लेखक परिचय

नीरज कुमार दुबे

नीरज कुमार दुबे

नीरज जी लोकप्रिय हिन्दी समाचार पोर्टल प्रभासाक्षी डॉट कॉम में बतौर सहयोगी संपादक कार्यरत हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा हासिल करने के बाद आपने एक निजी संस्थान से टीवी जर्नलिज्म में डिप्लोमा हासिल कीं और उसके बाद मुंबई चले गए। वहां कम्प्यूटर जगत की मशहूर पत्रिका 'चिप' के अलावा मुंबई स्थित टीवी चैनल ईटीसी में कार्य किया। आप नवभारत टाइम्स मुंबई के लिए भी पूर्व में लिखता रहे हैं। वर्तमान में सन 2000 से प्रभासाक्षी डॉट कॉम में कार्यरत हैं।

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नीरज कुमार दुबे

प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता स्वामी अग्निवेश पर माओवादियों और नक्सलियों के प्रति नरम रुख रखने के आरोप लगते रहे हैं। हालांकि वह इन आरोपों पर हमेशा यही कहते रहे हैं कि वह सिर्फ मानवाधिकार की बात कर रहे हैं लेकिन छत्तीसगढ़ में माओवादियों की सभा में उनके द्वारा ‘लाल सलाम’ के नारे लगाते हुए जो सीडी सामने आई है, उससे उनका दूसरा चेहरा सबके सामने आ गया है। छत्तीसगढ़ की सरकार ने तो यहां तक कह दिया है कि हम तो अग्निवेश को संत समझते थे लेकिन वह तो संत के वेष में माओवादी निकले। रिपोर्टों के मुताबिक यह सीडी 11 जनवरी 2011 को छत्तीसगढ़ के जगदलपुर के करियामेटा के पास जंगलों के बीच माओवादियों की जन अदालत की है। इस जन अदालत में ‘भारत सेना वापस जाओ’ के नारों के बीच स्वामी अग्निवेश को ‘लाल सलाम’ के नारे लगाते और ‘माओवाद’ के पक्ष में बोलते हुए दिखाया गया है। यह वही जन अदालत थी जिसमें पांच अपहृत जवानों को रिहा करने का फैसला किया गया था। इन जवानों की रिहाई के लिए अग्निवेश खुद मध्यस्थता के लिए आगे आए थे और शासन ने जवानों की जिंदगी की रिहाई के लिए अग्निवेश के प्रस्ताव को स्वीकार किया था।

 

यह मात्र संयोग नहीं हो सकता कि राज्य में माओवादियों की ओर से अपहरण की दो घटनाओं में अग्निवेश मध्यस्थ बने। यही नहीं उड़ीसा के एक जिलाधिकारी का माओवादियों की ओर से अपहरण हो या फिर गत वर्ष बिहार में पुलिसकर्मियों का अपहरण, सभी मामलों में अग्निवेश ने मध्यस्थता की पेशकश की या फिर मध्यस्थता की इच्छा जताई। संभव है माओवादियों के ‘पहले अपहरण करो और फिर बाद में छोड़ दो’ के खेल में वह भी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से शामिल हों। अपहरण के बाद अपनी बात मनवाने के साथ ही अपहृत की रिहाई कर शायद माओवादी यह संदेश देना चाहते हैं कि वह आम लोगों को नहीं सताते। इसके अलावा यह भी संभव है कि माओवादियों की छवि सुधार में लगे अग्निवेश शायद मध्यस्थता के बाद अपहृतों की रिहाई करवा कर माओवादियों का ‘मानवीय’ चेहरा सामने लाना चाहते हैं। अब अग्निवेश कह रहे हैं कि वह जिस धर्म और जिस देश में जाते हैं वहां के नारे लगाते हैं और इसमें कुछ गलत नहीं है। यदि किसी धर्म अथवा किसी देश के पक्ष में नारे लगाने की अग्निवेश की बात को मान भी लिया जाए तो भी यह तो किसी दृष्टि से सही नहीं है कि आप वहां भारत का या फिर भारतीय सेना का अपमान सुनते रहें।

 

 

अपने को सामाजिक कार्यकर्ता और मानवाधिकारों का पक्षकार कहलवाने वाले अग्निवेश यदि सचमुच लोगों का हित सोच रहे होते तो पिछले सप्ताह के छत्तीसगढ़ दौरे के दौरान उन्हें जनता का भारी विरोध नहीं झेलना पड़ता। आज जनता जागरूक हो चुकी है और वह अपना अच्छा बुरा पहचानती है। अब किसी भी घटना के राजनीतिक निहितार्थ निकालने को पहुंचे लोगों को विरोध झेलना ही पड़ता है। राज्य के ताड़मेटला, मोरपल्ली और तिम्मापुर में हुई आगजनी के कारणों की पड़ताल के लिए जब अग्निवेश अपने समर्थकों के साथ प्रभावित इलाकों में पहुंचे तो लोगों ने उनका जबरदस्त विरोध किया और उनकी गाड़ी पर अंडे, टमाटर व जूते फेंके। खास बात यह रही कि अग्निवेश के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे लोगों में महिलाओं की संख्या ज्यादा थी। सभी ग्रामीण उनसे यही पूछ रहे थे कि जब 2006 में नक्सलियों ने उनके घरों में आगजनी की थी तब वह क्यों नहीं आए? सरकार ने हालांकि अग्निवेश के साथ हुई धक्कामुक्की को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर और एसएसपी का तबादला कर दिया लेकिन अब राज्य के गृहमंत्री अग्निवेश की सीडी सामने आने के बाद मान रहे हैं कि संत के रूप में अग्निवेश माओवादी निकले और अब सरकार मानती है कि एसएसपी ने कहीं भी गलती नहीं की थी।

 

राज्य के दंतेवाड़ा जिले के ताड़मेटला, मोरपल्ली और तिम्मापुर में हुई घटनाओं के पीछे माना जा रहा है कि यह नक्सलियों और पुलिस के बीच संघर्ष के कारण हुई। ग्रामीणों के घर जलाने वालों को चिन्हित करने की बात करते हुए सरकार ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं लेकिन इससे पहले उसे इस वर्ष 14 मार्च को हुई मुठभेड़ के दौरान 37 माओवादियों के मारे जाने की घटना को याद कर लेना चाहिए जिसमें माओवादियों ने जल्द ही बदला लिये जाने का ऐलान भी किया था।

 

बहराहाल, स्वामी अग्निवेश की सीडी मामले की जांच जारी है। मामला राजनीतिक होने के कारण शायद जांच परिणाम शीघ्र ही आ जाएं लेकिन इतना तो है ही कि पूर्व में राजनीतिज्ञ रह चुके और अब बंधुआ मुक्ति मोर्चा के प्रमुख स्वामी अग्निवेश माओवादियों का पक्ष लेकर ठीक नहीं कर रहे हैं। वह भ्रष्टाचार और काला धन के खिलाफ रैलियों या भाषणों में हिस्सा लेते हैं तो बात समझ में आती है लेकिन लोकतंत्र के खिलाफ काम कर रहे माओवादियों और नक्सलियों के पक्ष में उनका खड़ा होना उन्हें संदिग्ध बनाता है।

जय हिन्दी, जय भारत

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8 Comments on "वस्त्र भगवा पर जुबां पे ‘लाल सलाम’! यह कैसे संत हैं अग्निवेश"

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himwant
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बहरुपिया है स्वामी अग्निवेष. उनके कारण आर्य समाज अन्दोलन कलंकित हुआ है.

Vijay Madal
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चिदम्बरम भगवा आतंकवाद की जो बकवास करते हैं शायद वह स्वामी अग्निवेश को देखकर ही करते होंगे.!!
भगवा को कलंकित किया है अग्निवेश (छद्मवेश) ने.
अन्ना और रामदेव दोनों को इससे दूर ही रहना चाहिए.

डॉ. मधुसूदन
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यह व्यक्ति स्वामी छद्मवेश नामसे जानी जाए|

डॉ. राजेश कपूर
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Sachmuch swami agniwesh ki prishthbhumi sandehon se pare nahin hai. inakaa pichhalaa itihaas kaii kalaabaajoyon se bhraa huaa hai. Nexliters aur isaaii mishnariyon se inhen milane waala samarthan khatare ki ghanti hai, ise samajhaa janaa chaahiye.

Jeet Bhargava
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कितनी हैरत की बात है कि, चर्च के इशारों पे कंधमाल (उड़ीसा) के जंगलो में सेवारत स्वामी कृष्णा नन्द की निर्मम ह्त्या करने वाले नक्सली अब स्वामी (?) अग्निवेश के लिए पलक-पावडे बिछा रहे हैं…! इसमे साफ़ तौर पर हिन्दू समाज को कमजोर करने का चर्च का छिपा एजेंडा उजागर होता है. अग्निवेश को जेहादियों से लेकर नकसलियो तक के मानवाधिकार की चिंता तो है, लेकिन कश्मीर, केरल, पश्चिमी बंगाल और नोर्थ-ईस्ट में जुल्मो के शिकार हिन्दू और वनवासियों के मानवाधिकार की चिंता नहीं…! यह कैसा ‘स्वामी/संत’ है. पहले यह स्वामी बनाकर घूमता था और आर्यसमाज (हिन्दू धर्म का अहित… Read more »
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