लेखक परिचय

प्रवक्‍ता ब्यूरो

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दिनांक 7 नवम्बर 2010 को नेहरू केन्द्र नंदन में यू.के. हिन्दी समिति की बीसवीं वर्षगांठ के सुअवसर पर यू.के. में हिन्दी पत्रकारिता पर सेमिनार आयोजित हुआ।

सेमिनार के प्रथम सत्र की अध्यक्षता करते हुए भारतीय उच्चायोग के हिन्दी एवं संस्कृति अधिकारी श्री आनन्द कुमार ने कहा कि यू.के. से प्रकाशित होने वाली हिन्दी पत्रिकाओं को आर्थिक सहयोग देने के लिए भारतीय उच्चायोग विचार कर रहा है।

पत्रकार एवं कवयित्री सुश्री शिखा वाष्‍र्णेय ने इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर अपने पर्चे में अनूभूति-अभिव्यक्ति वेब साईट का उल्लेख करते हुए कहा कि आज बी बी सी हिंदी, तहलका, जनतंत्र, वेबदुनिया जैसी वेबसाइट्स न सिर्फ हिंदी भाषा में सामग्री प्रस्तुत करके हिंदी की उन्नति के लिए काम कर रही है, बल्कि आज हिंदुस्तान में ही नहीं, पूरी दुनिया में इन पोर्टलों पर अब तक कि सबसे सफल वैचारिक क्रांति की नीव भी रख रही हैं। उन्होंने आगे कहा कि आज के आपाधापी युग में रफ़्तार का भी बहुत महत्व है और वेब पत्रिकाएं उस पैमाने पर खरी उतरती हैं .वो पाठकों तक हर जानकारी उस जगह और उस वक़्त उपलब्ध कराती हैं जिस जगह और जिस वक़्त वे चाहते हैं.वसुधैव कुटुम्बकम के नारे को वेब पत्रकारिता ने चरितार्थ कर दिया है ।

यू.के. के वरिष्ठ पत्रकार और लेखक श्री नरेश भारतीय स्वयं उपस्थित न हो सके परन्तु उन्होंने अपना आलेख भेजा जिसे श्री जनार्दन अग्रवाल ने प्रस्तुत किया। अपने आलेख में श्री भारतीय ने करीब साढ़े चार दशक पूर्व 1967 में प्रकाशित ब्रिटेन की पहली हिन्दी पत्रिका ‘चेतक’ के प्रकाशन के दौरान अपने अनुभवों को बताते हुए कहा कि पत्रकारिता का सम्बन्ध रिपोर्ताज और राजनीतिक, आर्थिक एवं सामजिक विषयों पर चर्चा और बहस से होता है. आज पत्रकारिता की परिधि में मुद्रण के साथ साथ इलेक्ट्रोनिक मीडिया को भी शामिल किया जाता है. रेडियो, टेलीविजन और अब इन्टरनेट इसमें शामिल हैं. इससे पत्रकारिता की परिभाषा नहीं बदलती. मात्र स्वरूप और प्रस्तुति का माध्यम बदलते है. रेडियो और टेलीविजन में भी तो पत्रकार ही काम करते हैं. लिखते हैं और बोलते भी हैं।

पुरवाई के संपादक श्री पद्मेश गुप्त ने पुरवाई के पिछले 13 सालों की उपलब्धि्यों और कार्यों का उल्लेख करते हुए अत्यंत रोचक पॉवर पॉईन्ट प्रेसेन्टेशन और चित्रों के माध्यम से कहा ‘‘पुरवाई पत्रिका एक अंतर्राष्ट्रीय अभियान है। अभियान नए रचनाकारों के मंच का, अभियान प्रवासी भावनाओं की अभिव्यक्ति का और अभियान विश्व के हिन्दी लेखकों को जोड़ने का। मैं यह भी स्पष्ट करता चलू कि पुरवाई मूल रूप से साहित्यिक पत्रिका नहीं है। यह भावो की अभिव्यक्ति का माध्यम है, नए रचनाकारों को प्रोतसाहित करने का माध्यम है, स्थापित लेखकों के आशीर्वाद एवं मार्गदर्शन का माध्यम है और प्रवासी इशूस को सामने लाने का माध्यम है।’’

इस अवसर पर यू.के. से प्रकाशित प्रवासिनी पत्रिका, अमरदीप, मिलाप, नवीन वीकली और जगतवाणी जैसे अख़बारों का भी उल्लेख हुआ।

सत्र के अंत में आज इंटरनेट की वेब पत्रिकाओं की विश्वस्नीयता और मौलिकाता पर खड़े सवालों पर भी चर्चा हुई।

सेमिनार के दूसरे सत्र में बी.बी.सी. रेडियो के वरिष्ठ सदस्य एवं पूर्व प्रसारक श्री यावर अब्बास ने कहा कि बी.बी.सी. विश्व सेवा का दूनिया में खबरों को पहुंचाने का एतिहासिक योगदान रहा है परन्तु राजनैतिक कारणों से आज वह खतरे में है।

इस सत्र का संचालन करते हुए लंदन के लेखक एवं पत्रकार श्री तेजेन्द्र शर्मा ने बी.बी.सी. विश्व हिन्दी पर आरोप लगाया कि वे भारत को भारत की खबरें बताते हैं परन्तु यू.के. की खबरों का प्रसारित नहीं करते।

बी.बी.सी. हिन्दी सेवा लंदन के पूर्व प्रसारक श्री विजय राणा ने तेजेन्द्र जी के आरोपों पर सफाई देते हुए कहा कि तेजेन्द्र जी उस समय की बात कर रहे हैं जब बी.सी.सी. हिन्दी सेवा अपने उतार की ओर थी। बी.सी.सी. हिन्दी सेवा पर पूर्व में संगम, संपादक के नाम पत्र जैसे अनेक कार्यक्रमों का प्रसारण होता रहा है जिसमें यू.के. की संस्थाओं और विभूतियों से सम्बन्धित समाचार भारत प्रसारित होते रहे हैं। उन्होंने बी.बी.सी. हिन्दी सेवा के योगदानों की पावर पॉईन्ट प्रेसेन्टेशन द्वारा प्रस्तुति की। उन्होंने कहा कि बी.बी.सी. की हिन्दी सेवा ने भारत के गांव गॉंव में दुनिया की खबरें पहुंचाई हैं। विजय जी ने बी.बी.सी. विश्व सेवा को अत्यंत निष्पक्ष बताया।

बी.बी.सी. हिन्दी सेवा के पूर्व अध्यक्ष श्री कैलाश बुधचार ने कहा अपने लम्बे कार्यकाल के अनुभवों को बांटते हुए कहा कि पत्रकार प्रसारक होते हैं और उनका काम होता है कि वे समाज के आईने को निष्पक्ष रूप से प्रस्तुत करें। पत्रकारों का काम समाज को बदलना नहीं अपितु उसे सच का आईना दिखाना है।

यू.के. के सनराईज़ रेडियो के प्रख्यात प्रसारक श्री रवि शर्मा ने सनराईज़ रेडियो को एक व्यवसायिक रेडियो बताया। उन्होंने कहा कि सनराईज़ रेडियो मूलत: एन्टरटेन्मेन्ट के लिए है परन्तु अन्य समाचार ऐजेन्सियों के साथ यह रेडियो समाचार भी प्रसारित करता है।

कार्यक्रम में नेहरू केन्द्र लंदन की प्रोग्राम डाइरेक्टर श्रीमती दिव्या माथुर, हिन्दी समिति के प्रबन्धक श्री के.बी. एल.सक्सेना, डा. पियूश गोयल, एम.पी. मीडिया सर्विसेज के श्री मानजी पटेल, लेखक श्री इसमाईल चुनारा, सुश्री सुरेखा चोफला सहित लंदन के अनेक गणमान्य लोग उपस्थित थे।

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2 Comments on "यू.के. में हिन्दी पत्रकारिता पर सेमिनार"

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pt-VINOD CHOUBEY (jyotishachrya)
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pt-VINOD CHOUBEY (jyotishachrya)

Mujhe yeh Janker Behad Khushi Hui ki HINDI ka U.K. me Etana Smman Hai Lekin INDIAN Inglish ka preyog kar aapene aap ko GUORAWANVIT kyo hote hai BHARAT WASIYO Ko U.K. ke is karyakram se seekh lenee chahia …………..
”Patrakarita ko chatukarita se pare hoker nishpakch aawaj Uthani Chahia ”

Jyotishacharya-pt.Vinod Choubey
(”JYOTISH KA SURYA” HINDI MASIK PATRIKA) Sampadak,

sangeeta swarup
Guest

बहुत अच्छा लगा यह सब जान कर …अच्छी रिपोर्ट ….

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