लेखक परिचय

डॉक्टर घनश्याम वत्स

डॉक्टर घनश्याम वत्स

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Posted On by &filed under राजनीति, हिंद स्‍वराज.


चीन इस दुनिया का सबसे ज्यादा आबादी वाला एक जिम्मेवार देश है । उस पर अपने नागरिकों के भरण पोषण और उनके हितों की रक्षा की जिम्मेवारी है । जिस प्रकार हर देश को अपने नागरिकों के सुखद ओर स्वर्णिम भविष्य की कामना होती है उसी प्रकार चीन को भी अपने देश के नागरिकों के लिए सम्पन्नता और दुनिया में सम्मानजनक स्थान चाहिए । उसे अपने 140 करोड़ लोगों के लिए यूरोपीय देशों और अमरीका के नागरिकों के समान सुविधाएँ और संसाधन चाहियें।वह वैश्विक महाशक्ति बनना चाहता है । जिसके लिए वह प्रयासरत भी है । पिछले कुछ वर्षों में चीन एक आर्थिक महाशक्ति के रूप में उभरा है किन्तु उसे पता है कि केवल आर्थिक महाशक्ति बन कर वह यह सब हासिल नहीं कर सकता उसे आर्थिक के साथ-साथ राजनीतिक महाशक्ति भी बनना होगा ।

उसे वर्तमान महाशक्ति अमरीका से यह ताज हासिल करने के लिए सबसे पहले दक्षिण एशिया में अपने प्रभाव को बढ़ाना पड़ेगा क्योंकि जिस देश का अपने पड़ोसियों में ही दबदबा न हो उसे दुनिया का सिरमौर कौन मानेगा । दक्षिण एशिया में भारत सबसे बड़ा देश है । सबसे पहले उसे दक्षिण एशिया में भारत के बढ़ते क़दमों को रोकना होगा । उसे विश्व में एक महाशक्ति बनना है तो उसे हर अड़ोसी-पडोसी देश ख़ास तौर पर भारत से बीस रहना ही पड़ेगा । भारत अन्य दक्षिण एशियाई देशों के साथ जितना घुलमिल कर रहेगा भारत का प्रभाव उतना ही बढेगा जो कि चीन के लिए एक राजनीतिक चुनौती पेश करेगा और चीन के महाशक्ति बनने के सपने में एक बड़ी अड़चन साबित होगा ।

इसलिए अन्य दक्षिण एशियाई देशों से भारत को दूर करने के लिए एवं भारत के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए चीन ने नेपाल में माओवादिओं को बढ़ावा दिया और नेपाल को आर्थिक सहायता बढ़ाकर वहां कि राजनीति में अपना हस्तक्षेप बढाकर भारत के प्रभाव को कम कर दिया । इसी कड़ी में चीन ने परोक्ष रूप से पकिस्तान को दोस्ती के बहाने आर्थिक, सैन्य और राजनीतिक मदद देना आरम्भ किया जिसका दुरूपयोग भारत के खिलाफ हो रहा है और अब एक कदम आगे बढ़कर एक तीर से दो निशाने साधते हुए चीन ने बिखरते हुए पाकिस्तान का खुलकर साथ देना प्रारंभ कर दिया है और पाकिस्तान में अमरीकी प्रभाव को भी कमज़ोर करना प्रारंभ कर दिया है । भारत के खिलाफ अपने इस अभियान में चीन ने श्रीलंका में भी अपने पैर जमाकर भारत को चारों ओर से घेरने की कोशिश की है ।

इन बातों को सुन और पढ़ कर लगता है की चीन सचमुच भारत के खिलाफ कार्य कर रहा है और भारत के खिलाफ एक युद्ध की तैयारी कर रहा है ।

किन्तु चीन दुविधा में भी है । वर्तमान महाशक्ति अमरीका के साथ G-8, नाटो देश एवं अन्य कई देश है । जो समय-समय पर संयुक्त राष्ट्र संघ जैसे विश्व मंचों पर अमरीका के निर्णयों को सही ठहराने में और उन्हें लागू करवाने में अमरीका कि सहायता करते है । विपत्ति के समय हर प्रकार से अमरीका का साथ देते है एवं उसके लिए काम करते है । चीन के साथ ऐसा कोई गुट नहीं है । महाशक्ति बनने के लिए उसे भी कुछ देशों का साथ चाहिए ताकि जब वह महाशक्ति बने तो उसके भी कुछ सहयोगी हों और वह भी अमरीका कि तरह अपने सभी फैसले दुनिया पर लागू करवा कर राज कर सके । इस लिए उसे G-5 और ब्रिक्स जैसे संगठनों में भारत कि भागीदारी भी चाहिए क्योंकि भारत को नज़रंदाज़ करके विश्व के विषय में कोई नीति बनाना किसी बेवकूफी से कम नहीं है ।भारत चीनी सामान का एक बहुत बड़ा खरीदार है चीन इतने बड़े बाज़ार को भी खोना नहीं चाहेगा इन बातों को पढ़ और सुन कर लगता है कि चीन को भारत कि आवश्यकता है तो वह भारत पर आक्रमण क्यों करेगा ?

किन्तु चीन जितना ताकतवर है उतना ही समझदार भी है । उसे भारत की सेन्य क्षमता का ज्ञान है उसे पता है कि यदि वह भारत के खिलाफ युद्ध करता है तो उसका नुक्सान निश्चित है । क्योंकि अब 1962 वाला समय नहीं है । भारत भी एक सशक्त देश है । महाशक्ति पद का दावेदार है इसलिए वह भारत के खिलाफ प्रत्यक्ष युद्ध नहीं करना चाहेगा । जिस प्रकार पाकिस्तान चाहकर भी भारत का कुछ नहीं बिगाड़ सका और हर बार युद्ध में उसे मुह कि खानी पड़ी तो पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ छद्मयुद्ध (आतंकवाद) का सहारा लिया और काफी हद तक भारत की तरक्की को रोका और भारत को परेशान एवं कमज़ोर करने में कामयाब भी रहा । इसी बात से सबक लेते हुए चीन भी भारत के खिलाफ एक राजनीतिक युद्ध में सलग्न रहकर भारत से सीधा न उलझ कर, किसी न किसी बहाने भारत को उलझाकर रखना चाहता है । नेपाल, पाकिस्तान, श्रीलंका, बांग्लादेश और म्यांमार में उसके हस्तक्षेप इसी योजना का एक अंग है ताकि भारत इन्ही मुद्दों में उलझकर रह जाए और चीन निश्चिन्त होकर दक्षिण एशिया में अपना प्रभाव बढ़ाते हुए अपने लक्ष्य कि और बढ़ सके है इसलिए चीन द्वारा भारत पर आक्रमण कि संभावना बहुत ही कम है ।

किन्तु अब सोचने का विषय यह है कि यदि चीन भारत के खिलाफ किसी भी प्रकार का दुस्साहस करता है तो भारत की क्या तैयारी है ?

हर देश को तरक्की करने और ऊँचे सपने देखने का अधिकार है । ऊँचा सोच कर चीन ने कुछ गलत नहीं किया है और यदि चीन भारत को अपने प्रगति के मार्ग में चुनौती के रूप में देखता है तो इसमें कुछ गलत भी नहीं है क्योंकि दक्षिण एशिया में सिर्फ भारत ही उसे आर्थिक और सामरिक टक्कर दे सकता है । हर देश को यह चाहिए कि वह अपने प्रगति के मार्ग में आने वाली बाधाओं को समय से पहले पहचान कर, समय रहते उस समस्या के समाधान के लिए सही कदम उठाये । यदि चीन हमे अपने प्रगति के मार्ग में आने वाली बाधा मानकर इसके लिए तैयारी कर रहा है तो क्या गलत है । गलत तो भारत कर रहा है इस चुनौती को अनदेखा करके । यदि भारत सशक्त एवं सजग होगा तो चीन भारत के विषय में अपनी भ्रांतियों पर पुनर्विचार करेगा एवं उसके साथ दोस्ती का व्यवहार करेगा और चीन चाह कर भी प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष रूप से भारत के खिलाफ कुछ गलत करने की हिम्मत नहीं कर पायेगा जैसा कि वह अक्सर भारत की सीमाओं का अतिक्रमण करके और भारत के कुछ भूभागों पर अपना अधिकार दिखा कर एवं अन्य अनेकों प्रकार से करता रहा है । चीन द्वारा किसी भी प्रकार के दुस्साहस करने की स्थिति में भारत द्वारा पलटवार करने की क्षमता की कमी काफी लम्बे समय से अनुभव की जा रही है इसलिए भारत को हमले के लिए न सही आत्मरक्षा के लिए तो अपनी तैयारी रखनी ही पड़ेगी क्योंकि एक शक्ति ही दूसरी शक्ति का सम्मान करती है

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1 Comment on "क्या कभी चीन भारत पर आक्रमण करेगा ?"

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sunil patel
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डॉ वत्स जी ने अत्यंत महत्वपूर्ण प्रश्न उठाया है और हर भारतीय को इसपर गंभीरता से सोचना चाइये. आखिर १९६२ में चीन द्वारं हमारी शर्मनाक हार के बाद हर भारतीय का कर्त्तव्य है की इस प्रशन का उत्तर जाने. हमारी सरकार ने आजतक उस युद्ध के कागजात सार्वजानिक नहीं किये. बेशक चीन हर चेत्र में उन्नति कर रहा है. आज हमारे देश के खिलोने, कपडे, कॉस्मेटिक, घरुले उपयोग के सामान चीनी सामानों से आते पड़े है. चाइना की यह एक बहुत बड़ी जीत है की दुनिया का सबसा बड़ा ग्राहक उसका उपभोका है. चीन भारत पर आक्रमण क्यों नहीं कर… Read more »
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