लेखक परिचय

संजय स्‍वदेश

संजय स्‍वदेश

बिहार के गोपालगंज में हथुआ के मूल निवासी। किरोड़ीमल कॉलेज से स्नातकोत्तर। केंद्रीय हिंदी संस्थान के दिल्ली केंद्र से पत्रकारिता एवं अनुवाद में डिप्लोमा। अध्ययन काल से ही स्वतंत्र लेखन के साथ कैरियर की शुरूआत। आकाशवाणी के रिसर्च केंद्र में स्वतंत्र कार्य। अमर उजाला में प्रशिक्षु पत्रकार। दिल्ली से प्रकाशित दैनिक महामेधा से नौकरी। सहारा समय, हिन्दुस्तान, नवभारत टाईम्स के साथ कार्यअनुभव। 2006 में दैनिक भास्कर नागपुर से जुड़े। इन दिनों नागपुर से सच भी और साहस के साथ एक आंदोलन, बौद्धिक आजादी का दावा करने वाले सामाचार पत्र दैनिक १८५७ के मुख्य संवाददाता की भूमिका निभाने के साथ स्थानीय जनअभियानों से जुड़ाव। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं के साथ लेखन कार्य।

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नागपुर में दो दिन तक चले कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स के सम्मेलन में वैट विरोधी गुस्सा व्यापारियों में इतना ज्यादा था कि उन्होंने नाग विदर्भ चेंबर ऑफ कॉमर्स के प्रांगण में 12 अप्रैल को एक वैट का पुतला फूंक दिया। 26 राज्यों से आए व्यापारी नेताओं ने कसम खाई कि अब वैट में हुई बढ़ौतरी के विरूद्ध आंदोलन तेज किया जाएगा और यह तब तक नहीं रूकेगा जब तक सरकार बढ़ाई हुई किमतों को वापस नहीं ले लेती। कन्फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष बी.सी. भरतिया और महामंत्री प्रवीन खण्डेलवाल ने कहा कि सरकार ने वैट के मुद्दे पर देशभर के व्यापारियों के साथ विष्वासघात किया है और अब वक्त आ गया है सरकारों को यह बताने का कि व्यापारी इस मुद्दे पर चुप नहीं बैठेंगे।

भरतिया ने कहा कि कन्फेडरेशन देशभर में सरकार के खिलाफ एक आंदोलन चलाएगा क्योंकि अगले साल पूरे देशभर में जी.एस.टी. कानून ला रही है और उसकी तैयारियां न ही केंद्र सरकार और न ही राज्य सरकार ने की है। आखिरकार अब हम सरकार पर कैसे भरोसा करें, जब कि उसने वैट के मुद्दे पर पूरी तरह से यू-टर्न ले लिया है। उन्होंने कहा कि वैट के श्वेत पत्र में यह साफ था कि राज्य सरकारें मनमाने ढंग से कभी भी वैट के साथ छेड़छाड़ नहीं करेगी। यही नहीं, पूरे देश में टैक्स को लेकर एक कानून होगा। लेकिन दोनों में से सरकार ने अपना कोई वायदा पूरा नहीं किया। इसलिए जब तक सरकार इस देश में आसान और एक समान कानून लागू नहीं करेगी, व्यापारी सरकार के खिलाफ लांमबंद रहेंगे।

साथ ही दो दिन तक चले इस अधिवेशन में इस बात पर भी फैसला लिया गया कि केंद्र सरकार ने जो रिटेल ट्रेड में विदेषी निवेश को इजाजत दी है उसे भी व्यापारी समाज स्वीकार नहीं करेगा। उनके मुताबिक भारत एक व्यापार प्रधान देश है और अगर बहुराश्ट्रीय कंपनियों को इसमें आने की इजाजत देंगी तो भारतीय व्यापारी बरबादी की कगार पर पहुंच जाएगा।

व्यापारियों ने यह भी फैसला लिया कि अब से 25 जून को हर साल व्यापारी दिवस के रूप में मनाया जाएगा। प्रवीन खण्डेलवाल ने यह जानकारी दी कि दानवीर व्यापारी भामाशाह का जन्म 25 जून को हुआ था और उन्होंने मेवाड को बचाने के लिए अपनी तमाम संपत्ति और धन महाराणा प्रताप को दे दिया था, ताकि महाराणा मुगलों से लड़ सकें। ऐसे महान व्यापारी पूरे देश के लिए एक प्रेरणा का स्त्रोत है और उन्हें एक स्तंभ के रूप में स्थापित करना जरूरी है। श्री खण्डेलवाल के मुताबिक केंद्र सरकार से 25 जून को व्यापारी दिवस के रूप में मान्यता दिये जाने के लिए वो बातचीत करेंगे। साथ ही वो केंद्र सरकार से इस बात की भी मांग करेंगे कि भामाषाह की एक बडी प्रतिमा दिल्ली में लगाने की इजाजत दी जाए।

इस अवसर पर नाग विदर्भ चेंबर ऑफ कॉमर्स के सर्वश्री हेमंत खुंगर, अध्यक्ष, मयुर पंचमतिया, वरिश्ठ उपाध्यक्ष, प्रकाश मेहाडिया, मानद सचिव, रामदास वजानी, प्रभाकर देशमुख, विजय केवलरामानी, अतिरिक्त उपाध्यक्ष, फारूकभाई अकबानी, राजू व्यास, अतिरिक्त सहसचिव, लक्ष्मीकांत अग्रवाल, मनुभाई सोनी, रविंद्रकुमार गुप्ता, सचिन पुनियानी, षंकर सुगंध, आनंद मेहाडिया, प्रकाश जैस, लालचंद गुप्ता, आसनदास बालवानी, डॉ. अजय सोनी, प्रिंस उप्पल, ज्ञानेष्वर रक्षक, बजरंगलाल अग्रवाल, हस्तीमल कटारिया, गजानंद गुप्ता, आदि प्रमुखता से उपस्थित थे।

-संजय स्वदेश

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