लेखक परिचय

बीनू भटनागर

बीनू भटनागर

मनोविज्ञान में एमए की डिग्री हासिल करनेवाली व हिन्दी में रुचि रखने वाली बीनू जी ने रचनात्मक लेखन जीवन में बहुत देर से आरंभ किया, 52 वर्ष की उम्र के बाद कुछ पत्रिकाओं मे जैसे सरिता, गृहलक्ष्मी, जान्हवी और माधुरी सहित कुछ ग़ैर व्यवसायी पत्रिकाओं मे कई कवितायें और लेख प्रकाशित हो चुके हैं। लेखों के विषय सामाजिक, सांसकृतिक, मनोवैज्ञानिक, सामयिक, साहित्यिक धार्मिक, अंधविश्वास और आध्यात्मिकता से जुडे हैं।

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गुलमोहर के पेड़ अनोखे
सुन्दर लाल सुनहरी
फूलों से आग लगायें।
घने पेड़ लगे हों जहाँ
उस आग से,
मन शीतल होजायें।
पीले अमलतास के फूल
वृक्षों पर लहराये
शोभा हर वन उपवन की
मनभाये इतरायें
पलाश के जंगल
ही जंगल लाल सुनहरे
पीले से भी
फूल बड़े कुछ छोटे से भी
झुंडो मे मुस्कायें
ये हैं प्यारे फूल अनोखे
बिना देख भाल के पनपे
ना कुछ मांगे हमसे तुमसे
सुन्दरता बरसायें।

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