लेखक परिचय

रोहित श्रीवास्तव

रोहित श्रीवास्तव

रोहित श्रीवास्तव एक कवि, लेखक, व्यंगकार के साथ मे अध्यापक भी है। पूर्व मे वह वरिष्ठ आईएएस अधिकारी के निजी सहायक के तौर पर कार्य कर चुके है। वह बहुराष्ट्रीय कंपनी मे पूर्व प्रबंधकारिणी सहायक के पद पर भी कार्यरत थे। वर्तमान के ज्वलंत एवं अहम मुद्दो पर लिखना पसंद करते है। राजनीति के विषयों मे अपनी ख़ासी रूचि के साथ वह व्यंगकार और टिपण्णीकार भी है।

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moonइस करवाचौथ धरती पर एक विकट स्थिति पैदा हो गई। एक तरफ जहां धरती पर करोड़ो भारतीय सुहागिन महिलाओ ने अपने पति की दीर्घाऊ के लिए व्रत रखा था वही दूसरी तरफ ‘चाँद’ था कि आसमान के आँचल मे पता नहीं कहाँ छुपा बैठा था। पत्नियाँ अधीर होती जा रही थी और पति कुछ ज्यादा ‘गंभीर’। माना की व्रत पत्नियों ने किया था पर चाँद के समय पर दर्शन न देने से ‘खामियाजा’ पतियों को ही भुगतना पड़ रहा था। धरती पर अफरातफरी का माहौल था। न्यूज़ चैनलों मे इसी विषय पर चर्चा-परिचर्चा भी चालू थी। कुछ अति-बुद्धिजीवी लोग ‘चाँद’ के अपहरण कि बात कर रहे थे तो कुछ का आरोप था की चाँद भी अब ‘सांप्रदायिक’ हो गया है केवल ‘ईद’ मे ही दिखाई देता है। माहौल कि भीषण गर्मी मे अर्धागनियों के ऊष्मा की ज्वाला मे ‘पति-परमेश्वरों’ का पारा ऊंचे आसमान पर था जिसकी ऊंचाई के सामने एवरेस्ट पर्वत की ऊंचाई भी क्षीण हो गई थी। भारत सरकार ने आनन-फानन मे उचित कदम उठाते हुए भारतीय खुफिया एजेंसियों को ‘चाँद’ के सही ठिकाने को ढूंढ निकालने का आदेश दिया था। इसरो के वैज्ञानिक हाल मे गए मंगल पर भारतीय मंगलयान से भी ‘चाँद कि स्थिति’ पता लगाने की गुहार लगा रहे थे वही मंगलयान का कहना थे ‘देखो भाई, मैं यहाँ मंगल का पता लगाने आया था अब ‘चाँद’ के बारे मे जासूसी करने का ‘एक्सट्रा चार्ज’ लगेगा। राजी हो तो बोलो। भारतीय वैज्ञानिको ने ‘मंगयलान’ की शर्त को फट से स्वीकार करते हुए उसे भरोसा दिया कि उसकी बात पर जरूर गौर किया जाएगा।

इसी बीच स्वर्ग से विश्वसनीय सूत्रो से खबर आ रही थी कि देवराज इंद्र स्वर्ग पर अपने सहयोगी देवी-देवताओं के साथ एक आपातकालीन मीटिंग कर रहे हैं। माना जा रहा था मीटिंग का मूलबिन्दु ‘चाँद’ का धरती पर निर्धारित समय पर न पहुँचना था। खबर थी कि इससे पहले आलाकमान सृष्टिकर्ता ब्रहम देव ने ‘इंद्र’ को तलब करते हुए चाँद के धरती पर न पहुँचने का ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी किया था। कहा जा रहा है जब इंद्र के लोगो ने चंद्र-लोक से संपर्क साधने की कोशिश कि तो पता चला असल मे ‘चाँद’ महोदय अपनी कुछ मांगो के साथ धरने पर बैठे हैं। ‘चंद्र-लोक’ के प्रवक्ता का चाँद की और से बयान आया कि ‘चाँद’ की मांगे पूरी तरह से जायज़ और संवेधानिक है। इनकी मांगो को पूरी न करना ‘चंद्रवाधिकार के हनन’ के समान होगा। चाँद की ब्रहम देव और उनके ‘रिपोर्टिंग ऑफिसर’ इंद्र से मूल्यत : दो मुख्य मांगे थी पहली की उन पर ‘सांप्रदायिक’ होने के पृथ्वी-वासियों के आरोपों का स्पष्टीकरण ‘ब्रहम-लोक’ से दिया जाना चाहिए। दूसरा उनकी छवि को साफ-सुथरा रखने के लिए धरती के लोगो को अधिसूचना जारी कर उनके ‘लिंग-वर्ग’ के बारे मे सही जानकारी देनी चाहिए। कोई उन्हे ‘चंदा मामा’ बुलाता है तो कोई ‘चंद्रमा माता’। कोई उन्हे देख कर ‘ईद’ मनाता है तो कोई उनकी पूजा कर अपना ‘करवा चौथ व्रत’ तोड़ता है। हे भगवन। क्या वह ‘उभयलिंगी’ हैं ? प्रवक्ता की बात सुनकर ब्रह्मा जी आनंद के कारण रोमांचित हो गए उन्होने कहा मेरे ‘प्रिय चाँद’ की व्यथा सुन कर मेरा मन बड़ा व्याकुल हो गया है। सोच रहा हूँ धरती ही नष्ट कर दूँ । पर क्या करूँ भावनाओ मे बहकर और उत्तेजित होकर मैं इतना ‘बेवकूफ’ नहीं जो चाँद के लिए समस्त धरती को ही नष्ट कर दूंगा। ब्रह्मा ने प्रवक्ता से कहा चाँद को संदेश दो कि हम अपनी तरफ से कुछ जरूरी कदम उठा रहे है पर उससे पहले चाँद धरती के लिए प्रस्थान करें वरना पतियों की उम्र बढ़ाने के लिए रखा गया व्रत ही उनकी ‘ज़िंदगी’ को कम कर देगा। अगर अब और ज्यादा विलंब हुआ तो पत्नियाँ चंडी और दुर्गा का अवतार ले कर पतियों के साथ समस्त संसार के विनाश का कारण बन सृष्टि का विधान बदल देंगी। आखिरकार ब्रह्मा जी का संदेश पाकर ‘चाँद’ ने धरती की सुहागिन स्त्रियॉं को दर्शन देते हुए वाकई मे करोड़ो पतियों की जिंदगी की डोर कटने से बचाते हुए सभी की उम्र ‘बढ़ा’ दी।

 

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