लेखक परिचय

ब्रजेश कुमार झा

ब्रजेश कुमार झा

गंगा के तट से यमुना के किनारे आना हुआ, यानी भागलपुर से दिल्ली। यहां दिल्ली विश्वविद्यालय के किरोड़ीमल कालेज से पढ़ाई-वढ़ाई हुई। कैंपस के माहौल में ही दिन बीता। अब खबरनवीशी की दुनिया ही अपनी दुनिया है।

Posted On by &filed under समाज.


rickshaw01सुबह-सबेरे दिल्ली की सड़कों पर चलते वक्त यदि आटो रिक्शा के पीछे लिखा दिख जाय बुरी नजर वाले तेरा मुंह काला तो अन्यथा न लें बल्कि गौर करें। क्या ये चुटकीली पंक्तियां शहरी समाज के एक तबके को मुंह नहीं चिढ़ा रही हैं? गौरतलब है कि ऐसी सैकड़ों पंक्तियां तमाम आटो रिक्शा व अन्य गाडि़यों के पीछे लिखी दिख जायेंगी जो बेबाक अंदाज में शहरी समाज की सच्चाई बयां करती हैं। अंदाजे-बयां का ये रूप केवल हिन्दुस्तान तक ही सीमित नहीं है बल्कि पूरे दक्षिण एशिया में प्रचलित है। इन पंक्तियों के पीछे भला क्या मनोविज्ञान छिपा हो सकता है, इस दिलचस्प विषय पर शोध कर रहे दीवान ए सराय के श्रृंखला संपादक रविकांत ने कहा कि आटो रिक्शा के पीछे लिखी चौपाइयां, दोहे और शेरो-शायरी वहां की शहरी लोक संस्कृतियों का इजहार करती हैं। मनोभावों की अभिव्यित का ये ढंग पूरे दक्षिण एशिया में व्याप्त है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में भी आपको आटो रिक्शा के पीछे लिखा दिखेगा कायदे आजम ने फरमाया तू चल मैं आया। कहने का मतलब यह है कि हर वैसी चीजें जो शहरी समाज का हिस्सा हैं वह शब्दों के रूप में आटो रिक्शा व अन्य वाहनों के पीछे चस्पां हैं। वह रूहानी भी हैं और अश्लील भी। सियासती भी हैं और सामाजिक भी। फिलहाल मैं और प्रभात इन लतीफों को इकट्ठा कर रहा हूं जिसे अब तक गैरजरूरी समझ कर छोड़ दिया गया था। यकी नन इससे शहरी लोक संस्कृतियों को समझने में काफी मदद मिलेगी। खैर! इसमें दो राय नहीं है कि आटो रिक्शा व अन्य गाडि़यों को चलाने वाले चालकों का जीवन मुठभेड़ भरा होता है। इन्हें व्यक्ति, सरकार और सड़क तीनों से निबटना पड़ता है। तनाव के इन पलों में ऐसी लतीफे उन्हें गदुगुदा जाते हैं। पर क्या अब दिल्ली में इजहारे-तहरीर पर भी सियासती रोक लगा दी गयी है?

ब्रजेश झाbrajesh-4-copy (Brajesh Jha)

Leave a Reply

1 Comment on "आटो के पीछे क्या है?"

Notify of
avatar
Sort by:   newest | oldest | most voted
PN Subramanian
Guest

इन पर तो पूर्व में ही काफ़ी शोध हो चुका है. संदर्भित ग्रन्थ कि जानकारी तो नहीं है लेकिन काफी बड़ा लेख एक बार कहीं पढ़ा है. वैसे बड़ी दिलचस्प रहेगी. आभार.

wpDiscuz