लेखक परिचय

तेजवानी गिरधर

तेजवानी गिरधर

अजमेर निवासी लेखक तेजवानी गिरधर दैनिक भास्कर में सिटी चीफ सहित अनेक दैनिक समाचार पत्रों में संपादकीय प्रभारी व संपादक रहे हैं। राजस्थान श्रमजीवी पत्रकार संघ के प्रदेश सचिव व जर्नलिस्ट एसोसिएशन ऑफ राजस्थान के अजमेर जिला अध्यक्ष रह चुके हैं। हाल ही अजमेर के इतिहास पर उनका एक ग्रंथ प्रकाशित हो चुका है। वर्तमान में अपना स्थानीय न्यूज वेब पोर्टल संचालित करने के अतिरिक्त नियमित ब्लॉग लेखन भी कर रहे हैं।

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प्रतिपक्ष की नेता श्रीमती वसुन्धरा राजे ने बाड़मेर जिले के कोलू (बायतू) में जसनाथ महाराज के भव्य मन्दिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह में मुख्य अतिथि पद से बोलते हुए फिर हुंकार भरी कि भंवरी मामले में सीबीआई छोटे नेताओं की तो जांच कर रही है, मगर कांग्रेस के बड़े-बड़े दिग्गजों पर हाथ नहीं डाल रही। सीबीआई का इस्तेमाल कांग्रेस लोगों को डराने, धमकाने और परेशान करने में कर रही है, ताकि वे सहम कर कांग्रेस के नेताओं का आधिपत्य स्वीकार कर लें, लेकिन उनका ये सपना कभी साकार नहीं होगा। उन्होंने यहां तक पूछा कि भंवरी मामले में सीबीआई की जांच मारवाड़ के इर्द-गिर्द ही क्यों हो रही है, बाकी के कांग्रेसी दिग्गजों को क्यों जांच से बाहर रखा गया है, जबकि उनके नाम चर्चाओं में हैं। सवाल ये उठता है कि अगर सीबीआई को दिग्गजों के नाम पता नहीं हैं या फिर वह जानबूझ कर उन पर हाथ नहीं डाल रही तो खुद वसुंधरा दिग्गजों नाम क्यों नहीं उजागर कर देतीं। जब से यह मामला उजागर हुआ है, वे लगातार पिटा हुआ रिकार्ड प्लेयर चला रही हैं। बीच-बीच में गायब हो जाती हैं और जब भी आती हैं तो वही राग अलापने लगती हैं। यदि यह मान भी लिया जाए कि सीबीआई तो कांग्रेस सरकार के हाथों में खेल रही है, मगर वसुंधरा जी पर तो किसी का दबाव नहीं है। वे तो पूरी तरह से स्वतंत्र हैं। माना कि सरकार चलाने की जिम्मेदारी मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की है, मगर नेता प्रतिपक्ष होने के नाते उनकी भी आखिरकार बड़ी जिम्मेदारी है। वह भी तब जब कि वे आगामी संभावित भाजपा सरकार की मुख्यमंत्री बनने जा रही हैं। असल में नेता प्रतिपक्ष होने के नाते उनकी जिम्मेदारी ज्यादा की बनती है कि यदि सरकार किसी मामले को दबा रही है तो वे उसे उजागर करें। मात्र कुछ अज्ञात दिग्गजों का जिक्र कर सरकार पर हमला करने की बजाय उन्हें बाकायदा नाम लेकर बताना चाहिए कि भंवरी मामले में और कौन शामिल हैं। केवल शोशेबाजी करने से क्या लाभ? ऐसी शोशेबाजी कर जनता को उद्वेलित करना जन भावनाओं से खेलने की संज्ञा में आता है। यदि उन्हें पता है और उनके पास सबूत हैं तो एक अर्थ में जानकारी छिपाने का कानूनी अपराध वे भी कर रही हैं। इस मामले में एक दिलचस्प बात ये भी है कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भी कह चुके हैं कि वे तो नियमानुसार कार्यवाही कर रहे हैं, मगर वसुंधरा ज्यादा नहीं बोलें, उनकी पार्टी के लोगों पर भी आंच आ सकती है। इसका मतलब ये निकलता है कि उन्हें पता है कि कौन-कौन से भाजपा नेता इस मामले में लिप्त हैं। यह दीगर बात है कि पुख्ता सबूत के अभाव में सरकार उन पर हाथ नहीं डाल पा रही। वैसे बताते ये हैं कि सीबीआई को जो सीडियां मिली हैं, उनमें अनेक नेता व बड़े अधिकारी भी संदिग्ध अवस्था में दिखाई दे रहे हैं। इसके बावजूद आरोप कुछ ही नेताओं पर मढ़े गए हैं। कहीं ऐसा तो नहीं कि मुख्यमंत्री गहलोत व वसुंधरा नूरा कुश्ती खेल रहे हैं। अपने गिरेबां में भी झांकें श्रीमती वसुंधरा ने मन्दिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह में यह भी कहा कि सरकार 3 साल तो जनता के बीच से गायब रही, अब जब उसे पता चला कि चुनाव आने वाले हैं और हमारा लोगों के दु:ख-दर्द सुनने का सिलसिला जारी है तो सरकार की नींद खुल गई और उसने फरमान जारी कर दिया कि सभी मंत्री 3 दिन दौरा करें। तीनों दिन मुख्यमंत्री का विरोध हुआ। जनता ने पूछ लिया 3 साल गायब थे, अचानक जनता की कैसे याद आ गई। सवाल ये उठता है क्या वे खुद पूरे तीन साल जनता के बीच रहीं। पूरा प्रदेश जानता है कि वे यदा-कदा अचानक गायब हो जाती हैं। कई बार तो उनके निजी समर्थकों तक को पता नहीं लग पाता कि वे कहां हैं। राजनीति पर नजर रखने वाले दिग्गज पत्रकार तक ये कहते हैं कि पिछले तीन साल में राज्य की राजनीति में ज्यादा सक्रिय नहीं रही हैं। विधानसभा में भी वे सिर्फ उपस्थिति दर्ज करवाती हैं। ऐसे में उन्हें सरकार से तीन साल गायब रहने पर सवाल करने का अधिकार है या नहीं, यह जनता पर ही छोड़ दिया जाना चाहिए। ऐसा प्रतीत होता है कि वे अगली मुख्यमंत्री बनने की खुशफहमी में जी रही हैं। खुद उनके पार्टी संगठन व संघ से संबंध कुछ खास अच्छे नहीं हैं फिर भी प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष चंद्रभान के हवाले से मान रही हैं कि कांग्रेस 50 सीटों पर ही सिमट जायेगी। यानि कि भाजपा अपने दम पर सरकार में नहीं आ रही, वे तो कांग्रेस का रायता ढुलने का इंतजार कर रही हैं। हो सकता है बिल्ली के भाग्य का छींका टूट ही जाए।

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