श्रेष्ठ अतीत श्रेष्ठ भविष्य

पिछले अनेक दशकों से देख रहा हूँ कि वामपंथी विचारधारा के लोगों को भारत की श्रेष्ठता की एक भी बात नजर नहीं आती। वे केवल और केवल अंधेरा पक्ष देखते हैं भारत का। गाँधी जी के शब्दों में “वे भारत के गटर इंस्पैक्टर हैं।” भारत की केवल नालियाँ देखने में उन्हें सुख मिलता है। उनका पूर्वाग्रह, उनकी कट्टरता, कंडीशनिंग बहुत पक्की है।
वास्तव में भारत के गुण व दोष दोनो हैं। पर भारत के विरोथ का पूर्वाग्रह पराकाष्ठा पर हो तो वह मीनिया बनजाताहै और केवल बुरा ही नजर आता है, वही देखने की चाह रहती है। वामपंथी बन्धु भारत विरोधी मीनिया, पागलपन के शिकार बन चुके हैं। इसलिये उन्हे भारत के उजले पक्ष दिखानाअसम्भव काम है। भारत की प्रशंसा किसी तालिबानी को तो शायद समझ आजाए पर किसी वामपंथी को समझ नहीं आ सकती, पसंद नही आसकती।
भारत की श्रेष्ठता के कुछ उदहारण पढ़ें………

भारत विश्व गुरू क्यों था?

1.भारत ने अपने इतिहास में किसी भी देश पर कब्जा नहीं किया। पर भारत के साँस्कृतिक प्रतीक, कथाएं सारे विश्व में मिलते हैं। यानी भारत सैनिक- साम्रज्यवादी नहीं,  साँस्कृतिक प्रसारवादी है।

2. अमरिका के जेमोलोजिकल संस्थान के अनुसार 1896 तक भारत ही केवल हीरों का स्त्रोत था।

3. भारत में ही अंकों का आविष्कार हुआ और आर्यभट्ट ने शून्य का अविष्कार किया। तभी अरबी में इन्हे ‘हिन्दसा’ या ‘हिन्सा’ कहते हैं। हिन्दसा याने हिन्द से आए हुए।
ये अंक भारत से अरब देशों में और वहाँ से युरोप में पहुंचे।
इन अंकों के आधार पर बहुत बाद में  विश्व के विज्ञान की उन्नति संम्भव हुई। अन्यथा विज्ञान का विकास रोमन अंकों के आधार पर तो असम्भव था।

4. नौकायन विद्या की खोज 6000 पूर्व भारत में हुई मानी जाती है। वास्तव में तो 17 लाख साल पहले रामायण काल में भी नौकाएं चलती थीं।
अँग्रेज़ अधिकारियों के अनुसार युरोपियन या अंग्रेज भारत के पुराने जहाज खरीदकर अपना काम चलाते थे। भारतीयों द्वारा 50 साल चले जहाज वे 25 साल चला लेते थे।
वे लिखते हैं कि भारत जैसे बढ़िया और सस्ते जहाज संसार में कोई नहीं बनाता।

5. विश्व का पहला विश्वविद्यालय तक्षशिला 700 ईसा पूर्व में भारत में स्थापित किया गया था। जिसमें केवल भारत के नहीं, सारे संसार से आए 10 हजार विद्यार्थी पढ़ते थे।

ऐसे अने शिक्षा केन्द्रों को अरब से आए असभ्य, मतान्ध लुटेरों ने नष्ट कर दिया। हजारों साल के संचित ज्ञान की पुस्तकों को नष्ट कर दिया।

6. संस्कृत संसार की लगभग सभी भाषाओं की जननी है। विश्व की कोई भी भाषा इतनी स्मृद्ध और वैज्ञानिक नहीं है। कम्पयूटर के लिये भी सर्वोत्तम भाषा मानी गयी है। आधुनिक वैज्ञानिक मानते हैं कि संस्कृत से बुद्धि का विकास होता है, स्मरणशक्ति बढ़ती है।

7. भास्कराचार्य ने पृथ्वी द्वारा सूर्य की सही दूरी, सूर्य की परिक्रमा का सही समय ३६५.२५८७५६४८४ दिन पांचवी शताब्दी में ही बतला दिया था। यानी न्यूटन के दादा के जन्म से भी पहले।

8. संसार के सर्वश्रेष्ठ चिकित्सा विज्ञान  आयुर्वेद का जन्म भारत में हुआ। शल्य-चिकित्सा ज्ञान भारत ने संसार को दिया। कर्नल कूट की नाक जब हैदरअली ने काट दी थी तब बेलगाँव के एक वैद्य ने नयी नाक इतनी कुशलता से बनाई कि कोई निशान भी नजर नहीं आता था। कर्नल कूट ने यह जानकारी रटेन की संसद में दी। तब वहाँ से चिकित्सकों का एक दल भारत आया और शल्यक्रिया सीखी। बाद में इसे प्लास्टिक सर्जरी के नाम पर प्रचलित कर दिया। पर चोरी और ठगी की अपनी आदत के कारण कभी नहीं बतलाया कि उन्होने यह ज्ञान भारत से लिया है।
9. संसार में धातु-विज्ञान का विकास सबसे पहले भारत में हुआ। अंग्रेजों ने अपने वृत्तों में लिखा है कि भारत का इस्पात संसार में सबसे उत्तम है। युरोपीय बाजारों में जब तक भारत का इस्पात उपलब्ध रहता था, तब तक युरोप का घटिया इस्पात नहीं बिकता था।

अंग्रजों ने काले कानून बनाकर वस्त्र उद्योग के समान भारत के इस्पात उद्योग को भी नष्ट करदिया।

10.  विश्व की सबसे पुरानी पुस्तक “ऋग्वेद” की रचना भारत में हुई। भाषा, वर्णमाला, लेखन भारत की देन है।

11. मानव जाती व सभ्यता का विकास सर्वप्रथम भारत में हुआ, रोमाँरोलाँ आदि अनेक विद्वानों ने ऐसा लिखा है।

12. विज्ञान का विकास भारत में हुआ, ऐसे अनेक प्रमाण मिले हैं।
The British India, by William Digby की 700+ पृष्ठों की पुस्तक में ऐसे अनेक प्रमाण हैं। 1800 तक भी भारत संसार का सबसे अमीर, सबसे सभ्य देश था। भारतीय गौरव की यह बात पढ़, सुनकर अनेक भारत विरोधियों को बदहजमी हो जाएगी। पर ध्यान रहे कि तब तक  न वामपंथ का जन्म हुआ था और न संघ का। इसलिये डिगबी को आप संघी भी नहीं कह सकते।

13. वायुयान का आविष्कार शिवकर वापूजी तलपदे ने, भारत के प्रचीन वैमानिकी शास्त्र के आधार पर 1895 में किया था और मुम्बई में रिमोट से उड़ाकर दिखाया था, राईट बन्धुओं से वर्षों पहले।

अभी अफगानिस्तान से 5000 साल पुराना, महाभारत कालीन भारत का एक वायुयान गुप्त रूप से अमेरीका लेजाया गया है। वायुयान हजारों साल बाद आज भी सही, सक्रीय है। यूट्यूब में इसपर अनेक वीडियो उपलब्ध हैं।

14. बैटरी निर्माण की तकनीक का आविष्कार सर्वप्रथम महर्षि अगस्त्य ने किया था (अगस्त्य संहिता ) बेंजामिन फ्रेंक्लिन के जन्म से पहले।

15. सबसे पहले व्याकरण की रचना भारत में महर्षि पाणिनी द्वारा हुई।

16. लोकतांत्रिक प्रणाली का जन्म भारत में
हुआ।

17. प्लास्टिक सर्जरी का आविष्कारक ऋषि सुश्रुत द्वारा भारत में हुआ। युद्ध में हार के बाद कर्नल कूट की नाक काट दी गयी थी। बेलगाँव के एक वैद्य ने नयी नाक बनादी।
एक अंग्रजी-चिकित्सक दल ने यह शल्य चिकित्सा भारत आकर सीखी व संसार में अपने प्लास्टिक सर्जरी के नाम पर प्रचलित कर दी। धोखा देने के पुराने स्वभाव के कारण भारत के प्रति कभी कृतज्ञता प्रकट नहीं की।

18. संसार का सबसे पुराना धर्म सनातन धर्म भारत की देन है।

19. मिश्र के पिरामिड भारत के द्रविड़ ब्राहमणों ने बनाए थे। इस्लामी आक्रमणों से पहले सारा मिश्र वैदिक संस्कृति को मानता था। देखें पुस्तक ‘दि कैलेटिक ड्रूईड्ज़’ तथा ‘इंडिया इन ग्रीस’।

20. चीन पर 2000 साल तक भारत का साँस्कृतिक साम्राज्य थापित था, बिना एक भी सैनिक भेजे यह हुआ था। -हूशिह, अमेरीका में चीनी राजदूत।

21. साँस्कृतिक रूप से भारत जापान की माँ है।
-प्रो. नाकामूरा।

22. अफ्रीका को श्री राम के पुत्र कुश ने बसाया और वे वहाँ के राजा थे। अतः वे स्वयं को कुश के वंशज ‘कुशाईट’ मानते हैं। अर्थात इस्लामी आक्रमण से पहले तक अफ्रीका भी आर्य/हिन्दू था।

अफ्रीकी सम्राट हेलसलासी को जब स्वामी कृष्णानन्द जी ने रामायण भेंट में दी तब हेलसलासी ने कहा कि वे कुशाईट हैं, राम के पुत्र कुश के वंशज हैं।

भारत संसार में सबसे स्मृद्ध, सुसंस्कृत था, इसके अनेकों ऐतिहासिक प्रमाण हैं। पहले अंग्रेजों यानी इसाईयों ने, फिर नेहरू व अब्दुल कलाम आदि पाकपरस्तों व वामपंथियों ने उस इतिहास व साहित्य को नष्ट कर दिया। पर सौभाज्ञ की बात यह है कि इस विषय में संसार के 200 से अधिक विद्वानों के लिखे ग्रंथ, साहित्य अनेक देशों में उपलब्ध हो रहे हैं।

अपना सही इतिहास जानकर हम फिर से विश्वगुरू बनने के पथ पर आगे बढ़ सकते हैं।
इतिहास में बहुत ताकत है। किसी राष्ट्र को समाप्त करना हो तो वहाँ के इतिहास को नष्ट करें। वह राष्ट्र समाप्त होजाएगा। भारत के साथ यही तो हुआ है।।                       तभी कहा है….
If you want to destroy a nation, destroy it’s History, the nation will be destroyed it self.
भारत का सही इतिहास सामने लाकर, हम भारत को परम वैभवशाली बनाने के मार्ग पर आगे बढ़ सकते हैं।

 

* इसाईयों और वामपंथियों ने सुनियोजित प्रचार किया है कि अतीत की महानता के गीत गाना बेकार की बात है। हम भारतीय उसी कुप्रचार का शिकार हैं। मित्रो मनोविज्ञान और आधुनिक विज्ञान का बहुमूल्य नियम है कि हमारा अतीत व उसकी स्मृतियाँ हमारे वर्तमान व भविष्य का निर्माण करती हैं। बुरी स्मृतियों से बुरे और अच्छी स्मृतियों से अच्छे भविष्य का निर्माण होता है।
भारत विरोधी मूर्ख नहीं हैं जो वे भारत के अतीत की छवि काली बनाने-बताने में अनेक दशकों से लगे हुए हैं। नासमझ तो हम हैं जो इस षड़यंत्र को अभी तक नहीं समझ रहे।
अपनी बात स्पष्ट करने के लिये मैने पिछली पोस्ट में विलियम वोन पौकहेमर की पुस्तक ‘इंडियाज़ रोड टू नेशनहुड’ को उधृत किया था। पर शायद कुछ लोगों के ध्यान में बात आई नहीं।
इस बात को समझे बिना अच्छे भविष्य की आशा असम्भव है कि स्वर्णिम आतीत के बारम्बार स्मरण से वह ऊर्जा जगेगी जिससे एक सशक्त व स्मृद्ध भारत का उदय होगा।
विश्व के सभी देश यही कर रहे हैं जबकि उनके पास हम जैसे महान इतिहास का एक अंश ही है। पर मैकाले व मार्क्स के अंधे मानस पुत्रों को यह सूर्य के समान प्रकाशित सत्य नजर नहीं आ रहा। भारत का उद्भव चाहने वाले हम भारतीयों को इस सत्य को समझना होगा।

 

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