लेखक परिचय

सुधीर मौर्य

सुधीर मौर्य

मूलत: कानपुर (उ.प्र.) के रहने वाले सुधीरजी साहित्‍यकार हैं और इनकी आठ किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं। इन दिनों आप मुंबई में रहते हैं।

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-सुधीर मौर्य-
VAIDIK SAYEED

काश वैदिक जी ने जिस हिम्मत के साथ भारत के प्रधानमंत्री रहते नरसिम्हा राव जी के साथ ताश खेलते थे उसी हिम्मत के साथ हाफ़िज़ से विरोध दर्ज़ करते भारत के मुंबई में उसके द्वारा करवाये गए आतंकवादी हमले का। के वैदिक जी को हाफिज के घर पर नाश्ता करते हुए उसके द्वारा मुंबई में फैलाये गए सैकड़ों निरपराध लोगों का खून बिलकुल याद नहीं अाया। क्या संदीप उन्नीकृष्णन के बलिदान का कोई महत्व नहीं वैदिक जी की नज़र में।
क्यों उन्होंने पाकिस्तान में रह रहे हिन्दुओं के जबरन धर्म परिवर्तन पर हाफिज को आड़े हाथ नहीं लिया। पाकिस्तान में महीनों रहने के बाद भी क्या वैदिक जी को पाकिस्तान में हो रहे नाबालिग हिन्दू लड़कियों के बलात्कार और जबरन निकाह दिखाई नहीं दिये। क्यों वैदिक जी के दिल में ये ख्याल नहीं आया की रिंकल कुमारी जैसी उन लड़कियों और उनके परिवार वालों से मिलना चाहिए, जिन्हें जबरन नर्क़ की आग में झोंक दिया गया।

नाश्ते की मेज पर भारत की प्रधानमंत्री रही इंदिरा गांधी जी को विदेश नीति की सीख देने वाले वैदिक जी अपने पाकिस्तान में कश्मीर के सन्दर्भ में जो ब्यान दिया, आपको अंदाज़ा भी है की अगर आपने ऐसा ही बयान पाकिस्तान के नागरिक रहते सिंध की आज़ादी के बारे में भारत में दिया होता तो आपका क्या हाल होता ? अब तक आप पर देशद्रोह का मुक़दमा लादकर अापको कोट लखपत जेल के हवाले कर दिया जाता। जानते हैं न आप कोट लखपत जेल के बारे में जहां निर्दोष भारतीय नागरिक सरबजीत की हत्या हाफ़िज़ जैसे किसी भेड़िये ने कर दी थी।

वैदिक जी आप तो पिकनिक की तरह पाकिस्तान जाते रहते हैं, आपको अच्छी तरह से मालूम होगा कि किस तरह वहां पर हिन्दुओं के साथ तीसरे दर्ज़े के नागरिक जैसा व्यवहार किया जाता है। इस तरह के व्यवहार के लिए हाफ़िज़ सईद जैसे कट्टरपंथी ही जिम्मेदार हैं, आपको कतई लज़्ज़ा नहीं आई ऐसे कट्टरपंथियों के घर जाके उससे गलबहियां करते हुए। और कश्मीर क्या तुम्हारे घर के पिछवाड़े का कोई खेत है जिसे आप पाकिस्तानी अखबार डॉन के माधयम से आज़ाद करने की बात कर रहे थे। वैदिक जी आपका प्रताप अगर कभी था भी तो वो अब लाहौर की किसी गली में हाफिज़ के पैरो की धूल के साथ गलबहियां कर रहा होगा और वेद तो आपने बड़ी शराफत से मियां शरीफ के आफिस और घर में गिरवी रखते रहे हैं। वैदिक जी सच कहे तो आप वैदिक कहां “आलौकिक” हैं। तो कहिये हाफिज का “आलोक” अब कश्मीर में फैलाने का प्लान कर रहे हैं आप।

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1 Comment on "वैदिक हाफिज भाई-भाई"

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mahendra gupta
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बेशर्मी की हद देखिए कि अभी भी वह एक न्यूज़ चैनल पर कह रहे हैं, कि यदि मौका मिला तो वह एक बार फिर हाफिज से मिलेंगे ,इन दिनों हाफिज पाक चैनलों पर मुलाकात के बाद के घटना क्रम पर जिस प्रकार भारत के प्रति आग उगल रहा है , उस के बाद भी इस शख्श की यह बातें कुछ शक ही पैदा करती है

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