लेखक परिचय

गिरीश पंकज

गिरीश पंकज

सुप्रसिद्ध साहित्‍यकार गिरीशजी साहित्य अकादेमी, दिल्ली के सदस्य रहे हैं। वर्तमान में, रायपुर (छत्तीसगढ़) से निकलने वाली साहित्यिक पत्रिका 'सद्भावना दर्पण' के संपादक हैं।

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गिरीश पंकज

अन्ना हजारे के अहिंसक आन्दोलन के आगे सरकार को झुकाना पडा और संसद के दोनों सदनों में जनलोकपाल विधेयक पर सहमित नज़र आई, चर्चा हुई. बेशक अभी विधेयक पारित नहीं हुआ है,लेकिन कल इसे पारित करना ही होगा, क्योंकि संसद से बड़ी जन सनसन होती है और जन संसद का रुख साफ़ है. पूरे देश में जो अन्ना-लहर चली और जिस तरह से लोगों ने भ्रष्टाचार के विरुद्ध गुस्से का इज़हार किया, उसे देख कर सांसदों को समझ लेना चाहिए कि अगर उन्होंने जन लोकपाल के प्रावधानों का विरोध किया तो, वे कहीं के नहीं रहेंगे. अगले चुनाब में सब को जनता निपटा देगी. अन्ना ने जगाया भारत को, अब इन्कलाब तो आएगा. इसमें दो राय नहीं कि इस देश की जनता भ्रष्टाचार से त्रस्त हो चुकी है. यही कारण है कि अन्नाके आन्दोलन को भरपूर सहयोग मिला. छोटे-छोटे कस्बो तक यह आन्दोलन फैला और हर कही ”तू भी अन्ना, मै भी अन्ना, अब तो सारा देश है अन्ना” गूंजने लगा. तब मेरे कवि-मन ने लिखा-

जागा-जागा देश मेरा, भ्रष्टाचारी पस्त हुए,

हर कोई जैसे आज एक अन्ना हो गया.

बच्चा, बूढ़ा, नौजवान हर कोई जागा अब,

कैसा था ये देश मेरा आज कैसा हो गया.

सर पर अन्ना टोपी, हाथ में तिरंगा थामे

हर कोई सजा-धजा एक बन्ना हो गया.

दिल्ली की गिल्ली अब उड़ गई देखिये,

देखते ही देखते ये देश अन्ना हो गया..

गाँधी की अहिंसा को अपना सात्विक हथियार बना कर अन्नाने लोगों को जगाया और अहिंसा के मन्त्र को सफल भी किया.वे बार-बार अहिंसा कही सदेश देते रहे, क्योंकि उन्हें सत्ता के चरित्र कापता है. अगर आन्दोलन थोड़ा भी हिंसक हो जाता तो सत्ताके इशारे पर पुलिस आन्दोलन को कुचल कर रख देती. लेकिन ऐसी नौबत ही नहीं आई क्योंकि पूरे देश में आन्दोलनकारियों नेधैर्य से काम लिया. इसलिये सरकार भी बेबस बनी रही. उसे आन्दोलन को कुचलने का मौका ही नहीं मिला. और अगर वह आन्दोलन को रामदेव बाबा के आन्दोलन की तरह जबरन कुचलने कि घटिया कोशिश भी करती तो, पूरी दुनिया में भारत की थू-थू ही होती, इसलिये समझदार सरकार ने अपनी गलती नहीं दोहरी.

हालाँकि इस आन्दोलन के दौरान एक भितरघाती चेहरा भी उभर कर सामने आया, जिसका चोला तो भगवा है, मगर आचरण हिंसक.यह भगवाधारी इस बात से दुखी हो रहा था कि अन्नाहजारे के आगे सरकार क्यों झुकती जा रही है. वे चाहते थी आन्दोलन का दमन हो जाये,लेकिन ऐसाहुआ नहीं, सरकार ने जन-संसद का सम्मान किया और संसद में जनलोकपाल बिल पर चर्चा कराई. अन्ना का अनशन तुडवाना भी एक बड़ा लक्ष्य था, इसलिये सरकार ने संसद में चर्चा करवाई . और प्रस्ताव स्थाई समिति के पास भिजवा दिया. इसीलिये अन्ना ने इसे अपनी आधी जीत कहा. पूरी जीत तो तब होगी जब जन लोकपाल बिल पास हो जाएगा. सबसे बड़ी बात यह है कि अन्ना ने देश को जगा दिया/ देश भर के करोड़ों लोग अन्नाके साथ इस तरीके से जुड़ गए थे, गोया अन्नाकी माँग उनकी अपनी माँग भी है. और सरकार ने जब अन्नाकी माँग पर अपनी सहमति जताई तो पूरे देश ने कुछ इस तरह का जश्न मनाया मानो देश को आजादी मिली है. हम लोग १५ अगस्त १९४७ के वक्त नहीं थे, लेकिन कल्पना की जा सकती है कि उस वक्त भी लोगों ने कुछ इसी तरह खुशियों का इज़हार किया होगा. इसी लिये अगर इसे दूसरी आजादी कहा जाये तो गलत नहीं होगा. दूसरी नहीं, तीसरी आजादी. लोग अब जाग रहे हैओं, बेशक इस नवजागरण में अन्ना का साथ मीडिया ने भी दिया . कारण जो भी रहा हो, मगर मीडिया के कारण एक वातावरण तो बना ही.

आज पूरा देश अन्ना के साथ है. अब अन्ना चुनाव सुधारों की तरफ भी ध्यान देने वाले है. जनप्रतिनिधियों को वापस बुलाने का अधिकार एक महत्वपूर्ण मुद्दा है. हमारे नेता संसद या विधायक बनाने के बाद अपने आपक राजा समझने लगाते है. टुच्चा आचरण करते है. दंभ समा जाता है उनमे.इस लिये ऐसे दम्भी लोगों को वापस बुलाने का अधिकार जनता को मिलानाही चाहिए. तभी जनप्रतिनिधियों कि अकड़ कम होगी. भविष्य में अन्ना हजारे ऐसे अनेक सुधारों को ले कर फिर अहिंसक तरीके से आन्दोलन छेड़ेंगे. तय शुदा है कि तब फिर करोड़ों लोग उनके साथ आयेंगे. सरकार उनका दमन करने की कोशिशें भी करेगी.लेकिन अन्ना और उनके साथ चलाने वाले निर्भय हो कर आन्दोलन करते रहेंगे. इस बार की अन्ना अगस्त क्रांति ने जो दृश्य प्रस्तुत किया है, उससे उम्मीद जागी है, कि जनता गांधीगीरी बनाम अन्नागीरी के सहारे परिवर्तन के लिये संघर्ष से पीछे नहीं हटेगी. अपनी बात इन पंक्तियों के साथ ख़त्म करता हूँ कि-

जो भ्रष्ट हुए है उन सबको इक सच्ची राह दिखायेगा.

जो पापी है घबराए है, जाने कल को अब क्या होगा

यह पूरा देश बना अन्ना ये अब इतिहास बनाएगा.

बच्चा-बच्चा जागा है जब, कल बेहतर हो जाएगा

ये इन्कलाब इस भारत को गौरव पथ पे ले जाएगा.

हम प्रण करते है भारत को पापों से मुक्त करेंगे अब,

कोई भी शातिर नेता हो वो दिल्ली तक न जाएगा.

बहुत हो गई लापरवाही लेकिन अब हम जागे है.

यह देश हरेक शातिर को अब फ़ौरन तिहाड़ पहुंचाएगा.

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1 Comment on "हम प्रण करते है भारत को पापों से मुक्त करेंगे अब"

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swamisamvitchaitanya
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भारत को पापो से बचने का विचार छोड़ दो स्वयं पापो से मुक्त हो जाओ बस देश तुम्हारी द्रस्ती के अनुकूल hoga

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