लेखक परिचय

इक़बाल हिंदुस्तानी

इक़बाल हिंदुस्तानी

लेखक 13 वर्षों से हिंदी पाक्षिक पब्लिक ऑब्ज़र्वर का संपादन और प्रकाशन कर रहे हैं। दैनिक बिजनौर टाइम्स ग्रुप में तीन साल संपादन कर चुके हैं। विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में अब तक 1000 से अधिक रचनाओं का प्रकाशन हो चुका है। आकाशवाणी नजीबाबाद पर एक दशक से अधिक अस्थायी कम्पेयर और एनाउंसर रह चुके हैं। रेडियो जर्मनी की हिंदी सेवा में इराक युद्ध पर भारत के युवा पत्रकार के रूप में 15 मिनट के विशेष कार्यक्रम में शामिल हो चुके हैं। प्रदेश के सर्वश्रेष्ठ लेखक के रूप में जानेमाने हिंदी साहित्यकार जैनेन्द्र कुमार जी द्वारा सम्मानित हो चुके हैं। हिंदी ग़ज़लकार के रूप में दुष्यंत त्यागी एवार्ड से सम्मानित किये जा चुके हैं। स्थानीय नगरपालिका और विधानसभा चुनाव में 1991 से मतगणना पूर्व चुनावी सर्वे और संभावित परिणाम सटीक साबित होते रहे हैं। साम्प्रदायिक सद्भाव और एकता के लिये होली मिलन और ईद मिलन का 1992 से संयोजन और सफल संचालन कर रहे हैं। मोबाइल न. 09412117990

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इक़बाल हिंदुस्तानी

 

ज़ालिम को जा रहा हूं बताने के वास्ते,

मेरा लहू नहीं है बहाने के वास्ते।

 

मुफ़लिस हैं शेरदिल हैं मगर सो गये हैं जो,

रहबर बनो तो उनको जगाने के वास्ते।

 

हक़ पे हो मुजाहिद हो तो कोहराम मचादो,

बन जाओगे मिसाल ज़माने के वास्ते।

 

खुद अपने घर को आज जलाना पड़ा मुझे,

तारीकियों से शहर को बचाने के वास्ते।

 

हूं बेक़सूर चाहे क़लम सर को कीजिये,

लेकिन ये सर नहीं है झुकाने के वास्ते।

 

अपना लहू जला दिया मैंने चिराग़ में,

मग़रूर आंधियों को हराने के वास्ते।

 

महरूम थे जो पांव से वो दौड़ने लगे,

मैं जब चला हूं उनको चलाने के वास्ते।

 

 

नोट-मुफ़लिस-गरीब, रहबर-नेता, मुजाहिद-संघर्ष करने वाले,

तारीकियों-अंधेरे, क़लम-काटना, मग़रूर-घमंडी, महरूम-वंचित।।

 

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