लेखक परिचय

आशुतोष माधव

आशुतोष माधव

बनारस में जन्म, वहीं थोड़ी पढ़ाई-लिखाई, हिमालय के एकांत यात्री, पर्वतीय उपत्यकाओं में अबाध विचरण, जीवन और अध्यात्म के सूक्ष्म तंतुओं की खोज का आकर्षण। संपर्क न.: 9627332040

Posted On by &filed under कविता, साहित्‍य.


आशुतोष माधव

 

इसका कोई टुकड़ा
बिकाऊ नहीं

संतानवल्लभा धरती का
स्तन है यह
पूरे का पूरा हिमालय

जहाँ है जैसा है
भरा है पूरा है
इसका सब कुछ
सब कुछ का है

मिलाना होता है
अपना पूरापन
इसके पूरेपन में
पूरे प्रन के साथ

बाहें फैलाए
मिलता है नगाधिराज
अपने
पूरे मन से

अब हिमालय आपका है
शतद्रु की दूधधारा और
लाल दहकते बुरांश
सब, आपके हैं

आप अब आप नहीं
हीर हैं
दुनिया भर में
इकलौते अमीर हैं

Leave a Reply

Be the First to Comment!

Notify of
avatar
wpDiscuz