लेखक परिचय

मयंक चतुर्वेदी

मयंक चतुर्वेदी

मयंक चतुर्वेदी मूलत: ग्वालियर, म.प्र. में जन्में ओर वहीं से इन्होंने पत्रकारिता की विधिवत शुरूआत दैनिक जागरण से की। 11 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय मयंक चतुर्वेदी ने जीवाजी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में डिप्लोमा करने के साथ हिन्दी साहित्य में स्नातकोत्तर, एम.फिल तथा पी-एच.डी. तक अध्ययन किया है। कुछ समय शासकीय महाविद्यालय में हिन्दी विषय के सहायक प्राध्यापक भी रहे, साथ ही सिविल सेवा की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों को भी मार्गदर्शन प्रदान किया। राष्ट्रवादी सोच रखने वाले मयंक चतुर्वेदी पांचजन्य जैसे राष्ट्रीय साप्ताहिक, दैनिक स्वदेश से भी जुड़े हुए हैं। राष्ट्रीय मुद्दों पर लिखना ही इनकी फितरत है। सम्प्रति : मयंक चतुर्वेदी हिन्दुस्थान समाचार, बहुभाषी न्यूज एजेंसी के मध्यप्रदेश ब्यूरो प्रमुख हैं।

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world bank डॉ. मयंक चतुर्वेदी 

भारत जाग उठा है, भारत दौड़ रहा है, भारत इस वक्त वह सभी कुछ करता नजर आ रहा है, जो कि कल तक एक सपना लगता था। जिस आबादी को लेकर तरह-तरह के तंज कसे जाते थे आज वही आबादी और उसकी श्रमशक्ति भारत की ताकत बन चुकी है। कल तक जिस अक्षय जनसंख्या की दम पर हमारा पड़ोसी हमें आंखे दिखाता था, बदलते हालातों को देखते हुए लगता है कि अब उसके दिन लदने वाले हैं। दुनिया का तो अभी से कुछ कहा नहीं जा सकता, किंतु जो परिस्थितियां बन रही हैं, उन्हें देखकर इतना तो कहा ही जा सकता है कि एशिया में हिन्दुस्तान शीघ्र ही लीडर की भूमिका निभाता नजर आएगा। वस्तुत: ऐसा करने के पीछे आज अनेक तथ्यपरक तार्किक तर्क और परिस्थितियां उत्पन्न हो रही हैं। कल तक जो वर्ल्ड बैंक ये कहता था कि भारत कारोबार के लिए मुश्किल ठिकाना है, वर्तमान में तेजी से विकास की रफ्तार पकड़ने के लिए उद्यत हो चुके भारत के लिए अब वही कह रहा है कि विकास की तेजी के मामले में भारत अगले साल चीन की बराबरी पर आ जाएगा। इसके बाद भारत वर्ष 2017 में चीन को पछाड़ देगा।
अभी इस बात को एक वर्ष भी नहीं हुआ है, कि पिछले वर्ष 10 अप्रैल को हमारे प्रति विश्व बैंक की राय कितनी नकारात्मक थी। उस वक्त विश्व बैंक के प्रेसीडेंट जिम यंग किम कह रहे थे कि निजी क्षेत्र की ग्लोबल कंपनियों के लिए भारत कारोबार करने के लिहाज से मुश्किल ठिकाना है, क्योंकि यहां कई तरह के कानून हैं तथा बेहतर कारोबारी माहौल नहीं हैं। भारत में अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए कई प्रकार के आवश्यक सुधार करने की जरूरत होगी। उस समय किम ने यहां तक कहा था कि भले ही भारत शिक्षा प्रणाली में सुधार पर बहुत ध्यान दे रहा है, किंतु आर्थिक वृद्धि के लिए मानव विकास में निवेश करना, स्वास्थ्य संबंधी व्यवस्था में सुधार और अन्य कई क्षेत्रों में निवेश बेहद महत्वपूर्ण है, जिस पर भारत का अभी पूरा ध्यान नहीं है। मगर, अब वही विश्व बैंक है जो यहां केंद्र में सत्ता के बदलने के साथ जिस प्रकार का सकारात्मक माहौल बना है, उसकी तारीफ करने से नहीं थक रहा है।
वस्तुत: सत्ता में आई नई सरकार के आर्थिक सुधारों से उत्साहित विश्व बैंक ने आज के माहौल को देखकर आगे का अंदाजा लगाते हुए ही यह भविष्यवाणी की है कि आने वाला वक्त दुनिया में किसी अन्य देश का हो या ना हो, लेकिन भारत के हित में अपने पैगाम जरूर सुनाने वाला है। तभी तो अभी से ही विश्व बैंक के प्रमुख अर्थशास्त्री और वरिष्ठ उपाध्यक्ष कौशिक बसु अपने आंकड़ों को जोड़कर आगामी समय का आकलन करते हुए खुलकर कह रहे हैं कि भारत की रफ्तार वर्ष 2016 और 2017 में चीन को कड़ी टक्कर देगी। यही बात विश्व बैंक की ग्लोबल आउटलुक रिपोर्ट का हालिया जारी अंक भी कह रहा है।
वास्तव में देखा जाय तो देश में यह तेजी से आर्थिक विकास हो इसीलिए पा रहा है, क्योंकि जिस तेजी से भारत ने पिछले आठ माहों में अर्थव्यवस्था के सुधारों की दिशा में कदम बढ़ाए हैं, उससे पूरी दुनिया में भारत के प्रति भरोसा बढ़ा है। वैसे भी भारतीयों की धन जोड़ने की जो प्रवृति है, वह रुपया इकटठा करने के जुनून को लेकर हमें पहले से ही अलग करती और दूसरों को हमारे प्रति भरोसा करने के लिए प्रेरित करती आई है, क्योंकि उन्हें लगता है कि भारत का मध्यम वर्ग इतना सशक्त है कि अव्वल तो कभी यहां आर्थिक संकट आएगा नहीं, गोया यदि कभी आ भी गया, तो मध्यम वर्ग ना केवल अपने देश को इससे उबारने में सक्षम है, बल्कि वह उसे अपने श्रम की बदौलत पूर्व परिस्थितियों से उबारते हुए उसे और ताकतबर बनाकर विश्व के समक्ष खड़ा कर देगा।
शायद, आज इसी भरोसे के चलते विश्व बैंक के आंकड़े भी हमारा फेवर करते नजर आ रहे हैं। विश्व बैंक के अनुसार चीन की विकास दर अभी भले ही ऊंची बनी दिखे, लेकिन वह कुछ समय बाद से धीरे-धीरे घटती हुई नजर आने लगेगी। विश्व बैंक की ग्लोबल आउटलुक रिपोर्ट कहती है कि साल 2016 में ड्रैगन की यह रफ्तार सात पर आएगी, फिर 2017 में 6.9 पर पहुंच जाएगी। जबकि वहीं भारत की विकास दर को लेकर विश्व बैंक का अनुमान है कि इसी बीच यहां वित्त वर्ष 2016 व 2017 में  विकास दर 7-7 प्रतिशत रहेगी।
इस ग्लोबल रिपोर्ट पर भरोसा करें तो पिछले कुछ समय में यह पहली बार होगा, जब भारत की विकास दर एशिया की दिग्गज अर्थव्यवस्था चीन के पास पहुंच जाएगी। विश्व बैंक ने इस वित्तीय वर्ष में भारत की विकास दर 5.6 रहने का अनुमान जताया था। साल 2015 में उसने विकास दर 6.4 रहने का पूर्वानुमान जताया है। जबकि इसकी तुलना में वर्ष 2014 में चीन की विकास दर 7.4 अनुमानित है तथा साल आगामी वित्त वर्ष में ड्रैगन की रफ्तार 7.1 प्रतिशत रहने की संभावना बताई जा रही है।
भारत के विकास को लेकर इस प्रकार का विश्वास अन्य संस्थाओं ने भी दर्शाया है। आज विदेशी और देशी अंतर्राष्ट्रीय मानक के आर्थिक फॉरम सभी एक साथ कह रहे हैं कि हिन्दुस्तान की अप्रैल 2014 से शुरू मौजूदा वित्त वर्ष की पहली दो तिमाही में विकास दर पिछले साल की तुलना में एक फीसद अधिक रही है, जो आगे निरंतर और बढ़ेगी। आईएमएफ ने आगामी वर्षों में भारत के दूसरे सबसे तेज बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बनने की भविष्यवाणी की है। ऑर्गेनाइजेशन फॉर इकोनॉमिक कोऑपरेशन एंड डेवलपमेंट (ओईसीडी) भी घोषणा कर रही है कि दुनिया के तमाम बड़ी अर्थव्यवस्था रखनेवाले देशों में सिर्फ भारत ही इस साल अपनी विकास दर तेज बनाए रखने में कामयाब होगा।
कहने का आशय इतनाभर है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के करिश्माई व्यक्तित्व का लोहा विश्व बैंक ने भी मानना शुरू कर दिया है। अभी हाल ही में हुए वाइब्रेंट गुजरात सम्मेलन में हमने देखा कि संयुक्त राष्ट्र के महासचिव बानकी मून और विश्व बैंक के अध्यक्ष की मौजूदगी ने दुनिया को यह भरोसा दिला दिया कि उभरती अर्थव्यवस्थाओं की प्रगति और समृद्धि में हम निरंतर आगे आते जा रहे हैं। सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुनियाभर के निवेशकों को सीधे शब्दों में बताया है कि स्थिर कर व्यवस्था तथा भरोसेमंद, पारदर्शी और निष्पक्ष नीतिगत माहौल बनाकर भारत को कारोबार करने के हिसाब से ‘सबसे आसान’ देश बनाया जाएगा। देश में आर्थिक विकास तेज करने एवं रोजगार अवसर बढ़ाने के लिए विनिर्माण क्षेत्र को मजबूत करने के साथ सभी प्रकार की परियोजनाओं की मंजूरी के लिए केंद्र तथा राज्य दोनों स्तरों पर एकल खिड़की मंजूरी व्यवस्था स्थापित की जा रही है।
वस्तुत: सही बात यही है कि भारत ने पिछले वर्षों की तुलना में गत कुछ माह के भीतर ही तेजी से अपनी आर्थिक नीतियों में सुधार किया है। जहां कठोर नियम थे उनका सरलीकरण किया गया और देश में कई विवाद होने के बाद भी पिछले महीनों में निर्माण क्षेत्र में एफडीआई को उदार बनाया गया, जिसमें रेलवे में 100 फीसद एफडीआई को मंजूरी, रक्षा और बीमा क्षेत्रों के लिए एफडीआई की सीमा बढ़ाकर 49 फीसद जैसे निर्णय शामिल हैं। केंद्र तथा राज्य स्तरों पर एकल खिड़की मंजूरी (सिंगल विंडो क्लीयरेंस) की दिशा में काम शुरू किया गया है। प्रधानमंत्री मोदी के द्वारा जो देश के आर्थिक विकास की तेजी के लिए काम किए जा रहे हैं, वस्तुत: विश्वबैंक की नई रिपोर्ट को हम इसी आईने से देख सकते हैं। इसीलिए ही यह वैश्विक बैंक घोषणा कर पा रही है कि एक तरफ आने वाला साल विश्व अर्थव्यवस्था के लिए मुश्किलों भरा साबित होगा और विश्व में मंदी छाएगी, वहीं भारत में तेजी का रुख रहने की आशा वह व्यक्त कर रही है। ऐसे में निश्चित तौर पर कहा जा सकता है कि यह समय भारत को लेकर दुनिया द्वारा उसे आर्थिक क्षेत्र में समझे जाने का दौर है।

 

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