लेखक परिचय

विनोद बंसल

विनोद बंसल

लेखक इंद्रप्रस्‍थ विश्‍व हिंदू परिषद् के प्रांत मीडिया प्रमुख हैं। कई पत्र-पत्रिकाओं एवं अंतर्जाल पर समसामयिक विषयों पर नियमित लेखन।

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विनोद बंसल

फ़िल्म, फ़ैशन व मस्ती के नाम पर या सस्ती लोकप्रियता पाने की लालसा में हिन्दू धर्म के प्रतीकों का अपमान आज कल आम बात बनती जा रही है। कभी गीतों में कभी चित्रों में तो कभी टेलीविजन के कार्यक्रमों व विज्ञापनों में कोई भी और अभी भी इन प्रतीकों (हिन्दू देवी-देवताओं, साधू-संतों तथा धर्म ग्रंथों) की मर्यादा को तार-तार कर देता है। कभी जूतों पर, कभी चप्पलों पर, कभी बीयर की बोतलों पर, तो कभी किसी महिला की बिकनी पर या फ़िर भोंडे विज्ञापनों में हिन्दू देवी-देवताओं को इस तरह से चित्रित किया जाता रहा है कि देखने वाला या तो आक्रोशित हो उठता है या इनके प्रति अपनी आस्था खो बैठता है। हालांकि ऐसा नहीं कि इस सब का विरोध या प्रतिकार नहीं किया गया। हिन्दू धर्म और भारत माता का अपमान करने वाला चित्रकार एम एफ़ हुसैन गत अनेक वर्षों से विदेशों में निर्वासित जीवन व्यतीत करने को मजबूर है। अनेक फ़िल्मों को भी भौंडे गानों व गलत फ़िल्मांकन के कारण सेंसर करवाया गया। अब हाल ही में आस्ट्रेलियाई फ़ैशन डिजाइनर लीसा ब्लू को भी हिन्दू समाज ने एक सबक सिखा कर माफ़ी मांगने को मजबूर कर दिया। इतना ही नहीं चाहे देर से ही सही किन्तु, भारत और आष्ट्रेलिया के बीच राजनयिक स्तर पर इस मसले पर हुई वार्ता और इस सम्बन्ध में विदेशी मीडिया द्वारा विस्तार पूर्वक दी गई खबर और विश्लेषणों से स्पष्ट होता है कि अब कोई देश हिन्दू समाज का इस तरह अपमान आसानी से नहीं होने देगा। गत 6 मई को एक हिन्दी और दो अंग्रेजी दैनिक अखबारों ने एक माडल के दो ऐसे चित्र छापे थे जिसके स्विम सूट और बिकनी पर धन और परम वैभव की देवी माता लक्ष्मी को चित्रित किया गया था। यह चित्र 5 मई को सिडनी में हुए एक फ़ैशन वीक के पहले दिन के थे। 6 मई को अक्षय त्रितीया के पवित्र दिन सुबह लगभग दस बजे विश्व हिन्दू परिषद पूर्वी दिल्ली के मंत्री श्री राम पाल सिंह के फ़ोन से मिली जानकारी के तुरंत बाद समाचार पत्र में मैंने जब यह चित्र देखा तो दंग रह गया। एक मन में आया कि इस मसले को तूल देने से फ़ैशन डिजाइनर को अनावश्यक प्रचार मिलेगा तो दूसरे ही क्षण यह भी सोचा कि यदि इन सब विधर्मियों को रोका नहीं गया तो हिन्दुओं का उपहास उड़ाने वालों की फ़ौज बढती ही जाएगी। इस संदर्भ में एक मेल तुरन्त विहिप के केन्द्रीय संयुक्त महामंत्री व विदेशी मामलों के प्रमुख स्वामी विज्ञानानंद जी को भेज कर खबर की सत्यता की पुष्टी और उनका मार्ग दर्शन चाहा गया। शायद विदेशों में उनके गहन प्रवास की व्यस्तता के कारण उनका जबाब जब दूसरे दिन तक नहीं मिला तो शनिवार दोपहर विहिप आस्ट्रेलिया के प्रधान श्री ब्रज पाल सिंह से सम्पर्क कर मामले की सत्यता की जानकारी ली तथा विषय की गम्भीरता को देखते हुए एक मेल लीसा ब्लू को भेजा गया। इस मेल की कापी भारत में आष्ट्रेलियाई दूतावास को तथा दूसरी स्वामी जी तथा श्री ब्रज पाल सिंह को भेजी गई। इस मेल को अनेक हिन्दू धर्मावलम्बियों को भी लीसा व दूतावास के संपर्क सूत्र (फ़ोन/फ़ैक्स/ई-मेल) के साथ भेजा गया। इधर यह खबर जैसे-जैसे फ़ैली, एक तरफ़ तो लोगों ने व्यक्तिगत रूप से लीसा व दूतावास से अपना विरोध दर्ज कराया वहीं दूसरी ओर विहिप दिल्ली ने सोमवार को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर अपना विरोध दर्ज कराने का निर्णय लिया। साथ ही यह भी तय किया गया कि दूतावास को हम ज्ञापन भी देंगे। इस बाबत एक प्रेस वक्तव्य भी जारी किया गया जिसे रविवार के अधिकांश देशी व विदेशी अखबारों तथा शनिवार को ही कुछ टीवी चैनलों द्वारा प्रसारित किया गया।

रविवार सुबह एक अंग्रेजी दैनिक के मुख पृष्‍ठ पर खबर थी सौरी, सेज लीसा यानि लीसा ने माफ़ी मांगी। जब मेल खोल कर देखा तो पता चला कि लीसा ने तो वास्तव में माफ़ी मांग ली है। शनिवार देर रात दस बजकर चालीस मिनट पर विहिप आस्ट्रेलिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री ब्रज पाल सिंह के माध्यम से मिले इस माफ़ी नामे में डिजाइनर ने लिखा है कि उस प्रत्येक व्यक्ति से हम माफ़ी मांगते हैं जिनकी भावनाएं आहत हुई हैं तथा देवी मां लक्ष्मी की तस्वीर अब हमारे किसी भी ब्राण्ड पर नहीं मिलेगी साथ ही यह भी लिखा है कि हमारे नये कलेक्शन के उत्पादन को पूरी तरह से रोक दिया है तथा यह उत्पाद या खुदरा बाजार में कहीं भी नहीं मिलेगी। दुनिया के किसी भी कोने में मां लक्ष्मी के चित्र वाला उत्पादन नहीं रहेगा। विहिप दिल्ली के महा मंत्री श्री सत्येन्द्र मोहन से वार्ता कर यह तय किया गया कि भले ही अपने कुकर्म के लिए लीसा ने मांफ़ी मांग ली हो किन्तु भारतीयों को आष्ट्रेलिया में बार-बार प्रताड़ित किया जाता रहा है अत: हम अपना प्रदर्शन यथावत रख अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर इस मुद्दे को उठाएंगे जिससे इन घटनाओं की पुनरावृति न हो सके। इस संबन्ध में फ़िर एक प्रेस वक्तव्य जारी कर रविवार को हमने कहा कि हमारा प्रदर्शन यथावत रहेगा। पंजाब व उत्तर प्रदेश सहित कुछ राज्यों में विहिप-बजरंग दल के कार्यकर्ता शनिवार को ही प्रदर्शन कर चुके थे। सोमवार को देश की राजधानी दिल्ली में किए गए विशाल प्रदर्शन के दौरान देशी मीडिया से अधिक विदेशी मीडिया के लोगों को देखा गया। प्रदर्शन के बाद आष्ट्रेलिया के दूतावास को एक ज्ञापन सौंप कर मांग की गई कि आस्ट्रेलिया सरकार भविष्य में इस प्रकार की घटना की पुनरावृति न होने का वचन दे।

यह खबर हिन्दी के तो लगभग सभी अखबारों में प्रमुखता के साथ दी किन्तु भारत का अंग्रेजी मीडिया हमेशा की तरह हिन्दू भावनाओं के प्रति उदासीन ही दिखा। विश्व के लगभग सभी बडे अखबारों में यह खबर प्रमुखता के साथ प्रकाशित की गयी। इसी बीच सोमवार को एक जनहित याचिका पर विचार करते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट ने इसी सम्बन्ध में भारत सरकार, आस्ट्रेलियाई दूतावास तथा कुछ अखबारों (जिन्होंने बिकनी पर माता के फ़ोटो छापे थे) को नोटिस जारी कर दिए। मंगलवार को विहिप ने एक पत्र इस सम्बन्ध में भारत के प्रधानमंत्री तथा विदेशमंत्री को भी भेजा तो सरकार ने आस्ट्रेलियाई दूतावास से इस सम्बन्ध में अपना रोष जताया। बाद में दोनों देशों के वाणिज्य सचिवों के बीच हुई वार्ता में भी इस मुद्दे को गंभीरता से उठाया गया, ऐसा विदेशी मीडिया ने प्रकाशित किया। इस पूरे घटनाक्रम पर विचार करने पर दो बातें सामने आती हैं। एक तो यह कि भारत की सरकार और यहां का तथाकथित सेक्यूलर मीडिया आखिर हिन्दू धर्मावलम्बियों तथा उनके मानविन्दुओं/आस्था केन्द्रों पर बार-बार होते हमलों के प्रति संवेदनहीन क्यों है? दूसरा, क्या हिन्दूओं को अपने धर्म व स्वाभिमान की रक्षार्थ हमेशा आन्दोलन की राह अपनानी पड़ेगी या अन्य धर्मों की तरह हिन्दू धर्म की रक्षार्थ हमारी सरकार अपने आप भी कभी चेतेगी। खैर! हिन्दू मानविन्दुओं का उपहास तो रोकना ही होगा।

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1 Comment on "रोकना होगा हिन्दू मान-बिन्दुओं का उपहास"

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Dr. Ashutosh
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सत्य बात कही गई है आपके लेख में परन्तु आप या आप जैसे हिन्दू इस tathya को nahi समझेंगे कि इस धर्म का नाम हिन्दू धर्मं न hokar मानव धर्मं है जिसका स्वरुप सनातन है तब तक तथाकथित हिन्दू धर्म का उपहास होता रहेगा. वस्तुतः पूरी मानव जाति मनु कि संतान है इस कारण इस धर्म का नाम मानव धर्म है. ये हिन्दू या इंडियन नाम तो मुग़लों ने और अंग्रेजो ने दिए हैं और इन दोनों ही शब्दों का अर्थ नाजायज़ संतान या हराम की औलाद होता है. १८३६ की ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी उठा के देख लीजिये या फिर अमरीका… Read more »
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