लेखक परिचय

प्रमोद भार्गव

प्रमोद भार्गव

लेखक प्रिंट और इलेक्ट्रोनिक मीडिया से जुड़े वरिष्ठ पत्रकार है ।

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सीबीआई विशेष न्यायालय का अनूठा फैसला

प्रमोद भार्गव

दिल्ली की सीबीआई अदालत ने भ्रष्टाचार के मामले में अनूठा फैसला सुनाकर दण्ड का भय कायम करने की शानदार मिसाल पेश की है। दिल्ली में सीबीआई विशेष न्यायालय के जज धर्मेश शर्मा ने दिल्ली नगर निगम के इंजीनियर को रिश्वत तथा भ्रष्टाचार का दोषी पाया। न्यायालय ने पूर्व इंजीनियर आरके डवास को तीन साल की सश्रम कैद और पांच लाख के जुर्माने की सजा सुनाई, साथ ही आरोपी की पत्नी को एक साल की साधारण कैद अथवा ढाई लाख रूपए जुर्माने की सजा सुनाकर ऐतिहासिक फैसला दिया। जज ने स्पष्ट किया की आरोपी की पत्नी घरेलू महिला जरूर है लेकिन वह अपने पति को काली कमाई के लिए उकसाती थी और इस कमाई से चल व अचल संपत्ति जोड़ती थी। इस सिलसिले में पर्याप्त प्रमाण पुष्टि के लिए अदालत में पेश किए गए हैं। तय है पत्नी को पति के भ्रष्ट कदाचरण की जानकारी थी। इस हालत में पत्नी का फर्ज बनता था कि वह अपने पति को गलत काम करने से रोके। लेकिन ऐसा न करते हुए वह पति की काली करतूत में भागीदार बनकर संपत्ति जोड़ने में शामिल हो गई। लिहाजा पत्नी भी सजा की बराबर हकदार है।

यदि अदालतें विवेक से फैसला लेते हुए भ्रष्टाचारी पतियों की पत्नियों और बालिग बच्चों को सजा देने लगेंगी तो निश्चित रूप से भ्रष्टाचार पर भारत में अंकुश लगने की उम्मीद की जा सकती है। हांलाकि लगता है कि यह सिलसिला अब शुरू हो जाएगा। केंद्रीय मंत्री बीरभद्र सिंह की पत्नी प्रतिभा सिंह को भी भ्रष्टाचार के एक 23 साल पुराने मामले में शिमला उच्च न्यायालय ने आरोपी बनाया है। प्रतिभा सिंह हिमाचल प्रदेश के उद्योगपतियों से धन वसूली में पति के साथ बराबर की भागीदारी करती थीं, ऐसे साक्ष्य अदालत ने पेश किए गए थे। भ्रष्टाचार को अमरबेल बना देने वाले आला नौकरशाह अब दंडित होने लगे हैं। बेबस नागरिकों को यह खबर निश्चित रूप से सुकून देने वाली है। भ्रष्टाचार के खिलाफ संघर्ष को ऐसे ही कठोर और दूरगामी फैसलों से सार्थक अंजाम तक तो पहुंचाया जा सकता है, साथ ही जनता में यह भरोसा भी पैदा किया जा सकता है कि जनता दबाव बनाए और कानून साथ दे तो भ्रष्ट से भ्रष्ट तीसमारखा भी पत्नी व बच्चों समेत सीखचों के पीछे होंगे।

वैसे भी अब भ्रष्टाचारियों के बावत तमाम मुगालते टूटे रहे हैं। कुछ समय पहले ही भारतीय प्रशासनिक सेवा की महिला अधिकारी नीरा यादव को चार साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई थी। नीरा देश की पहली आईएएस महिला अधिकारी थीं। इस फैसले ने बहतरीन नजीर पेश करते हुए इस भ्रम को तोडा़ था कि किसी आईएएस अफसर को सजा नहीं हो सकती ? क्योंकि यह देश के न्यायपालिका के इतिहास में पहला प्रकरण था, जिसमें किसी आईएएस को सजा सूनाने के साथ ही तत्काल जेल भी भेज दिया गया था। भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में अब तक ऐसी सजाएं नहीं सुनाई गई हैं। निश्चित रूप से ये सजाएं भ्रष्टाचारियों के मन में खौफ पैदा करेंगी और किसी हद तक बेलगाम भ्रष्टाचार पर अंकुश भी लगेगा। लेकिन जो वैकल्पिक कानून भ्रष्टाचारियों को संरक्षण देते हैं, उनमें यदि कसावट और ला दी जाए, कुछ कानूनों का विलोपीकरण कर दिया जाए और अदालतें आरके डवास के मामले की तरह विवेक को भी फैसले का आधार बनाने लगें तो देश भ्रष्टाचार से मुक्ति की दिशा में मुड़ सकता है।

इस बाबत हम चीन को बतौर बानगी अनुकरण करते हुए भारतीय दण्ड प्रक्रिया संहिता में भ्रष्टाचार के सिलसिले में ऐसे और कठोर दांडिक प्रावधान भी ला सकते हैं, जिनकी पहंुच भ्रष्टाचारी के पारिवारिक सदस्यों को भी दायरे में लाने वाली हांे। क्योंकि आखिर कोई भी व्यक्ति भ्रष्टाचार से जो अकूत संपत्ति जुटाता है उसका लाभ परिवार के सदस्य ही उठाते हैं। लाभ-लीला की यह गति निरंतर बनी रहे इस दुष्टि से पत्नी व संतानें भी व्यक्ति को नाजायज कमाई के लिए उकसाने का काम करते हैं। लिहाजा दण्ड के दायरे को लाभान्वित व्यक्तियों की पहंुच तक विस्तार देने की जरूरत है।

मौजूदा दौर में चीन की आर्थिक विकास की रफ्तार 11.2 फीसदी है। सकल घरेलु उत्पाद के पैमाने पर चीन ने जापान को नीचे धकेल कर अमेरिका के बाद दूसरा स्थान हासिल कर लिया है। चीन में उन्नति की इस गति के सरोकार केवल औद्योगिक-प्रौद्योगिक विकास पर अवलंबित नहीं हैं। कानून में सख्त और फौरी दण्डात्मक कार्रवाही भी आर्थिक विकास की दर को बढ़ाने में सहायक बनी हुई है। हाल ही में चीन में भ्रष्टाचार के आरोप साबित होने पर दो अधिकारियों को मृत्युदण्ड तो दिया ही गया, उनकी चल-अचल संपत्ति भी जब्त कर ली गई। यही नहीं एक अधिकारी की पत्नी को भी आठ साल की सजा दी गई। बीजिंग के एक वरिष्ठ बैंक अधिकारी वांग ई पर 18 लाख अमेरिकी डाॅलर की रिश्वत का आरोप साबित हुआ और सजा मिली मौत ! इसी तरह एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी वेन छियांग को 24 लाख अमेरिकी डाॅलर की रिश्वत लेने का आरोप सिद्ध होने पर मृत्युदण्ड दिया गया। दोनों की चल-अचल संपत्ति भी जब्त कर ली गई। छियांग तो पत्नी को भी आठ साल की बमुशक्कत कैद की सजा सुनाई, क्योंकि वह छियांग को अनैतिक कदाचरण के लिए उकसाती थी।

कानूनी प्रावधानों के ईमानदार क्रियान्वयन पर सख्ती से अमल के भय के चलते ही चीन संतुलित आर्थिक विकास के बूते 60 करोड़ लोगों को गरीबी से छुटकारा दिलाने में सफल रहा। चीन अपनी अर्थव्यवस्था को ऐसा रूप देना चाहता है, जो घेरलू खपत पर आधारित हो। चीन की कोशिश है कि धन का समान वितरण हो,, जिससे गरीबी रेखा से नीचे रह रहे लोगों का जीवन स्तर ऊपर उठे और असमानता दूर हो। जीवनयापन की आधारभूत जरूरतों के अलावा स्वस्थ्य जीवन की अन्य जरूरतें मसलन शिक्षा और स्वास्थ्य परियोजनाओं की भी गुणवत्ता बढ़ाई जा रही है।

चीन ने अपनी विशाल आबादी को संकट न मानते हुए उसे कृषि उत्पादन, प्रबंधन व रोजगार से जोड़ा। नतीजतन चीन देखते-देखते इतना बड़ा निर्यातक देश बन गया कि आज वह दुनिया के कुल उत्पादों का 50 फीसदी निर्माण खुद करता है। अमेरिका चीन के उत्पादों को खरीदने वाला सबसे बड़ा उपभोक्ता देश है। इसके साथ ही चीन ने अपने प्राकृतिक संसाधनों को भी कमोबेश स्वच्छ व सुरक्षित बनाए रखा। जबकि भारत ने इन्हें बहुराष्ट्रीय कंपनियों के दोहन के लिए खुला ही नहीं छोड़ा, बल्कि विकास नीतियां भी कंपनियों के हित कैसे सुरक्षित रहें, इस दृष्टि से बनाई गईं हैं। ये नीतियां विकास दर बढ़ाने में भी सहायक रहेंगी, इस मुगालते में भी हम रहे। नतीजा यह निकला कि आर्थिक विकास के दौरान हमारी प्राकृतिक संपदा से भरे भण्डार लगातार रीत रहे हैं और क्षेत्रीय व आर्थिक विषमता की हैसियत जो 20 साल पहले चीन की तुलना में 80 प्रतिशत थी वह अब घट कर बमुश्किल 25 फीसदी रह गई है। और अब हम लगातार आर्थिक संकट की ओर बढ़ रहे है।

भारत में भ्रष्टाचार किस हद तक सर्वव्यापी बना हुआ है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि देश के भ्रष्ट लोगों ने 12740 करोड़ रूपए स्विस बैंकों में जमा कर रखे हैं। यह जानकारी हाल ही में स्विस नेशनल बैंक ने स्विस बैंकों की वार्षिक समीक्षा पत्रिका में दी है। दरअसल अब हमारे देश में भ्रष्टाचार ने एक कारोबार की तरह मांग और आपूर्ति का स्वरूप ग्रहण कर लिया है। जिसके चलते रिश्वत का लेनदेन किसी सामग्री की खरीद-फरोख्त की तरह होने लगा है। 2 जी स्पेक्ट्रम, आदर्श सोसायटी, उत्तरप्रदेश में 35 हजार करोड़ का अनाज घोटाला, राष्ट्रमण्डल खेल और कोयला घोटालों में बरता गया भ्रष्टाचार इसी करोबारी चरित्र के पर्याय हंै।

देश में प्रतिभा पलायन और सुरक्षित भ्रष्टाचार की समस्याएं नई नहीं है। भ्रष्टाचार बड़ी बाधा होने के कारण ही कल्पनाशील, नवाचारी एवं उत्साही युवक देश में रहकर कुछ नया नहीं कर पा रहे हैं। यही कारण है कि जिस देश की युवाशक्ति बेहतरी की खोज में बाहरी मुल्कों में पढ़ने व बसने की मानसिकता बना रही हो, वह देश कैसे एक ईमानदार आर्थिक महाशक्ति बन सकता है ? एक जानकारी के मुताबिक मलेशिया ने भारतीय सैलानियों को वीजा पहले हासिल करने की बजाए, मलेशिया में ही पहुंचकर वीजा प्राप्त करने की सुविधा दी थी। फलस्वरूप 40 हजार भारतीय इस सुविधा का लाभ उठाकर मलेशिया में ही घुसपैठियोें की, तरह घुल मिल गए। नतीजतन मलेशिया ने भारतीयों के लिए यह सुविधा बंद कर दी। यह स्थिति भारत में उन बांग्लादेशी घुसपैठियों की तरह है, जो अपने वजूद को अपने देश से बेहतर व सुरक्षित भारत में महसूस करते हैं। जिस देश के नागरिकों मंे अपने देश को समर्थ, समर्द्ध और शक्तिसंपन्न बनाने की बजाए परदेशों में स्थायी रूप से बसने की ललक व होड़ लगी हो, उस देश से वैश्विक महाशक्ति बनने की अपेक्षा कैसे की जा सकती है ?

दिल्ली की सीबीआई अदालत ने अपना फैसला सुनाते हुए नसीहत दी है कि व्यक्ति जितनी चादर हो, उसे उतने ही पैर पसारने चाहिए। लेकिन भौतिक सुखों की चाहत व्यक्ति की हवस बढ़ा रही है। पत्नी और बच्चों की भोग-विलास के उपकरणों की मांगंे लगातार बढ़ रही हैं। इन्हीं महत्वाकांक्षाओं की आपूर्ति के लिए भ्रष्टाचार चरम पर है। साथ ही भ्रष्टाचारी की यह धारणा पक्की हो चुकी है कि उनकी अनैतिक गतिविधियों को पकड़ा नहीं जाएगा और वे चतुराई से जनता की कड़ी मेहनत से कमाई संपत्ति को हड़पते रहेंगे। इसलिए उन्हें ऐसा दण्ड दिया जाना चाहिए, जिससे उनके मन में डर पैदा हो कि जिस दिन वे पकड़े जाएंगे, उस दिन भ्रष्ट साधनों से अर्जित संपत्ति दंडित किए जाने की तारीख से मूल्य सहित उनके पास से वापस चली जाएगी और भ्रष्टाचारी की पत्नी व बच्चों को भी सजा हो सकती है। लिहाजा आरके डवास से जुड़े इस मामले में पति के साथ पत्नी को भी सजा सुनाई गई है, उससे एक नई उम्मीद जगी है कि लोकसेवकों मे भय व्याप्त होगा और भ्रष्टाचार उत्तरोतर कम होगा।

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