लेखक परिचय

अनुप्रिया अंशुमान

अनुप्रिया अंशुमान

अनुप्रिया अंशुमान, आज़मगढ़ जिले में जन्म, आज़मगढ़ के शिबली नेशनल डीग्री कॉलेज से अँग्रेजी में स्नातकोत्तर, हिन्दी में नियमित लेखन, मुख्यरूप से स्त्री विमर्श, प्रेम व गुरु विषयों पर लेखन...

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—-अनुप्रिया अंशुमान

मोहब्बत की दुनिया है तुम्हारी आँखें,

चमकता हुआ सितारा है तुम्हारी आँखें ।

तुम्हारे ही दम से है मेरा ये नसीब,

मेरी पहचान है ये तुम्हारी आँखें ॥

आँखें बोलती है तुम्हारे दिल की धड़कन,

दिल की धडकनों की आवाज़ है तुम्हारी आँखें ।

आँखों से बरसता है जहाँ हल्का सा नशा ॥

वो नशे मन जहाँ है तुम्हारी आँखें,

स्वर्ग को ढूंढती फिर रही हूँ मै ।

आशियाना है दो जहाँ की तुम्हारी ये आँखें,

जी चाहता है डूब जाऊ मैं मोहब्बत के समन्दर में,

वफ़ा का सागर है ये तुम्हारी आँखें ॥

 

(2)

तेरे दर पे आये

तेरे दर पे आये

पर तुझको पहचान न सके,

तुझे देखकर मुस्कुराये तो बहुत

मगर मुस्करा न सके ।

मुझे ठुकरा दे तू

वो तेरी जिंदगी का मौसम है,

हम तो तेरे पास रह कर भी

तुझे गा न सके ।

मत पूछ की

कितने शर्मिंदा हैं हम,

तेरे सामने भी रहकर

खुद को पहचान न सके ।

तेरा रंग दुनिया के हर रंग में

नजर आता है,

होली हो बहुत खेले

मगर तेर रंग में नहा न सके ।

तू आया है आँखों में

प्रेम की मुस्कराहट को लेकर,

पर हम तो तेरे आँखों से

आंखे मिला न सके ।


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