लेखक परिचय

प्रवक्ता.कॉम ब्यूरो

प्रवक्ता.कॉम ब्यूरो

Posted On by &filed under राजनीति.


-अतुल गौड़-
Arvind-Kejriwal-2AFP
एक कहानी जो बचपन में सबने सुनी होगी वह यूं थी एक साधु जिसके पास बहुत खूबसूरत अश्व था और किसी की निगाह उस पर ठहरती नहीं थी। एक बार एक डाकू गुजरा अश्व को देखा और दीवाना हो गया, साधु से उस अश्व को लेने के उसने कई जतन किए पर हर बार हारकर लौट गया पर उसने अश्व को पाने की लालसा नहीं त्यागी और एक रोज वह जरूरत मंद बनकर साधु के मार्ग में आ लेटा, बोला बहुत दिनों से कुछ नहीं खाया, विवश हूं चल भी नही सकता तो साधु अश्व से उतरकर पैदल चलने लगा और उसने उस कमजोर जान पड़ रहे, दु:खी होने का ढोंग कर रहे डाकू को घोड़े पर बिठा दिया था, कुछ दूर ही चले थे कि डाकु अपने असली रूप में आया, साधु से बोला अब यह अश्व मेरे कब्जे में है और मैं इसे लेकर चला। अब तू मुझे नहीं रोक सकता। साधु यह दृश्य देखकर सकते में आया, अश्व को लेकर भागते डाकू को आवाज दी और बोला जा ले जा इस अश्व को पर यह वाक्या किसी पर बयां मत करना क्योंकि इंसानियत से लोगों का यह वाक्या सुनकर भरोसा उठ जाएगा और कोई इस कहानी को सुनने के बाद किसी जरूरतमंद की मदद के लिये आगे नहीं आयेगा, जाकर ले अपनी ख्वाहिश पूरी, पर किसी पर अपनी शेखी न बगारना। झूठ से ही सही अगर कुछ हासिल हुआ है तुझको तो सही मार्ग पर चलकर आगे किसी के काम आना। कुछ इसी तरह की कहानी आम आदमी पार्टी की कहानी बनती नजर आने लगी है। सत्ता में आने के लिए मानवता की दुहाई देने और ईमानदारी का चोला ओढ़े आम आदमी के कार्यकर्ता जब सड़कों पर आए तो लोगों में आस जगी और लगा कि सिस्टम में बदलाव आएगा, राजनीति स्वच्छता की तरफ कदम बढ़ाएगी और सब कुछ सामान्य होकर देश एक नई राजनैतिक सोच के साथ आगे बढ़ेगा लेकिन आम आदमी की पार्टी एक के बाद एक गलतियों ने सब कुछ बिखेर कर रख दिया या यूं कहें कि आम आदमी को ही तोड़कर रख दिया तो गलत नहीं होगा। सूरत ऐसी बदलनी थी और इस पार्टी का अंजाम इस ओर बढ़ना था यह किसी ने नहीं सोचा था कि यह आम आदमी की बात करने वाली पार्टी एक दिन हिंसक होगी और हाथापाईयों को अंजाम देगी और देखो आज पंजाब के एक आम आदमी विधायक ने एक कर्मचारी को पीटा, भला बुरा कहा और जनता में वाह वाही लूटने का प्रयास किया गया। दिल्ली सरकार में फर्जी डिग्री के आधार पर मंत्री बनना भी इन्हें गलत नजर नहीं आया तो इनसे भला क्या उम्मीद की जा सकती है। दरअसल बीते कुछ दिनों पहले इन्होंने अमानवीयता की सभी हदें पार कर दी थीं और सिर्फ अपने राजनैतिक फायदे के लिए ये लोग इतने कमजर्फ होते जान पड़े कि पद और कद में भले ही इन्हें कोई कुछ भी हांकता हो, लेकिन जंतर-मंतर की किसान रैली में ये आम आदमी की असल कसौटी पर बहुत बौने हो गये। आप सबने देखा कि जंतर-मंतर पर किसानों की एक रैली में किसान पेड़ पर लटके की कोशिश करता रहा और आप ताली बजाते रहे। भाषण देते रहे तो आपसे भला और क्या उम्मीद की जा सकती है। ऐसा नहीं है कि इसे देखकर सबकुछ अनदेखा कर दिया जाये और आप भी अगर ऐसे ही थे तो फिर उनमें क्या कमी थी जो अब से पहले नेतागिरी में थे। यही सवाल एक आदमी को कचोटे जा रहा है। वह टूट रहा है और साधू और डाकू की कहानी को याद कर इंसानियत की दुहाई दे रहा है। अब शायद कोई आम न हो क्योंकि अब आम का भरोसा टूटकर चूर-चूर हो रहा है। बुरा बहुत कुछ हुआ है, पर शायद वाकई कोई अच्छा आम आदमी राजनीति की सफाई के लिए आ रहा हो। बुरा तो बस यही हुआ है कि उस पर से भी भरोसा उठ रहा है।

Leave a Reply

2 Comments on "आप की गलतियों से टूटता आम आदमी"

Notify of
avatar
Sort by:   newest | oldest | most voted
आर. सिंह
Guest
अतुल गौड़ जी, आपने सुदर्शन की प्रसिद्द कहानी “हार की जीत” को तोड़ मरोड़ कर पेश करने का प्रयत्न तो किया,पर आआप की तुलना आपने डाकू खडग सिंह से किस आधार की?दूसरी बात आआप की सरकार को दिल्ली में आये हुए अभी कितने दिन हुए?अगर आप दिल्ली में रहते हैं और आपके पास समय हो तो,आप आआप के विधायकों के साथ कुछ समय बिताइये.आप को अंतर समझ में आ जाएगा.दिल्ली सरकार जो काम कर रही है,उसका असर दिल्ली के स्कूलों ,अस्पतालों और अन्य जगहों पर इन थोड़े दिनों में हो दिखने लगा है.सच पूछिये तो उनकी अंदरूनी झगड़ों से आम… Read more »
Anand Raman Tewari
Guest
जहां एक ओर भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी ने राजनीति से संन्यास ले लिया तो बस ले लिया, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी भारत के प्रधानमंत्री का पद ठुकरा कर खुद को त्याग की मूर्ति के तौर पर पेश कर चुकी है. हां इन बातों में वजह कुछ भी हो, पर आखिर सच्चाई तो यही है. सरकार चलाना यूं भी हंसी-मजाक का खेल नहीं है, इसके लिए जो दम और खम चाहिए वह आम आदमी में कहां. देख लिया न आप का हाल. पहले दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए मरे जा रहे थे और अब एक-दूसरे को मारे… Read more »
wpDiscuz