लेखक परिचय

मुकेश चन्‍द्र मिश्र

मुकेश चन्‍द्र मिश्र

उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले में जन्‍म। बचपन से ही राष्ट्रहित से जुड़े क्रियाकलापों में सक्रिय भागेदारी। सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और देश के वर्तमान राजनीतिक तथा सामाजिक हालात पर लेखन। वर्तमान में पैनासोनिक ग्रुप में कार्यरत। सम्पर्क: mukesh.cmishra@rediffmail.com http://www.facebook.com/mukesh.cm

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vandematramवन्दे मातरम नहीं पूजा है किसी की, 
ये तो सिर्फ एक माँ को उसके बेटे का सलाम है।
यही समझाते हमने सदियाँ गुजार दीं,
पर आज तक इसमें रोड़ा इस्लाम है।।

जिस सोच ने विभाजित कर दिया देश को, 
वो आज भी उसी रूप में ही विद्यमान   है।
सेकुलर और तुष्टीकरण की नीतियों से,
हिंद में भी बन गए कई तालिबान  हैं।।

राष्ट्रभक्त मुस्लिमो को बरगला रहें हैं जो, 
ऐसे  एक  नहीं  और कई  रहमान  हैं।
फूंक के तिरंगा यदि जिन्दा है कोई तो, 
संविधान ऐसे चन्द गद्दारों का गुलाम  है।।

मातृभूमि और माँ की सेवा से बड़ा ना धर्मं, 
ऐसा सोचना भी क्या सांप्रदायिक काम है?
मुल्क से भगावो ऐसे देशद्रोहियों को जो,
कहे की माँ का वंदन अभिनन्दन हराम है।।

 

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2 Comments on "वन्दे मातरम"

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DR.S.H.Sharma
Guest

I congratulate you on your fearless patriotic expression .The change is possible if we can crush the Congress and its policy of appeasement of minorities and anti India policies by defeating in future elections.

BINU BHATNAGAR
Guest

बहुत अच्छी रचना

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