लेखक परिचय

मनोज यादव

मनोज यादव

१२ जुलाई १९८९, गांव-नया पुरवा,राय बरेली, उत्तर प्रदेश चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ से एम.कॉम. पी. सी. जेवेलर्स में लेखाकार पद पर कार्यरत मंच से कविताओं का मंचन, ग्रामीण अंचल से बेहद लगाव I हृदय की गहराईओं में जो भाव उतरकर मन को जकझोर देते है, वही भाव मेरी कलम से कागज पर उतरकर कविता का रूप लेते हैं I

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women empowerment in Chattisgarhअनामिका

मनुष्य ने समय-समय पर अपने साहस का परिचय दिया है. आज हम जिस दुनिया में जी रहे हैं, वह हमारे साहस का ही परिणाम है. आदिमानव के रूप में हम कभी इस बात का यकिन ही नहीं कर सकते थे कि आसमान में हवाई जहाज उड़ा करेंगे लेकिन आज मनुष्य अपने सांसों से अधिक तेज गति से विकास कर रहा है. इसी साहस और संकल्प को देखना है तो छत्तीसगढ़ आना होगा. आदिवासी बहुल इस राज्य में प्रकृति का अनुपम वरदान है. एक सम्पन्न राज्य के रूप में छत्तीसगढ़ की पृथक से पहचान है. बावजूद इसके लगभग चार दशकों से बढ़ती नक्सली हिंसा से जनजीवन बेहद प्रभावित हुआ है. इस हिंसा से आमतौर पर लोगों का मनोबल टूट जाता है लेकिन छत्तीसगढ़ का आदिवासी समाज का आत्मबल इतना मजबूत है कि उन्होंने अपने साहस से नक्सलियों को आईना दिखा दिया है और लगातार सफलता की ओर आगे बढ़ रहे हैं. आदिवासी समाज का यह आत्मविश्वास सरकार के साहस को आगे बढ़ाता है और सरकार विभिन्न योजनाएं चलाकर इनका हौसलाअफजाई करती हैं.

मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के नेतृत्व में राज्य शासन द्वारा महिलाओं के सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए संचालित विभिन्न योजनाओं का लाभ उठाकर इस जिले के महिलाएं अपने स्व-सहायता समूहों के माध्यम से धरातल पर आत्म निर्भरता का एक नया इतिहास रच रही हैं। नक्सल हिंसा और आतंक की गंभीर चुनौती के बावजूद छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में महिला सशक्तिकरण की भावना लगातार शक्तिशाली होकर उभरती जा रही है। नक्सल हिंसा पीडि़त जिलों के लिए राज्य शासन द्वारा संचालित एकीकृत विकास योजना के माध्यम से बीजापुर जिले की महिलाओं को भी विभिन्न रोजगार मूलक कुटीर उद्योग और व्यवसाय का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

बीजापुर में सशक्तिकरण की यह मशाल लगभग 6 साल पहले जलाई गई थी। कभी अगरबत्ती की काड़ी बनाने वाली महिलाएं आज सरकार के सहयोग से कामयाबी की जोत जला रही हैं। जिले के महिला समूहों को अगरबत्ती काड़ी, आइसक्रीम काड़ी, ईंट निर्माण और स्कूली बच्चों सहित पुलिस तथा होमगार्ड जवानों के लिए वर्दी बनाने का काम भी मिला है। जिले के लगभग पचास महिला स्व-सहायता समूहों की सैकड़ों महिलाओं ने अगरबत्ती की काड़ी बनाने का काम सीख लिया है, वही इनमें से चालीस समूहों की महिलाओं के द्वारा डेढ़ वर्ष में लगभग एक सौ क्विंटल (दस टन) अगरबत्ती काड़ी बनाकर वन विभाग के सहयोग से पास के राज्यों को भेजा जा रहा है।

गायत्री महिला स्व-सहायता समूह बीजापुर की सचिव श्रीमती जयमनी के अनुसार इससे इन समूहों को करीब चार लाख रुपए की आमदनी हुई है। इन महिला समूहों ने दस क्विंटल आइस्क्रीम काड़ी बनाकर भी 3378-2-291011लगभग चालीस हजार रूपए का आमदनी हासिल की है। ये महिलाएं घर-गृहस्थी और खेती-बाड़ी के काम के बाद अपने खाली समय का उपयोग घर पर अगरबत्ती काड़ी और आइस्क्रीम काड़ी बनाने के लिए कर रही हैं।

इसी जिले के सभी चार विकासखंडों में 35 महिला स्व-सहायता समूहों की साढ़े तीन सौ महिलाएं भवन निर्माण के लिए जरूरी ईट उद्योग का संचालन कर रही हैं। इन समूहों के भ_ों में तैयार ईटों की इस्तेमाल जिला प्रशासन और जिला पंचायत द्वारा विभिन्न सरकारी भवनों, स्कूल और आश्रम शाला भवनों तथा आंगनबाड़ी भवनों सहित इंदिरा आवास योजना के मकानों के लिए भी किया जा रहा है। ग्राम नैमेड़ स्थित मां दंतेश्वरी महिला स्व-सहायता समूह की अध्यक्ष श्रीमती जयमति ने बताया कि उनके समूह ने तो पिछले आठ महीने में इलाके में स्कूल भवन और आश्रम शाला भवन सहित शिक्षक आवास गृह निर्माण के लिए लगभग डेढ़ लाख ईटों की बिक्री कर करीब दो लाख रूपए की कमाई की है। उनका समूह गांव में ही इंदिरा आवास योजना के हितग्राहियों के मकान बनाने के लिए रियायती दर पर एक लाख ईटों का निर्माण कर रहा है।

इसी तारतम्य में जिले के महिलाएं अपने महिला स्व-सहायता समूहों में संगठित होकर सिलाई-बुनाई का काम भी सीख रही हैं। जिले में इनके लिए छह सिलाई प्रशिक्षण केन्द्र संचालित किए जा रहे हैं, इनमें चालीस महिला समूहों की चार सौ महिलाएं सिलाई-कढ़ाई का काम सीख कर स्कूली बच्चो के लिए वर्दी (गणवेश) सिलाई का काम भी कर रही हैं, इनमें से श्रीराम महिला स्व-सहायता समूह की अध्यक्ष श्रीमती महादेई के अनुसार उनके समूह ने विगत दस महीने में स्कूली बच्चों की वर्दी सिलकर पांच लाख रूपए की कमाई का एक नया कीर्तिमान बनाया है। अब इस महिला समूह को जिला प्रशासन द्वारा स्वास्थ्य विभाग के पैरामेडिकल कर्मचारियों सहित पुलिस और होमगार्ड के जवानों के लिए भी वर्दी सिलने का काम सौंपा गया है। इससे उन्हें साल भर रोजगार मिलता रहेगा।

गंभीर नक्सली हिंसा से जूझते अंचलों में महिलाओं का यह उद्यम इस बात का संदेश देता है कि- कोई भी लक्ष्य मनुष्य के साहस से बड़ा नहीं/ हारा वही, जो लड़ा नहीं। महिलाओं की यह कामयाबी से मुख्यमंत्री रमनसिंह का प्रसन्न होना स्वाभाविक है। उनका ही क्यों, महिलाओं के इस उद्यम ने छत्तीसगढ़ में स्त्री सशक्तिकरण की दिशा में उजियारा फैलाया है जो आगे निकलकर पूरे समाज की महिलाओं को हौसला देती हैं।

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