लेखक परिचय

पंडित सुरेश नीरव

पंडित सुरेश नीरव

हिंदी काव्यमंचों के लोकप्रिय कवि। सोलह पुस्तकें प्रकाशित। सात टीवी धारावाहिकों का पटकथा लेखन। तीस वर्षों से कादम्बिनी के संपादन मंडल से संबद्ध। संप्रति स्‍वतंत्र लेखन।

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पंडित सुरेश नीरव

भ्रष्टाचार मिटाना ही होगा। देश को भ्रष्टाचार से जब तक मुक्त नहीं कराया जाएगा तब तक देश तरक्की नहीं कर पाएगा। भ्रष्टाचार हटाओ समिति की बैटक में चंपालालजी बोल रहे थे। आज चंपालालजी-जैसे देश के हर जागरुक नागरिक की चिंता भ्रष्टाचार हटाने की है। चंपालालजी उससे अछूते कैसे रह सकते हैं। और वो भी तब जब कि दो महीने पहले ही घोर घोटालों की बदौलत विभाग से उन्हें ससम्मान निष्काषित किया गया हो। निष्कासन के बाद से ही वे खूंखार किस्म के ईमानदार हो गए हैं। लोग उनके पास जाने से डरते हैं। और इस डर के मारे ही लोगों ने उन्हें भ्रष्टाचार हटाओ संस्थान का अध्यक्ष बना डाला। वैसे भी चोट खाया सांप और नौकरी से निकाला बाबू भैरंट खतरनाक हो जाता है। जब चंपालालजी से सरकार ने भ्रष्टाचार करने के सारे मौके छीन लिए तो फिर वो सरकार को भ्रष्टाचार कैसे करने दें। जब हम नहीं खाएंगे तो सरकार को कैसे खाने दें। कुछ इसी तर्ज के प्रतिशोध में चंपालालजी भ्रष्टाचार के पीछे हाथ धो कर पड़ गए हैं। बड़ी गंभीरता से संस्था की मीटिंग चल रही थी। झनकूलालजी अभी तक नौकरी से निकाले नहीं गए हैं। इसलिए संस्था के लिए कार्यालय से सरकारी स्टेशनरी जुगाड़ने का कार्य सर्वसम्मति से उन्हें ही सौंपा गया है। झनकूलालजी से ज्यादा ईमानदार पदाधिकारी संस्था को भला और कौन मिल सकता है। नेताओं के सिर पर कलयुग तांडव कर रहा है। रक्षक ही भक्षक बन रहे हैं। धरमपालजी ने पीछे से राग अलापा। अपने आश्रम में अपनी शिष्या के यौनशोषण –जैसे धार्मिक कृत्य के लिए तिहाड़ जेल में सरकारी मेहमानी स्वीकार कर भ्रष्ट करकार को अनुग्रहीत कर अभी-अभी घर लौटे स्वामी धरमपालजी ने नैतिकता से ओतप्रोत दुर्लभ प्रवचन दिया। अफीम-गांजे के भूमिगत कारोबारी लाला हरिश्चंचंद्र ने प्रस्ताव रखा कि कि अगर संस्था अनुमति दे तो स्वामीजी के बहुमूल्य विचारों को जनमानस में पहुंचाने के लिए किसी धांसू चैनल पर टेलीकास्ट समय मैं तय कर दूं। मीडिया को अपने साथ लिए बिना प्रजातंत्र में हम क्या कर सकते हैं। भ्रष्टाचार के खिलाफ यदि कोई साधु बोलता है तो कौन उसे सीरियसली लेगा। पुलिस की लाठी का प्रहार और साधु की सलवार कब चल जाए क्या भरोसा। इससे तो लालूप्रसादजी ज्यादा ठीक रहेंगे। नटवरलाल प्रसाद नारायण सिंह ने प्रस्ताव को उपयोगिता की छैनी से तराशा। और फिर कहा कि स्वामीजी से तो लालूजी ज्यादा ठीक हैं।भ्रष्टाचार का उन्हें लंबा तजुर्बा है। अरे भाई जो भ्रष्टाचार कर नहीं सकता वो क्या खाक भ्रष्टाचार हटाएगा। अन्ना हजारे-जैसे हजारों अनुभनहीन मार्केट में घूम रहे हैं। लालूजी तो बाकायदा हमारे सम्मानित जनप्रतिनिधि हैं। चैनल पर हमें उन्हें मौका देना ज्यादा ठीक रहेगा। नटवरलाल प्रसाद नारायण सिंह के प्रस्ताव की पीठ में छुरा घोंपते हुए मंगेरी लाल जी ने मुंह खोला- लालूजी की इमेज से नई पीढ़ी बिल्कुल प्रभावित नहीं होगी। संस्था को सुरेश कलमाडी-जैसे हाईटेक नौजवान को आगे लाना होगा। कामनवेल्थ का कैसे उपयोग किया जाता है इसके वे एकमात्र विशेषज्ञ हैं। या फिर कानिमोझी जैसी महिला को भ्रष्टाचार पर बोलने का मौका देना चाहिए। आखिर स्त्री को भी तो मौका मिलना चाहिए। आजकल स्त्री सशक्तीकरण की फैशन भी तो चल रही है। फिर वो देवी दक्षिण की भी हैं। आखिर भ्रष्टाचार में उत्तर भारत की दादागीरी कब तक चलती रहेगी। कम-से-कम बेईमानी में तो हमें पारदर्शिता और ईमानदारी रखनी चाहिए। सभी जानते हैं कि हीरा ही हीरा को काटता है। इसी सिद्धांत के मुताबिक भ्रष्टाचारी ही भ्रष्टाचार को मिटा सकता है। भ्रष्टाचार मिटाने में वे क्या कर सकते हैं जिन्होंने कभी सपने में भी भ्रष्टाचार नहीं किया। क्या कर सकते हैं ऐसे लोग। न घर के न घाट के। न लीपने के ना पोतने के। यदि भ्रष्टाचार मिटाना है तो हमें भ्रष्टाचारविरोधियों को भी मिटाना होगा। सभा में यह प्रस्ताव बहुमत से पारित हो गया।

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