लेखक परिचय

रवि कुमार छवि

रवि कुमार छवि

(भारतीय जनसंचार संस्थान)

Posted On by &filed under खेल जगत.


world cup 2015क्रिकेट विश्व कप का 11 वां संस्करण इन दिनो आस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में चल रहा है। ये दूसरा मौका है जब विश्व कप आस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की संयुक्त मेजबानी में खेला जा रहा है। इससे पहले ये दोनों देश 1992 में विश्व कप की मेजबानी कर चुके हैं।

विश्व कप की शुरुआत 1975 में इंग्लैंड से हुई थी। उस समय मैच 60 -60 ओवर के होते थे. उन दिनों विश्व क्रिकेट पर वेस्टइंडीज का दबदहा देखने को मिलता था। लार्डस में पहले विश्व कप का फाइनल खेला गया। आस्ट्रेलिया ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया। वेस्टइंडीज ने निर्धारित 60 ओवर में 8 विकेट खोकर 291 रन बनाए। क्लाइव लायड ने कप्तानी पारी खेलते हुए शानदार 102 रनों की पारी खेली जबकि रोहन कन्हाई ने भी 55 रनों की उम्दा पारी खेली। जवाब में आस्ट्रेलिया की टीम लक्ष्य की पीछा करते हुए 274 रनों पर सिमट गई। क्लाइव लायड को शानदार पारी के लिए मैन ऑफ दी मैच का खिताब दिया। इस तरह से वेस्टइंडीज ने पहले विश्व कप पर कब्जा किया।

1979 में विश्व कप एक बार फिर से इंग्लैंड में ही खेला गया। इस विश्व कप में भी आठ टीमों ने भाग लिया था। ये विश्व कप भारत के लिए विलेन साबित हुआ। भारत ने इस विश्व कप में तीन मैच खेले लेकिन तीनों में उसे हार का सामना करना पड़ा।

वेस्टइंडीज ने अपनी बादशाहत को एक बार फिर से साबित करते हुए विश्व कप जीता। वेस्टइंडीज ने फाइनल में इंग्लैंड को आसानी से 92 रन से हरा दिया।

वेस्टइंडीज की ओर से विवियन रिचर्डसन 138 के अलावा कोलिस किंग के 86 रन की मदद से 286 रन बनाए। इसके जवाब में इंग्लैंड की शुरुआत काफी अच्छी रही। लेकिन इन दोनों ओपनर के जल्दी-जल्दी आउट होने से इंग्लैंड की टीम संकट में घिर गई। जिससे वो अंत तक उबर नहीं पाई। और पूरी टीम 194 रनों पर आल आउट हो गई। विवियन रिचर्डसन ने फाइनल में नाबाद रहते हुए शानदार 138 रन बनाए जिसके कारण उन्हें मैन ऑफ द मैच का खिताब दिया गया। इस तरह से वेस्टइंडीज पहली टीम बनी जिसने लगातार दो विश्व कप खिताब पर कब्जा किया।

1983 का विश्व कप भी पहले दो विश्व कप की तरह इंग्लैंड में खेला गया। इस विश्व कप में कुछ फेरबदल हुए। पहली बार 30 यार्ड सर्कल का प्रयोग किया गया।। इसके तहत घेरे के अंदर हर समय कम से कम चार क्षेत्ररक्षक खिलाड़ी को अनिवार्य किया गया। इस बार भी आठ टीमों ने प्रतियोगिता में हिस्सा लिया। सभी आठ टीमों को चार-चार के 8 ग्रुपों में बांटा गया था।। वाइड और नो बॉल के लिए नियम कड़े किए गए थे

चूंकि पहले दो विश्व कप में भारत का प्रदर्शन खराब था। ऐसे में किसी को भी भारतीय टीम से ज्यादा उम्मीद नहीं थी। लेकिन फाइनल का दिन शायद भारत के लिए था। भारतीय क्रिकेट में 25 जून 1983 इतिहास बन गया। वेस्टइंडीज ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया। भारत की पूरी टीम मात्र 183 रनों पर आल आउट हो गई। ऐसा लगा कि वेस्टइंडीज विश्व कप की हैट्रिक पूरी कर लेगा। भारत ने उस दिन असाधारण खेल दिखाकर वेस्टइंडीज की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। वेस्टइंडीज सिर्फ 143 रनों पर आल आउट हो गई और भारत ने फाइनल मैच 40 रन से जीत लिया। मोहिंदर अरमनाथ को मैन ऑफ द मैच का खिताब दिया गया। भारत ने अपना पहला विश्व कप खिताब जीता और इस तरह भारत में क्रिकेट युग के सुनहरे दौर की शुरुआत हुई जबकि वेस्टइंडीज के सुनहरे दौर का अंत

1987 का विश्व कप भारतीय उपमहाद्वीप में खेला गया। इस विश्व कप में भी आठ टीमों ने हिस्सा लिया था। विश्व कप में फाइनल सहित कुल 27 मैच खेले गए थे। आस्ट्रेलिया ने फाइनल में ईडेन गार्डेन के खचाखच भरे स्टेडियम में इंग्लैंड को सात रन से हरा कर पहली बार विश्व कप चैंपियन बनने का गौरव प्राप्त किया।

1992 विश्व कप को बेंसेज एंड हेजेज विश्व कप का नाम दिया गया। इस बार विश्व कप का ट्रेंड बदला। सफेद जर्सी की जगह अब रंगीन कपड़ों ने ले ली। ये पहला मौका था जब क्रिकेट में रंगीन कपड़ों का प्रयोग किया गया था. इस बार टूर्नामेंट का फार्मेट भी बदल दिया गया। आठ टीमों को दो पूल में बांटने के बजाय लीग चरण में हर टीम का हर किसी से मुकाबला कराया गया। इस विश्व कप में एक और खास बात ये रही कि अमूमन,पहला ओवर तेज गेंदबाज करता है लेकिन न्यूजीलैंड के कप्तान मार्टिन क्रो ने इस मिथक को तोड़ा। मार्टिन क्रो ने पहला ओवर ऑफ स्पिनर दीपक पटेल को दिया। और इस तरह से दीपक पटेल ने पहला ओवर किया।

साथ ही पहले 15 ओवर में के दौरान 30 गज के दायरे से बाहर सिर्फ दो ही खिलाडी ही रह सकते थे। इस नए नियम के कारण पिच हिटर का जन्म हुआ। इसका श्रेय दिया गया इयान बॉथम को जाता है।
आस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में खेले गए इस विश्व कप में पाकिस्तान के लिए इमरान खान (72) जावेद मिंयांदाद (58) और वसीम अकरम 33 रनों का योगदान दिया। जवाब में इंग्लैंड की टीम लक्ष्य का पीछा करते हुए 227 रनों पर आल आउट हो गई। वसीम अकरम ने गेंदबाजी में भी कमाल दिखाते हुए 3 विकेट लिए. अकरम को इस प्रदर्शन के लिए मैच का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी चुना गया। इस तरह से पाकित्सान ने पहली बार विश्व कप जीता। और एक बार फिर इंग्लैंड फाइनल में पहुंचने के बावजूद खिताब नहीं जीत पाई थी।

1996 विश्व कप क्रिकेट का छठा संस्करण था.1996 का विश्व कप एक बार फिर से भारतीय उपमहाद्वीप में पहुंचा। इस बार इसे भारत पाकिस्तान और श्रीलंका ने मिलकर आयोजित किया था। इस विश्व कप में 12 देशों ने हिस्सा लिया था। संयुक्त अरब अमीरात, नीदरलैंड्स और कीनिया ने पहली बार विश्व कप में भाग लिया. इसी विश्व कप से तीसरे अंपायर की भी भूमिका शुरू थी। पावर प्ले में तेजी से रन बनाने का सिलसिला इसी विश्व कप की देन है जिससे क्रिकेट और तेज हुआ।

लाहौर का गद्दाफी स्टेडियम ऑस्ट्रेलिया और श्रीलंका के बीच फाइनल मैच का गवाह बना। ये फाइनल पूरी तरह से एकतरफ़ा रहा। ऑस्ट्रेलिया ने पहले खेलते हुए मार्क टेलर के 74 रनों की मदद से 241 रन बनाए लेकिन श्रीलंका ने तीन विकेट के नुक़सान पर ही लक्ष्य हासिल कर लिया. किसी भी विश्व कप फ़ाइनल में एक खिलाड़ी ने इतना दमख़म नहीं दिखाया था, जैसा कि इस फ़ाइनल में अरविंद डी सिल्वा ने दिखाया. उन्होंने दो कैच पकड़े, तीन विकेट लिए और नाबाद 107 रनों की पारी खेली. इस प्रदर्शन के लिए अरविंद डी सिल्वा को मैन ऑफ द मैच का खिताब दिया गया। जबकि पूरे टूर्नामेंट में गेंद और बल्ले से शानदार प्रदर्शन के लिए सनत जयसूर्या को मैन ऑफ द टूर्नामेंट का खिताब दिया गया।

1999 विश्व कप एक बार फिर से इंग्लैंड में खेला गया। इस विश्व कप में फाइनल सहित कुल 42 मैच खेले गए थे।

20 जून 1999 को आस्ट्रेलिया और पाकिस्तान के बीच क्रिकेट का मक्का कहे जाने वाले लार्डस में विश्व कप का फाइनल खेला गया था। पाकिस्तान की पूरी टीम ने आस्ट्रेलियाई गेंदबाजों के सामने घुटने टेक दिए। पूरी टीम महज 39 ओवर में केवल 132 रन बनाकर आउट गई। आस्ट्रेलिया की ओर से शेन वार्न ने अपनी फिरकी का इस्तेमाल कर पाक के चार खिलाड़ियों को पवेलियन का रास्ता दिखाया था। आस्ट्रेलिया ने केवल दो विकेट खोकर आसानी से लक्ष्य हासिल कर लिया। इस तरह से आस्ट्रेलिया वेस्टइंडीज टीम के बाद दो विश्व कप जीतने वाली पहली टीम बनी। इसे कई क्रिकेट पंडितों के मुताबिक आस्ट्रेलिया के प्रभुत्व की शुरुआत कहा गया।

2003 विश्व कप दक्षिण अफ्रीका में खेला गया। इससे सचिन तेंदुलकर ने किसी एक टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा 673 रन बनाए जो आज भी एक रिकार्ड है। 23 मार्च 2003 को जोहंसबर्ग में खेले गए फाइनल में भारत का सामना आस्ट्रेलिया से। आस्ट्रेलिया जहां इस विश्व कप में अजेय थी. वहीं भारतीय टीम को सिर्फ आस्ट्रेलिया से मात मिली थी। फाइनल में फिर वही कहानी दोहराई गई। अंतर ये था कि इस बार बल्लेबाजों के बजाय गेंदबाजों ने नाक कटवाई ।

भारत ने टॉस जीता और पहले गेंदबाजी करने का निर्णय किया। आस्ट्रेलिया ने 50 ओवर में दो विकेट के नुकसान पर 359 रनों का स्कोर खड़ा किया। आस्ट्रेलिया के कप्तान रिकी पोटिंग ने भारतीय गेंदबाजों पर मनमफिक शॉट लगाए। पोंटिग ने 140 रनों की नाबाद पारी खेली जबकि डेमियन मार्टिन और एडम गिवक्रिस्ट ने अर्धशतक लगाए। भारतीय टीम को 125 रनों से हार झेलनी पड़ी। इस तरह से आस्ट्रेलिया ने लगातार दूसरी और कुल तीसरी बार विश्व कप खिताब किया।

विश्व कप 2007 क्रिकेट का नौंवा संस्करण था। वेस्टइंडीज में होने वाला ये पहला विश्व कप था। इस विश्व कप में अब तक सबसे ज्यादा 16 टीमों ने भाग लिया था।

भारतीय टीम की बागडोर राहुल द्रविड़ के हाथों में थी. भारत बाग्लांदेश और श्रीलंका से हारकर टूर्नामेंट के पहले ही दौर से बाहर हो गया था।

आस्ट्रेलिया ने फाइनल में टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करते हुए 38 ओवर में 4 विकेट खोकर 281 रन बनाए। आस्ट्रेलिया की ओर से एडम गिलक्रिस्ट ने बनाए 101 गेंदों पर 149 रन बनाए। जवाब में श्रीलंका की टीम डकवर्य़ लुईस नियम के तहत 36 रन से हार गई । एडम गिलक्रिस्ट को मैन ऑफ द मैच और ग्लेन मैकग्राथ को प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट चुना गया था। इस तरह से आस्ट्रेलिया ने विश्व कप की खिताबी हैट्रिक पूरी की और रिकार्ड चौथी बार खिताब जीता।

विश्व कप 2011 भारत श्रीलंका और बांग्लादेश ने मिलकर आयोजित किया। भारत को घरेलू हालत में खेलने का फायदा मिला। इस विश्व कप में 14 टीमों ने भाग लिया था। सचिन तेंदुलकर का ये आखिरी विश्व कप कहा जा रहा था। ऐसे में भारत की टीम ने एकजुट होकर प्रदर्शन किया। इस विश्व कप में आस्ट्रेलिया अपने तीनों विश्व कप का जादू नहीं दिखा पाया। और क्वार्टर फाइनल से आगे नहीं जा पाया। सेमीफाइनल में भारत का सामना पाकिस्तान से था भारत ने पाकिस्तान को हराकार फाइनल में प्रवेश किया। फाइनल में भारत के सामने श्रीलंका की टीम थी। फाइनल में महेला जयवर्धने का शतक बेकार चला गया और भारत ने धोनी और गंभीर के अर्धशतकों की बदौलत 28 साल एक बार फिर से अपना विश्व कप जीतने का सपना पूरा किया।

Leave a Reply

1 Comment on "विश्व कप क्रिकेट का सफरनामा"

Notify of
avatar
Sort by:   newest | oldest | most voted
sureshchandra.karmarkar
Guest
sureshchandra.karmarkar

आस्ट्रेलिया आर इंग्लैंड क बल्लेबाज धुंआधार बल्लेबाज हैं. ४-५ विकेट जाने के बाद भी बले की धार कम नहीं होती. हमारे खिलाडी पत्नियों और मित्रों की उपस्थिति की मांग कर रहे हैं. क्या होता है?

wpDiscuz