लेखक परिचय

पंडित दयानंद शास्त्री

पंडित दयानंद शास्त्री

ज्योतिष-वास्तु सलाहकार, राष्ट्रीय महासचिव-भगवान परशुराम राष्ट्रीय पंडित परिषद्, मोब. 09669290067 मध्य प्रदेश

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यदि मकान के पूर्व-दक्षिण के कमरे में शयन-कक्ष बनाया गया है, जो की वास्तु के सिद्धांतों के विपरीत है। इसके दुष्परिणामों से बचने के लिये क्या उपाय करें?

किसी भी घर का शयन कक्ष एक महत्वपूर्ण स्थान है शयनकक्ष की मुख्य संरचना घर के दक्षिण, या नैऋत्य कोण में रखने की वास्तु शास्त्र सलाह देता है शयन कक्ष किसी भी घर का आदर्श कमरा होता है वास्तु की अवहेलना करने से यहाँ सोने वाले के स्वास्थ्य व नींद पर व्यापक असर दीखता है अगर गृहस्वामी का स्वास्थ्य अच्छा नहीं होगा तो स्वतः ही घर की सुख शान्ति व अर्थव्यवस्था पर प्रभाव पड़ेगा

आज के समयनुसार जब लंबे चौड़े आवास उपलब्ध नहीं है बल्कि दो तीन कमरों के घर में एक सामान्य माध्यम वर्ग का परिवार गुजर करता है तब वास्तु विज्ञान अति विचारणीय है शयनकक्ष संबंधी प्रमुख तो गृहस्वामी शयनकक्ष है तथा अन्य बच्चो, मेहमानों आदि का शयनकक्ष आता है सभी शयनकक्ष एक साथ तो हो नहीं सकते किन्तु गृहस्वामी शयनकक्ष दक्षिणावर्ती कक्ष के साथ नैऋत्य में होना चाहिए

वास्तु की दिशाओं में पूर्व तथा दक्षिण दिशा के संधि-स्थल को आग्नेय कोण कहा जाता है। जैसा कि नाम से स्पष्ट है कि आग्नेय का अर्थ ही अग्नि होता है। आग्नेय के कमरे में अग्नि-तत्व अत्याधिक मात्रा में प्रवाहित होता है, जिसके दुष्परिणाम पुरुष वर्ग के जीवन को प्रभावित करते है, जिसके कारण पुरुष वर्ग के स्वास्थ्य एवं समृद्धि में विपरीत परिणाम पैदा होते हैं।

आग्नेय के कमरे को शयन-कक्ष के लिये उपयोग करने वाले पुरुष वर्ग को अग्नि-तत्व से संबंधित उच्च रक्तचाप, डायबिटीज, हृदयघात इत्यादि बीमारियाँ पैदा होने की प्रबल संभावना एवं स्वभाव उत्तेजित प्रवृत्ति में परिवर्तित होने के साथ पति-पत्नी के आपस में वैचारिक मतभेद उत्पन्न होते हैं।

शयनकक्ष यदि दक्षिण-पूर्व में हो तो पति-पत्नी के बीच अनबन हो सकती है। गुस्से में भी रह सकते हैं। कभी अत्यधिक तनाव या गुस्सा आ सकता है। यदि आप अपना बेडरूम कहीं और नहीं बना सकते तो बेड की व्यवस्था दक्षिण-पश्चिम में करें तथा दक्षिण में सिर करके सोएं।

आग्नेय कोण में शयनकक्ष होने से फालतू खर्च बढ़ता है और पति-पत्नी के बीच बिना वजह कलह होती है।आग्नेय कोण में पति-पत्नी को एक साथ नहीं सोना चाहिए इससे उनके बीच मनमुटाव होता है तथा समय केवल एक-दूसरे की बुराई खोजने में ही व्यतीत करेगे

आग्नेय कोण में शयन नहीं करें ..इसके कारण लोगों को गुस्सा बहुत आता है…क्रोध जब अपनी चरमावस्था पर होता है, तो संबंध विच्छेद का कारण भी बन जाता है। चाहें वह संबंध पति-पत्नी का हो, पिता-पुत्र का है या साझेदार का हो। क्रोध सरस रिश्तों में कड़वाहट घोल देता है।

वास्तु विषय से उत्तम परिणाम प्राप्त करने के लिये बेहतर यही होगा कि आग्नेय के कमरे को रसोई-घर के लिये उपयोग करे। लेकिन और कोई विकल्प नहीं होने की स्थिति में, आग्नेय के कमरे के एक चौथाई पूर्वी हिस्से में दीवार बनाकर तथा बचे हुए तीन-चौथाई हिस्से के पूर्व-ईशान में दरवाजा एवं दोनो हिस्सो के दक्षिण-आग्नेय में खिड़कियाँ लगाकर, शयन-कक्ष के लिये उपयोग करे।

इस परिवर्तन के साथ पति-पत्नी दोनों, उत्तम गुणवत्ता की प्राकृतिक स्फटिक की माला, चांदी में बनाकर पहनने से अग्नि-तत्व के दुष्परिणामों में न्यूनता आयेगी।

 

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