लेखक परिचय

जगमोहन ठाकन

जगमोहन ठाकन

फ्रीलांसर. यदा कदा पत्र पत्रिकाओं मे लेखन. राजस्थान मे निवास.

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-जग मोहन ठाकन-   voter

हाल में संपन्न विधान सभा चुनावों में काफी लोग वोटर कार्ड होते हुए भी मतदाता सूची में नाम कटा होने की वजह से मतदान नहीं कर पाए ! अब भारतीय लोकतंत्र के पंचवर्षीय कुम्भ का शुरुआती दौर प्राम्भ हो चुका है ! विभिन्न पार्टियों ने अपने उमीदवारों की सूचियां बनाने का कार्य शुरू कर दिया है ! चुनाव आयोग ने भी मतदाता सूचियों का प्रथम जनवरी २०१४ को आधार मानकर प्रकाशन आरम्भ कर दिया है! राजस्थान चुनाव विभाग ने भी १० फरवरी २०१४ को मतदाता सूचियाँ अपनी वेबसाइट पर डाल दी हैं ! पिछले वर्ष हुए विधान सभा चुनाव  को हालाँकि मात्र दो माह ही हुए हैं, परन्तु इसी दो माह के अन्तराल के बाद विभाग द्वारा जारी सूचना के मुताबिक इस संक्षिप्त पुनरीक्षण कार्यक्रम के दौरान राज्य में १८ लाख से अधिक नए मतदाताओं के नाम मतदाता सुची में जोड़े गए हैं ! अब राज्य में कुल ४ करोड़ २५ लाख ४२ हजार मतदाता हो गए हैं  , जिनमे २ करोड़ २४ लाख ५ हजार पुरुष तथा २ करोड़ १ लाख ३७ हजार महिला मतदाता शामिल हैं ! राज्य के जयपुर जिले में सर्वाधिक २ लाख ७७ हजार नए मतदाताओं के नाम जोड़े गए हैं ! सबसे कम १० हजार मतदाता प्रतापगढ़ जिले में  नए बने हैं !

अब प्रश्न यह उठता है कि नए मतदाता के रूप में जुड़ने वालों में एकदम १८ लाख की वृद्धि कैसे हुई है ? क्या प्रदेश में १ जनवरी २०१४ को १८ वर्ष की आयु हासिल करने वालों की तादाद में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है ? या किसी दुसरे प्रान्त से माइग्रेशन हुआ है ? अकेले जयपुर जिले में २ लाख ७७ हजार नए मतदाताओं का नाम जुड़ना क्या संकेत करता है ? जैसा कि राजनितिक पार्टियां एक दूसरे पर फर्जी मत बनवाने का आरोप लगाती रहीं हैं, क्या इस तथ्य में भी कुछ दम है ? या पिछले चुनाव में सरकार द्वारा चलाये गए मतदाता जागरूकता अभियानों का यह नतीजा है, जिसके कारण मतदान प्रतिशत में भी काफी वृद्धि  हुई थी ! और हो सकता है कि उसी जागरूकता अभियान का ही असर हो कि लोगों ने अधिक से अधिक मत बनवाने में रूचि ली हो !

परन्तु एक पक्ष इससे हटकर भी ध्यान आकृष्ट करता है ! गत चुनाव में जगह जगह से समाचार प्राप्त हुए थे कि लोगों के पास फोटो मतदाता पहचानपत्र तो थे , परन्तु  मतदाता सूचियों से उनके नाम नदारद थे ! एक समाचार के अनुसार गत विधान सभा चुनाव में अकेले डेगाना विधान सभा क्षेत्र में लगभग दस हजार ऐसे मतदाता वोट डालने से वंचित रह गए थे, जिनके पास वोटर आईडी कार्ड तो था , परन्तु उनका नाम वोटर लिस्ट से काट दिया गया था ! यह मात्र उदहारण है , लगभग हर विधान सभा क्षेत्र में हजारों लोग वोटर पहचान पत्र हाथ में लिए दिनभर अधिकारियों के पास घूमते रहे, परन्तु मतदाता सूची में नाम न होने के कारण मतदान से वंचित रह गए!

चुनाव विभाग पर उपरोक्त उदाहरण सवालिया निशान लगाता है कि आखिर क्यों कट जाते हैं ऐसे मतदाताओं के नाम ? क्या नाम काटे जाने की प्रक्रिया में किसी व्यस्थित सिस्टम का अभाव है ? क्यों नहीं मतदाता पहचान पत्र होने के बावजूद मतदाता सूची से नाम हटाने वाले कर्मचारी व अधिकारियों की जवाबदेही तय करके उनके खिलाफ कारवाई की जाती ? मतदान करना व्यक्ति का अपना पक्ष या विचार अभिव्यक्ति का मौलिक अधिकार है, कैसे कोई  किसी के  मौलिक अधिकार का हनन कर सकता है ? ऐसी व्यस्था की जाये कि जब किसी का नाम मतदाता सूची से हटाया जाये तो बाकायदा उस व्यक्ति को उसके अंतिम ज्ञात निवास पर पंजीकृत नोटिस तथा बूथ लेवल अधिकारी द्वारा व्यक्तिगत तौर पर सूचित करना सुनिश्चित हो ! तथा मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया में किसी राजपत्रित अधिकारी का पुष्टि प्रमाण पत्र अवश्य लिया जाये ! मात्र इतना कहने से  कि बी एल ओ द्वारा घर घर जाकर किये गए सर्वे के आधार पर नाम काटे जाते हैं , पीड़ित मतदाताओं को संतुष्ट नहीं किया जा सकता ! आरोप लगाये जाते रहे हैं कि बी एल ओ केवल विद्यालय या पंचायत घर में बैठकर चंद चहेतों के कहने से वोट काटने या बनाने की प्रक्रिया को अंजाम देते हैं ! वास्तविकता तो यह है कि अधिकतर बी एल ओ न तो घर घर जाते हैं तथा न ही घर घर जाकर मतदाता पर्ची वितरण का काम करते हैं ! एक जानकारी के अनुसार गत विधान सभा चुनाव में राज्य में वोट डालने वाले करीब एक करोड़ से ज्यादा मतदाताओं  तक फोटोयुक्त पर्ची नहीं पहुंच पाई ! विभाग ने इतनी बड़ी कोताही पर दोषी बीएलओ व चुनाव से जुड़े अन्य कर्मचारियों पर क्या कार्रवाई की ? सरकार व चुनाव विभाग को समय रहते चेतना होगा ,अन्यथा  लोकतंत्र के २०१४ के पंचवर्षीय कुम्भ में कहीं पुनः इसी समस्या का दोहराव न हो और लोकतंत्र के स्तम्भ मतदाता हाथ में वोटर कार्ड लिए मतदान करने के लिए इधर उधर भटकते रहें तथा पुनः उनका नाम मतदाता सूची से नदारद मिले !

केवल चुनाव विभाग की वेबसाइट या दीवारों पर नारे लिखने से मतदान का अधिकार नहीं मिल पायेगा ! मतदाताओं को भी जागरूक होना पड़ेगा और उन्हें भी समय समय पर मतदाता सूचियों का अवलोकन कर सुनिश्चित करना होगा कि उनका नाम मतदाता सूची में विद्यमान है , अन्यथा दाग ढूंढ़ते रह जाओगे, की तर्ज पर मतदान के समय मतदाता सूची में अपना नाम ढूंढ़ते ही रह जाओगे  !

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