एक बाल कविता चिड़िया पर


मम्मी कुछ चिड़ियां छत पर आई है,
भूखी प्यासी और सुकचाई सी हैं।
मुझको तुम चावल के दाने दो,
छत पर मुझको तुम जाने दो।
उनको मै चावल के दाने खिलाऊंगा,
साथ में उनको मै पानी पिलाऊंगा।
कुछ दाने तो वे चिड़िया खायेगी,
कुछ अपने बच्चो को ले जायेगी।
चोंच में उनके दाना वह डालेगी
तभी तो अपने बच्चो को पालेगी।
बच्चे जब उसके बड़े हो जायेंगे,
फुर से उड़कर कही चले जायेंगे।

आर के रस्तोगी

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