लेखक परिचय

रमेश पांडेय

रमेश पांडेय

रमेश पाण्डेय, जन्म स्थान ग्राम खाखापुर, जिला प्रतापगढ़, उत्तर प्रदेश। पत्रकारिता और स्वतंत्र लेखन में शौक। सामयिक समस्याओं और विषमताओं पर लेख का माध्यम ही समाजसेवा को मूल माध्यम है।

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-रमेश पाण्डेय-
up police

पुलिस एक ऐसा महकमा है, जिस पर हर असहाय, गारीब और समाज के वंचित तबके का फख्र है। उसे विश्वास है कि अगर किसी ने उसे आंख दिखाई, उसके अस्मत के साथ खिलवाड़ किया तो वह थाने जाकर पुलिस में प्राथमिकी दर्ज करा देगा। शायद विश्वास की इसी कड़ी ने पुलिस महकमे को प्रशासन का सबसे महत्वपूर्ण दर्जा समाज ने प्रदान कर रखा है। पर उत्तर प्रदेश में पिछले एक पखवारे से जिस तरह की घटनाएं सामने आ रही हैं, उससे खाकी कलंकित हो रही है। समाज में खाकी के प्रति घृणा का माहौल पैदा हो रहा है। अगर ऐसा ही रहा तो शायद ही अच्छे परिवार के लोग सिपही के पद पर भर्ती होने के लिए इच्छा जाहिर करें। इतना ही नहीं पुलिस महकमे के बड़ ओहदे पर बैठे अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठना शुरू हो गया है। हम जिक्र करते हैं कुछ घटनाओें का, जिससे आप खुद समझ जाएंगे कि पुलिस की इन करतूतों से समाज में उसका क्या स्थान बन रहा होगा। इलाहाबाद के शिवकुटी क्षेत्र में दो सिपाहियों समेत चार लोगों पर एक युवती ने दुराचार का आरोप लगाया है। सोनभद्र में सिपाहियों ने महिला के साथ दुराचार का प्रयास किया। सिपाहियों को लाइन हाजिर तो कर दिया गया, लेकिन मामले में लीपापोती शुरू कर दी गई है। कुशीनगर में सिपाही ने आर्केस्ट्रा कंपनी की लड़कियों से छेड़छाड़ की तो उसको बंधक बना लिया गया।

कौशांबी के पूरामुफ्ती इलाके की एक युवती ने इलाहाबाद के शिवकुटी थाने में तहरीर देकर आरोप लगाया है कि नयापूरा में रहने वाले मोहन व अजय के दोस्त राघवेंद्र ने 2009 में नौकरी दिलाने के बहाने उसे बुलाया था। यहां मोहन ने अजय के कमरे में उसे धोखे से नशीला पदार्थ खिलाया और दुराचार किया। इस दौरान विक्की नाम का भी शख्स मौजूद था। उसने जब पुलिस से शिकायत करने की बात कही तो राघवेंद्र ने शादी का झांसा देकर संबंध बनाता रहा। बाद में मोहन व अजय का सिपाही भर्ती में चयन हो गया और वाराणसी चले गए। राघवेंद्र भी गायब है। युवती की तहरीर पर रिपोर्ट दर्ज की गई है। सोनभद्र में सिपाहियों ने महिला के साथ पहले दुराचार का प्रयास किया और अब पीडि़ता के पुत्र पर तहरीर वापस लेने व झूठे केस में फंसाने का दबाव बनाया जा रहा है। रंगे हाथ पकड़े गए सिपाही अनुज सिंह व अमरेंद्र यादव के बचाव के लिए महकमा इसे पशु तस्करी से जोड़ मामले को मोड़ने में जुट गया है। पीडि़ता के पुत्र ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर मुकदमा पंजीकृत करने व दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। कुशीनगर में नशे में चूर पुलिस कर्मी बाजार में आर्केस्ट्रा में नर्तकियों के कमरे में घुस गया और अश्लील हरकत करने लगा। सिपाही की हरकत जब हद से आगे बढ़ गई तो हिम्मत जुटाकर नर्तकियों ने उसे एक कमरे में बंद कर पिटाई की और ताला बंद कर बाहर आ गईं। मौके पर पहुंची पुलिस ने आरोपी सिपाही को मुक्त कराया। यह तो कुछ घटनाएं है, जिनका जिक्र किया गया है। ऐसी ही न जाने कितनी घटनाएं वर्दी की आड़ में हो रही हैं। अभी समय है, अगर महकमे ने कोई सकारात्मक पहल न की तो वह दिन दूर नहीं जब गांव के लोग खाकी को गांव में घुसने से रोक देंगे।

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1 Comment on "उत्तर प्रदेश में कलंकित हुई ‘खाकी’"

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mahendra gupta
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कोई नई बात नहीं , कोई चिंता की भी बात नहीं , उन्हें व उनकी सरकार को पहले से ही आदत पड़ी हुई है

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