लेखक परिचय

पंकज व्‍यास

पंकज व्‍यास

12वीं के बाद से अखबार जगत में। लिखने-पढने का शुरू से शौक, इसी के चलते 2001 में नागदा जं. से प्रकाशित सांध्य दैनिक अग्रिदर्पण से जुड़ाव. रतलाम से लेकर इंदौर-भोपाल तक कई जगह छानी खाक. जीवन में मिले कई खट्टे-मीठे अनुभव. लेखन के साथ कंप्यूटर का नोलेज व अनुभव. अच्छी हिंदी व इंग्लिश टाइपिंग, लेआउट, ग्राफिक्स, डिजाइनिंग. सामाजिक-राजनीतिक और आध्यात्मिक विषयों पर लेखन. दिल का दर्द कविता में, अव्यवस्थाओं, विसंगतियों पर व्यंग्य-प्रहार. समाज के अनछुए पहलुओं पर लेखन. जिंदगी के खेल में रतलाम, दाहोद और झाबुआ से प्रकाशित दैनिक प्रसारण रतलाम से दूसरी पारी कि शुरुवात. फिलवक्त पत्रिका से जुडाव. मध्यप्रदेश के रतलाम में निवास.

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छुट भैयेजी मनाए जनम दिन। बांटें कंबल, मिठाई, फल-फूल बिस्किट। जनता मारे ताने, सुन मेरे भैये, जनम दिन पर याद नहीं आया होगा सगा बाप। पर, नेताजी का जनम दिन मनाएं धूमधाम। भैये जी क्या समझाए मुई जनता को मेरे यार। खुद का जनम दिन मत मनाओ, पर बड़े नेताजी का जनम दिन तो मनाना पड़ता है हर बार। मनाना पड़ता है हर बार। ये करवाता चुनावी वैतरणी पार। इलेक्शन में टिकट पक्का। जो न मनाए नेताजी का बड्डे, उसके हो जाते हैं दांत खट्टे। उसको लगता है धक्का। इलेक्शन के टाईम रह जाता है धरा का धरा।

ये लोकतंत्र है मेरे भाई, सगे बाप का जनम दिन चाहे न मनाया हो, नेताजी का मनाना पड़ता है…

happybirthdayअपने छुट भैये नेताजी बड़े नेताजी का जनम दिन बड़े धूमधाम से मना रहे थे। गरीबों को कंबल, बिस्किट, फल, फूल आदि बांट रहे थे। लगे हाथों वे अस्पताल के मरिजों व वृद्धाश्रम के वृद्धों को भी निपटाना नहीं भूले और नेताजी के जनम दिन की खुशी में उन्हें शामिल करते हुए उन्हें भी मिठाई, कंबल आदि बांट दिए।

ऐसे ही एक भैया जी वृद्धाश्रम में अपने लीडर का जनम दिन मना रहे थे कि जने ने पूछ लिया, आपको नेताजी का जनम दिन याद रहता है, क्या कभी आपको आपके बाप का भी जनम दिन याद रहा है? जिस खुशी के साथ आप बड़े नेताजी का जनम दिन मना रहे हैं, उतनी खुशी के साथ कभी अपने परिवार वालों का जनम दिन मनाया है? सुनकर नेताजी की पहले तो हवाईयां उड़ गई, फिर मुंह निपोड़ते हुए बत्तीसी दिखाई और हे…हे…हे… करके हंस दिए और बात को आई गई कर दिया…

बात आई गई, पर अपने भैये जी को दिल पर लग गई, जनता के सामने तो अपने दिल की बात कह नहीं सकते, सो नहीं कही, पर हमसे बोले- ये लोग भी कैसे-कैसे सवाल पूछ लेते हैं? अब, पूछ रहे हैं, कह रहे हैं कि कभी अपने बाप का जनम दिन मनाया क्या, जितने बड़े धूमधाम से नेताजी का जनम दिन मना रहे हों? मैने कहा- तो इसमें गलत क्या कहा?

नेताजी मुझे घूरते हुए बोले- भई अब तू भी यार! जनता हमरी मजबुरी नहीं समझती, तुम लोगों को तो समझ जाना चाहिए। मैंने कहा- तो समझाईए।

भैये जी ने होटल वाले को चाय का ऑर्डर दिया और लगे समझाने। भैये जी (छुट भैये नेताजी)बोले कि भई लिख्खाड़ अब हम अपने सगे बाप का जनम दिन मनाएं या न मनाए धक जाता है, लेकिन पार्टी से जुड़े हैं, तो अपने बड़े लीडर का जनम दिन तो मनाने की मजबूरी होती है, सो मानाना ही पड़ता है। इससे पब्लिसिटी मिलती है, कंबल, मिठाई, फल-फूट, बिस्किट आदि मनाने के बहाने लोगों से मुलाकात हो जाती है, लोगों से जुड़ाव हो जाता है।

भैये जी ने मुझे समझाया कि हाईकमान से जुड़े नेताजी के जनम दिन के बहाने हम जगत नारायण की सेवा करते हैं। जनता जनार्दन के बीच प्रकट होते हैं, जनता और नेता का जुड़ाव होता है, आखिर इससे हमारा लोकतंत्र ही मजबूत हो रहा है।

हम सुनते गए और भैयाजी सुनाते गए- कि नेताजी का जनमदिन मनाने का फायदा इलेक्शन में टिकट सिलेक्शन के टाईम पर मिलता है। जनम दिन मनाने के वक्त वो हमारी आंखों में चढ़े होते है, और केंडिडेट सिलेक्शन के वक्त हम उनकी आंखों में चढ़ जाते हैं? इस तरह छोटे-बड़े चुनावों में टिकट सॉलिड पक्का करवाने में जनम दिन की खासी भूमिका रहती है।

मैं बोला- कैसे? नेताजी ने साश्चर्य मेरी तरफ देखा मानों कह रहे हों इतना ही नहीं समझते। और फिर मेरी बुद्धि पर तरस खाते हुए अपना ज्ञान उढ़ेलने लगे कि खुदा न खास्ता इलेक्शन में जिन नेताजी का जनम दिन मनाया है, वो या उनका कोई अट्ठा पट्ठा पर्यवेक्षक बन गया, तो उनको याद रहता है कि इसने मेरा जनम दिन मनाया था, भले ही बेटे ने न मनाया हो, तो उसको याद कर केंडिडेट सिलेक्शन में हमरा सिलेक्शन कर देते हैं? आजकल बेटे बाप का जनम दिन कहां याद रखते हैं, और हम जैसे नेताजी याद रखें तो हम तो बेटे से बढ़कर हो जाते हैं ना?

मैंने भैये जी से प्रश्न किया कि मान लो जिनका जनम दिन नहीं मनाया है, वे ही नेताजी पर्यवेक्षक बन गया तो क्या? सुनकर भैये जी बोले- तो फिर तो गए काम से। मैने जिज्ञासावश उनसे पूछा- तो फिर इसका उपाय क्या?

सुनकर भैयेजी बोले- तुम्हारे बढ़े प्रेम के कारण मैं आज इस गूढ़ रहस्य को बता रहा हूं। मैंने अभिभूत होते हुए उनकी ओर देखा। तो वे बोले- तो सुनों इस रहस्या को बड़े नेताजी को उनके गुरुजी ने बताया था और गुरुजी को हाईकमान के एक बढ़िया से चमचे ने बताया था। आज उसी ज्ञान को तुम्हे बता रहा हूं, ध्यान से सुनना।

भैये जी का ऐसा कहना था कि मैने अपने कान खड़े कर लिया, सीधी कम करके बैठ गया। इस पर भैये जी के चेहरे पर चमक आ गई और गुढ़ रहस्य को मेरे प्रेम के कारण उध्दाटित करते हुए बोले- भई कलमकार। नेताजी के जनम दिन मनाने में कोई रिस्क नहीं लेना चाहिए। बहुत सोच समझ कर सर्वप्रथम तो सारे नेताजी के जनम दिन की लिस्ट तैयार कर लेनी चाहिए। सब नेताओं का जनमदिन बिना किसी पक्षपात के नेतानिरपेक्षता के साथ मनाना होगा। याद रखना होगा किसी नेताजी का जनम दिन भूलना नहीं होगा। चाहे अपने सगे बाप का भूल जाए, तो कोई बात नहीं, बाकी चुनाव में टिकट पक्का करना हो, तो सब नेताजी का जनम दिन मनाओ।

मैंने भैयाजी को कहा कि मैं तो समझ गया कि ये राजनीति है, इसमें नेताजी का जनम दिन मनाना ही पड़ता है। पर ये मुई जनता नहीं समझती है इनका क्या करें? सुनकर भैयेजी- जनता को समझाने के उपाय सोचने लग गए…अभी वो सोच ही रहे हैं।

बाकी एक बात है थिसिस लिखने वालों के लिए आज के टाईम पर ये बढिया विषय हो सकता है- राजनीति में नेताजी के जनम दिन का महत्व। कुछ मुद्दों के आधार पर एक बढ़िया-सा शोध तैयार हो सकता है कि कौन से नेताजी के जनम दिन मनाने वाले भैयाजी कितने हैं? किन-किन भैयाजी को जनमदिन मनाने का फायदा छोटे-बड़े चुनाव में मिला, उनकी संख्या कितनी है? कितने भैयेजी हैं, जो नेतानिरपेक्ष भाव से जनम दिन मनाते हैं? कब -कब और कहां-कहां नेताजी के जनम दिन को मनाने का फायदा किस-किस को मिला…हाल ही के निकाय चुनावों में कितने को जनम दिन मनाने का फायदा मिल रहा है, कितने को नहीं मिल रहा है? इन सारी बातों को लेकर एक डाक्यूमेन्ट्री भी बनाई जा सकती है।

आखिर, हमारे भैयेजी चुनाव में खड़े होकर लोकतंत्र को मजबूत बना रहे हैं और चुनाव में खड़े होने के लिए टिकट पक्का करने में नेताजी के जनम दिन के आयोजन का बड़ा महत्व होता है। इन सब बातों को ध्यान में रखते हुए राजनीतिक पार्टियों में भी जनम दिन प्रकोष्ठ की भी विधिवत स्थापना करना चाहिए। जो बकायादा ऐसे आयोजन करें और बढ़िया जनम दिन मनाने वाले की रिपोर्ट हाईकमान तक पहुंचाए।

नेताजी के जनम दिन को लेकर कैसे और क्या शोध हो सकते हैं, वो तो मुझसे अच्छे आप जानते हैं। इस तुच्छ व्यक्ति ने तो आपको क्लू दे दिया बाकी शोध तो आपको ही करना है…,आप में से ही किसी को नेता निरपेक्षता के रूल को फॉलो करना है। अगर आप या आपमें से कोई नेताजी के जनम दिन पर शोध करें या कोई नया महत्वपूर्ण तथ्य ध्यान में आए, तो जरूर बताईएगा। बताएंगे ना….

-पंकज व्यास, रतलाम

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