लेखक परिचय

मृत्युंजय दीक्षित

मृत्युंजय दीक्षित

स्वतंत्र लेखक व् टिप्पणीकार लखनऊ,उप्र

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budgetमृत्युंजय दीक्षित

केंद्रीय वितमंत्री अरूण जेटली ने वर्ष 2016- 17 का बहुप्रतीक्षित बजट पेशकर दिया है। एक प्रकार से यह बजट मोदी सरकार का पहला पूर्णकालिक बजट माना जा सकता है। अभी तक जो बजट सरकार की ओर से पेश किये गये थे उसमें यूपीए- दो की झलक दिखलायी पड़ रही थी। यह पहला ऐसा बजट हैं जिसमें किसानों और गरीबों के लिए बेहद अच्छी योजनाओं की घोषणायें की गयी है। यदि यह सभी योजनायें बेहद ईमानदारी के साथ धरातल पर उतरने में सफल रही तो यह राजनीति के क्षेत्र में राजग सरकार के लिए गेमचेंजर भी साबित हो सकती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किसानों की आय को दोगुनी करने के लिए वर्ष 2022 तक का लक्ष्य रखा है। जिसको ध्यान में रखते हुए कई ऐलान किये गये हैं। एक प्रकार से देखा जाये तो मोदी सरकार का यह बजट गांव ,गरीब, किसान और युवाओं को समर्पित हैं । एक प्रकार से आजादी के बाद पहली बार ऐसा बजट पेश किया गया है जिसमें मुख्य फेाकस ग्रामीण क्षेत्रों की मजबूती, कृषि विकास और बड़े पैमाने पर रोजगारांे का सृजन है। बजट में सड़क निर्माण पर पूरा जोर दिया गया है। मनरेगा को मजबूत बनाने के लिए सरकार ने दिल खेालकर धन उपलब्ध कराया है।

आम बजट के प्रस्तावों में जो सबसे अच्छी बात सामने आ रही है वह है अगले तीन वर्षो में पांच करोड़ बीपीएल परिवारों में रसोई गैस को पहुंचाया जायेगा। सबसे बड़ी बात यह है कि यह कनेक्शन महिलाओं के नाम पर होगा। इस वर्ग की महिलाओं को रसोई गैस कनेक्शन उपलब्ध कराने के लिए शुरूआती लागत पूरी करने के लिए दो हजार करेाड़ रूपये का प्रावधान रखा गया है तथा इस विशाल सरकारी मिशन को पूरा करने के लिए सरकार ने पूरी तैयारी भी कर ली है।  यदि यह योजना सफलतापूर्वक परवान चढ़ गयी तो चूल्हे में खाना बनाने वाली महिला तथा उस परिवार का स्वास्थ्य तो सुधरेगा ही  साथ ही साथ पर्यावरण को होन वाले नुकसान को भी रोका जा सकेगा सबसे खास बात यह होगी कि इस योजना के सफलतापूवक संपन्न हो जाने के बाद इन बीपीएल परिवारें के रहन- सहन में भी काफी बदलाव आ जायेगा। यही कारण है कि यह बजट बदलाव लाने का बजट कहा जा रहा है। अब देश की अर्थव्यवस्था किसानांे, गरीबों और दलितों की होने जा रही है। विषेशज्ञों का मानना है कि  इस बजट से अर्थव्यवस्था का भरोसा बढे़गा  और ढंाचागत विकास को  अभूतपूर्व गति मिलेगी। यह बजट सड़क, रेलवे , जलमार्ग, बंदरगाह और ऊर्जा क्षेत्र में विकास को अभूतपूर्व गति देगा। बजट में बड़े क्षेत्र को शामिल किया गया है और व्यापक योजनाएं व कदम उठाये गये हैं। यह बात सही है कि अर्थवयवस्था को इनसे मिलने वाला लाभ इनके जल्द और बेहतर क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा । सरकार ने बजट प्रावधानों में कई छोटे-  छोटे किन्तु अतयंत महतवपूर्ण कदमों का भी  ऐलान किया है जिससे बजट का प्रारूप सर्वव्यापक हो गया है, यह बजट सबके लिये हो गया है।

वर्ष 2016 – 17  के बजट में अब माल के तर्ज पर रोज दुकानें खेालने की तर्ज पर खुदरा बाजार को भी सातों दिन खेालने की बात कही गयी है जिसमें अब सातों दिन दुकानें खुलेंगी लेकिन इन दुकानोें में काम करने वाले लोगों को एक साप्ताहिक अवकाश देने की अनिवार्यता भी रखी गयी है। बजट प्रावधान के अंतर्गत आधार कार्ड को संवैधानिक दर्जा देने की बात कही गयी है जिसके लिए लोकसभा में विधेयक रख भी दिया गया है। नये कल – कारखानों को अपना काम धंधा करने के लिए कम टैक्स देना होगा। सरकार ने बजट प्रस्ताव में बैंकों केे क्षेत्र में व्यापक बदलाव लाने वाला एक रोडमैप पेश किया है जिसमे छोटे बैंकों को मिलाकर महाबैंक बनाने की एक अत्यंत महत्वपूर्ण योजना है अर्थात आने वाले दिनों  में  छोटे बैंकांे का युग सामप्त होने जा रहा है । अब देश के किसानों को खाद की सब्सिडी भी सीधे उनके खातों में ही भेजी जायेगी जिससे इस क्षेत्र में होने वाले नुकसान को रोका जा सकेगा। आम बजट में सरकारी लुभावनी नीतियों से किनारा कसा गया है। पंचवर्षीय योजनाओं का भी अंत होने जा रहा है। यह निर्णरू एक बहुत बड़े बदलाव का संकेत माना जा सकता है। पंचवर्षीय योजनायें  नेहरू जी का एक बड़ा योगदाना माना जाता रहा है। अभी तक की सभी सरकारं पंचवर्षीय योजनाओं का खूब ढोल- नगाड़े के साथ प्रचार प्रसार करती रही हैं लेकिन इनका लाभ गरीब लोगांे तक नहीं पहुंचा और देश की अधिकांश  जनता आज भी गरीबी में अपना जीवनयापन करने को मजबूर हो रही है। योजना अयोग को मोदी सरकार पहले ही समाप्त कर चुकी है और और नीति आयोग उसकी जगह ले चुका है।

आगामी वर्षो में  राज्यों को विकास के लिए केंद्र सरकार की आश्रै ताकना नहीं पड़ेगा अर्थात एक प्रकार से राज्यों की विकास योजनाओं को तय करने में केंद्र सरकार की भूमिका सीमित हो जायेगी। बजट प्रावधानों के अंतर्गत सातवें वेतन आयोग और वन रैंक वन पेंशन को लागू करने की बात कही गयी है जिसके कारण सरकार पर आर्थिक बोझ भी बढ़ेगा। साथ ही कुछ और कदम उठाये गये हैं जिससे ग्रामीण क्षेत्रों को व्यापक लाभ होगा और उनकी जीवनशैली में बदलाव आयेगा। जिसमें 11 नये नवेदय विद्यालय और हर जिले में डायलिसिस की सुविधा दी जायेगाी। वहीं दूसरी ओर एक अत्यंत महत्वाकांक्षी स्वास्थ्य बीमा योजना की भी घोषण की गयी है।

लघु उद्यमियों और विशेषज्ञों का मानना है कि बजट में जो उपाय किये गये हैं उनसे फसलों के उत्पादन के साथ ग्रामीणों की आय में वृद्धि होगी। बढ़ी  हुई खरीदारी क्षमता बाजार मंे मांग पैदा करेगी।जेनेरिक दवाओं के 3000 आउटलेट खुलने से कंपनियों का काकस टूटेगा और जनता को सस्ती दवायें मिल सकेंगी। यह बजट स्टार्ट अप इंडिया और मेक इन इंडिया अभियान को गति एवं बल प्रदान करने वाला बजट है।

बजट पेश होने के बाद सबसे बड़ा बदलाव यह आया है कि शेयर बाजार मजबूती के साथ बंद हो रहा है और डालर के मुकाबले रूपये में भी कुछ मजबूती अवश्य आयी है। ऐसा पहली बार हुआ हेै कि जब बजट पेश होता था तो उसके बाद शेयर बाजार में गिरावट दर्ज की जाती थी लेकिन अबकी बार ऐसा नहीं हुआ। बजट प्रस्तावों के बाद निवेशकों में व बाजार में एक बार फिर लोगों का भरोसा कायम हुआ है। इस बात पर विरोधी दलों का ध्यान नहीं गया। विरोधी दल तो हमेशा की तरह इस बार भी अपनी विकृत सोच के कारण आलोचना करते ही नजर आये।  पर्वू वित्तमंत्री यशवंत सिंहा ने बजट की सराहना की जबकि विपक्ष ने इसे निराशावादी किसान विरोधी करार दिया। हर बार की तरह उप्र के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इस बार भी  उत्तर प्रदेश को कम धन आवंटित करने और प्रदेश के साथ सौतेला व्यवहार करने की बात कही। सबसे बड़ी बात यह है कि जब कांग्रेस के पास कुछ नहीं रहता है तो वह केवल यह कहकर विरोध जता रही है कि बजट में कुछ भी नया नहीं हैं और अधिकांश योजनायें हमारी हैं। इस दौश्रान एक खास बात और हुई है कि सरकार पर विपक्ष ने केवल 45 जिलों में कृषि फसल बीमा योजना लागू कने की आलोचना की थी लेकिन अब पीएम मोदी ने राष्ट्रपति के अभिभाषण के दौरान ही आगामी एक अप्रैल से पूरे देश में लागू करने की बात कही है। आज इस बजट की आलोचना करने के लिए विपक्ष के पास कुछ विशेष तर्क नहीं रह गया है। गांव, गरीब और किसान के जीवन में बदलाव लाने बजट  पर एक बड़ा वर्ग  तर्क दे रहा है कि   इस बजट के बाद सरकार ने अपनी किसान विरोधी छवि को कुछ हद तक बदलने का प्रयास किया है अब वह इन प्रयासों में कितनी सफल हो पायेगी यह तो आने वाला समय ही बतायेगा। फिलहाल यह बजट वयापक बदलाव लाने वाला बजट है जिसका असर एक दो वर्षो ं में दिखलायी पड़ेगा।

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