाम करने का षड्यंत्र रचा गया उन्हीं असीमानंद और उनके अभिभावक ने उसे झूठ का पुलिंदा बताकर सब कुछ साफ कर दिया है। असीमानंद के अभिभावक जे.एस. राणा का तो यहां तक कहना है कि यह साक्षात्कार मानवाधिकार और विचाराधीन कैदी के हितों के खिलाफ है और एक बड़ी साजिश का प्रमाण है। उन्होंने यह भी खुलासा किया है कि असीमानंद ने ऐसे किसी भी साक्षात्कार से इंकार किया है। पूर्व में असीमानंद न्यायालय में भी यह कह चुका है कि संघ का इसमें कोई लेना-देना नहीं है। अब सबसे बड़ा सवाल यह पैदा होता है कि जब स्वयं असीमानंद न्यायालय में इस तरह के किसी भी आरोप से इंकार कर चुका है तो फिर सम्पूर्ण घटनाक्रम को क्या माना जाए? उत्तर साफ है कि यह संघ को बदनाम करने का षड्यंत्र है। जो राजनीतिक दल बिना तथ्यों की गहराई में जाए संघ पर निशाना साध रहे हैं उन्हें यह नहीं भूलना चाहिए कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पिछले अठासी वर्षों से राष्ट्रसेवा के कार्यों में समर्पित रहा है। अनगिनत सेवा प्रकल्पों के माध्यम से संघ कार्य करता रहा है। समरसता का भाव लेकर देश की एकता और अखंडता को कायम रखना संघ का मूल मंत्र रहा है। देश विभाजन की प्रतिकूल परिस्थितियां हों, चीन युद्ध का समय हो, पाकिस्तान से लड़ाई का वक्त  हो अथवा समय-समय पर देश में आई भीषण प्राकृतिक अपदाएं हों संघ स्वयंसेवक की राष्ट्र निष्ठा को पूरे देश ने देखा है। ऐसे संगठन के प्रमुख पर एक साक्षात्कार का हवाला देकर झूठे आरोप लगाना पूरी तरह से बेबुनियाद और संघ के खिलाफ षड्यंत्रकारी गतिविधियों का एक हिस्सा है। यह कोई पहली बार नहीं है जब संघ को बदनाम करने के प्रयास हुए हैं। गांधी हत्या का झूठा आरोप भी संघ पर लगाया गया था, इसकी आड़ में संघ को प्रतिबंध का सामना भी करना पड़ा लेकिन संघ सदैव इससे बेदाग साबित हुआ है। किसी ने सच ही कहा है, सांच को आंच नहीं।

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