लेखक परिचय

मृत्युंजय दीक्षित

मृत्युंजय दीक्षित

स्वतंत्र लेखक व् टिप्पणीकार लखनऊ,उप्र

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bjpमृत्युंजय दीक्षित

वर्ष 2014 अब अलविदा हो रहा है और हम सभी लोग आगामी 2015 की तैयारियों में जुटे हैं। 2014 का विचार मंथन चल रहा है। वर्ष 2014 भारतीय राजनीति में हो रहे बदलावों के लिए हमेशा याद किया जायेगा। यह साल देश की राजनीति को एक नया स्वरूप प्रदान करके जा रहा है तथा इस बार के राजनैतिक परिवर्तनों से देश की जनता को जो नयी उम्मीदें बंधी हैं उनके साकार होने का वर्ष भी साबित हो सकता है 2015 । देश की राजनीति में राष्ट्रवाद का वर्चस्व बढ़ा। नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश को एक नया करिश्माई नेतृत्व मिला और उनके नेतृत्व में भाजपा का कांग्रेसमुक्त अभियान भी तेज हो गया। राजनैतिक परिवर्तनों के बीच भारतीय जनता पार्टी को अमित शाह के नेतृत्व में एक नया युवा सशक्त चेहरा मिला जिसने भाजपा को एक नयी ताकत प्रदान की है। वर्ष 2014 के चुनावों में भाजपा व संघ परिवार ने काफी सोच- विचार के बाद अमित शाह को उस समय भाजपा का प्रभारी बनाकर उप्र भेजा जब उप्र में भाजपा पूरी तरह से रसातल में जा रही थी। बड़े- बड़े राजनैतिक विश्लेशक भी उप्र में भाजपा को चौथे नंबर की पार्टी करार दे रहे थे। लेकिन जब 16 मई को चुनाव परिणामों का पिटारा खुला तो सभी गणित पूरी तरह से धराशायी हो चुके थे। उप्र में केवल और केवल भाजपा ही दिखलाई पड़ रही थी। यह शाह की मेहनत का ही परिणाम था। उनकी मेहनत रंग लाई और उन्हें पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्त किया गया।

आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह की जोड़ी के नेतृत्व में भाजपा एक के बाद एक विजयी अभियानों पर निकल पड़ी है। लोकसभा चुनावों के बाद कुछ उपचुनावों में भाजपा को कुछ स्थानीय कारणों से पराजय का मुंह देखना पड़ा था तब राजनैतिक पंडितों में इस बात की चर्चा होने लगी कि मोदी का जादू अब उतरना शुरू हो गया है चारों तरफ हल्ला मच गया लेकिन जब हरियाणा, महाराष्ट्र और झारखंड विधानसभा चुनावों में भाजपा की ऐतिहासिक विजय मिली तो सभी विरोधी शांत हो गये। देश की राजनीति के लिए यह वर्ष एक बेहद ऐतिहासिक घटना के रूप में याद किया जायेगा क्योंकि लगभग 30 वर्षो के बाद संसदीय इतिहास में किसी अकेली पार्टी की बहुमत की सरकार बनी और सशक्त और मजबतू नेतृत्व मिला। विगत वर्ष कांग्रेस पार्टी का जनाधार तेजी से सिकुड़ता चला गया और उसे लोकसभा सहित कई प्रांतों में नेता विपक्ष के पद से भी मायूस होना पड़ रहा है। केवल राज्यसभा में बहुमत के कारण ही भाजपा व मोदी विरोधी विपक्ष सरकारी कामकाज में अड़ंगेबाजी कर रहा है।विपक्ष को अभी तक अपनी पराजय स्वीकार नहीं हो पा रही है। लेकिन जैसे- जैसे भाजपा राज्यों में अपनी स्थिति मजबूत करेगी वैसे- वैसे राज्यसभा में भी भाजपा की स्थिति मजबूत हो जायेगी। तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सपने साकर होने लग जायेंगे। आज कांग्रेस व जनता परिवार को यही भय सता रहा है।यही कारण है कि विगत वर्ष भाजपा रोको अभियान के तहत जनता परिवार के एकीकरण का प्रयास फिर से शुरू किया गया है। यह परिवार झारखंड विधानसभा चुनावों में एक भी सीट नहीं पा सका है।इस कारण इन दलों के सामने आने वाले विधानसभा चुनाव एक बड़ी परीक्षा की घड़ी साबित होने वाले हैं।

विगत 16 मई को भाजपा के नेतृत्व में राजग को बहुमत कम लने व सरकार बन जाने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के कार्यक्रम व उनकी कार्यशैली से जनता में एक नया विश्वास जगा है। प्रधानमंत्री मोदी रेडियो माध्यम से मन की बात कहकर जनता के दिल में अभी भी बसे हैं। मोदी के कार्यक्रम विशेष रूप से प्रधानमंत्री जन- धन योजना,स्वच्छता अभियान, सांसद आदर्श ग्राम योजना व मेक इन इंडिया अब धीरे – धीरे परवान चढ़ रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश यात्राओं से भारत का विश्व में एक बार फिर मान बढ़ा है तथा दुनिया भारत की ओर आशा भरी निगाहों से देख रही है। यह मजबूत सरकार का ही परिणाम है कि योग को अब अंतराष्ट्रीय मान्यता मिल चुकी है। भारत के किसी प्रस्ताव को पहली बार संयुक्तराष्ट्र संघ के अंतर्गत 177 देशों का समर्थन प्राप्त हुआ और 21 जून को हर वर्ष विश्व योग दिवस मनाने का प्रस्ताव पास हो गया। आज मोदी की विदेश नीति की पूरी दुनिया कायल हो रही है। अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान आतंकवाद व कश्मीर मामले पर कई बार अलग- थलग पड़ता नजर आया। चीन के साथ भी प्रधानमंत्री मोदी ने दोस्ती का हाथ बढ़ाया लेकिन वह फिर भी सीमा पर घुसपैठ से बाज नहीं आया। विदेश नीति के अंतर्गत प्रधानमंत्री मोदी का अब तक का सबसे बड़ा ऐतिहासिक फैसला यह रहा है कि आगामी 26 जनवरी को अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा मुख्य अतिथि होंगे। यह देश के लिए बेहद गौरवशाली क्षण होंगे यदि सबकुछ ठीकठाक रहा तो पूरी दुनिया की निगाहें 26 जनवरी के दिन भारत की ओर रहेंगी। यह पूरी दुनिया जानती है कि भारत और अमेरिका विश्व के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश हैं। दोनों देशों की मित्रता दक्षिण एशिया ही नहीं अपितु पूरे विश्व के लिए एक खबर होगी। साथ ही अमेरिकी राष्ट्रपति भारतीय गणतंत्र की कहानी व विकास को काफी नजदीक से देखेंगे व उसके गवाह बनेंगे। मोदी सरकार के सभी मंत्रीगण भी अपने कार्यो में पूरी तत्परता से लगे हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने मंत्रिमंडल में गोवा के पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर पार्रिकर को रक्षामंत्री बनाकर सभी को चौंका दिया। यह पहला अवसर हैं जब इतने छोटे प्रांत के मुख्यमंत्री को इतनी बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गयी।

सरकार में सबकुछ ठीकठाक रहा ऐसा भी नही हैं सरकार को संसद में बयान बहादुर नेताओं के कारण कई बार विपक्ष के आगे झुकना पड़ा। संसदीय इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ जब मंत्री सांसद साध्वी निरंजन ज्योति व साक्षी महाराज को संसद का कामकाज चलाने के लिए माफी मांगनी पड़ी। लेकिन सरकार की गाड़ी को पटरी से उतारने के लिए कमर कसकर बैठा विपक्ष हंगामा करता ही रहा क्योंकि उसे सरकार के सुधारवादी बिलों को लटकाना ही था। कभी संाप्रदायिक हिंसा के नाम पर,फिर धर्मांतरण के नाम पर व कालेधन के मुद्दे पर सरकार को घेरने की कोशिश की गयी लेकिन सरकार ने पूरी ताकत के साथ विपक्ष के प्रयासों को विफल कर दिया। विपक्ष कुछ समय बाद राज्यसभा में भी कमजोर हो जायेगा।यही डर इन दलों को सता रहा है। अगर प्रधानमंत्री मोदी अपने सपने को आधा पूरा करने में भी सफल हो गये तो वह दिन दूर नहीं जब यह सभी जातिवादी व वंशवाद पर आधारित दल समाप्त हो जायेंगे। जनता परिवार के आधे नेताओं व दलों का कैरियर तो वैसै भी समापन की ओर जा रहा है।

वर्ष 2014 एक ऐसे वर्ष के रूप में याद किया जायेगा जिसमें वंशवाद व क्षेत्रवाद के खिलाफ एक मजबूत राजनैतिक आधार खड़ा किया तथा वह कारवां अब आगे बढ़ रहा हैं। अब देश की जनता भेड़चाल की राजनीति से ऊब चुकी है। हालांकि जम्म-कश्मीर में अभी वैसा नहीं हो पाया है लेकिन आधार तैयार हो चुका है।निश्चय ही आने वाला वर्ष प्रधानमंत्री मोदी व उनकी सरकार के लिए चुनौती वर्ष होगा। जनता से किये गये वायदों को पूरा करना ही देश के नये प्रधानसेवक का काम होगा। अभी आतंकवाद के खिलाफ व जनता को सुशासन का वादा पूरा करने के लिए साहसिक कदम उठाने होंग। आर्थिक चुनौतियां भी सरकार के समक्ष होंगी। 2014 की छमाही में नयी सरकासर की योजनायें सरकार के समक्ष आयीं वहीं अब उन्हें साकर होने का समय भी आ गया है। अब अगले वर्ष ऐसा प्रतीत होना चाहिए कि सरकारी घोषणायें धरातल पर उतर रही हैं तथा जनता को उनका लाभ मिल रहा है।

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