लेखक परिचय

प्रवक्ता.कॉम ब्यूरो

प्रवक्ता.कॉम ब्यूरो

Posted On by &filed under धर्म-अध्यात्म, वर्त-त्यौहार.


प० राजेश कुमार शर्मा

स्कन्द पुराण के अनुसार लिंग पूजन के बिना महान अमंगल होता है और उसके पूजन से भुक्ति, मुक्ति सब मिलाती है! वेद, उपनिषद, महाभारत, रामायण, पुराण, तंत्र अर्वात्र ही शिव की महिमा गयी है! राम, कृष्ण, इंद्र, वरुण, कुबेर आदि देवताओं ने भी शिवलिंगार्चा से सिद्धियाँ प्राप्त की हैं ! यह भी शिव लिंग पूजा का उतकृष्ट शिक्षात्मक दृष्टिकोण है! किसी अवसर पर दृग और दृश्य दोनों एक रूप होते हैं!

शिवलिंग ही से समस्त विश्व की उत्पत्ति, स्थिथि और अंत में सब का उन्हीं में लय होता है! सब के आश्रय होने से और सब के लय का अधिष्ठान होने से भगवान ही लिंग कहलाते हैं! अथवा कार्य द्वारा कारण रूप से लिंगित –अवगत होने से भगवान “लिंग” शब्द वाच्य है! इस लिये जब सब सृष्टि का आधार ही शिवलिंग है, तब तो फिर सर्वत्र शिवलिंग की पूजा पायी जाय, यह ठीक ही है! अत: यह कहना कि शिवलिंग की पूजा पहले केवल अनार्थ ही करते थे और यह उनकी ही दें है सर्वथा निराधार है!

माया द्वारा एक ही परब्रह्म परमात्मा से ब्रह्माण्ड रूप लिंग का प्रादुर्भाव होता है! चौबीस प्रकृति-विकृति, पचीसवाँ पुरुष, छब्बीसवान ईश्वर यह सब कुछ शिवलिंग ही है! उसीसे ब्रह्मा, विष्णु, रूद्र का आर्विभाव होता है! प्रकृति के सत्त्व, राज, तम –इन तीनों गुणों से त्रिकोण योनी बनती है! प्रकृति स्थित निर्विकार बोध रूप शिव तत्त्व ही लिंग है! इसी को विश्व तैजस प्राज्ञ, विराट-हिरण्यगर्भ –वैश्वानर, जाग्रत-स्वपन-सुषुप्ति, ऋक-साम-यजु, परा-पश्यन्ति-मध्यमा आदि विकृतियाँ हैं जो त्रिकोण पीठ में तुरीय, प्रणव, परा वाक् स्वरुप लिंग रूप में संनिहित है!

अ, उ, म इस प्रणवात्मक त्रिकोण में अर्धमात्रा स्वरुप लिंग है! परमेश्वर समष्टि-व्यष्टि लिंग रूप से प्रत्येक योनी में प्रतिष्ठित होकर पञ्च कोशात्मक उत्पन्न करता है!

शिव लिंग का स्वरुप इस तरह समझना चाहिये!

नासदासीन्नो सदासीत्तदानीं नासीद्रजो नो व्योमा पारो यत! [ऋ १० /१२९/१ ]

न सन्न चाच्छिव एव केवल: !

अर्थात पहले कुछ भी नहीं था, केवल शिव ही था!

सर्वे निमेषा जज्ञिरे विद्युत्: पुरुषादधि!

नैनमूर्ध्वं न तिर्यन्चं न मध्ये परिजग्रभन!

उसीसे विद्युत् पुरुष और फिर उससे निमेषादि काल-विभाग उत्पन्न हुए! वही विद्युत् पुरुष ज्योतिर्लिंग हुआ! उसका पार आदि, अंत, मध्य कहीं से किसी को नहीं मिला! वही ” तदंडमभवध्दैमं सहस्त्रां शुसम प्रभम ” [ मनु ] है ! अर्थात सूर्य के समान परम तेजोमय ब्रह्माण्ड उत्पन्न हुआ!

दूसरे देवता साक्षात् निष्कल ब्रह्मरूप नहीं हैं!

शिव ही शिवलिंग है, शिवलिंग ही शिव है! सत्यं सत्यं न संशय!

 

श्रावण मास में शिव पूजा

 

सावन में शिवशंकर की पूजा :- सावन के महीने में भगवान शंकर की विशेष रूप से पूजा की जाती है। इस दौरान पूजन की शुरूआत महादेव के अभिषेक के साथ की जाती है। अभिषेक में महादेव को जल, दूध, दही, घी, शक्कर, शहद, गंगाजल, गन्ना रस आदि से स्नान कराया जाता है। अभिषेक के बाद बेलपत्र, समीपत्र, दूब, कुशा, कमल, नीलकमल, ऑक मदार, जंवाफूल कनेर, राई फूल आदि से शिवजी को प्रसन्न किया जाता है। इसके साथ की भोग के रूप में धतूरा, भाँग और श्रीफल महादेव को चढ़ाया जाता है। पुराणों के अनुसार जब देवी सती ने योग शक्ति से अपने शरीर का त्याग किया था (उससे पहले सती ने महादेव को हर जन्म में पति के रूप में पाने का प्रण लिया था) अपने दुसरे जन्म में देवी सती ने पार्वती के रूप में जन्म लिया | उन्होनें सावन महीनें में कठोर व्रत करके महादेव को प्रसन्न किया, जिसके बाद श्रावण मास महादेव को प्रिय हो गया | धार्मिक ग्रंथों के अनुसार भगवान् शिव ने समुद्र मंथन से निकले हलाहल विष का पान श्रावण मास में ही किया था |

 

राशि अनुसार करें आराधना : –

मेष राशि:- श्रावण मास में हर रोज बेलपत्र पर लाल चंदन से नम: शिवाय लिखें। इसी मंत्र का जाप करते हुए जलाभिषेक करें। तत्पश्चात यह बेलपत्र शिवलिंग पर अर्पित कर दें।

वृषभ राशि:- सर्वप्रथम शिवलिंग पर गंगाजल और दही से अभिषेक करें। उसके बाद कच्चा दूध चढ़ाएं। तत्पश्चात जल के साथ द्वादश ज्योर्तिलिंगों के मंत्रों का उच्चारण करें। शिवलिंग पर श्वेत चंदन से तिलक करें ।

मिथुन राशि:- हर रोज ऊँ नम: शिवाय का जाप करते हुए गंगाजल में श्रद्धानुसार शहद मिलाकर अभिषेक करें।

कर्क राशि:- गंगाजल, दूध व मिश्री मिलाकर ऊँ चंद्र मोलेश्वराय नम: इस मंत्र का जाप करते हुए अभिषेक करें।

सिंह राशि:- श्रद्धानुसार शुद्ध देसी घी से ऊँ अनंनताय नम: मंत्र का जाप करते हुए शिवलिंग पर अभिषेक करें।

कन्या राशि:- ऊँ त्रिमूर्तितेय नम: मंत्र का जाप करते हुए दूध, घी और शहद से अभिषेक करें।

तुला राशि:- दही और गन्ने के रस से शिवलिंग पर ऊँ श्री कंठाय नम: मंत्र का जाप करते हुए अभिषेक करें।

वृश्चिक राशि:- गंगाजल में दूध और शक्कर मिलाकर ऊँ नम: शिवाय कालं महाकाल कालं कृपालं ऊं नम: मंत्र का जाप करते हुए अभिषेक करें।

धनु राशि:- गंगाजल, कच्चे दूध व केसर मिलाकर ऊँ महेश्वराय नम: इस मंत्र का जाप करते हुए अभिषेक करें।

मकर राशि:- बादाम के तेल से ऊँ सर्वभूतहराय नम: मंत्र का जाप करते हुए अभिषेक करें।

कुंभ राशि:- घी, शहद और शक्कर से ऊँ अव्यक्ताय नम: मंत्र का जाप करते हुए अभिषेक करें।

मीन राशि:- कच्चे दूध, केसर और तीर्थ जल मिलाकर ऊँ सर्वलोक प्रजापतये नम: मंत्र का जाप करते हुए अभिषेक करें।

 

बिल्वपत्र- जन्म जन्मान्तर के पापो से मुक्ति (पूर्व जन्म के पाप आदि)

 

कमल- मुक्ति, धन, शांति प्रदायक

कुशा- मुक्ति प्रदायक

दूर्वा- आयु प्रदायक

धतूरा- पुत्र सुख प्रदायक

आक- प्रताप वृद्धि

कनेर- रोग निवारक

श्रंघार पुष्प- संपदा वर्धक

शमी पत्र- पाप नाशक

 

शिव अभिषेक व पूजा में प्रयुक्त द्रव्य विशेष के फल-

 

मधु- सिद्धि प्रद

दुग्ध से- समृद्धि दायक

कुषा जल- रोग नाशक

ईख रस- मंगल कारक

गंगा जल- सर्व सिद्धि दायक

ऋतू फल के रस- धन लाभ

Leave a Reply

Be the First to Comment!

Notify of
avatar
wpDiscuz