लेखक परिचय

संजय सक्‍सेना

संजय सक्‍सेना

मूल रूप से उत्तर प्रदेश के लखनऊ निवासी संजय कुमार सक्सेना ने पत्रकारिता में परास्नातक की डिग्री हासिल करने के बाद मिशन के रूप में पत्रकारिता की शुरूआत 1990 में लखनऊ से ही प्रकाशित हिन्दी समाचार पत्र 'नवजीवन' से की।यह सफर आगे बढ़ा तो 'दैनिक जागरण' बरेली और मुरादाबाद में बतौर उप-संपादक/रिपोर्टर अगले पड़ाव पर पहुंचा। इसके पश्चात एक बार फिर लेखक को अपनी जन्मस्थली लखनऊ से प्रकाशित समाचार पत्र 'स्वतंत्र चेतना' और 'राष्ट्रीय स्वरूप' में काम करने का मौका मिला। इस दौरान विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं जैसे दैनिक 'आज' 'पंजाब केसरी' 'मिलाप' 'सहारा समय' ' इंडिया न्यूज''नई सदी' 'प्रवक्ता' आदि में समय-समय पर राजनीतिक लेखों के अलावा क्राइम रिपोर्ट पर आधारित पत्रिकाओं 'सत्यकथा ' 'मनोहर कहानियां' 'महानगर कहानियां' में भी स्वतंत्र लेखन का कार्य करता रहा तो ई न्यूज पोर्टल 'प्रभासाक्षी' से जुड़ने का अवसर भी मिला।

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rahul-gandhi-at-nadvaसंजय सक्सेना

उत्तर प्रदेश में राहुल का रोड शो आजकल चर्चा में है। शो के दौरान राहुल आम जनता के सामने तो मोदी पर खूब गरज-बरस रहे हैं, लेकिन जब वह विद्वानों के बीच जाते हैं तो उनकी बेतुकी बातों का सही जबाव मिल जाता है। इस बात का अहसास लखनऊ के प्रमुख मुस्लिम धर्मगुरूओं ने राहुल को करा दिया। अपने संगी-साथियों के कहने पर राहुल गांधी लखनऊ में रोड शो के दौरान मुस्लिम धर्मगुरूओं से मिलने पहुंच गये। इस कड़ी में सबसे पहले वह विश्व प्रसिद्ध शैक्षिक संस्थान नदवा कालेज पहुंचे। यहां राहुल ने विद्वान मौलाना और आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लाॅ बोर्ड के अध्यक्ष राबे हसनी नदवी से मुलाकात की और कहा हमारे लिए (देश के लिए नहीं) दुआ कीजिए।
मौलाना नदवी जो सामने वाले की मंशा भांपने की काबलियत रखते हैं ने राहुल को आइना दिखाते हुए दुआ करने का वादा तो किया, लेकिन हर उस शख्स के लिये जो मुल्क की खिदमत करेगा। मुल्क की खिदमत कौन कर रहा है, यह बात राहुल और उनकी टीम के अलावा हर कोई समझ सकता है। इसी तरह से राहुल गांधी ने प्रसिद्ध शिया धर्म गुरू और आॅल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लाॅ बोर्ड के उपाध्यक्ष डा. कल्बे सादिक के पास जाकर उनसे पाकिस्तान और मुसलमानों के हालात पर चर्चा की। कहा, पाकिस्तान के खिलाफ सख्ती से निपटने की जरूरत है।
सादिक जिनकी काबलियत का लोहा पूरी दुनिया मानती है,उन्हें भी राहुल की मंशा भांपने मे जरा भी देरी नहंी लगी। सादिक ने जब यह कहा कि वह पाकिस्तान या मुसलमान की नहीं, देश और भ्रष्टाचार की बात करें, जब भ्रष्टाचार मिटायेंगे तभी देश बचा पाएंगे। तो राहुल बगले झांकने लगे। अब राहुल भ्रष्टाचार पर क्या बोल सकते थे, यूपीए सरकार का भ्रष्टाचार और घोटाला जगजाहिर है। इस तरह से राहुल यहां से भी मुंह की खाकर चले आये ।

राहुल की नादानी का आलम यह है कि वह 2017 में 2019 का अश्क देख रहे हैं। 2017 के विधान सभा चुनाव के बाद उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री की कुर्सी किसको मिलेगी, इसके लिये भारतीय जनता पार्टी, समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के बीच कड़ी टक्कर चल रही है, लेकिन राहुल गांधी अपनी सीएम प्रत्याशी शीला दीक्षित के लिये नही 2019 में स्वयं पीएम बनने का रास्ता साफ करने में लगे हैं। इसी लिये वह सीएम अखिलेश यादव, पूर्व मुख्यमंत्री मायावती की बजाये प्रधानमंत्री मोदी पर हमलावर हैं। उधर, भाजपा नेता राहुल के हमलावार रूख पर चुटकी लेते हुए कर रहे हैं कि जो स्वयं कुछ नहीं कर पाया, वह मोदी पर तंज कस रहा है। मोदी को किसे से सार्टिफिकेट लेने की जरूरत नहीं है।

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2 Comments on "जब मुस्लिम धर्म गुरूओं ने राहुल को दिखाया आईना"

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Himwant
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कांग्रेस जनों का यह प्लान है कि राहुल को पूर्ण रूप से असफल साबित कर प्रियंका को पार्टी की महारानी बनाए . राहुल अपने मूर्खतापूर्ण बयान एवं क्रियाकलापो से कांग्रेसजन की इच्छा पूर्ण होने की राह को सहज ही बना रहे है. इस बीच प्रियंका भी अपनी दारु की लत से छुटकारा पाने की कोशिश में है. जो भी हो इस प्लान को 2019 से पहले पूरा करने की पूरी तैयारी है.

इंसान
Guest

मैं पूछता हूँ कि आज भारत में भ्रष्टाचार और अराजकता से बुरी तरह प्रभावित राजनीति में चुनावों को ले कर गांधी परिवार अथवा कोई और व्यक्ति विशेष सदैव विषय क्यों बना हुआ है? ऐसा क्यों है कि हम भारतीयों को कबूतरों की नाइ कोई कबूतरबाज़ आकाश में उड़ाता अंत में इन राष्ट्र-द्रोहियों के चबूतरे पर ले आता है। क्यों?

हमें अपना व राष्ट्र का ध्यान रखते राष्ट्रवादी नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी को अपना समर्थन देते कांग्रेस-मुक्त भारत के पुनर्निर्माण में लग जाना चाहिये।

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