More
    Homeपरिचर्चासीरिया में ट्रंप का शीर्षासन

    सीरिया में ट्रंप का शीर्षासन

    सीरिया में ट्रंप का शीर्षासन
    डॉ. वेदप्रताप वैदिक
    अमेरिका, फ्रांस और ब्रिटेन ने मिलकर सीरिया पर जो मिसाइल बरसाए हैं, उसके आधार पर कहा जा सकता है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अब शीर्षासन की मुद्रा में आ गए हैं। यही ट्रंप जब राष्ट्रपति का चुनाव लड़ रहे थे, तब ओबामा को ‘बेवकूफ’ कह रहे थे, क्योंकि वे सीरिया में अमेरिकी खून और डाॅलर बहा रहे थे। ट्रंप तब वादा कर रहे थे कि वे जैसे ही राष्ट्रपति पद संभालेंगे, अमेरिकी फौजों को सीरिया से वापस बुला लेंगे। वे तो अभी भी कह रहे हैं कि अपने 2000 सिपाहियों को वापस बुलाने के लिए वे वचनबद्ध हैं। पिछले साल भी उन्होंने सीरिया पर 59 मिसाइल मारे थे और इस बार 100 मिसाइल इसलिए मारे के सीरिया की राजधानी दमिश्क के पास स्थित दौमा में रासयनिक हथियारों का एक कारखाना उन्हें नष्ट करना था। यहां बननेवाले रासायनिक हथियारों के हमले से कुछ लोगों की मौत हो गई थी। इसके जवाबी हमले में ट्रंप ने ब्रिटेन और फ्रांस को भी घसीट लिया। इन तीनों देशों के अनेक अखबार, टीवी चैनल और विरोधी नेतागण इस मिसाइल आक्रमण की निंदा कर रहे हैं। वे यह आशंका भी जाहिर कर रहे हैं कि कहीं सीरिया ही तीसरे विश्व-युद्ध की स्थली न बन जाए। यदि रुस भी सीरिया की ओर से जवाबी हमला कर दे तो ये महाशक्ति एक-दूसरे से सीधी भिड़ जाएंगी। वैसे पश्चिमी शक्तियों ने यह सावधानी तो रखी है कि उनके मिसाइलों से सीरिया के शासक बशर-अल-अस्साद या रुसी फौजों का कोई सीधा नुकसान नहीं हुआ है लेकिन इन राष्ट्रों का यह दोष तो स्पष्ट ही है कि इस हमले के पहले इन्होंने अपनी कार्रवाई पर संयुक्तराष्ट्र संघ की मुहर नहीं लगवाई और उससे भी ज्यादा यह दोष कि रासायनिक हथियारों पर प्रतिबंध लगानेवाले संगठन द्वारा इस मामले की जांच करने के पहले ही हमला बोल दिया। यह अंतरराष्ट्रीय कानून का स्पष्ट उल्लंघन है। आश्चर्य की बात तो यह है कि जिस तथाकथित इस्लामी आतंकवाद से लड़ने के बहाने ट्रंप सत्तारुढ़ हुए हैं, सीरिया में वे उसी आतंकवाद की रक्षा में डटे हुए मालूम पड़ रहे हैं। उन्हें सीरिया से क्या लेना-देना ? वे रुसी वर्चस्व का मुकाबला करने के लिए सीरिया में शीर्षासन के लिए भी तैयार हो गए हैं।
    डॉ. वेदप्रताप वैदिक
    डॉ. वेदप्रताप वैदिक
    ‘नेटजाल.कॉम‘ के संपादकीय निदेशक, लगभग दर्जनभर प्रमुख अखबारों के लिए नियमित स्तंभ-लेखन तथा भारतीय विदेश नीति परिषद के अध्यक्ष।

    LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here

    Must Read

    spot_img