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पत्रकारिता विश्वविद्यालय में स्वामी विवेकानंद जयंती के आयोजन के साथ सांध्यकालीन पाठ्यक्रमों का सत्रारंभ

भोपाल, 12 जनवरी। भारत की चित्ति से साक्षात्कार करवाने वाले स्वामी विवेकानंद हैं। हमारा राष्ट्रीय एवं जातीय आदर्श क्या होना चाहिए, यह हमें स्वामी विवेकानंद ने बताया। विवेकानंद ने बताया कि त्याग एवं सेवा ही हमारे राष्ट्रीय एवं जातीय आदर्श हैं और इसे तीव्र कर समाज से हर बुराई को हटाया जा सकता है। विवेकानंद का मानना था कि दरिद्र की सेवा करने वाला ही सच्चा महात्मा है। यह विचार आज विवेकानंद जयंती के अवसर पर माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में प्रख्यात साहित्यकार, लेखक एवं चिंतक डॉ. देवेंद्र दीपक ने व्यक्त किये। इस कार्यक्रम में डॉ. देवेंद्र दीपक ने “स्वामी विवेकानंद के सपनों का भारत” विषय पर अपने विचार व्यक्त किये। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बृज किशोर कुठियाला ने की।

अपने वक्तव्य में डॉ. देवेंद्र दीपक ने कहा कि पूरी दुनिया के सामने भारत की सबसे प्रभावशाली छवि स्वामी विवेकानंद ने बनाई। स्वामी विवेकानंद, रामकृष्ण परमहंस के अनुयायी थे। उन्होंने अपने गुरु से मिले ज्ञान को प्रयोगशीलता के माध्यम से समाज के सामने रखा। डॉ. दीपक ने कहा कि स्वामी विवेकानंद समाज को एक जातिवैद्य और एक सोशल पैथोलॉजिस्ट के रूप में मिले और उन्होंने यह बताया कि समाज में व्याप्त बुराई रूपी रोगों को कैसे दूर किया जा सकता है।

स्वामी विवेकानंद सचमुच एक ऐसे महापुरुष थे जिन्होंने समाज को नवाचार से परिचित कराया। स्वामी विवेकानंद ने अपने दर्शन में तीन बातों- शक्ति, शील और सेवा पर जोर दिया। शक्ति में छात्र-तेज, शरीर-बल और बुद्धिबल शामिल है। दूसरा तत्त्व शील या चरित्र है- नैतिक चरित्र से ही किसी समाज या राष्ट्र का निर्माण होता है। तीसरा तत्त्व सेवा है। सेवा ही सच्ची तपस्या है। जब हम किसी की सेवा करें तो हमारे मन में उसके प्रति दया या करुणा का भाव नहीं आना चाहिए। स्वामी विवेकानंद ने सेवा के अंतर्गत शिक्षा और चिकित्सा पर जोर दिया। स्वामी विवेकानंद ने जातिप्रथा और अस्पृश्यता के खिलाफ आवाज उठाते हुए ‘मतछुओवाद’ का घोर विरोध किया है।

विवेकानंद जयंती के अवसर पर विश्वविद्यालय के सांध्यकालीन पाठ्यक्रमों का सत्रारंभ भी हुआ। विश्वविद्यालय ने शैक्षणिक सत्र 2011-12 से पांच पी.जी. डिप्लोमा पाठ्यक्रम प्रारंभ किये हैं। यह पाठ्यक्रम वेब संचार, वीडियो प्रोडक्शन, पर्यावरण संचार, भारतीय संचार परंपराएं और यौगिक स्वास्थ्य प्रबंधन एवं आध्यात्मिक संचार विषयों में उपलब्ध हैं। इस कार्यक्रम में इन पाठ्यक्रमों में प्रवेश लेने वाले युवा, नौकरी पेशा, व्यवसायी एवं गृहणियां भी उपस्थित थीं। इस अवसर पर अध्यक्षीय उद्बोधन में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बृज किशोर कुठियाला ने विभिन्न पाठ्यक्रमों के उद्देश्यों, विषयवस्तु एवं महत्व से प्रवेशार्थियों को परिचित कराया। साथ ही सांध्यकालीन पाठ्यक्रमों की एकवर्षीय योजना का ब्यौरा प्रस्तुत किया।

स्वामी विवेकानंद पर अपने विचार व्यक्त करते हुए प्रो. कुठियाला ने कहा कि आज राष्ट्रीय युवा दिवस भी है और विश्वविद्यालय आने वाले एक वर्ष तक स्वामी विवेकानंद पर केंद्रित कार्यक्रम आयोजित करेगा। उन्होंने कहा कि युवाओं के लिए स्वामी विवेकानंद का सबसे बड़ा संदेश यह है- “उठो, जागो और तब तक रुको नहीं जब तक मंज़िल प्राप्त न हो जाए”। स्वामी विवेकानंद विज्ञान एवं अध्यात्म के सबसे बड़े प्रणेता थे। स्वामी विवेकानंद के सपनों के भारत को यदि हमें एक पंक्ति में व्याख्यायित करना हो तो हम कह सकते हैं कि स्वामी विवेकानंद के सपनों की मानवता को ही वे सपनों के भारत में समाहित करते थे। स्वामी जी ने मनुष्य को एक भौतिक मानव के साथ-साथ एक आध्यात्मिक मानव के रूप में भी देखा। इस अवसर पर विश्वविद्यालय ने डॉ. देवेंद्र दीपक का शॉल-श्रीफल से सम्मान किया। इस कार्यक्रम में शहर के प्रबुद्धजन, मीडियाकर्मी, विश्वविद्यालय के समस्त शिक्षक, अधिकारी एवं विद्यार्थी उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. पवित्र श्रीवास्तव एवं आभार प्रदर्शन श्री दीपक शर्मा ने किया।

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