लेखक परिचय

लक्ष्मी जायसवाल

लक्ष्मी जायसवाल

दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता में स्नातकोत्तर डिप्लोमा तथा एम.ए. हिंदी करने के बाद महामेधा तथा आज समाज जैसे समाचार पत्रों में कुछ समय कार्य किया। वर्तमान में डायमंड मैगज़ीन्स की पत्रिका साधना पथ में सहायक संपादक के रूप में कार्यरत। सामाजिक मुद्दों विशेषकर स्त्री लेखन में विशेष रुचि।

Posted On by &filed under कविता.


अजब इस दिल की मुश्किल है

जिसको चाहा वही दिल से दूर है।
हमसफ़र के होते हुए भी ज़िन्दगी
की राहों में आज भी सिर्फ तन्हाई है।
तन्हाई की आदत यूं तो थी पहले भी
पर न जाने क्यों आज इस तन्हाई
ने दिल में कैसी पीर उठाई है।
शिकवा नहीं हमें किसी से भी
फिर भी अपने आप से गिला है
क्यों दिल को रोग लगाया हमने
जिसका हमें मिला ऐसा सिला है।
दोष न इसमें उनका न हमारा है
क्योंकि हमें यह हाल भी गवारा है।
दूर ही सही पर दिल को तसल्ली है
कि आखिर वो प्यारा प्यार हमारा है।

Leave a Reply

Be the First to Comment!

Notify of
avatar
wpDiscuz